Home Blog Page 5926

कॉन्ग्रेसी चाटुकार सैम पित्रोदा के लिए मोबाइल फोन चलाने वाला हर भारतीय बन्दर है

कॉन्ग्रेस के क़रीबी सैम पित्रोदा आए दिन ऐसा कुछ ऐसा बोल देते हैं जिससे एक नया विवाद जन्म ले लेता है। कभी तो वो पुलवामा हमले के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी न ठहराने की पैरवी कर बैठते हैं, तो कभी मध्यम वर्ग को स्वार्थी न बन कर टैक्स जमा करने की नसीहत तक दे डालते हैं।

इसी कड़ी में एक बार फिर उन्होंने आपत्तिजनक शब्द कह दिए जिस पर हर भारतीय को आपत्ति होगी। उन्होंने कहा कि मोबाइल का इस्तेमाल करते भारतीय उन्हें बंदर जैसे दिखते हैं जो मोबाइल जैसे खिलौने के साथ खेलते रहते हैं।

रिपब्लिक टीवी द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई एक वीडियो क्लिप में, राहुल गाँधी के शीर्ष सलाहकार और लंबे समय तक कॉन्गेस के वफ़ादार यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि भारतीय, कनेक्टिविटी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहे हैं।

पित्रोदा कहते हैं, “भारतीय, कनेक्टिविटी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन आप जानते हैं कि यह आज की दुनिया है, यह एक नया खिलौना (मोबाइल) है। तो अचानक आपके पास मौजूद हर बंदर को एक नया खिलौना दे दिया जाता है और वे उस पर फ़िदा हो जाते हैं। वे नहीं जानते कि इसके साथ क्या करना है। मुझे लगता है कि यह पता लगाने में 5-10 साल लगेंगे कि आप इससे बहुत कुछ कर सकते हैं जितना आप अभी कर रहे हैं। आप जानते हैं, आज यह मनोरंजन है, गपशप झूठ है। झूठ सोशल मीडिया पर बढ़ जाता है।”

पित्रोदा की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की।

पित्रोदा ने हाल ही में 26/11 के मुंबई हमले को बड़ा न मानकर कम स्तर का आँकने की कोशिश की थी। इस हमले पर उन्होंने कहा था कि सिर्फ़ 8 लोग आए और कुछ किया, आप इसके लिए पूरे देश (पाकिस्तान) को दोष नहीं दे सकते।

पित्रोदा ने हाल ही में राहुल गाँधी की प्रस्तावित NYAY योजना का बचाव करने की कोशिश की थी और यह भी कहा था कि भले ही करों को बढ़ाना होगा इसके लिए मध्यम वर्ग को स्वार्थी नहीं होना चाहिए और इसके उन्हें अपना दिल बड़ा करना होगा। उन्होंने कहा था कि गरीबों की मदद करने के लिए, मध्यम वर्ग को इस योजना को पूरा करने के लिए अधिक कर देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

‘नवरेह’ बनाम ‘नौरोज़’ में उलझ कर रह गई प्रियंका, सोशल मीडिया पर हुई ट्रोल

चुनावों के मद्देनज़र कॉन्ग्रेस पार्टी में यूँ तो लगभग हर नेता अपने बयानों के कारण सक्रिय नज़र आ रहा है, लेकिन वास्तविक ‘मेहनत’ प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी द्वारा ही की जा रही है। एक तरफ़ जहाँ राहुल गाँधी बिना जीडीपी और बजट की समझ रखे सत्ता में आने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट का 70% हिस्सा खर्च करने को तैयार हैं वहीं प्रियंका गाँधी भी ‘नवरेह’ के मौके पर कश्मीरियों को ‘नौरोज़’ की बधाइयाँ देने पर तुली हुईं हैं।

जी हाँ, ट्वीटर पर चुनावों के लिहाज़ से सक्रिय होने वाली कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने आज कश्मीरी पंडितों को उनके नए साल ‘नवरेह’ की शुरुआत पर ‘नौरोज़’ की बधाइयाँ दी हैं।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि मेरे सभी कश्मीरी बहनों और भाइयों को नौरोज़ मुबारक!! इसके अलावा अपने ट्वीट में प्रियंका ने अपनी माँ के संदेश का भी ज़िक्र किया जिसमें कहा गया था कि थाली तैयार करना मत भूलना, लेकिन उनके पास थाली तैयार करने के लिए समय नहीं था और रोड शो के बाद जब वो घर पहुँची तो टेबल पर थाली देखी, जिसे शायद उनकी माँ ने तैयार किया था और इस पर प्रियंका ने लिखा कि मम्मी कितनी प्यारी होती हैं।

पोस्ट को देखते हुए उनके समर्थक उन्हें नौरोज़ की बधाइयाँ देने लगे। वहीं जाने-माने स्तंभकार और लेखक तारेक फतेह जैसे लोगों ने उनके इस ट्वीट पर जवाब देते हुए बताया, ‘प्रिय प्रियंका गांधी, नौरोज़ पिछले महीने मनाया जा चुका है। कश्मीर में नए साल के त्योहार को नवरेह के नाम से जाना जाता है।’

इसे अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता कहिए या फिर बड़ी गलती, लेकिन प्रियंका के इस पोस्ट ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करवा दिया है। कई लोगों ने उन्हें इन दोनों त्यौहारों को लेकर कंफ्यूज़ बताया। क्योंकि नवरोज़ पारसियों का त्यौहार (नया साल) होता है। जबकि नवरेह कश्मीरी पंडितों का नया साल होता है।

बता दें कि कश्मीर से प्रियंका के परिवार का पुराना रिश्ता रहा है। शायद इसी कारण से उनकी माँ सोनिया गाँधी ने नवरेह पर सजाई जाने वाली थाली को उनके लिए तैयार रखा। लेकिन रोड शो और बड़ी-बड़ी रैलियों में व्यस्त प्रिंयका ने इसे सोशल मीडिया पर ‘माँ का प्यार’ दिखाने का प्रयास किया। जिसके कारण सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हे यहाँ तक बोल डाला कि एक असली कश्मीरी पंडित को इसका फर्क पता होता है। लेकिन आपकी माँ को ‘नवरेह’ और ‘नौरोज़’ के बीच कन्फ्यूज़ लगती हैं। नौरोज़ पारसियों का नया साल है।

इस पोस्ट पर एक शख्स ने तो प्रियंका को पूरे भारत का मानचित्र ही प्रियंका को दे दिया। क्योंकि शायद उन्हें इसकी जरूरत भी थी। साथ ही यहाँ लोगों ने उन्हें झूठा हिन्दू तक कह दिया।

वहीं इब्न सिना ने प्रियंका को यहाँ तक कहा कि उन्हें उस शख्स को बदलने की जरूरत है जो उनका ट्वीटर हैंडल संभालता है।

बता दें कि नवरेह की पूर्व संध्या पर, चावल, दही, ब्रेड, अखरोट, इंकपॉट, कागज, कलम, दर्पण, फूल, चांदी का सिक्का और अगले वर्ष के पंचांग से भरी थैली को सुबह सबसे पहले देखने के लिए तैयार रखा जाता है। नवरोज़ पारसियों का नया साल है जो इस साल 21 मार्च को मनाया गया था। ऐसे में प्रियंका के इस पोस्ट ने उनकी माताजी की संस्कृति संबंधित समझ और प्रियंका के सामान्य ज्ञान पर सवाल खड़े कर दिए।

यहाँ ट्विटर पर चौकीदार सीए वी पी सिंह ने प्रियंका के इस ट्वीट का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि वो मालकिन ने बोल दिया तो नौरोज़ ही माना जाएगा। इस शख्स ने प्रियंका के समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा कि ये कोई भक्त नहीं हैं जो शिकायत करें या रूठ जाएँ, ये गुलाम हैं, गुलामी में बस इतनी ही छूट है।

PM ने रैली में गाँधी परिवार के ‘फार्महाउस’ पर ऑपइंडिया की ख़बर का उल्लेख किया

कॉन्ग्रेस पार्टी पर भ्रष्टाचार के लिए हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली में ऑपइंडिया की ब्रेकिंग न्यूज़ का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के इतने क़रीब हैं कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के शासन के दौरान भ्रष्टाचार ‘एक्सीलेटर’ पर रहता है और विकास ‘वेंटिलेटर’ पर रहता है। यही कॉन्ग्रेस की पहचान है।

गाँधी परिवार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर घोटाले में नामदार परिवार का नाम सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, “आपने हाल ही में मीडिया में देखा होगा कि, बड़े फार्महाउस में भी कैसे घोटाले किए गए। साथियों इन्होंने देश की सेना को नहीं छोड़ा, हमारे सैनिकों को नहीं छोड़ा।” हाल ही में ऑपइंडिया ने गाँधी परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए संदिग्ध भूमि सौदों का ख़ुलासा किया था।

राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने एचएल पाहवा के साथ कई भूमि सौदे किए हैं, जो भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी का क़रीबी है। राहुल गाँधी ने कम क़ीमत पर भूमि पाहवा से ख़रीदी थी, जबकि प्रियंका गाँधी ने पाहवा से ज़मीन ख़रीदी और फिर बाद में उसे बढ़े मूल्य पर बेच दिया।

गाँधी परिवार के भाई-बहनों ने अपने फार्महाउस को एक कंपनी को किराए पर दे दी, जिसपर मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा, राहुल गाँधी द्वारा फार्महाउस का अर्जित किराया घोषित मूल्य से 4 से 9 गुना अधिक था, जिसे राहुल गाँधी के चुनावी हलफ़नामे में 9 लाख रुपए से थोड़ा अधिक लिखा गया। राहुल गाँधी ने 2G घोटाले के अभियुक्त यूनिटेक से एक संदिग्ध सौदे में संपत्ति खरीदी थी, जहाँ वह वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए किए गए अग्रिम भुगतान पर ब्याज कमा रहे थे।

फर्श से सत्ता के अर्श तक: अभाव में कोई AK47 उठाता है, कोई जितना है, वही बाँट लेता है

एक पुरानी कहानी है जो रीडर्स डाईजेस्ट के जुलाई 2014 अंक में प्रकाशित हुई थी। बहुत से लोगों ने पहले भी पढ़ी होगी फिर भी आज लिखने का मन हुआ। सन् 1990 की गर्मियों की बात है। असम की रहने वाली दो युवतियाँ जो भारतीय रेलवे सेवा की परिवीक्षाधीन अधिकारी थीं, ट्रेन से लखनऊ से दिल्ली जा रही थीं। प्रथम श्रेणी के उसी डिब्बे में दो सांसद भी यात्रा कर रहे थे जिनके साथ दर्जन भर लफंगे भी थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि उस जमाने में जब कोई सांसद बन जाता था तो उसके साथ ढेरों लुच्चे-लपाड़ी, चेले-चपाटे समर्थक भी साथ चलते थे। आज भले ही लोग मोबाइल कैमरे से थोड़ा डरते हों किंतु नब्बे का दशक ‘शूल’ फिल्म के ‘बच्चू यादव’ टाइप विधायक और सांसदों का कालखंड हुआ करता था।

बहरहाल, नेताजी के साथ यात्रा कर रहे उन लफंगों ने असम की उन दो युवतियों पर भद्दे कटाक्ष किये और उन्हें उनकी आरक्षित सीट छोड़कर बैग और सामान के ऊपर बैठने को बाध्य किया। चूँकि डिब्बे में सांसदों और उनके चेलों के अतिरिक्त केवल वही दोनों युवतियाँ थीं इसलिए उन लफंगों के मन में जो आया वह कहते रहे और प्रताड़ित करते रहे। सब कुछ सहती हुई वे दोनों पूरी रात टीटीई की प्रतीक्षा करती रहीं किन्तु कोई नहीं आया। किसी प्रकार यात्रा पूरी कर दोनों युवतियाँ अगले दिन दिल्ली पहुँचीं। दिल्ली पहुँच कर एक युवती वहीं रुक गयी तथा दूसरी अपनी एक अन्य सहेली के साथ भारतीय रेलवे सेवा की ट्रेनिंग के अगले चरण के लिए रात की ट्रेन से दिल्ली से अहमदाबाद की यात्रा पर निकल पड़ी।

इस बार ट्रेन में आरक्षण नहीं मिला था और टिकट वेटिंग में था। युवतियों ने टीटीई से कोई खाली सीट दिलाने की प्रार्थना की। टीटीई महोदय ने कहा कि ट्रेन तो भरी हुई है, फिर एक कम्पार्टमेंट में ले गए जहाँ केवल दो बर्थ थी। उसपर भी दो भलेमानस विराजमान थे। टीटीई ने युवतियों से कहा, “चिंता मत कीजिये ये दोनों सज्जन पुरुष हैं और प्रायः इसी ट्रेन से यात्रा करते हैं आपको दिक्कत नहीं होगी।” इतना कहकर टीटीई चला गया। दोनों ‘सज्जन’ पुरुषों ने खादी पहनी थी यह देखकर युवतियाँ समझ गयीं कि ये दोनों भी नेता हैं। नेताओं के साथ यात्रा करने का परिणाम एक युवती चौबीस घंटे पहले ही भुगत चुकी थी इसलिए उसे डर लग रहा था लेकिन ओखली में सर देने के बाद मूसल से क्या डरना यही सोचकर दोनों ने वहीं बैठने का निश्चय किया।

आश्चर्यजनक रूप से उन दोनों पुरुषों ने युवतियों का सामान बड़े कायदे से सीट के अंदर घुसा दिया और बातचीत करने लगे। वार्तालाप प्रारंभ हुआ तो पता चला कि वे दोनों व्यक्ति गुजरात में भाजपा के कार्यकर्ता हैं। युवतियों ने उन्हें अपना नाम बताया- एक का नाम लीना सरमा था और दूसरी उत्पलपर्णा। उत्पलपर्णा ने इतिहास में एमए किया था अतः भारत के इतिहास पर बातें होने लगीं। उन दोनों पुरुषों को इतिहास में खासी रुचि और विषय का ज्ञान भी था। स्वतंत्रता के पूर्व हिन्दू महासभा और श्यामाप्रसाद मुखर्जी की बातें होने लगीं तो उन दोनों पुरुषों में से जो कम वय का लग रहा था उसने लीना से पूछा, “आप श्यामाप्रसाद मुखर्जी को कैसे जानती हैं?” लीना ने उत्तर दिया कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने उनके पिताजी को कलकत्ता विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति दिलाने में सहायता की थी।

बातचीत समाप्त होते-होते खाना खाने का समय हो चला तो चार शाकाहारी थाली मंगाई गयी। भोजन करने के पश्चात कम आयु वाले व्यक्ति ने सभी का भोजन का पैसा चुका दिया। उसके बाद जब सोने का समय हुआ तो उन दोनों भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन की फर्श पर सोने का निर्णय लिया और लीना और उत्पलपर्णा को अपनी दोनों बर्थ आराम से सोने के लिए दे दी। प्रातःकाल जब ट्रेन अहमदाबाद पहुँची तो आयु में बड़े व्यक्ति ने लीना और उत्पलपर्णा से अहमदाबाद में ठहरने के ठिकाने के बारे में भी पूछा। उसने कहा कि वे चाहें तो उसके घर में रह सकती हैं। कम आयु वाले व्यक्ति ने कहा कि वह तो घुमक्कड़ है उसका कोई निश्चित ठिकाना नहीं है इसलिए वे उसके मित्र के घर में रह सकती हैं। लीना और उत्पलपर्णा को उन दोनों पुरुषों के निमन्त्रण को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार करना पड़ा क्योंकि वे तो ट्रेनिंग के लिए आई थीं इसलिए सरकारी आवास की सुविधा तो उन्हें मिलती ही। इसके बाद दोनों सज्जन पुरुषों ने हाथ जोड़ा और अपने रस्ते चल पड़े।

लीना सरमा और उत्पलपर्णा को जो दो व्यक्ति ट्रेन में मिले थे उनमें से आयु में बड़े वाले शंकर सिंह वाघेला थे और छोटे वाले थे नरेंद्र मोदी जो आज भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री हैं। यह कहानी 2014 में रीडर्स डाइजेस्ट से पहले सन 1995 में असम के समाचार पत्र दैनिक असम और द हिन्दू के किसी संस्करण (तारीख याद नहीं) में भी प्रकाशित हुई थी।

भारतीय रेल की फर्श नब्बे के दशक में इतनी गंदी होती थी कि आजकल स्लीपर में यात्रा करने वाले नौजवान उस समय वयस्क होते तो उस फर्श पर सोना तो दूर बैठना पसंद न करते। नेता तो आज भी ऐसे होते हैं कि विधायक और सांसद तो छोड़िये किसी पार्टी के पार्षद से दोस्ती भी हो जाये तो पूरे नगर में अपनी हेकड़ी दिखाते हैं। दो युवतियों के लिए अपनी सीट स्वेच्छा से छोड़कर ट्रेन की फर्श पर सोने वाला नेता आज देश का प्रधानमंत्री है। ट्रेन की गंदगी ही नहीं बल्कि समूचे देश के मानस में व्याप्त गंदगी उसने देखी है और उसका अनुभव किया है इसीलिए वह व्यक्ति साफ़ सफाई का आग्रह कर पाता है।

सुविख्यात अर्थशास्त्री राजीव कुमार नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत जीवन पर प्रकाश डालते हुए लिखते हैं कि रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में यात्रा कर रहे सैनिकों को चाय पिलाते हुए नरेंद्र मोदी ने सैनिक स्कूल में पढ़ने का सपना पाला था लेकिन उनके पिताजी ने जाने नहीं दिया। राजीव कुमार का एक महत्वपूर्ण आकलन है कि जब देश बेरोजगारी से जूझ रहा था और चारू मजूमदार नक्सलवाद का बीज बो रहा था तब युवाओं में मार्क्सवादी कीड़ा घुस जाना आम बात हुआ करती थी। परन्तु अत्यंत गरीबी में पले बढ़े होने के बावजूद नरेंद्र मोदी को मार्क्सवादी विचारधारा छू भी नहीं पाई थी।

नरेंद्र मोदी बाल्यकाल से ही प्रतिदिन अपनी गली के गिरिपुर महादेव मन्दिर दर्शन करते थे और उसपर भगवा ध्वज लहराते थे। हिंदुत्व और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से ही ट्रेन के फर्श से सत्ता के अर्श पर पहुँचा यह व्यक्ति आज सवा सौ करोड़ भारतवासियों की प्रेरणा का स्रोत है क्योंकि हिंदुत्व अभावों में जीने को बुरा मानकर बंदूक उठाने को नहीं कहता बल्कि अभाव में भी कुछ न कुछ प्रेम का भाव साझा करने का संदेश देता है।

हिन्दू धर्म को हिंसक बताने वाली कॉन्ग्रेस नेता उर्मिला ने गुड़ी पड़वा पर जमकर किया नृत्य

रामगोपाल वर्मा की फिल्म भूत की नायिका उर्मिला मार्तोंडकर हाल ही में कॉन्ग्रेस में शामिल हुई हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उर्मिला मार्तोंडकर को उत्तरी मुंबई लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी के साथ, उर्मिला मातोंडकर ने एक टीवी इंटरव्यू में हिन्दू धर्म को हिंसक और उग्र बताकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की है।

अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए हिन्दू धर्म को हिंसक बताने के अगले दिन ही बॉलीवुड अभिनेत्री और कॉन्ग्रेस नेता उर्मिला मार्तोंडकर गुड़ी पड़वा के पर्व पर उत्तरी मुंबई में महिलाओं की रैली में शामिल हुई हैं। उर्मिला ने इस खुशी के मौके पर सड़क पर जमकर डांस भी किया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।इस मौके पर उन्होंने पूजा अर्चना भी की।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि उर्मिला ने शादी करने के लिए इस्लाम कबूल किया था और उन्होंने अपना नाम उर्मिला से बदलकर मरियम अख्तर मीर कर लिया था। ऐसे में अगर वो इस्लाम कबूल कर चुकी हैं तो चुनाव के लिए उन्हें राहुल गाँधी की तरह मंदिर जाने और हिन्दू त्योहारों पर खुश होने का ढोंग नहीं करना चाहिए। भले ही इस प्रकार की छींटाकशी चुनाव के समय खूब देखने को मिलती हैं, लेकिन इनकी प्रमाणिकता कुछ नहीं होती।

चैत्र महीने की पहली तिथि से गुड़ी पड़वा की शुरुआत हो गई है। गुड़ी पड़वा प्रति वर्ष चैत्र महीने की पहली तिथि को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। चैत्र महीने के शुक्ल प्रतिपदा को नया साल यानी (हिंदू नववर्ष) मनाया जाता है, जो कि महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के नाम से लोकप्रिय है। गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र में बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। महिलाएँ मुंबई की सड़कों पर दो पहिया वाहन से रैली निकाल कर इस त्योहार को बड़ी उत्साह के साथ मना रही है।

उर्मिला कॉन्ग्रेस के टिकट पर नॉर्थ मुंबई लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। इस क्षेत्र में मराठियों के साथ ही गुजराती लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है। गुजराती वोटरों को लुभाने के लिए उर्मिला ने पिछले दिनों अपने भाषण में मराठी के साथ ही गुजराती में भी स्पीच देती नजर आई। नॉर्थ मुंबई के बोरीवली इलाके में प्रचार के लिए उर्मिला हर गली-नुक्कड़ में सभा कर रही हैं। इतना ही नहीं, उर्मिला ने बोरीवली इलाके में ऑटो की सवारी के साथ ही इसे चलाकर भी प्रचार किया जिसकी फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हुई। उर्मिला की इन सभी मिलीजुली हरकतों से यही प्रतीत हो रहा है कि वो राजनीति और कॉन्ग्रेस में जरा देर से आई हैं।


‘धुर-विरोधी’ अजीत जोगी ने इंटरव्यू में पीएम नरेंद्र मोदी का किया जमकर गुणगान

कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने एक इंटरव्यू में पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। इस दौरान उन्होंने तीन मुद्दों पर बात की। सबसे पहले उन्होंने मोदी सरकार द्वारा लाए गए स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा की। अजीत जोगी ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान से छत्तीसगढ़ के लोग काफी खुश हैं। खासकर महिलाओं और गरीब परिवारों में खुशी का माहौल है।

इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में बात करते हुए कहा कि इससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। अजीत जोगी ने कहा कि उनके पास इंदिरा आवास जैसी योजनाएँ थीं, लेकिन वो जो सुविधाएँ दे रहे थे, वह पर्याप्त नहीं था, मोदी जो दे रहे हैं, वह सम्मानजनक है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए कहा, “तीसरा मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेता के रूप में उभरने का है। वह ऐसे प्रधानमंत्री नहीं हैं, जिनको देश के बाहर कोई जानता ही ना हो।”

गौरतलब है कि अजीत जोगी अभी तक कॉन्ग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के भी धुर विरोधी के रूप में खुद को पेश करते आए हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके बारे में कहा जा रहा था कि वो चुनाव के बाद बीजेपी के साथ आ जाएँगे। इस बात पर अजीत जोगी ने कहा था, “चाहे मुझे सूली पर चढ़ा दिया जाए, लेकिन बीजेपी को ना तो समर्थन दूँगा और ना ही समर्थन लूँगा।” इस बात को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर पिन करके रखा हुआ है। बसपा के साथ विधानसभा चुनाव में उतरे अजीत जोगी दावा कर रहे थे कि वह सरकार बनाएँगे लेकिन उनकी पार्टी को सिर्फ पांच सीटों पर जीत मिली थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी ‘जनता कॉन्ग्रेस छत्तीसगढ़ जे’ राज्य की 11 सीटों में से किसी पर भी अपना कैंडिडेट नहीं उतारेगी। उनकी पार्टी की ओर से कहा गया है कि सभी सीटों पर वह बसपा का समर्थन करेगी। ये फैसला इसलिए भी लिया गया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में उनकी पार्टी के कई बड़े नेताओं ने उनका साथ छोड़कर दूसरी पार्टियों का दामन थाम लिया है।

राहुल बनाम राहुल बनाम राघुल: वायनाड से लोकसभा की दौड़ में तीन ‘गाँधी’

यह बात तो अब सर्वविदित है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं दो ऐसे और नाम हैं जो लोकसभा चुनाव की दौड़ में शामिल हैं जिनका नाम भी राहुल है। और इस पर भी अचंभे वाली बात यह है कि दोनों राहुल के नाम के साथ ‘गाँधी’ शब्द भी जुड़ा है। आइये आपको बताते हैं कि राहुल गाँधी के अलावा वो दो राहुल कौन हैं, इनमें से एक हैं राहुल गाँधी केई (Rahul Gandhi K E.) और दूसरे हैं राघुल गाँधी के (Raghul Gandhi K)। तीनों राहुल ने केरल से ही लोकसभा चुनाव लड़ने संबंधी नामांकन पत्र दाखिल किया है। मतलब साफ़ है कि तीनों राहुल एक दूसरे के समक्ष  राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रुप में होंगे जबकि दोनों राहुल ऐसे परिवार से हैं जो कॉन्ग्रेस समर्थक रहा है।

इंडियन एक्प्रेस की ख़बर के अनुसार, गुरुवार (अप्रैल 4, 2019) को वायनाड में रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कॉन्ग्रेस प्रमुख ने नामांकन पत्र दाखिल किया जिसके कुछ घंटे बाद ही राहुल गांधी केई (33) ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन प्रस्तुत किया। कोट्टायम के एरुमेली गाँव के निवासी, राहुल गाँधी केई लोक संगीत के विद्यार्थी हैं। उनके छोटे भाई का नाम राजीव गाँधी केई है। उनके पिता, स्वर्गीय कुंजुमोन, एक ड्राइवर थे जो कि कॉन्ग्रेसी होने के साथ-साथ गाँधी परिवार के प्रशंसक भी थे। जबकि राहुल गाँधी केई ने नामांकन दाखिल करने के बाद अपना फोन स्विच ऑफ़ कर दिया, उनके भाई राजीव ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

तस्वीर आभार: इंडियन एक्सप्रेस

स्थानीय पंचायत सदस्य प्रकाश पुलिकाल ने कहा कि कुंजुमन एक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता थे और इसलिए उन्होंने अपने बेटों का नाम राहुल और राजीव रखा। इसके अलावा पुलिकाल ने कहा, “बेटों का कॉन्ग्रेस से कोई संबंध नहीं है, लेकिन राजीव सीपीएम का फॉलोवर है। उनकी माँ वलसम्मा एक दैनिक कार्यकर्ता हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने घर पर किसी से सलाह नहीं ली है। उनके इलाके में हर कोई उम्मीदवारी के बारे में सुनकर हैरान था।”

चलिए, अब बात दूसरे राघुल गाँधी (30 वर्षीय) की, जो तमिलनाडु के कोयम्बटूर से हैं। राघुल, अगिला इंडिया मक्कल काज़गम के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। राघुल ने बताया कि उनके पिता कृष्णन पी एक स्थानीय कॉन्ग्रेसी नेता थे, जो बाद में अन्नाद्रमुक में चले गए। जब वो कॉन्ग्रेस में थे, तब मेरा जन्म हुआ था और तभी उनका नाम राघुल गाँधी रख दिया गया। राघुल ने यह भी बताया कि उनकी बहन को तब इंदिरा प्रियदर्शिनी नाम दिया गया था।

इसके अलावा राघुल ने कहा कि वायनाड में चुनावी राजनीति में उनका यह तीसरा प्रयास था – 2016 में, उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान कोयम्बटूर में सिंगनल्लूर सीट से चुनाव लड़ा; और 2014 में, उन्होंने कोयंबटूर नागरिक निकाय चुनावों में चुनाव लड़ा।

गले लगाया, आँख मारी, ‘मोदी से प्यार करता हूँ’ चिल्लाया… लेकिन वो मेरा नाम तक नहीं लेता

बीते दिनों राफेल से लेकर हर राजनैतिक/सामाजिक मुद्दे पर प्रधानमंत्री को घेरने वाले राहुल गाँधी चुनाव के नज़दीक आते ही अपने सुर बदलने लगे हैं या कहें कि बचकानी बातें करने लगे हैं। इस बदलाव का एक कारण यह भी हो सकता है कि वो अब समझ चुके हैं कि उनका ज्यादा एंटी-मोदी होना उनकी राजनैतिक सफलता पर भी सवाल उठा सकता है। घटना कल (अप्रैल 5, 2019) की है जब पुणे में छात्रों के बीच पहुँचकर राहुल गाँधी ने पूरे जोश के साथ पीएम के प्रति अपने अगाध प्रेम को जाहिर करने की कोशिश की। लेकिन, इसके बाद वहाँ जो हुआ उससे राहुल एकदम भौंचक रह गए।

दरअसल, राहुल कह रहे थे कि वो पीएम मोदी से प्यार करते हैं और वास्तव में अपने दिल में पीएम के प्रति कोई नफरत की भावना नहीं रखते लेकिन मोदी राहुल के लिए दिल में गुस्सा रखते हैं। उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, “उनके प्रति मैं सच में गुस्सा नहीं रखता हूँ।” राहुल की इस टिप्पणी के तुरंत बाद उन्हें लगा होगा जैसे पूरे सभागार में उनके लिए तालियाँ बज उठेंगी, लेकिन वहाँ पर पूरा दृश्य ही उल्टा हो गया। राहुल की बात पर विराम लग ही रहा था कि वहाँ मौजूद छात्र मोदी, मोदी कहकर नारे लगाने लगे। इसपर ‘अति शालीन’ स्वभाव वाले राहुल गाँधी सिर्फ़ “ठीक है…ठीक है” ही जवाब दे पाए।

इस घटना के बाद एक बात तो निश्चित है कि जगह-जगह जाकर ‘कॉन्ग्रेस की जीत हो चुकी है’ कहने से पहले अब राहुल नतीजों का इंतजार करने पर ज्यादा गौर करेंगे। 2019 में मोदी की लोकप्रियता पर सवाल उठाने वाले विपक्ष को भी इस घटना से अंदाजा हो गया होगा कि मोदी को सत्ता से निकालने का उनका सपना 2019 लोकसभा चुनावों में तो बिलकुल भी सच नहीं होगा। याद दिला दें कि रिपब्लिक भारत के साथ साक्षात्कार में मोदी ने खुद भी विपक्ष को सलाह दी है कि वो 2024 के चुनावों की तैयारी करें क्योंकि 2019 में तो वाकई मोदी का कोई विकल्प नहीं है।

खैर, पीएम मोदी के प्रति प्रेम दिखाने का काम राहुल गाँधी ने पहली बार नहीं किया है। आपको वो दृश्य तो याद ही होगा, जिसमें राहुल ने भरी संसद में प्रधानमंत्री को गले लगाया था। इस प्रेम की गंभीरता का अंदाजा तो तभी लग गया था जब उन्होंने अपनी जगह पर बैठकर आँख मारी थी। लेकिन उस घटना को आज भी राहुल प्रासंगिक बनाकर याद करते रहते हैं और कहते हैं कि वह उनसे नफरत नहीं कर सकते क्योंकि प्रेम देश के मिजाज और प्रत्येक मत और मजहब में है।

गाँधी जी की ‘अहिंसा’ नीति पर चलने वाले राहुल गाँधी मार्च में चेन्नई में एक कॉलेज के छात्रों से बातचीत के दौरान उल्लेख करते हैं कि उन्होंने संसद में एक बहुत गुस्सैल मोदी को देखा है जो उनकी पार्टी, उनके पिता और माताजी का जमकर आलोचना करता है। हैरान करने वाली बात है कि जो राहुल जनता के बीच जाकर मोदी को चुप कराने के लिए 15 मिनट का समय माँगता था वो अब सिर्फ़ इस बात पर अड़ गया है कि उसे मोदी से बहुत प्यार है।

चुनाव है तो राजनीति होनी तय है, लेकिन भाषणों में इतना फेरबदल करना भी ठीक नहीं है कि जनता न चाहते हुए नतीजों की ‘घोषणा’ कर दे बिलकुल वैसे, जैसे कल हुई। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष खुद मौजूद हैं और वहाँ की जनता मोदी-मोदी का नाम ले रही है। खैर ऐसा पहली बार नहीं हुआ था, इससे पहले राहुल गाँधी का बेंगलुरु में भी मोदी के नाम के साथ स्वागत हुआ है और उन्हीं की तरह कन्हैया कुमार भी जनता की राय प्रत्यक्ष देख चुके हैं। बेगुसराय की जनता ने कन्हैया का उम्दा स्वागत करने के बाद खूब जोर से हर-हर मोदी के नारे लगाए थे। साथ ही जनता ने यह भी कहा था कि हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है जो देश के लिए लड़ता है, देश के लिए जीता-मरता है, तो हम किसी और को क्यों वोट दें?

UN का सर्वे: पाकिस्तान की आर्थिक हालत होगी नेपाल, बांग्लादेश से भी बदतर

इन दिनों पाकिस्तान का हाल काफी बुरा है। वहाँ की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है और महंगाई आसमान छू रही है। जरूरत का हर सामान दुगने-तिगुने दामों पर मिल रहा है। खाने-पीने से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमताें में बेतहाशा बढ़ाेतरी दर्ज की गई है। कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्‍तान के लिए एक और बुरी खबर है। संयुक्त राष्ट्र की एक आर्थिक रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया है कि इस साल 2019 में पाकिस्‍तान की जीडीपी वृद्धि दर सबसे कम 4.2% और 2020 में मात्र 4% रह सकती है। बड़ी बात यह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान की जीडीपी दर नेपाल, बांग्‍लादेश और मालदीव से भी पीछे रह सकती है।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) की तरफ से ‘एंबिशंस बियॉन्ड ग्रोथ’ शीर्षक से जारी की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि 2019 में पाकिस्तान की जीडीपी की वृद्धि दर इस क्षेत्र में सबसे कम 4.2% रहने का अनुमान है। जबकि इसी वर्ष बांग्‍लादेश की जीडीपी 7.3%, भारत की 7.5%, मालदीव और नेपाल की 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है।

पाकिस्तान में पर्यावरणीय पतन खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है, जो कि विकास की उपलब्धियों के लिए खतरा बन रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी कहा था कि पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में सुस्त होकर 3.9% रहेगी। एडीबी ने ‘व्यापक आर्थिक चुनौतियों’ का हवाला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018 में 5.2% से गिरकर 2019 में 3.9% पर आने का अनुमान है।

एशियाई विकास परिदृश्य 2019 के अनुसार, कृत्रि क्षेत्र में सुधार के बावजूद 2018 में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ी है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की विस्तारवादी राजकोषीय नीति ने बजट और चालू खाते के घाटे को व्यापक रूप से बढ़ाया और विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान किया है। एडीबी ने कहा कि जब तक वृहद आर्थिक असंतुलन को कम नहीं किया जाता है, तब तक वृद्धि के लिए परिदृश्य धीमा बना रहेगा, ऊँची मुद्रास्फीति रहेगी, मुद्रा पर दबाव बना रहेगा।

‘लड़कियो तुम्हारी खुशी किसी लड़के की मोहताज नहीं’- क्यों हो रही है यह पोस्ट वायरल

टीवी सीरियल नव्या के आठ साल पूरे होने पर सीरियल की अभिनेत्री सौम्या सेठ ने एक इमोशनल पोस्ट शेयर की है। स्टार प्लस पर प्रसारित हो चुके इस शो में सौम्या और शबीर शेख ने मुख्य भूमिका निभाई थी। सौम्या फिलहाल अमेरिका में रह रही है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए पोस्ट लिखी है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि वो घरेलू हिंसा जैसे बुरे दौर से गुजर चुकी है।

दरअसल, सौम्या ने फोटो के साथ कैप्शन लिखा- “8 साल पहले जब मैंने सीरियल नव्या किया था तब मैं 21 साल की थी। चाहती थी कि दुनिया प्यार पर विश्वास करे। प्यार से दुनिया को ठीक करना चाहा था। मेरा मानना था कि हर कोई प्यार लेने और प्यार करने का हकदार है। मैं अपने ही देश में थी। मैं अपने माता-पिता के साथ रहती थी, जिन्होंने मुझे हर बुराई से बचाया। मैं बड़ी हो गई हूँ। मैंने हिंसा देखी है। मैंने ड्रग्स (कोकीन वगैरह) को देखा है। मैंने घृणा देखी है। मैंने ईर्ष्या देखी है। मैंने अन्याय, भावनात्मक हेरफेर और शारीरिक शोषण देखा है। मैंने बुरे दिलों के साथ सुंदर चेहरे देखे हैं, जो लोग अच्छे दिखते हैं, लेकिन दिल और दिमाग से बीमार होते हैं।”

इसके साथ ही सौम्या ने लिखा कि नव्या करने के 8 साल बाद उनका मानना है कि प्रिंस चार्मिंग जैसा कॉन्सेप्ट बेकार है। लड़कियों को बस अपने दिल की सुनने की जरूरत है। उनकी खुशी किसी भी पुरुष पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। वो कहती हैं कि आज वो बता सकती हैं कि ईमानदार होना महंगा, बेकार, दर्दनाक और बेवकूफी है। वहीं सौम्या ने नव्या सीरियल को सबसे सुंदर सपना बताया और कहा कि ये उनके जीवन के कुछ सबसे यादगार दिन थे, उन्हें कुछ दिनो के लिए इसे जीने का मौका मिला। इसके लिए वो हमेशा आभारी रहेंगी।

सौम्या ने अपने नए घर की चाबियों की एक तस्वीर नोट के साथ पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने अपने और अपने बेटे के बारे में लिखा है। इस पोस्ट से साफ हो जाता है कि सौम्या और उनके पति के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है और अपने पति से अलग हो चुकी है। इस बात की पुष्टि एक और पोस्ट करती है, जिसमें उन्होंने एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “उन्हें लगता है कि वे मेरे जीवन को कठिन बना रहे हैं, लेकिन वे नहीं जानते कि यह लड़की लंबे समय से खुश है, क्योंकि वह जानती है कि उसने बुरे वक्त को पीछे छोड़ दिया है और अब केवल अच्छाई उसके आसपास है। कभी-कभी संबंधों को तोड़ देना आपके लिए सबसे अच्छी बात होती है।” इस पोस्ट से जाहिर हो रहा है कि वो अपने बुरे दौर से बाहर निकल चुकी है और सौम्या ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से अपनी शादी की तस्वीरें भी डिलीट कर दी है।