सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कॉन्ग्रेस विधायक और कर्नाटक के आवास मंत्री एमटीबी नागराज जमकर डांस कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो प्रचार के लिए होसकोट में आयोजित की गई एक चुनावी रैली का है।
लोकसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस विधायक एमटीबी नागराज अपने समर्थकों के साथ होसकोट में रैली निकाल रहे थे। सड़क पर लोग बॉलीवुड के गाने बजा कर नाच रहे थे, लेकिन इस बीच किसी ने गलती से नागिन धुन बजा दी और सभी लोग नाग स्टाइल में डांस करने लगे।
ट्विटर पर कॉन्ग्रेस विधायक नागराज का ये नागिन डांस देखकर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें ट्रॉल करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने रिप्लाई करते हुए लिखा कि अब बस यही देखना बाकी रह गया था। 23 मई तक खुशी मना लो। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘‘नाग-नागिन अपने मानव अवतार में।’’
एक यूज़र ने लिखा है कि क्या नागिन डांस कर के सोनिया गाँधी को प्रसन्न कर रहे हो? इस दौरान किसी ने पूछा कि जहर कब उगलेंगे तो किसी ने नागमणि की ही डिमांड कर दी।
वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी ब्लैक होल की तस्वीरें खींचने में सफलता हासिल की है। ब्रह्माण्ड के सबसे कौतूहल के विषयों में से एक को समझने की राह में यह उपलब्धि मील का पत्थर है।
उक्त ब्लैक होल Messier 87 आकाशगंगा में स्थित है, जो हमसे 5.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। तस्वीरों में आकाशीय ‘धूल’ और गैसों का एक चमकता वृत्त इस विशालकाय ब्लैक होल के चारों ओर है, और तस्वीरें असल में इसी की हैं। ब्लैक होल की खुद की तस्वीरें ले पाना असंभव है क्योंकि इसके अन्दर इतना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल होता है कि प्रकाश की किरणें भी इसके अन्दर फंस कर रह जातीं हैं।
यह तस्वीरें ब्लैक होल के आसपास की उस आखिरी सीमा की हैं जिसे दूर से भी देखा जा सकता है। इसे Event Horizon कहते हैं, और यह एक दहलीज जैसा होता है, जिसे पार करते ही भौतिकी के सभी नियम असीम गुरुत्व बल के चलते टूट जाते हैं।
EHT दूरबीन का कारनामा, 200 वैज्ञानिक लगे
हमसे करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस ब्लैक होल की यह तस्वीरें खींचना भी 8 दूरबीनों के एक विशेष तंत्र (network) से ही संभव हो पाया है। इस दूरबीन-तंत्र का नाम Event Horizon Telescope (EHT) है, और इसमें शामिल रेडियो दूरबीनें अंटार्टिका से लेकर स्पेन और चिली तक लगाईं गईं थीं, और इस कार्य में 200 वैज्ञानिकों का योगदान रहा।
आनंद रंगनाथन का भारतीय मीडिया को सन्देश
वैज्ञानिक और उपन्यासकार आनंद रंगनाथन ने इस ब्लैक होल के बारे में कवरेज करने के लिए भारतीय मीडिया से अपील करते हुए ट्वीट किया:
Two minutes to one of the most momentous scientific events in recent memory.
Dear Indian Media. Junk everything you have planned for the next couple of hours and devote your time and effort on it. #ETHBlackHole
राज्यसभा टीवी (RSTV) ने बौद्धिक संपदा अधिकारों और कॉपीराइट के उल्लंघन के लिए वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट, द वायर को कानूनी नोटिस थमाया है। कानूनी नोटिस में, RSTV ने राज्यसभा टीवी की कॉपीराइट सामग्री के अवैध और गैरकानूनी तरीके से चोरी करने या चोरी की सामग्री प्राप्त करने और उनका उपयोग करने का आरोप लगाया है।
नोटिस में द वायर को 2 सप्ताह के भीतर आवश्यक विवरण और दस्तावेज प्रदान करने के लिए कहा है ताकि यह साबित हो सके कि उन्होंने चोरी नहीं की है या RSTV की चोरी की संपत्ति उनके कब्जे में नहीं है और उन्होंने RSTV के अनन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया है या उन्होंने RSTV के कॉपीराइट अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया है। कानूनी नोटिस में कहा गया है कि यदि द वायर ऐसा करने में विफल होता है, तो वे नागरिक और आपराधिक परिणामों के लिए ज़िम्मेदार होंगे।
RSTV द्वारा The Wire को भेजा गया लीगल नोटिस
17 सितंबर 2018 को, द वायर ने एक स्टोरी की थी, “RSTV ने भारत छोड़ो आंदोलन में वाजपेयी की भूमिका के बारे में सवाल किया था।” नोटिस में कहा गया है कि कहानी में, उन्होंने एक वीडियो क्लिप का इस्तेमाल किया था, जहाँ एक एंकर अटल बिहारी वाजपेयी और एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार के साथ चर्चा कर रहा था।
नोटिस में कहा गया है कि द वायर ने अपनी स्टोरी में जिस वीडियो क्लिप का इस्तेमाल किया है, वह राज्यसभा टीवी की विशिष्ट संपत्ति है और पोर्टल द्वारा इस्तेमाल की गई क्लिप में राज्यसभा टीवी का लोगो भी नहीं है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि द वायर ने इस क्लिप के इस्तेमाल के लिए RSTV से कोई अनुमति नहीं ली थी।
दिलचस्प बात यह है कि कानूनी नोटिस में सबूत के तौर पर यह मामला महज कॉपीराइट के उल्लंघन से ही जुड़ा नहीं है क्योंकि कानूनी नोटिस द वायर के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाया गया है।
राज्यसभा टीवी ने आरोप लगाया है कि चूँकि द वायर द्वारा प्रयुक्त क्लिप में RSTV का कोई लोगो नहीं था, इसलिए यह मूल क्लिप है जो राज्यसभा टीवी के पास है। पहली नज़र में, यह प्रतीत होता है कि द वायर ने न केवल प्राधिकरण के बिना परमिशन के क्लिप का उपयोग किया है, बल्कि “गैरकानूनी तरीके से RSTV की संपत्ति को अपने कब्जे में दिखाने की कोशिश की है।” वीडियो में RSTV का कोई लोगो भी नहीं है, यह भी गंभीर मामला है।
यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कॉन्ग्रेस सरकार के कार्यकाल में, राज्यसभा टीवी, जो पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के नियंत्रण में था, प्रोपेगेंडा और कॉन्ग्रेसी एजेंडा फैलाने और वफादारों को बहुत कुछ नवाजने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
हामिद अंसारी के दौरान करदाताओं की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा द वायर के संस्थापक संपादक एम के वेणु और सिद्धार्थ वरदराजन, दोनों को 15,000 रुपए प्रति उपस्थिति की दर से लुटाया जा रहा था, कुल 33 लाख रुपए एम के वेणु को और 14.70 लाख रुपए वरदराजन को पिछले कुछ वर्षों में दिए गए।
वरदराजन, जिनकी शो की मेजबानी अप्रैल 2017 से बंद कर दी गई थी, जबकि वेणु को कहा गया था कि वे उन शो की मेजबानी न करें जिन्हें वह अगस्त तक होस्ट कर रहे थे। अगस्त के बाद ही द वायर द्वारा हिट-जॉब्स बढ़ गए हैं।
2018 में यह बताया गया कि राज्यसभा सचिवालय ने राज्यसभा टेलीविजन (RSTV) के कामकाज में अनियमितताओं की जाँच करने का निर्णय लिया है। आरएस सचिवालय ने अपनी स्थापना के बाद से ही आरोपों पर गौर करने के लिए एक-व्यक्ति जाँच समिति का गठन किया है, विशेष रूप से “राग देश” नामक फिल्म के निर्माण पर होने वाला खर्च की समीक्षा के लिए भी, जिसमें 13 करोड़ रुपए की लागत आई थी।
यह बताया गया है कि RSTV ने अपनी स्थापना के बाद से 2015 तक चैनल को संचालित करने के लिए करदाताओं के धन की 1,700 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च कर चुका है। बता दें कि RSTV के लिए बजट किसी भी सरकारी चैनल से बड़ा है और इससे कोई आय भी नहीं होती है, क्योंकि चैनल ने विज्ञापन से कोई लाभ नहीं कमाया है।
नोट- द वायर द्वारा कॉन्ग्रेस प्रोपेगेंडा और हिट जॉब्स की पूरी लिस्ट यहाँ है।
आम चुनाव के मतदान की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस की मुश्किलें हर दिन बढ़ती हुई ही नजर आ रही है। इस बार पार्टी के युवा चेहरे अल्पेश ठाकोर ने हाथ का साथ छोड़ दिया है। गुजरात के विधायक अल्पेश ठाकुर और 2 अन्य विधायकों ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफ़ा देने वाले अल्पेश के अलावा, धवल सिंह ठाकोर और भरतजी ठाकोर जैसे नाम शामिल हैं। अल्पेश पाटन जिले की राधानपुर सीट से विधायक हैं।
ठाकोर समेत तीनों विधायक 2017 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनकर आए थे। बीते कुछ समय से लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर अल्पेश ठाकोर की कॉन्ग्रेस नेतृत्व से तनातनी चल रही थी। कई दिनों से वो कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने का भी इशारा कर रहे थे। ऐसा माना जा रहा था कि वो जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं लेकीन अल्पेश ने भाजपा ज्वाइन करने से इंकार कर दिया है। अल्पेश ने कहा है कि वो सभी MLA के तौर पर 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
मनपसंद टिकट नहीं मिलना है वजह
बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में अल्पेश और उनका संगठन ठाकोर सेना कुछ सीटों पर अपनी पसंद के प्रत्याशी चाहते थे, जिस पर कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। अल्पेश द्वारा खुद के लिए पाटन लोकसभा सीट से टिकट माँगने की बात भी सामने आई थी। कॉन्ग्रेस ने यहाँ से पूर्व सांसद जगदीश ठाकोर को कैंडिडेट बनाया है। वहीं, मेहसाणा और बनासकांठा सीट पर भी अल्पेश के पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट नहीं मिल पाया।
ठाकोर और OBC जातियों पर है पकड़
अल्पेश ठाकोर गुजरात के 2017 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक तौर पर उभर कर सामने आए थे। उन्होंने कॉन्ग्रेस के लिए जमकर प्रचार किया था। उनका ठाकोर और कई OBC जातियों में प्रभाव माना जाता है। बीते काफी समय से उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं।
ठाकोर क्षत्रिय सेना ने कहा था अल्पेश से पार्टी छोड़ने को
अल्पेश ठाकोर के ही बनाए संगठन ने ठाकोर क्षत्रिय सेना ने मंगलवार देर रात बैठक के बाद अल्पेश को कॉन्ग्रेस से नाता तोड़ने को कहा था। सेना ने अल्पेश ठाकोर से 24 घंटे के भीतर कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने या फिर ठाकोर सेना छोड़ने को कहा था और अल्पेश ने कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़ कर अपना निर्णय दे दिया।
लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में सियासी घमासान तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। इसमें राजनीतिक पार्टियाँ तो अपना दम-खम लगा ही रही हैं, साथ ही सिनेमा जगत भी इससे पीछे नहीं रहा। कुछ दिनों पहले, 600 से अधिक थिएटर कलाकारों और मशहूर हस्तियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर लोगों को आगामी लोकसभा चुनावों में सत्ता से बाहर कट्टरता, घृणा और उदासीनता को वोट करने के लिए कहा था। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दावा किया कि संविधान और विभिन्न संस्थान निरंतर ख़तरे में हैं और वर्तमान स्थिति के तहत उनका दम घुट गया है।
बता दें कि इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले कुछ प्रमुख व्यक्तित्वों में अमोल पालेकर, अनुराग कश्यप, डॉली ठाकोर, लिलेट दुबे, नसीरुद्दीन शाह, अभिषेक मजुमदार, अनमोल हकर, नवतेज जोहर, एमके रैना, महेश दत्तानी, कोंकणा सेन शर्मा, रथ पाठक पाठक और संजना कपूर जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी एक ऐसा वीडियो शेयर किया गया जिसमें फ़िल्मी हस्तियों ने जनता से वोट डालने की अपील की गई थी। कहने को तो इस वीडियो में फ़िल्मी हस्तियों ने जनता से वोट डालने की अपील की थी, लेकिन बढ़ती असहिष्णुता, फासीवाद और घृणा जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर वो मोदी विरोधी ज़हर उगलने की गुप्त चाल भी चल रहे थे।
Bollywood has one message to the people of India: Vote karo, magar soch samajh ke. pic.twitter.com/ibnK78hArf
एक तरफ, फ़िल्म जगत में ऐसे लोग हैं जो नफ़रत फैलाकर अप्रत्यक्ष रूप से कॉन्ग्रेस का प्रचार कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ इनका जवाब देने के लिए रणवीर शौरी जैसे अभिनेता भी हैं जो भ्रमित कर देने वाले वीडियो का खुलकर विरोध करते हैं। आज उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस के 60 साल शासन पर कटाक्ष किया और जनता से सोच-समझकर वोट डालने की अपील की।
My fellow Indians, in the fine tradition of entertainers talking politics, here is my pre #Elections2019 special. Watch and share. Jai Hind. pic.twitter.com/VXyglWAJZb
इससे पहले भी एक ख़बर फैलाई गई थी कि फ़िल्म उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक हस्तियों द्वारा मोदी सरकार के ख़िलाफ़ वोट देने संबंधी एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए गए थे। संयुक्त बयान की यह लिस्ट आर्टिस्ट यूनाइटेड इंडिया नाम की वेबसाइट पर जारी की गई थी। इस फेक लिस्ट का पता तब चला जब अभिनेत्री और फ़िल्म निर्माता आरती पटेल ने इस ऐसे किसी भी प्रकार के बयान पर हस्ताक्षर न किए जाने की बात का ख़ुलासा किया। बता दें कि आरती पटेल का नाम लिस्ट में दूसरे नंबर पर दर्ज था। पूरा मामला पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
कहना होगा कि जनता को भरमाने का काम चारों तरफ से जारी है। कोई फ़िल्मी डॉयलाग का इस्तेमाल करता है, तो कोई चुनावी जुमलेबाजी करता दिखता है। कोई पैसा बाँटने के नाम पर ठगने का प्रयास करता है, तो कोई पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधकर उन पर व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी करता है। अपनी हद पार करते हुए कॉन्ग्रेस अपने चेले-चपाटों के ज़रिए ऐसा कोई पैंतरा बाक़ी नहीं छोड़ती जिससे पीएम मोदी को घेरा न जा सके। विरोध की इस बयार में फ़िल्म जगत भी अछूता नहीं रहा।
जो कॉन्ग्रेस अपनी सबसे लंबी पारी में देश की जड़ें केवल खोखली करती आई, वो जब NYAY की बात करती है, तो आश्चर्य होता है। अच्छा होता अगर मोदी सरकार का विरोध करते इन नामी चेहरों ने कॉन्ग्रेस का प्रचार करने के बजाए देश को एकजुट करने की बात कही होती, असहिष्णुता की जगह भारत की जनता को एकसूत्र में बाँधने की कोशिश की होती। कॉन्ग्रेस की परिवारवाद की छवि से जनता को अवगत कराया होता तो बेहतर होता।
आज इन हस्तियों को अपने ही देश में ऐसा दुष्प्रचार करते देखना बेहद दु:खद एहसास है। काश! कि ये नामी चेहरे विकास के नाम पर अगर कुछ बात कर लेते तो थोड़ा देशहित का काम ही हो जाता और जनता को अपने मतदान का सही इस्तेमाल करने में कुछ मदद मिल जाती। जनता को मतदान करने की नसीहत देने वालों से अगर पूछा जाए कि जिस कॉन्ग्रेस का वो छिपकर समर्थन कर रहे हैं उसके शासनकाल में कौन-से चार चाँद लग गए थे, जो मोदी सरकार में नहीं लगे। पिछले पाँच सालों में देश का ऐसा कौन-सा अहित हो गया जिससे तरक्की की राह में रोड़े पैदा हो गए। जबकि यह जगज़ाहिर है कि देश ने बीते पाँच वर्षों में तरक्की की नई बुलंदियों को छुआ है। अब यह बात अलग है कि कॉन्ग्रेस के इन चहेतों को गाँधी-वाड्रा परिवार के घोटाले नहीं दिखाई देते।
60 सालों तक राज करने वाली पार्टी की मजबूरी है कि वो सत्ता से दूर है, और यह दूरी रात-दिन बढ़ती जा रही है। सत्ता पाने की यही लालसा उससे नए-नए हथकंडे आजमाने का दुष्चक्र चलवाती है। लेकिन जब बड़े और नामी चेहरे भी इस धूर्तता का हिस्सा बनने लगते हैं तो अफ़सोस होता है कि आख़िर कैसे देश को इन चालबाज़ो से बचाया जाए।
जिस महाराष्ट्र में शरद पवार की तूती बोलती थी, कल वहाँ वे अधभरे मैदानों में रैलियाँ संबोधित कर रहे थे। उल्हासनगर में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार मंगलवार को एक चुनावी रैली को आधे ही भरे मैदान में संबोधित करते पाए गए।
पहुँचे थे 3 घन्टे देरी से, जनता ने कहा ‘टाटा’
दरअसल शरद पवार को रैली के लिए शाम 6 बजे पहुँचना था, और लोग बड़ी संख्या में उन्हें सुनने के लिए एकत्र भी हुए थे। भीड़ में एक बड़ी संख्या स्थानीय लोगों और कामगारों की भी थी। पर पवार सभास्थल पर 3 घंटे देरी से, यानी रात के 9 बजे, पहुँचे। तब तक जनता का धैर्य चुक गया था और लोग उठ कर जा चुके थे।
यहाँ तक कि पवार के पहुँचने के बाद भी लोगों के जाने का सिलसिला नहीं थमा। उनके सामने से भी उठ-उठकर लोग बाहर जाते रहे। पर इन सबसे अविचलित महाराष्ट्र के क्षत्रप ने अपना भाषण जारी रखा।
मोदी पर हमला
पवार ने मोदी के उस हमले पर जवाबी हमला बोला जो प्रधानमंत्री ने शरद पवार के नेशनल कांफ्रेंस से हाथ मिला लेने पर किया था। उन्होंने मोदी को यह याद दिलाया कि अतीत में भाजपा भी फारूख अब्दुल्ला से हाथ मिला चुकी है।
पवार और मोदी में परस्पर हमले का यह सिलसिला तब शुरू हुआ था जब प्रधानमंत्री ने वर्धा की एक चुनावी सभा में 1 अप्रैल को पवार के आगामी लोकसभा चुनाव न लड़ने पर चुटकी ली थी। मोदी ने कहा था कि पवार ने यह निर्णय चुनावी मुश्किलों को देखते हुए लिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि राकांपा आन्तरिक संघर्ष में फँसी है और पवार के हाथों से पार्टी की कमान फिसलती जा रही है।
महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस-राकांपा गठबंधन के लिए पवार का चुनावों में न उतरना बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अलावा संप्रग गठबंधन को एक और झटका तब लगा था जब महाराष्ट्र विधानसभा के नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने चुनाव प्रचार करने से मना कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पवार ने उनके परिवार का अपमान किया था। इसके अलावा उनके बेटे पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
सेना-भाजपा ने निपटाए झगड़े
महाराष्ट्र कुछ समय पहले तक भाजपा-नीत राजग के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा था। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा विकास कार्यों में कोताही न बरतने के बावजूद आशंका जताई जा रही थी कि शिवसेना-भाजपा की दरार और शनि शिगनापुर के अधिग्रहण जैसे मसलों से भाजपा का कोर हिन्दुत्ववादी वोटर बंट या उदासीन हो सकता है। पर चुनाव आते-आते 2014 में क्रमशः 23 और 18 सीटें जीतने वाली भाजपा और शिवसेना ने सारे मसले निपटा कर 25-23 के फार्मूले से प्रदेश की 48 सीटों पर लड़ने की घोषणा कर दी।
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव 4 चरणों में होंगे और तारीखें 11, 18, 23, और 29 अप्रैल की होंगी। चुनाव आयोग की योजना 23 मई को मतगणना कर उसी दिन नतीजों की घोषणा की है।
सचिन तेंदुलकर क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और आज क्रीज पर खेलते हुए नहीं दिखते हैं, लेकिन सचिन के सबसे बड़े फैन सुधीर गौतम भारत का हर मैच आज भी देखने और भारत को चियर-अप करने स्टेडियम में जरुर आते हैं। भारतीय टीम विश्व के किसी भी देश में खेल रही हो सुधीर वह जरुर जाते हैं और लोगों को भूलने नहीं देते हैं कि सचिन तेंदुलकर अब क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं।
2019 आईसीसी विश्व कप में क्रिकेट के डाई-हार्ड प्रशंसकों को पहचान देने और सम्मानित कर रही है। भारत की ही इंडियन स्पोर्ट्स फैन (ISF) कम्यूनिटी वर्ल्ड कप 2019 के दौरान ग्लोबल स्पोर्ट्स फैंस अवॉर्ड्स कार्यक्रम में विश्व के सबसे बड़े फैंस का सम्मानित किया जा रहा है और इन सबसे बड़े फैंस की लिस्ट में भारत के सुधीर गौतम भी शामिल हैं।
कार्यक्रम में कुल 5 फैंस का सम्मान होगा, उनमें से एक सुधीर कुमार गौतम को चुन लिया गया है। सचिन तेंदुलकर ने अपने ट्विटर एकाउंट से इसकी सूचना दी। सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट में, “हमारे फैंस ही हमें वो बनाते हैं, जो हम हैं। स्पेशल फैन सुधीर गौतम को पहला ISF अवार्ड जितने पर बधाइयाँ। भारत का झंडा हमेशा इसी तरह ऊँचा रखना।”
Fans make us what we are! Congrats to a special fan @Sudhir10dulkar on recieving the 1st ever #ISF Award! You’ve stood as a symbol of passion & love for the sport and the Indian Cricket team.
सुधीर गौतम ने दर्शक के रूप में अपने जीवन में अब तक कुल 319 वनडे, 66 टेस्ट, 73 टी-20, 68 आईपीएल और 3 रणजी ट्रॉफी के मैचों में हिस्सा लिया हैं। सुधीर पिछले 18 सालों से भारतीय क्रिकेट के फैन बने हुए हैं और सचिन तेंदुलकर के दीवाने हैं।
ISF अवार्ड
यह ऐतिहासिक ISF पुरस्कार समारोह उन प्रशंसकों के खेल में व्यक्तिगत योगदान को पहचान दिलाता है, जिन्होंने अपनी पसंदीदा टीमों की सेवा करने में एक दशक से अधिक समय बिताया है।
विश्वभर के चुनिन्दा फैन्स में से एक भारतीय को अवॉर्ड मिलना गौरव की बात है। सुधीर गौतम आज भी मैच के दौरान अपने शरीर पर तिरंगे के साथ ‘मिस यू तेंदुलकर’ लिखवाकर आते हैं। यह जोश और जूनून उन्हें फैन्स से अलग बनाता है और यही वजह है कि उन्हें यह सम्मान मिला है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उत्तर दे दिया है जिसमें कोर्ट ने तीन विवादास्पद दस्तावेजों को राफेल मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार कर लिया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने इस आशय से ट्वीट किया है।
Defence Ministry on SC allows admissibility of 3 documents in Rafale deal as evidence: It’s reiterated that petitioners are using documents with intention to present a selective&incomplete picture of internal secret deliberations on a matter relating to National Security &Defence pic.twitter.com/U4fvs6CAf1
एक प्रेस विज्ञप्ति में रक्षा मंत्रालय ने दोहराया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए जा रहे दस्तावेज़ न केवल ‘चुराए’ हुए हैं बल्कि उनका इस्तेमाल रक्षा व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में अधूरी और भ्रामक छवि प्रस्तुत करने के लिए किया जा रहा है।
‘याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश दस्तावेज यह नहीं दिखाते कि कैसे मुद्दों का समाधान किया गया था और उचित अधिकारियों से अनुमति ली गई थी। यह सुविधाजनक तरीके से हिस्से चुनकर तथ्यों और अभिलेखों का आधा-अधूरा प्रदर्शन करने का प्रयास है।’
Defence Ministry: The documents presented by the petitioners are failing to bring out how the issues were addressed and resolved and necessary approvals of the competent authorities taken. These are selective and incomplete presentation of the facts and records by the petitioners https://t.co/7fTgpAKWfe
रक्षा मंत्रालय ने इस पर भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने जो-जो दस्तावेज़ माँगे थे वे उसे पहले ही दिए जा चुके हैं। यही नहीं, कैग को भी सरकार ने सभी फाइलें और अभिलेख उपलब्ध कराए थे। ‘हमारी मुख्य चिंता इस बारे में है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील और क्लासिफाइड जानकारी सार्वजानिक हो जाएगी।’ रक्षा मंत्रालय ने अपने कथन में कहा।
बुधवार को राफ़ेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के उस तर्क को ख़ारिज कर दिया था जिसमें गुप्त दस्तावेजों की साक्ष्य के तौर पर स्वीकार्यता पर आपत्ति की थी। कोर्ट अपने ही पूर्व में (गत 14 दिसंबर, 2018) को दिए गए उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने फ़्रांस की दसौं से 36 राफ़ेल जेट खरीद के मामले की जाँच के आदेश से इंकार कर दिया था।
Defence Ministry: Govt had provided requisite information as desired by SC & also provided all records & files as required by CAG.The main concern of the Government is relating to availability of sensitive & classified information concerning National Security in the public domain https://t.co/wkpyrg9g4s
ताज़ा सुनवाई में कोर्ट का मुख्य ध्यान ‘चोरी’ किए गए दस्तावेज़ों की स्वीकार्यता और उसके विरुद्ध विशेषाधिकार के सरकार के दावे को लेकर था।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी-जनरल केके वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि यह पुनर्विचार याचिका सिरे से ख़ारिज कर देनी चाहिए क्योंकि यह जिन दस्तावेजों पर आधारित है वह ‘चोरी’ के हैं।
मार्च में वामपंथी और विवादास्पद अधिवक्ता प्रशांत भूषण 8 पन्नों का एक नोट सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रस्तुत करना चाहते थे जोकि तथाकथित रूप से रक्षा मंत्रालय से चुराया हुआ था और बाद में द हिन्दू के एन राम ने प्रकाशित किया था। राफ़ेल समझौते में मूल्य-निर्धारण के लिए बातचीत हेतु अधिकृत भारतीय दल (Indian Negotiation Team) के इस नोट का इस्तेमाल इस आरोप के साक्ष्य के तौर पर हुआ था कि राजग के समय हुआ राफ़ेल समझौता संप्रग के समय के राफ़ेल समझौते, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था, से अधिक महँगा है।
‘पकड़े’ गए थे एन. राम
मोदी सरकार को निशाना बनाने के लिए हिन्दू ने अपने पास मौजूद रक्षा मंत्रालय के नोट में क्रॉपिंग और छेड़छाड़ कर यह दावा किया था कि रक्षा मंत्रालय इस नए समझौते के खिलाफ था और केवल प्रधानमंत्री इसके लिए दबाव बना रहे थे। इस आरोप को बल देने के लिए नोट में से तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर की लिखी एक टिप्पणी को हटा दिया गया था।
हिन्दू की खबर छपने के तुरंत बाद एएनआई ने पूरे दस्तावेज़ को छापा जिसने यह साबित कर दिया कि हिन्दू द्वारा मूल नोट के साथ छेड़छाड़ की गई है। इसको लेकर समाचारपत्र को काफ़ी शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ी जिसके बाद एक स्पष्टीकरण कर यह दावा करने की कोशिश की गई कि उनके द्वारा छापा गया नोट नकली नहीं, केवल पुराना है, और मनोहर पार्रिकर की टिप्पणी बाद में जोड़ी गई। पर उनका यह दावा भी सवालों के घेरे में आ गया जब रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर-मित्रा ने उसमें मनोहर पार्रिकर के नोट के अलावा अन्य चीज़ें भी मिटाए जाने की ओर इंगित किया।
अप्रैल 13, 2019 को भारतीय इतिहास और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दौरान घटे जलियाँवाला बाग हत्याकांड के काले अध्याय के 100 वर्ष पूरे हो जाएँगे। इससे पहले इस मामले पर एक नई चर्चा ने आजकल जोर पकड़ा है। कल ही ब्रिटेन के विदेश मंत्री मार्क फील्ड ने हाउस ऑफ कॉमन्स कॉम्प्लेक्स के वेस्टमिंस्टर हॉल में जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर आयोजित एक बहस में कहा कि इतिहास में यह एक ‘शर्मनाक प्रकरण’ के रूप में दर्ज है। लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान को बार-बार अतीत में खींचने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि बार-बार इस घटना के लिए माफी की माँग ब्रिटिश राज से संबंधित कई दूसरी समस्याओं को पैदा करेगा।
इसके बाद आज (अप्रैल 10, 2019) को ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ़ कॉमन्स) में जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर खेद व्यक्त किया है। थेरेसा मे ने कहा, “जो भी हुआ था और उससे लोगों को जो पीड़ा हुई, उसका हमें बेहद अफसोस है।” उन्होंने आगे कहा, “1919 की जालियाँवाला बाग त्रासदी ब्रिटिश-भारतीय इतिहास के लिए शर्मनाक धब्बा है। जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जालियाँवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे बीते हुए इतिहास का दुखद उदाहरण है।”
AFP: British Prime Minister Theresa May in British Parliament today expressed regret for #JallianwalaBaghMassacre; said, “We deeply regret what happened and the suffering caused.” pic.twitter.com/F5CWvDfObg
ब्रिटेन अक्सर अपने औपनिवेशिक अतीत के इस नरसंहार को लेकर माफ़ी माँगने से बचता रहा है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान, आजादी से पहले के इतिहास में कई ऐसे प्रकरण हैं, जिन पर बात करने में आज तक ब्रिटिश संसद को समय और संसाधनों का दुरुपयोग नजर आता है। ऐसे हालातों में PM थेरेसा द्वारा संसद में जलियाँवाला बाग की घटना पर दुःख प्रकट करना एक पहल मानी जा सकती है।
ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के मंत्री मार्क फील्ड ने कल ही एक बयान में कहा, “भारत के साथ समृद्ध संबंधों की पूरी संभावना है और जलियाँवाला बाग पर कोई अलग स्पष्टीकरण इसे विशेष रूप से मजबूती देगा।” जलियाँवाला हत्याकांड दुनिया के सबसे जघन्य नरसंहारों में से एक माना जाता है। इस हत्याकांड में करीब 1000 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1500 से अधिक लोग घायल हो गए थे, ये वो विवादित आँकड़े हैं जिन्हें तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने जारी किया था।
भारतीय मूल के लेबर सांसद वीरेंद्र शर्मा ने ब्रिटिश प्रधान मंत्री थेरेसा मे से औपचारिक माफी मांँगने का आह्वान किया है। अन्य कई लोगों ने इस माँग का समर्थन किया और जलियाँवाला नरसंहार में जान गँवाने वालों की याद में एक भौतिक स्मारक के निर्माण की संभावना जताई।
100 वर्ष पूरे होने पर ब्रिटिश सरकार पर जलियाँवाला नरसंहार के लिए मोदी सरकार द्वारा ब्रिटेन से माफी माँगने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। अब मोदी सरकार के दौरान कूटनीतिक मामलों पर भारत की सबसे बड़ी जीत देखने को मिली है। विदेश संबंधों का स्वर्णिम समय मोदी सरकार के दौरान देखने को मिला है और पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान जैसे देशों का वैश्विक स्तर पर बहिष्कार देखना इसका एक उदाहरण है। यहाँ तक कि आज सुबह ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बयान दिया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध मोदी सरकार के दौरान ज्यादा बेहतर हो सकते हैं। शायद इसी कारण से ही इमरान खान ने भाजपा को ही वोट देने की अपील कर डाली है।
बीते दिनों यूपी में मनरेगा मज़दूरों को लेकर खुशखबरी सुनने को मिली थी कि बजट में उनके वेतन में तीस फीसदी का अधिक इजाफ़ा किया गया है लेकिन आज तेलंगाना में मनरेगा मजदूरों से जुड़ी दिल दुखाने वाली खबर आई है।
यह खबर तेलंगाना के नारायनपेट जिले के मणिकल गाँव से आई है। जहाँ मनरेगा के तहत काम कर रहे मज़दूरों पर एक मिट्टी का टीला भरभराकर गिर गया है। मीडिया खबरों की मानें तो इस हादसे में 10 मज़दूरों की मौत और 1 व्यक्ति के घायल होने की जानकारी है। हादसा आज (अप्रैल 10, 2019) दोपहर का है।
SP, Narayanpet: 10 dead and one injured after a wall collapsed in Marikal in Narayanpet. We are shifting the dead bodies to the local government hospital for post-mortem. The injured is also shifted to hospital for treatment. #Telangana.
इस हादसे में मरने वालों में महिलाएँ भी शामिल हैं। एएनआई ट्वीट के मुताबिक पुलिस ने बताया है कि मृतकों के शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए लोकल अस्पताल भेजा जा रहा है। साथ ही घायल व्यक्ति को भी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मीडिया खबरों के मुताबिक हादसे के समय घटना स्थल पर 15 लोग मौजूद थे। हादसे के बाद से वहाँ राहत और बचाव कार्य जारी है। लोगों को जेसीबी मशीनों की मदद से निकाला जा रहा है।
Unfortunate Accident 10 #Manrega Labers Die in Land slide This Happen in Tileru village, Marikal Mandal,Narayanpet (MBNR)District Telangana state,The work on there is unorthariced must be Enquiry & StateGovtMust give20lakh Exgricia every person @PMOIndia@narendramodi ji central pic.twitter.com/ZsP1x9WKBr
— Chowkidar NaguraoNamaji (@Naguraonamaji) April 10, 2019
मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने इसपर हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया है। इसके साथ ही सीएम ने इस हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अफसरों को घायलों और पीड़ित परिवारों को सभी जरूरी मदद मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
I request @LabourMinistry if there Every kind Help to those who die in that Accident and @CNarayanpet must take serious action in this case thank you.
— Chowkidar NaguraoNamaji (@Naguraonamaji) April 10, 2019