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100 साल बाद जलियाँवाला नरसंहार पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भरी संसद में ऐसे जताया खेद

अप्रैल 13, 2019 को भारतीय इतिहास और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दौरान घटे जलियाँवाला बाग हत्याकांड के काले अध्याय के 100 वर्ष पूरे हो जाएँगे। इससे पहले इस मामले पर एक नई चर्चा ने आजकल जोर पकड़ा है। कल ही ब्रिटेन के विदेश मंत्री मार्क फील्ड ने हाउस ऑफ कॉमन्स कॉम्प्लेक्स के वेस्टमिंस्टर हॉल में जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर आयोजित एक बहस में कहा कि इतिहास में यह एक ‘शर्मनाक प्रकरण’ के रूप में दर्ज है। लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान को बार-बार अतीत में खींचने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि बार-बार इस घटना के लिए माफी की माँग ब्रिटिश राज से संबंधित कई दूसरी समस्याओं को पैदा करेगा।

इसके बाद आज (अप्रैल 10, 2019) को ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ़ कॉमन्स) में जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर खेद व्यक्त किया है। थेरेसा मे ने कहा, “जो भी हुआ था और उससे लोगों को जो पीड़ा हुई, उसका हमें बेहद अफसोस है।” उन्होंने आगे कहा, “1919 की जालियाँवाला बाग त्रासदी ब्रिटिश-भारतीय इतिहास के लिए शर्मनाक धब्बा है। जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जालियाँवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे बीते हुए इतिहास का दुखद उदाहरण है।”

ब्रिटेन अक्सर अपने औपनिवेशिक अतीत के इस नरसंहार को लेकर माफ़ी माँगने से बचता रहा है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान, आजादी से पहले के इतिहास में कई ऐसे प्रकरण हैं, जिन पर बात करने में आज तक ब्रिटिश संसद को समय और संसाधनों का दुरुपयोग नजर आता है। ऐसे हालातों में PM थेरेसा द्वारा संसद में जलियाँवाला बाग की घटना पर दुःख प्रकट करना एक पहल मानी जा सकती है।

ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के मंत्री मार्क फील्ड ने कल ही एक बयान में कहा, “भारत के साथ समृद्ध संबंधों की पूरी संभावना है और जलियाँवाला बाग पर कोई अलग स्पष्टीकरण इसे विशेष रूप से मजबूती देगा।” जलियाँवाला हत्याकांड दुनिया के सबसे जघन्य नरसंहारों में से एक माना जाता है। इस हत्‍याकांड में करीब 1000 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1500 से अधिक लोग घायल हो गए थे, ये वो विवादित आँकड़े हैं जिन्हें तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने जारी किया था।

भारतीय मूल के लेबर सांसद वीरेंद्र शर्मा ने ब्रिटिश प्रधान मंत्री थेरेसा मे से औपचारिक माफी मांँगने का आह्वान किया है। अन्य कई लोगों ने इस माँग का समर्थन किया और जलियाँवाला नरसंहार में जान गँवाने वालों की याद में एक भौतिक स्मारक के निर्माण की संभावना जताई।

100 वर्ष पूरे होने पर ब्रिटिश सरकार पर जलियाँवाला नरसंहार के लिए मोदी सरकार द्वारा ब्रिटेन से माफी माँगने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। अब मोदी सरकार के दौरान कूटनीतिक मामलों पर भारत की सबसे बड़ी जीत देखने को मिली है। विदेश संबंधों का स्वर्णिम समय मोदी सरकार के दौरान देखने को मिला है और पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान जैसे देशों का वैश्विक स्तर पर बहिष्कार देखना इसका एक उदाहरण है। यहाँ तक कि आज सुबह ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बयान दिया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध मोदी सरकार के दौरान ज्यादा बेहतर हो सकते हैं। शायद इसी कारण से ही इमरान खान ने भाजपा को ही वोट देने की अपील कर डाली है।

तेलंगाना में मनरेगा के तहत काम कर रहे 10 मज़दूरों की हुई मौत, 1 घायल

बीते दिनों यूपी में मनरेगा मज़दूरों को लेकर खुशखबरी सुनने को मिली थी कि बजट में उनके वेतन में तीस फीसदी का अधिक इजाफ़ा किया गया है लेकिन आज तेलंगाना में मनरेगा मजदूरों से जुड़ी दिल दुखाने वाली खबर आई है।

यह खबर तेलंगाना के नारायनपेट जिले के मणिकल गाँव से आई है। जहाँ मनरेगा के तहत काम कर रहे मज़दूरों पर एक मिट्टी का टीला भरभराकर गिर गया है। मीडिया खबरों की मानें तो इस हादसे में 10 मज़दूरों की मौत और 1 व्यक्ति के घायल होने की जानकारी है। हादसा आज (अप्रैल 10, 2019) दोपहर का है।

इस हादसे में मरने वालों में महिलाएँ भी शामिल हैं। एएनआई ट्वीट के मुताबिक पुलिस ने बताया है कि मृतकों के शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए लोकल अस्पताल भेजा जा रहा है। साथ ही घायल व्यक्ति को भी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मीडिया खबरों के मुताबिक हादसे के समय घटना स्थल पर 15 लोग मौजूद थे। हादसे के बाद से वहाँ राहत और बचाव कार्य जारी है। लोगों को जेसीबी मशीनों की मदद से निकाला जा रहा है।

मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने इसपर हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया है। इसके साथ ही सीएम ने इस हादसे को दुर्भाग्‍यपूर्ण बताते हुए अफसरों को घायलों और पीड़ित परिवारों को सभी जरूरी मदद मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।

फैक्ट चेक: कंगना ने दिया शबाना के ‘अपमानास्पद’ ट्वीट का जवाब?

शबाना आज़मी और उनके पति जावेद अख़्तर को अक्सर ख़बरों में बने रहने के शौक के लिए हिन्दुओं की भावना आहत करने वाला कोई ना कोई कारनामा करते हुए देखा जाता है। इस बार सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक इन्फोग्राफिक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, शबाना ने ट्विटर पर लिखा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा।

वायरल हो रही यह तस्वीर शबाना आज़मी के अंग्रेजी में दिए एक विवादित बयान के हिंदी अनुवाद की है, जिस पर आज़मी को आपत्ति है। शबाना आज़मी ने 2017 ट्वीट में लिखा था, “इस नवरात्रि, मैं अल्लाह से दुआ करती हूँ कि लक्ष्मी को भीख न माँगना पड़े, कोई दुर्गा गर्भ में न मरे, न पार्वती को दहेज देना पड़े, न सरस्वती को शिक्षा से वंचित किया जाए और न ही किसी काली को ‘फेयर एंड लवली’ की ज़रूरत पड़े। इंशाल्लाह!”

सोशल मीडिया पर शबाना आज़मी को उनके इस पुराने बयान को ट्विटर यूज़र्स ने याद दिलाया, लेकिन सोशल मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दोनों तरफ काम करता है। इसके सकारात्मक पहलू भी हैं और नकारात्मक पहलू भी, कभी यह आपके पक्ष में काम करता है तो कभी आपके विपक्ष में।

व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी द्वारा जारी शबाना के ‘अपमानास्पद’ बयान पर कंगना के ‘पलटवार’ की वायरल तस्वीर

इस तस्वीर के अनुसार शबाना आज़मी के ‘अपमानास्पद’ बयान पर कंगना रनौत ने पलटवार किया है और बेहद तीखा कटाक्ष करते हुए कहा है, “मैं ईद पर ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि किसी आइशा का 6 साल की उम्र में निकाह ना हो, शाहबानो को ट्रिपल तलाक़ ना मिले, मीनाकुमारी हलाला ना हो। फातिमा को 4 की बीबी ना बनना पड़े, इशरत आतंकवादी ना बने, शेहला को बुरका ना पहनना पड़े। किसी मुमताज को 14 बच्चे पैदा ना करना पड़े! – कंगना रनौत”

क्या है सच्चाई?

सोशल मीडिया पर शबाना के इस घेराव के बाद फ़ौरन एक दूसरी तस्वीर देखने को मिली, जिसमें बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत को शबाना आज़मी की क्लास लगाते हुए देखा गया। इस तस्वीर के ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा है, “कंगना के पलटवार से सन्न रह गई शबाना?”
शबाना के ट्वीट को ‘अपमानास्पद’ बताने वाली इस तस्वीर की सच्चाई ये है कि इस तरह की तस्वीरें सिर्फ व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी पर बैठे लोगों, यानी खाली बैठे लोगों द्वारा समय बिताने के लिए बनाई जाती हैं। हालाँकि, इस प्रकार की तस्वीरों में कहीं ना कहीं आहत हुई आस्थाओं का भी योगदान रहता है, वही आस्थाएँ जिन्हें अक्सर शबाना जैसे लोग सिर्फ चर्चा में आने के लिए निशाना बनाती हैं।

कंगना रनौत अक्सर सामाजिक मुद्दों को लेकर मुखर रहती हैं और खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शबाना को पुलवामा हमले के बाद भी जमकर घेरा था। शायद यही कारण है कि जज्बाती समर्थकों ने कंगना के नाम पर ही इस तरह की झूठी तस्वीर ‘वायरल’ करने का निर्णय लिया। कंगना का ट्विटर पर फिलहाल कोई व्यक्तिगत एकाउंट नहीं है और ना ही उन्होंने शबाना को लेकर इस मुद्दे पर इस्लाम के विरोश में कोई बात कही है। इसलिए यह तस्वीर भाषा और वर्तनी से लेकर इस्लाम के अपमान तक एकदम फ़र्ज़ी है।

दरअसल शबाना ने 2017 में दुर्गा अष्टमी के अवसर पर विवादास्पद पोस्ट किया था। शबाना ने ट्वीट किया था, “इस दुर्गा अष्टमी, आइए हम प्रार्थना करें कि किसी दुर्गा का गर्भपात न हो, किसी भी सरस्वती को स्कूल जाने से न रोका जाए, किसी लक्ष्मी को पति से भीख न माँगनी पड़े, किसी भी पार्वती को दहेज के लिए बलि नहीं दी जाए और न ही किसी काली को फेयरनेस क्रीम के ट्यूब की ज़रूरत पड़े।”

शबाना द्वारा 29 सितंबर, 2017 को किया गया यह ट्वीट एक बार दोबारा चर्चा का विषय बना और फिर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने-अपने तरीके से शबाना के इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।

कॉन्ग्रेस नहीं है Pak को पसंद, शांति के लिए इमरान को मोदी से है उम्मीद: ये डर, दबाव या कुछ और!

चुनाव मतदान का पहला चरण शुरू होने से ठीक पहले एक तरफ़ जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता भी पार्टी को छोड़कर मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में अपनी रूचि दिखा रहे हैं, तो वहीं ‘उरी’ और ‘बालाकोट’ जैसे हमलों के बाद भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तक कॉन्ग्रेस को भारतीय सत्ता संभालते नहीं देखना चाहते हैं। ऐसा इमरान ने खुद मीडिया को दिए बयान में कहा है।

दरअसल, पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान के अनुसार लोकसभा 2019 के चुनावों में नरेंद्र मोदी को दोबारा से सत्ता मिलती है तो शांति वार्ता होने की बेहतर उम्मीद है। जबकि इमरान का मानना है कि अगर नरेंद्र मोदी के सिवा कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आती है तो कश्मीर मुद्दे समेत कई मुद्दों पर बातचीत की राह काफ़ी मुश्किल हो जाएगी।

इमरान खान के इस बयान के बाद हालाँकि विपक्ष ने इस पर अपनी राजनीति साधने का पूरा प्रयास किया। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा है कि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर मोदी के साथ हो गया है। उनकी मानें तो मोदी को वोट करने का पर्याय पाकिस्तान को वोट करना है।

माना जा रहा है कि इमरान खान ने चुनावी माहौल के मद्देनज़र ऐसा बयान दिया है। ट्वीटर पर मोदी विरोधी लोग इस बयान को हथियार समझकर इस्तेमाल करने पर जुटे हुए हैं, विपक्ष लगातार वार करने के लिए प्रयासों में जुटा है। वहीं मोदी समर्थकों का कहना है कि इमरान खान और पाकिस्तान को मालूम चल चुका है कि मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आने वाली है, जिसके कारण वह उन्हें मक्खन लगा रहे हैं।

ऐसे में ट्वीटर पर आपस में भिड़े इन दोनों तरह के ‘समर्थकों’ की लड़ाई में उलझने की जगह यह समझना जरूरी है कि इस समय इमरान खान पर और पाकिस्तान पर मोदी के कारण बहुत बड़ा दबाव बना हुआ है। जिसे भारत की कूटनीतिक जीत भी कहा गया है। पुलवामा हमले के बाद पेरिस में एक हफ्ते तक चली बैठक के बाद पाकिस्तान को FATF की ओर से ग्रे लिस्ट में बनाए रखा गया था। यहाँ भारत ने पाकिस्तान पर विशेष नजर रखने और उन्हें दी जाने वाली फंडिंग को रोकने की माँग की थी। जिसके बाद FATF ने उसे ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल रखा था और उससे कहा गया था कि अगर वो खुद में सुधार नहीं करता है तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। यहाँ पाकिस्तान ने FATF से 200 दिनों की मोहलत माँगी थी।

इसके अलावा न चाहते हुए भी पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर मसूद अजहर के मामले में नकेल कसनी पड़ी थी। बता दें कि पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र ने हमले को न केवल जघन्य और कायराना बताकर इसकी निंदा ही की थी। बल्कि जोर देकर कहा था कि इस तरह की हरकतों को करने वालों और इन्हें फंडिंग कर देने वालों कटघरे में खड़ा करना चाहिए।

इतना ही नहीं नए साल की शुरूआत के साथ इस बात को सरकार ने साझा किया था कि पाकिस्तान की हिरासत में भारत के 503 मछुआरे हैं। जिसके बाद पाकिस्तान ने इस बात को स्वीकारा कि उसने 483 भारतीय मछुआरों को हिरासत में लिया हुआ है। इस दौरान विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने बताया था कि 2014 से अनेकों प्रयासों के बाद पाकिस्तान से 1749 भारतीय कैदी रिहा हुए हैं। इसके अलावा अभी हाल ही में पाकिस्तान ने बाघा बॉर्डर के जरिए 100 कैदियों को भारत रिहा किया है। और बाकी के कैदियों को रिहा करने की तारीख़ भी बता दी है।

इस कदम को भले ही पाकिस्तान ने ‘सद्भावना’ के तहत उठाया कदम बताया गया हो, लेकिन सच यही है कि ये पाकिस्तान के भीतर मोदी सरकार का डर है। जिसके कारण वो ज्यादा समय अपनी हठों पर टिकने के लिए नाकाबिल हैं। वो चाहते हुए भी भारत के ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठा सकता है।

जो इस बात को कह रहे हैं कि मोदी के चुनाव जीतने पर पाकिस्तान में बम फूटेंगे, वो उन्होंने शायद इमरान खान के पूरे बयान को ध्यान से नहीं सुना है। क्योंकि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान अपने बयान में मोदी पर कई आरोप भी लगाएँ हैं, जो साबित करते हैं कि भले ही पाकिस्तान कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने को लेकर चिंतित है, लेकिन मोदी सरकार की जीत को लेकर फायदा वाली बात कहने का मतलब मोदी को ‘समर्थन’ देना या मोदी का ‘समर्थन’ पाना तो बिलकुल भी नहीं है। लेकिन हाँ, इसे डर जरूर कहा जा सकता है क्योंकि अनेकों शिकायतों और हैरानी होने के बाद भी वो कामना करते हैं कि मोदी की सरकार वापस बने।

तेजस्वी यादव: शेर का बेटा हूँ; सुप्रीम कोर्ट: लालू चोर है; बिहारी: ये लेख पढ़ लो

श्री अमिताभ बच्चन जी की एक फिल्म में कुछ दुष्ट लोगों ने उनके हाथ पर लिख दिया था, “मेरा बाप चोर है।” चोर तो बहुतों के बाप होते हैं, लेकिन बहुत कम के बच्चे ऐसे होते हैं जो बाप के जेल में होने के बावजूद उसके शेर होने का दंभ भरते हैं और पूरी दुनिया को गुंडा बताते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति का नाम है तेजस्वी यादव।

बिहार को गाली बना देने वाले अपराधी का लौंडा आज ट्विटर पर लालटेन टाँग कर लिखता है कि वो शेर का बेटा है, गीदड़ भभकी से नहीं डरता। हालाँकि, इस ट्वीट में अपनी आदत, और लालू-राबड़ी के द्वारा पूरी शिक्षा व्यवस्था की माचिस जला कर डाह देने वाले तेजस्वी ने वर्तनी की कोई गलती नहीं की, जो सराहनीय है। हो सकता है कि उसका ट्विटर कोई ऐसा बिहारी हैंडल कर रहा हो जिसकी पूरी परवरिश उसके बाप के दौर के आतंक के कारण बिहार से बाहर हुई हो।

तेजस्वी का घमंड और ख़ानदानी चोर होने के बावजूद ये कॉन्फ़िडेंस बताता है कि डकैतों और घोटालेबाज़ों की डिक्शनरी में लज्जा शब्द की जगह नहीं होती। वैसे भी लालू परिवार में डिक्शनरी जैसी कोई किताब हो, यह मानने में मुझे संदेह है क्योंकि हो न हो इन लोगों ने बिहार के बच्चों के लिए बनी हर किताब पर लालटेन का किरासन तेल डालकर जाड़े में अलाव जला कर ताप लिया होगा।

इस आदमी की धृष्टता तो देखिए कि बाप जेल में है, सुप्रीम कोर्ट ने आज ही उसे याद दिलाया कि वो अपराधी है, और बेटा गुंडों से लड़ने का ऐलान कर रहा है! अरे भाई, बिहार में गुंडे अब बचे कहाँ, सारे तो तुम्हारी पार्टी के काडर हैं जो पिछले कुछ महीनों से शांत बैठे हैं। तुमने दोबारा सत्ता पाते ही जो अपराध का नंगा नाच शुरू किया था, वो 2015 और 2016 में बिहार को दोबारा दिखने लगा था।

बिहार में पैदा हुआ हूँ, सरकारी स्कूल में पढ़ने की ही क्षमता थी, लेकिन कर्ज लेकर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई की क्योंकि सरकारी स्कूलों में न तो शिक्षक आते थे, न मकान थे। मेहनत कर के, घर से दूर रह कर, परीक्षाएँ पास कर के सैनिक स्कूल तिलैया तक पहुँचा और जीवन में कुछ ठीक कर पाया हूँ। दुर्भाग्य से इसका श्रेय भी तुम्हारे ही बाप को जाता है। हर छुट्टी इस ख़ौफ़ में बीतती थी कि कब कोई अपहरण कर लेगा, भले ही अगर अपहरण हो जाता तो मेरे माँ-बाप मुझे छुड़ाने के लिए पैसे कहाँ से लाते, ये कोई नहीं जानता।

और तुम दंभ भरते हो कि तुम बिहार की महान माटी के लाल हो! तुमने उतनी पढ़ाई नहीं की है तेजस्वी यादव कि तुम्हें महान या मिट्टी, दोनों में से एक का भी सही अर्थ मालूम हो। तुम और तुम्हारे परिवार ने बिहार की मिट्टी पर मूत्र विसर्जन और विष्ठा करने के अलावा कुछ नहीं किया है। तुम्हारे बाप ने बिहार को तबाही का वो दौर दिखाया है कि वहाँ से और नीचे गिरने का सवाल ही नहीं था। और तुम दंभ भरते हो कि बिहार की महान माटी के लाल हो!

बिहार की मिट्टी से दिनकर जैसे लोग पैदा होते हैं, लालू जैसे घोटालेबाज़ डकैतों को इस मिट्टी से मत जोड़ो। थोड़ी शर्म कर लो यार, बाप जेल में है, इतने समय केस चला और बुढ़ापे में ही सही, सजा तो हुई। लेकिन, बात तो वही है कि अपराध को ग्लैमराइज करके नेतागीरी चमकाने वाले लोग तो इस जेल को बैज ऑफ ऑनर मानते हैं।

यही कारण है कि राबड़ी देवी का ट्विटर अकाउंट है, और वो उससे ग़रीबों के मसीहा और सामाजिक न्याय के पुरोधा लालू के लिए साज़िश और पता नहीं क्या-क्या शब्द बताकर खोते जनाधार को पाने की कोशिश कर रही है। वैसे साज़िश तो लालू-राबड़ी ने बहुत अच्छी रची थी कि किसी भी बिहारी को ढंग की शिक्षा ही न मिले, उसे नकारा बनाए रखो, और गरीबी-निचली जाति-आरक्षण की बातें कह कर उसके वोटों का दोहन करते रहो।

बीस साल तुम्हारे परिवार ने बिहार को तबाह किया। तुम में दो पैसा शर्म होती तो किसी गुमनाम देश की नागरिकता लेकर, मुँह छुपाकर जीवन व्यतीत कर रहे होते। लेकिन जिनके घरों में चोरी ही मेन्स्ट्रीम हो, ईमानदारी एक अवांछित अवगुण, तो शर्म काहे आएगी।

स्कूटर पर भैंस ढोने वाले परिवार की जीनियस संतान आखिर पोस्टरों पर लिखे जयघोषों का सहारा नहीं लेगी तो जाएगी कहाँ! साथ ही, मैं फिर से दावे के साथ कह सकता हूँ कि तेजस्वी यादव की औक़ात नहीं है वो दो वाक्य हिन्दी या भोजपुरी भी सही से लिख ले। ये जो लिखवाया भी होगा तो उसी व्यक्ति से जिसका भविष्य लालू-राबड़ी के अंधकार युग में बर्बाद हो रहा होगा, और उसके घरवालों ने उसे बाहर पढ़ने भेजा होगा।

वैसे मुझे नेताओं के निरक्षर होने पर कोई समस्या नहीं है, लेकिन जिसके बाप के कारण पूरा राज्य अशिक्षा के अंधेरे में जीने को मजबूर हो, उसके ऊपर तंज करने का मुझे पैदाईशी हक है क्योंकि उसके परिवार द्वारा लगाए गए हर अवरोध को पार करने के बाद मैं इस स्तर पर पहुँचा हूँ कि दो लाइन लिख और बोल सकूँ। ये अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

ये भी बड़ी अच्छी बात है कि इन्होंने अपनी पार्टी का चिह्न भी लालटेन चुना है। आप सोचिए कि जिसका विजन बल्ब तक जा ही ना रहा हो, वो आखिर राज्य का भविष्य कहाँ तक ले जाएगा। बत्ती, किरासन तेल, काँच और उसका कमज़ोर फ़्रेम राजद की राजनीति और विजन के बारे में बहुत कुछ कहता है। ये ऐसे ग़ज़ब के लोग हैं कि अगर इन्हें पानी का स्रोत चुनाव चिह्न में रखना होता तो ये नदी की जगह नाली या सड़के के गड्ढे में जमा पानी को चुन लेते।

खैर, लालू की देन यही है कि बिहारियों को चाणक्य, पतंजलि, आर्यभट्ट, अशोक, चंद्रगुप्त, राजेन्द्र प्रसाद, दिनकर, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरु गोविंद सिंह, पार्श्वनाथ, नालंदा, पाटलिपुत्र के गौरवशाली इतिहास को भुलाकर बिहारी होने पर शर्म महसूस करने पर मजबूर कर दिया। उस पाटलिपुत्र और बिहार से संबंध बताने पर झिझक होने लगी जो ऐसी महान विभूतियों की जन्म और कर्मस्थली रही। उस पाटलिपुत्र और बिहार से खुद को जोड़ने पर दो बार सोचना पड़ता था जिसने महानता के अलावा और कुछ देखा ही नहीं था।

और तुम, तेजस्वी यादव तुम, बिहार की महान माटी से खुद को जोड़ रहे हो? शर्म नहीं आई ट्वीट करते हुए? बाप के कारनामे याद नहीं आए? उँगलियाँ नहीं काँपी तुम्हारी टाइप करते हुए? तुम और तुम्हारा परिवार कलंक है बिहार के नाम पर। चुल्लू भर पानी लो और नाक डुबाकर मर जाओ। राजनीति ही है कि तुम्हारे जैसे लोग पब्लिक में आज भी खड़े हो लेते हैं, ट्वीट करते हैं वरना अगर हमारी न्याय व्यवस्था ने थोड़ी और कड़ाई दिखाई होती, सरकारों ने तुम्हारे परिवार के खिलाफ केस को द्रुत गति से आगे किया होता, तो तुम अठारह साल के होते ही जेल में होते, सपरिवार।

इसलिए, लोगों को ठगना बंद करो। नारेबाज़ी और दूसरों से पोस्टर बनवा कर, खुद के महान होने का घमंड मत करो, अपने वृद्ध अपराधी पिता को देखो जो जेल में सजा काट रहा है। जो बोया है, वो काटना पड़ेगा। समय का पहिया घूमता रहता है, भले ही तुम्हारे परिवार के लोग उस पहिए पर किरासन डालकर लालटेन से आग लगाने की बहुत कोशिश कर चुके। समय रुकता नहीं, समय बदलता है।

मैं बिहार से हूँ। किसान का बेटा हूँ। तुम्हारे जैसे लौंडों की दो कौड़ी की राजनीति और बयानबाज़ी आए दिन देखता रहता हूँ जिनकी एक मात्र उपलब्धि किसी का बेटा या बेटी होना है। तुम लालू के बेटे हो इसलिए तुम्हें पार्टी और पद मिला है। वरना, सड़क पर भीख माँगने जाओगे, तो तुम में वो क़ाबिलियत भी नहीं है कि कोई कटोरे में सिक्का डाल दे।

अंत में, एक बात और, अगर बिहार में सच में गुंडे बचे होते, और उनमें थोड़ा भी ज़मीर होता तो तुम्हें सड़क पर पटक कर, तुम्हारी बाँह पर वही गोद देते, जो अमिताभ के हाथ पर किसी ने गोदा था, “मेरा बाप चोर है।”

नोट: बाप शब्द के प्रयोग से जिनको आपत्ति है वो नब्बे के दशक में जन्मे किसी बिहारी से चर्चा कर लें।

ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव हैं बलात्कारी: इस्लामिक सेंटर के प्रवक्ता ने हिंदू समुदाय के ख़िलाफ़ उगला ज़हर

जहाँ एक तरफ कनाडा में चुने हुए नेतागण पीछे की तरफ झुकते हुए अपनी ‘इस्लामोफोबिया विरोधी’ सोच को प्रस्तुत करने में ज़ोर-शोर से लगे हुए थे, टोरंटो में स्थित इस्लामिक सेंटर ‘हिन्दफोबिया’ के आरोपों का सामना कर रहा था। ये आरोप कनाडा में रहने वाले उन हिन्दुओं की तरफ से लगाए गए जो आमतौर पर राजनीति में रूचि नहीं रखते। उनका गुस्सा नूर कल्चरल सेंटर पर फूट रहा था, जिसके द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम का शीर्षक कुछ इस प्रकार था: “भारत में मुस्लिमों और दलितों का उत्पीड़न”। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब कुछ ही दिनों बाद भारत में आम चुनाव होने हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे ज़ोर-शोर से चुनाव में उतर चुके हैं।

अगर इस कार्यक्रम में भारतीय राजनीतिक विचारधारा के सभी पक्षों के वक्ताओं को बुलाया जाता तो शायद लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का शायद ही कोई आधार होता लेकिन इसमें जो भी वक्ता शामिल हुए थे, पीएम मोदी के प्रति उनका द्वेषभाव किसी से छिपा नहीं था। इस विवाद ने तब विकराल रूप धारण कर लिया जब एक के बाद एक कई इमेल्स लीक हुए। ये सारे ईमेल नूर सेंटर के खदीजा कांजी द्वारा टोरंटो के इंटर-फेथ परिषद को भेजे गए थे।

ईमेल में नाइजीरियाई बोको हरम द्वारा लड़कियों के अपहरण और बलात्कार करने की प्रथा की चर्चा करते हुए कांजी ने अरब आक्रमणकारी मोहम्मद बिन कासिम द्वारा भारत पर इस्लामी हमले का बचाव करता दिखा। वही कासिम, जिसने हिंदू महिलाओं का बलात्कार किया और हज़ारों लोगों को अरब में दास के रूप में बेच दिया। कांजी ने इन लीक हुए इमेल्स में दावा किया कि यह “उस समय के मानकों के अनुरूप था।” अपने तर्क को साबित करने के लिए कांजी ने लिखा:

“सभ्यतागत मान्यताओं में बहुत से ऐसे बड़े लोग हैं जो हिंसा या अपराध में लिप्त हैं, जैसे- [हिंदू] देवताओं से ब्रह्मा, शिव और विष्णु (जिन्होंने अनसूया का बलात्कार किया था) और कई अन्य लोगों के अलावा क्रिस्टोफर कोलंबस, रिचर्ड लायनहार्ट।”

मैंने जब मिसेज कांजी से उनके इस घृणित बयान के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि उन्होंने चर्चाओं के सन्दर्भ में हिन्दू देवताओं का उदाहरण दिया था। एक अलग ईमेल भेजकर उन्होंने मुझे अपने तर्कों को समझाते हुए लिखा:

“हिन्दू धर्म के बारे में इस तरह से बात करना ठीक नहीं है। जैसे हिन्दुओं में आप एक दो ऐतिहासिक या धार्मिक कहानी या किदार उठाकर पूरे समाज को नहीं लपेट सकते, ऐसे ही मुस्लिमों को लेकर भी किया जाना चाहिए।”

सोशल मीडिया पर हिन्दू हैरान थे। रागिनी शर्मा (यॉर्क विश्वविद्यालय से पीएचडी) नूर सेंटर इवेंट के खिलाफ अभियान का नेतृत्व कर रही थीं। इसे हिंदूफोबिक के रूप में लेबल करते हुए शर्मा ने मुझे बताया:

“इस ईमेल में भारत, हिंदुओं और हिन्दू धर्म के प्रति खदिजा ने जो घृणा व्यक्त की है, उससे मैं काफ़ी स्तब्ध और आहात हूँ। अगर घृणा से भरे उनके इस बयान की छानबीन करें तो पता चलता है कि यह एक गहरे पूर्वाग्रह से ग्रस्त है, यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा:

‘बलात्कारियों के संदर्भ में ब्रह्मा,शिव और विष्णु का उल्लेख करना हिंदुओं को गहरा दु:ख देना है। कंजी ने दर्शाया है कि उन्होंने इस्लामी चश्मे को पहनकर हिंदु धर्म की पौराणिक कथाओं को समझने के दौरान हिन्दुत्व को पूर्ण रूप से नकारा है’।

शर्मा ने माँग की है कि नूर केंद्र को टोरंटो में रह रहे भारतीयों और हिंदू समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम इस पर ग़ौर करेंगे, कनाडा जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में नफ़रत फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं हैं।

इसके अलावा विध्या धर जिन्होंने सन् 1990 में अपने बचपन में कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार देखा है। उन्होंने भी इस वाकये पर गहरा दु:ख जताया है। बतौर हिंदू, मुझे यह पढ़कर बहुत हैरानी हुई कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव ब्रह्मंड को संचालित करने वाली त्रिदेव की शक्तियाँ हैं। हमारे भगवान को क्रिस्टोफर कोलंबस से तुलना करना लेखक की हिन्दुओं के प्रति घृणा दिखाता है।

आयोजन में बातचीत के दौरान, मुस्लिम प्रवक्ता सनोबर उमर ने ‘हिंदू अधिकारों’ पर आरोप लगाया कि वह अमेरिकी श्वेत अतिवादियों के समकक्ष हैं। इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी पत्नी को छोड़ने के लिए उन्हें जेल भेजने की माँग की।

इस्लामिक केंद्र के बाहर, कनाडा में रह रहे कुछ हिंदु अपने हाथ में हिंदूफोबिया और भारत उन्मादी गतिविधियों को कनाडा से खत्म करने के लिए तख्तियाँ लिए खड़े हैं।

खास बात यह है कि इस आयोजन पर वहाँ के किसी अखबार ने खबर छापने की कोशिश नहीं कि कहीं इस्लामियों को किसी तरह का दु:ख न पहुँच जाए। जिससे यह सवाल उठता है कि जब भारत की साख और लोकतंत्र में निहित तत्वों को इस्लामवादियों द्वारा रौंदा जा रहा था तो भारतीय राजनयिक वहाँ बैठकर क्या कर रहे हैं।

फैक्ट चेक: ‘मोदी को वोट नहीं देंगी मुस्लिम औरतें’ – ‘आज तक’ का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया

आज तक ग्रुप का यूट्यूब चैनल ‘UP तक’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में खुलेआम फेक न्यूज़ फैलाता पकड़ा गया है। उत्तर प्रदेश के देवबंद में मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों के इस इंटरव्यू का शीर्षक है, ‘मोदी ने काम तो बहुत किया पर वोट नहीं दे सकते!, क्यों ऐसा बोल रहीं हैं देवबंद की मुस्लिम महिलाएँ?: UP Tak

वीडियो का यह शीर्षक वीडियो की सामग्री के लिहाज से पूरी तरह झूठ है। वीडियो के अन्दर मुस्लिम महिलाएँ न केवल मोदी के द्वारा कराए गए विकास कार्यों की तारीफ़ करतीं हैं और कई योजनाओं का लाभार्थी खुद होने की बात स्वीकारतीं हैं, बल्कि उनमें से एक महिला साफ-साफ कहतीं हैं कि अगर मोदी से उन्हें फायदा हो रहा है तो बिलकुल उन्हें ही वोट देंगी। उनके खुद के शब्दों में, ‘देखो… हम तो बाहर निकलते नहीं हैं… हमें कोई मालूम नहीं है… जहाँ जैसा कोई कहेगा कर देंगे…  भाई, जहाँ से हमें कोई फायदा होगा (परिप्रेक्ष्य में यह विकास कार्यों के फायदे की ओर इंगित करता है), वहाँ अपना लगा देंगे (निशान, मत चिह्न), (अस्पष्ट) भेज देंगे।’ इस कथन को वीडियो में 1:51 के आस-पास से सुना जा सकता है।

चार से की बात, एक ने भी नहीं की मोदी की बुराई  

यूपी तक के वीडियो में चार मुस्लिम समुदाय की महिलाओं से बात की गई है, जिनमें से तीन से मोदी को वोट देने को लेकर सवाल ही नहीं पूछा गया है। एक से सवाल पूछा गया तो उन्होंने उपरोक्त उत्तर दिया। बाकी तीनों का भी मोदी को लेकर नजरिया सकारात्मक ही रहा। यही नहीं, एक मुस्लिम महिला ने तो मोदी ही नहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी बात अपनी तरफ से जोड़ कर उनकी तारीफ़ कर दी।

अब जबकि तीन महिलाओं से पूछा ही नहीं कि आप मोदी को वोट देंगी या नहीं, वे मोदी के काम से खुश हैं, और जिस एक से पूछा उसने भी मोदी को वोट देने से इंकार नहीं किया, तो किस आधार पर आज तक ग्रुप के इस चैनल ने लिख दिया कि विकास कार्य होने के बावजूद देवबंद की मुस्लिम महिलाएँ मोदी को वोट नहीं देंगी?  

फेक न्यूज़ फ़ैलाने के खुद में गंभीर कृत्य के साथ ही जगह का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। देवबंद का इस्लामी जगत में बहुत प्रभाव है। यहाँ के रुढ़िवादी-से-रुढ़िवादी फतवे तक अंतरराष्ट्रीय धमक रखते हैं। ऐसे में यदि यह सन्देश देवबंद के मुस्लिमों ‘की ओर से’ प्रसारित हो कि मोदी चाहे जो विकास कर ले, उसे वोट नहीं देना है तो देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं, जहाँ का मुस्लिम वोट नहीं प्रभावित होगा। और वीडियो देख कर यह साफ़ पता चलता है कि यह सन्देश फर्जी होगा।

क्या यह फ़ेक न्यूज़ फ़ैलाने के साथ-साथ धारा 171[G] के अंतर्गत चुनावों को अवैध रूप से (चुनावों के सम्बन्ध में झूठ बोलकर) प्रभावित करने का अपराध नहीं है ?

कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ ने चुनावी हलफ़नामे में ₹600 करोड़ से अधिक की संपत्ति की घोषणा की

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ ने अपने चुनावी हलफ़नामे में ₹600 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है। नकुल मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार हैं।

उनके नामांकन पत्र के अनुसार, नकुल के पास ₹615,93,17,741 की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास कुल ₹2,30,31,907 हैं। इसके अलावा, नकुल के पास लगभग ₹41.77 करोड़ (मौजूदा बाजार मूल्य) से अधिक की अचल संपत्ति है।

हलफ़नामे में, नकुल ने पिछले 5 वित्तीय वर्षों के दौरान दर्शाए गए अपने आयकर रिटर्न में उन्होंने अपनी वार्षिक आय घोषित की है। 2013-14 में, उनकी आय ₹98 लाख से बढ़कर अगले वित्तीय वर्ष के अंत तक ₹3.37 करोड़ हो गई। वित्तीय वर्ष 2016-17 में सबसे अधिक वृद्धि हुई, जहाँ उनकी आय ₹1.50 करोड़ से ₹13.34 करोड़ हो गई। नकुल की आय अगले वर्ष (2018) ₹2.76 करोड़ गिर गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब नकुल ने आय में वृद्धि की सूचना दी थी उसी वित्तीय वर्ष में विमुद्रीकरण हुआ था।

नकुल की पत्नी, प्रिया नाथ ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में अपने पति की आय में भारी उछाल की सूचना दी। 2018 में उनके पिछले साल की आय जो कि ₹22.63 लाख थी वो बढ़कर ₹4 करोड़ से अधिक हो गई।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के पास TV-18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड के ₹3.52 लाख के शेयर हैं जिसके द्वारा CNBC-TV-18, CNBC आवाज, CNBC-टीवी 18 प्राइम HD, CNN-न्यूज 18, न्यूज 18 इंडिया और IBN लोकमत जैसे विभिन्न समाचार चैनल चलाए जाते हैं। दूसरी ओर, उनकी पत्नी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश किया है।

हाल के दिनों में मध्य प्रदेश में आयकर विभाग द्वारा 50 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान नकुल के पिता, कमलनाथ की काफ़ी किरकिरी हो चुकी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी, रतुल पुरी (कमलनाथ का भतीजा), अमीरा समूह और मोजर बेयर के स्थानों पर तलाशी ली गई। भोपाल, इंदौर, गोवा और दिल्ली में 35 स्थानों पर भी तलाशी ली गई।

आयकर विभाग ने सोमवार को कहा कि उसने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके अन्य करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान लगभग ₹281 करोड़ की बेहिसाब नकदी के रैकेट का पता लगाया।

इजराइल में Right Wing की सरकार, रिकॉर्ड 5वीं बार PM बनेंगे मोदी के ‘बीबी’

इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली गठबंधन की जीत हुई है। उनकी दक्षिणपंथी ‘Likud Party’ को 35 सीटें मिली हैं। हालाँकि, उनके प्रतिद्वंदी बेनी गांट्ज़ की पार्टी को भी इतनी ही सीटें मिली है लेकिन अन्य दक्षिणपंथी पार्टियों के सहयोग से 69 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर से अपने ‘शक्तिशाली’ देश का नेतृत्व करने को तैयार हैं। बेनी इजराइली सेना के प्रमुख रहे हैं। 120 सदस्यीय ‘Knesset में’ बहुमत के लिए 61 सीटों की ज़रूरत होती है। नेतन्याहू की पार्टी को 2014 में हुए चुनाव से इस बार 5 सीटें अधिक मिली है। सभी दक्षिणपथी पार्टियों के गठबंधन को मिला दें तो उनकी सीटों की संख्या 65 पहुँच जाती है।

इसके साथ ही इस साल के अंत तक नेतन्याहू इजराइल के सबसे लम्बे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री हो जाएँगे। वो इजराइल के संस्थापक पितृपुरुष डेविड बेन-गुरियन को पीछे छोड़ देंगे। नेतन्याहू पर हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे लेकिन उनकी जीत से पता चलता है कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता कम नहीं हुई है। नेतन्याहू ने जीत की ख़ुशी में समर्थकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भले ही ये दक्षिणपंथी सरकार है लेकिन वो सभी के प्रधानमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि वो राइट, लेफ्ट, Jews, Non-Jews- इन सभी के पीएम होंगे। उन्होंने पिछले चुनाव से भी ज्यादा सीटें देने के लिए इजराइल की जनता का धन्यवाद किया।

शुरुआती एग्जिट पोल्स में सेंटर-लेफ्ट बेनी की जीत की सम्भावना दिख रही थी लेकिन चुनाव परिणाम आने पर पता चला की ये काँटे की टक्कर थी। नेतन्याहू को दक्षिणपंथी, राष्ट्रवादी व धार्मिक पार्टियों का समर्थन मिला है। नेतन्याहू को प्यार से वहाँ की जनता उनके निकनेम ‘बीबी’ से पुकारती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें ट्विटर पर बीबी कहकर ही सम्बोधित करते हैं। जब पीएम मोदी 2017 में इजराइल गए थे तो पीएम नेतन्याहू ने कहा था कि उन्होंने इसके लिए 70 वर्ष का बहुत लम्बा इंतजार किया है। बता दें कि मोदी इजराइल का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।

नेतन्याहू ने सुरक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था और ये जनता के बीच प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी लेफ्टिनेंट जनरल बेनी गांट्ज़ ने नवंबर ब्लू वाइट पार्टी का गठन किया था। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा था कि इजराइल रास्ता भटक चुका है और वो देश में फिर से एकता स्थापित करेंगे। नेतन्याहू ने अपने चुनावी प्रतिद्वंद्वियों को ‘कमज़ोर लेफ्टिस्ट्स’ बताया था। उनके ख़िलाफ़ तीन पूर्व सेना प्रमुखों का गुट था। उन्होंने विपक्ष और मीडिया द्वारा अपने ख़िलाफ़ लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों को ‘Witch Hunt’ बताया था। जनता ने ‘किंग बीबी’ के नारे लगाकर उनकी जीत का उत्सव मनाया।

बता दें कि अभी आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में भारत और इजराइल के सम्बन्ध काफ़ी अच्छे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार बढ़कर क़रीब 9 बिलियन डॉलर हो गया है। मिडिल ईस्ट में भी भारत अपना अहम किरदार निभाने के लिए तैयार है और इसके लिए इजराइल से उनके अच्छे संबंधों का फ़ायदा मिल सकता है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि इजराइल और भारत के अच्छे संबंधों को फिलीस्तीन अपने लिए फ़ायदे के तौर पर देखता है।

EC ने PM मोदी की बायोपिक पर लगाई रोक, आम चुनाव ख़त्म होने तक नहीं रिलीज होगी फ़िल्म

चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक की रिलीज पर रोक लगा दी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित फ़िल्म 12 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी। इसमें अभिनेता विवेक ओबेरॉय पीएम मोदी के किरदार में नज़र आने वाले हैं। इसमें नरेंद्र मोदी के बचपन से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के सफ़र को दर्शाया गया है। फ़िल्म के ट्रेलर को वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट यूट्यूब पर क़रीब ढाई करोड़ लोगों द्वारा देखा जा चुका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर सेंसर बोर्ड फ़िल्म को पास कर देती है तो इसके रिलीज में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनज़र आयोग ने फ़िल्म की रिलीज रोक दी है।

सुरेश ओबेरॉय द्वारा प्रोड्यूस की गई इस फ़िल्म का फर्स्ट लुक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा जारी किया गया था। विपक्षी दल लगातार कहते रहे हैं कि ये फ़िल्म चुनाव को प्रभावित करने के लिए रिलीज की जा रही है लेकिन विवेक ओबेरॉय ने विपक्षी दलों के इन आरोपों को खारिज कर दिया था। आयोग ने कहा कि जबतक आम चुनाव ख़त्म नहीं हो जाते, तबतक ये फ़िल्म रिलीज नहीं होगी।

अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने एक साक्षात्कार में इस बात को स्वीकार किया था कि वो पीएम नरेंद्र मोदी पर विश्वास करते हैं और आज के समय में देश को उनके जैसे नेता की ही आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि मोदी के चाय वाले बनने से लेकर एक विश्व नेता बनने तक की कहानी हर दूसरे वैश्विक नेता के लिए प्रेरणादायक है। फ़िल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की अवधि 2 घंटे 10 मिनट और 53 सेकेंड है। मंगलवार (अप्रैल 9, 2019) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दी थी। फिल्म को सुप्रीम कोर्ट और सेंसर बोर्ड दोनों ही संस्थाओं से हरी झंडी मिल गई थी।

कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘पीएम नरेंद्र’ मोदी को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘फ्लॉप आदमी’ के जीवन पर बनी फिल्म में ‘फ्लॉप हीरो’ ने काम किया है। कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि फिल्म ‘जीरो’ साबित होने वाली है।