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होली के समय दिवाली, पटाखों और प्रदूषण पर SC ने बताया गाड़ियाँ हैं ज़्यादा खतरनाक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (मार्च 12, 2019) को पटाखों से होने वाले प्रदूषण संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए सवाल किया कि आखिर लोग पटाखों के पीछे क्यों पड़े हुए हैं, जबकि प्रदूषण को बढ़ाने का सबसे बड़े कारण तो ऑटोमोबाइल हैं।

अदालत ने केंद्र से पूछा कि जो लोग पटाखे की फैक्ट्रियों में काम करते थे, उन बेरोजगार कर्मचारियों का क्या हुआ? कोर्ट ने उन कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि उन्हें भूखा नहीं छोड़ा जा सकता है।

जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने कहा कि उनकी मंशा बेरोजगारी पैदा करने की बिलकुल भी नहीं है। अगर कोई कारोबार वैध रूप से संचालित हो रहा है, और उसके पास लाइसेंस भी है, तो आप किसी को काम करने से कैसे रोक सकते हो?

इस मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 3 अप्रैल की तय हुई है। अदालत ने केंद्र से पटाखों और ऑटोमोबाइल्स से होने वाले प्रदूषण पर एक तुल्नात्मक अध्य्यन की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही पटाखे बैन करने वाली माँग पर कोर्ट ने विचार करने को कहा है कि जब ऑटोमोबाइल से प्रदूषण ज्यादा फैलता है तो पटाखों पर बैन लगाने की बात क्यों की जाती है।

पटाखों से फैलते प्रदूषण पर केंद्र ने अदालत से कहा है कि पटाखों में अब बेरियम के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया जा चुका है, साथ ही ग्रीन पटाखों का फार्मुला अभी फाइनल करना बाकि है। यहाँ बता दें कि गत वर्ष कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे छोड़ने के लिए रात 8 से 10 बजे का समय तय किया था, साथ ही सुरक्षित ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री को भी मंजूरी दी थी ताकि प्रदूषण को कम नुकसान पहुँचे।

नेहरू BJP के थे और जिन्ना RSS के, यही कह रहे हैं राहुल गाँधी

राहुल गाँधी को जो रटा जाए, उसे ही रिपीट मोड में हर जगह दोहराते रहें हैं। फिर चाहे कोई कितना भी तथ्य दे या पूरा का पूरा सच ही सामने क्यों न आ जाए। एक तरफ राहुल का रा-फेल राग अभी भी जहाँ-तहाँ सुनने को मिल ही जाता है। पर अब जब उन्हें लगने लगा है कि इससे मामला बन नहीं रहा तो उन्होंने एक नया राग छेड़ा कि बीजेपी और RSS ने देश को बाँटा।

तो लगे हाथ भाजपा सांसद परेश रावल ने उनसे पूछ ही लिया कि ठीक है बीजेपी और RSS ने देश को बाँटा तो ये तो बता दीजिए कि नेहरू और जिन्ना में से कौन बीजेपी का था और कौन RSS का?

इससे पहले राहुल गाँधी कुख्यात आतंकी मसूद अज़हर को, ‘मसूद अज़हर जी’ कहकर सेल्फ गोल कर चुके हैं। यही राहुल गाँधी प्रधानमंत्री के प्रति अवसाद की हद तक जाकर एक से एक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं। उनके कल के ‘मसूद अज़हर जी’ वाले बयान पर भी परेश रावल ने चुटकी लेते हुए इसे ‘संस्कार’ की संज्ञा दी है।

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ‘हाफिज सईद साहब’ तो वहीं ख़ुद सोनिया गाँधी नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कह चुकी हैं।

अभी तो बस चुनाव अभियान शुरू ही हुए हैं, अब देखना ये है कि राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस के अन्य नेता भाषाई मर्यादा का कितना उल्लंघन करते हैं, तथा चुनाव प्रचार के स्तर को और कितना नीचे ले जाते हैं।

जनरल बख्शी का मज़ाक उड़ाने वालो, लॉन्ड्री ही चलाओ क्योंकि पत्रकारिता तुम्हारे वश की बात नहीं

आजकल एक नया चलन चला है। हर एक ऐसे व्यक्ति का मज़ाक बनाया जाता है, जिसने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया हो, बलिदान दिया हो, ज़िंदगी खपा दी हो या देशहित में अपना शरीर गलाया हो। मीडिया के नए ब्रीड में आवारा की तरह दिखने वाले और हार्दिक पांड्या से कॉपी किए गए अंग्रेजी एक्सेंट में ‘हे गाइज’ बोलने वाली ये टोली ‘कूल’ बनने के लिए नीचता पर उतर आई है। न्यूज़लांड्री के अभिनन्दन शेखर ने मेजर जनरल गगनदीप बख्शी का मज़ाक बनाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें टीवी डिबेट्स में उनके अंदाज को लेकर उनपर तंज कसा गया है। इस वीडियो में अभिनन्दन शेखर मेजर जनरल बख्शी की नक़ल करने की कोशिश में कुत्ते-बिल्लियों की आवाज़ें निकालते हैं और उनके कुछ क्लिप्स दिखा कर ‘कूल’ बनने की कोशिश करते हैं।

ऊपर दिए गए इस वीडियो में मेजर जनरल बख्शी का मज़ाक बनाना उतना दुःखद नहीं है जितना कि कुछ लिबरल्स का आकर इस वीडियो को बढ़ावा देना। तथाकथित अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने इस वीडियो को रीट्वीट करते हुए लिखा कि जीडी बख्शी ‘National Embarrassment’ हैं। ये वही लोग हैं जिनके लिए आतंकवादी तो सहानुभूति के पात्र हैं लेकिन उन आतंकवादियों से लोहा लेकर नागरिकों की रक्षा करने वाले राष्ट्रीय परेशानी। इन लोगों समझाना भैंस के आगे आगे बीन बजाने के बराबर है। स्वरा भास्कर और अभिनन्दन शेखर जैसे लोगों को हम पाठ पढ़ाएँगे लेकिन उस से पहले ज़रूरी है कि हम सब मेजर जनरल गगनदीप बख्शी के बारे में थोड़ा-बहुत जान लें। उनके बारे में जानना इसीलिए भी आवश्यक है ताकि आगे जब भी ऐसे ‘हे गाइज’ टाइप लोग हमारे रक्षकों का मज़ाक बनाएँ, हम उन्हें करारा सबक सिखाएँ।

किश्तवार में पाकिस्तानी मंसूबे को किया नाकाम

कश्मीरी पंडितों की व्यथा किसी से छिपी नहीं है। अपने ही देश में शरणार्थी बनने को मज़बूर हो गए इन पंडितों ने कभी हथियार नहीं उठाया और जहाँ भी रहे, देशहित में अपना योगदान देते रहे। फ़िल्म इंडस्ट्री से लेकर पत्रकारिता तक परचम लहराने वाले कश्मीरी पंडित आज तक अपनी मातृभूमि नहीं लौट सके हैं। उन्हें सबकुछ छोड़ना पड़ा- अपनी संपत्ति, घर-बार.. सबकुछ। कइयों को तो मार दिया गया। इस बारे में लगभग कुछ न कुछ सबको पता है। लेकिन, कश्मीरी पंडितों को घाटी से भगाने के बाद पाकिस्तान के मंसूबे और भी ख़तरनाक हो चले थे। इसके बाद आतंकियों, अलगाववादियों व पाकिस्तान समर्थित ताक़तों की नज़र जम्मू कश्मीर में रह रहे डोगरा लोगों पर पड़ी। किश्तवार जिले में डोगराओं को निशाना बनाया जाने लगा। उनका भी हाल कश्मीरी पंडितों जैसा करने का कुचक्र रचा गया।

लेकिन, इसी दृश्य में एक ऐसे नायक ने एंट्री ली, जिसके रहते पाकिस्तान और आतंकियों के इरादे असफल हो गए। यह इतना सरल नहीं था। मेजर जनरल बख्शी द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘Kishtwar Cauldron‘ में इस ऑपरेशन की चर्चा की गई है। 2013 में ईद के दौरान एक हिन्दू बाइक सवार मुस्लिम जलूस के बीच फँस गया और उसके साथ बदतमीजी की गई। राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए व उनके बाद भड़के दंगों में कई लोगों की मौत हो गई। आतंकियों की इस बौखलाहट के पीछे वो घाव था जो बख्शी ने उन्हें दिया था। जम्मू से डोगराओं को भगाना आज भी आतंकियों की ‘To Do List’ में है लेकिन हमें मेजर जनरल बख्शी को धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने इस कुचक्र पर ऐसा प्रहार किया कि अब वे चाह कर भी ऐसा करने में सफल नहीं हो सकते।

भारत के सबसे अनुभवी काउंटर-इंसर्जेन्सी कमांडर्स में से एक जीडी बख्शी को अक्टूबर 2000 में इस क्षेत्र में सेक्टर कमांडर के रूप में तैनात किया गया। परिस्थितियों को नियंत्रित करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। 2001 में 13 डोगरा हिन्दुओं को निर्ममतापूवक मार डाला गया। उनमे महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। जीडी बख्शी ने इसके बाद आतंकियों के ख़िलाफ़ चौतरफा प्रहार शुरू किया। एक महीने के अंदर-अंदर इस नरसंहार को अंजाम देने वाले सभी आतंकियों का खदेड़-खदेड़ कर उनका काम तमाम कर दिया गया। जीडी बख्शी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने इस जोख़िम भरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। डोडा-किश्तवार इलाक़े का भूगोल थोड़ा अलग है। दक्षिण में हिमाचल, पूर्व में कारगिल और पश्चिम में पीर-पंजाल से लगे इस क्षेत्र में आतंकियों ने भारतीय सेना से बचने के लिए पनाह ली थी।

उस समय डोडा में सैन्य उपस्थिति कम थी। इस कारण पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई ने इस इलाक़े का गलत प्रयोग करना शुरू कर दिया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता चुप बैठे थे। मीडिया इन ख़बरों को तवज्जो नहीं देती थी। राजनेता डोगराओं की फिक्र नहीं करते थे। डोगरा लगातार पलायन कर रहे थे। उनका नरसंहार हो रहा था। ऐसे समय में जीडी बख्शी ने स्थिति को नियंत्रित किया। 2005 के एक ख़बर में जीडी बख्शी ने साफ़-साफ़ कहा था कि डोगराओं व उनके गाँवों को बचाना उनकी प्राथमिकता है और उसके लिए वह कुछ भी करेंगे। सड़कों की अनुपस्थिति में उन पहाड़ियों पर आतंकियों से लोहा लेना कितना कठिन कार्य रहा होगा, आप सोच सकते हैं। डोडा में आतंकियों का आना 1991 के बाद से ही प्रारम्भ हो गया था।

क्या आपको पता है कि मेजर जनरल जीडी बख्शी अपने परिवार की बात न मान कर सेना में शामिल हुए थे? उनके भाई सृष्टि रमन बख्शी जम्मू कश्मीर राइफल्स का हिस्सा थे। मात्र 23 वर्ष की उम्र में वे एक माइंस ब्लास्ट में वीरगति को प्राप्त हो गए थे। जिसने अपने भाई को इतनी कम उम्र में खो दिया, वो भी देश की रक्षा हेतु- उस आदमी का मज़ाक बनाने में क्या स्वरा ब्रिग्रेड को शर्म नहीं आती? इसके बावजूद युवा गगनदीप ने एनडीए का फॉर्म भरा और आल इंडिया मेरिट लिस्ट में दूसरे स्थान पर आए। इस व्यक्ति की जिजीविषा को आप समझ सकते हैं। उन्होंने वोलंटरी रूप से कारगिल में अपनी पोस्टिंग कराई- एलओसी से मात्र 5 किलोमीटर दूर।

आपको यह भी बता दें कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सबसे कठिन क्षेत्रों में से एक किश्तवार में भी पोस्टिंग स्वेच्छा से ही कराई थी। डोगराओं की वापसी के बाद उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। उन्हें कारगिल में उनके योगदान के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। अभी भी वे किसी न किसी रूप में देशहित में कार्य करते रहते हैं और टीवी चर्चाओं में भी हिस्सा लेते हैं।

जीडी बख्शी का मज़ाक बनाने की कोशिश कर ख़ुद मज़ाक बन रहे

अगर कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप उसके चरित्र हनन पर उतर आएँ। सावरकर की प्रशंसा करना अपराध नहीं है। अपने कठिन और लम्बे अनुभवों के आधार पर अगर जीडी बख्शी कुछ कहते हैं तो उन्हें सुना जाना चाहिए क्योंकि आप किसी एसी कमरे में बैठ कर सेना का मज़ाक बनाते हैं जबकि उन्होंने सीमा पर आतंकियों से लोहा लिया है, आपकी रक्षा के लिए। कुत्ते-बिल्ली की आवाज़ निकालने से आप ‘कूल’ नहीं बन जाएँगे और न ही अपने पिता के उम्र के एक सैन्य अधिकारी का अपमान कर आपको कुछ हासिल होगा।

किसी भी देश में अपने सेना के वेटरन्स का सम्मान किया जाता है, उनके लिए तालियाँ बजती है, बच्चों को उनका सम्मान करना सिखाया जाता है। भारत में भी ऐसा होता रहा है लेकिन आज मुट्ठी भर गिरोह विशेष के लोग उनका मज़ाक बना कर युवा पीढ़ियों को दिग्भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं।

छुट्टा गायों को गौशाला पहुँचाने के लिए सेल्फी विद काउ की शुरुआत

नोएडा में कुछ युवाओं द्वारा ‘सेल्फी विद काउ’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य सड़क पर या उसके किनारे बेतरतीब बैठी छुट्टा गायों को सेक्टर-63 के वाजिदपुर स्थित नए काऊ शेल्टर में पहुँचाना है। जिससे ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभियान की शुरुआत करने वाले अमित गुप्ता, अभय पांडेय और सचिन गोयल के पहल को स्थानीय लोगों का भी साथ मिलना शुरू हो गया है।

सेल्फी विद काऊ (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

स्थानीय लोग द्वारा जहाँ-तहाँ बैठी गायों के साथ सेल्फी लेकर नगर निगम प्रशासन को टैग कर रहे हैं। ऐसे में उन पर दबाव बन रहा है कि वह गायों को नए बने काऊ शेल्टर पहुँचाए।

इस पहल से जहाँ एक्सीडेंट में कमी आएगी, वहीं ट्रैफिक व्यवस्था में भी सुधार होगा। साथ ही इस अभियान से ऐसे शहरों को भी प्रेरणा मिलेगी, जहाँ सड़क पर छुट्टा गायों के घूमने से लोग परेशान हैं।

पति ने वॉट्सऐप पर दिया तीन तलाक, फ़ोन पर हुआ था निक़ाह

तीन तलाक के रोजाना आने वाले मामले यह साबित करते जा रहे हैं कि सामाजिक कुरीतियों से जन्मे अपराध और रूढ़िवादिता पर अंकुश लगाने के लिए क़ानून बना देना मात्र व्यापक समाधान नहीं हो सकता है। केंद्र सरकार द्वारा ‘तीन तलाक’ पर अध्यादेश लाए जाने के बावजूद हैदराबाद से इस तरह का एक मामला सामने आया है।

22 वर्षीय महिला फराह फातिमा का कहना है कि उसके पति ने व्हाट्सएप्प मैसेंजर के जरिए उसे तीन तलाक दिया है। आरोपित पति की पहचान यासीर सिद्दकी के रूप में की गई है जो हैदराबाद के मीर आलम मंडी कर रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में अमेरिका में रह रहा है। शादी प्रमाणपत्र के अनुसार, दोनों की शादी फोन के माध्यम से हुई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फातिमा के पति ने मोबाइल मैसेंजर व्हाट्सएप्प के जरिए उसे तलाक दे दिया। व्हाट्सएप्प मैसेज मिलने के बाद महिला ने अमेरिका जाने का और अपने पति से मिलने का निर्णय किया, लेकिन जब वह अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को एयरपोर्ट पर पहुँची तो उसे हिरासत में ले लिया गया। इमिग्रेशन ऑथरिटी द्वारा यह जानकारी दी गई है कि अब वह सिद्दकी की पत्नी नहीं रही। यह जानकारी मिलते ही महिला हैरान रह गई।

फातिमा ने बताया कि वह 24 दिनों तक इमिग्रेशन कस्टडी में रही। 12 फरवरी को वह अमेरिका पहुँची थी और फिर 09 मार्च को भारत वापस लौटी। जब उसे फ्लाइट पर लाया गया तो उस समय उसके हाथों व पैरों में जंजीर बाँध दी गई थी।

फातिमा ने आगे बताया कि वह अपने पति के साथ 2 बार अमेरिका गई थी। कुछ महीने पहले जब वह भारत में थी, तब उसे एक संदेश मिला कि वह (पति) उसे (महिला) तलाक दे चुका है। उन दोनों के बीच हुए व्हाट्सएप्प मैसेज में पति ने महिला को कहा था कि यदि वह चाहती है तो उसके खिलाफ एक शिकायत भी दर्ज करवा सकती है। इस दौरान तलाक को लेकर किसी कागज पर हस्ताक्षर भी नहीं किया गया था।

यासीर सिद्दकी और फ़राह फातिमा दोनों की शादी 3 मार्च 2016 को हुई थी। 1 जून 2016 को तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किए गए विवाह प्रमाण पत्र के अनुसार दोनों की शादी फोन पर हुई थी। महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का किसी और महिला के साथ संबध है, जिस वजह से उसने तलाक दिया है।

पाकिस्तानी चैनल में TRP के लिए देश को नुकसान पहुँचा रहे लोग: अरूण जेटली

पुलवामा में हुए फिदायीन हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना की तरफ से बालाकोट में किए गए एयर स्ट्राइक की देश में काफी सराहना हुई। सारे विपक्षी दलों ने भी लगभग एक हफ्ते तक शांत होकर देश के साथ होने का ढोंग किया। मगर फिर अचानक से विपक्ष के कई नेताओं की तरफ से एयर स्ट्राइक का सबूत माँगा जाने लगा, जो कि काफी शर्म की बात है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इन नेताओं की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में कुछ लोग पाकिस्तान के टीवी चैनलों की टीआरपी के लिए काम कर रहे हैं। जेटली ने कहा कि नेताओं की इस हरकत से उन्हें पाकिस्तान के टीवी चैनलों में तो टीआरपी तो मिल जा रही है, लेकिन इससे देश का नुकसान हो रहा है।

बता दें कि अरूण जेटली ने ये बात देश की सुरक्षा से जुड़े मसलों पर चर्चा के लिए ‘आज तक’ द्वारा आयोजित विशेष ‘सुरक्षा सभा’ को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने कहा, “सेना के मुखिया कह रहे हैं कि हमने टारगेट हिट किया और आप कहते हो कि झूठ बोल रहे हैं। क्या कोई जिम्मेदार देश या सेना अपने अभियान की डिटेल सार्वजनिक करता है? हमारा वहाँ इंटेलीजेंस था पाकिस्तान में, हम क्या उसको सार्वजनिक कर सकते हैं? इतना बड़ा सफल ऑपरेशन जिस पर एयर फोर्स सहित पूरा देश गर्व कर रहा है आप उनसे सबूत मांग रहे हो।”

अरूण जेटली ने कहा, “पाकिस्तान के लिए एयर स्ट्राइक की इससे बड़ी कीमत क्या होगी कि चीन और टर्की जैसे देश तटस्थ हैं। इस्लामिक देशों का संगठन ओआईसी भी आपकी बात नहीं सुन रहा। जब हमने स्ट्राइ‍क किया तो हमने दुनिया को बताया नहीं, दुनिया को पहली सूचना सुबह 4:45 पर उनकी फौज ने दी।” इससे साफ जाहिर हो रहा है कि वहाँ की सरकार सेना चला रही है।

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस से नेता प्रतिपक्ष के पुत्र भाजपा में शामिल

एक ओर जहाँ लोकसभा चुनाव की तैयारी और रणनीति बनाने के लिए कॉन्ग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की 58 साल बाद गुजरात में अहम बैठक चल रही है इसी बीच महाराष्ट्र में पार्टी को बड़ा झटका लगा गया है। महाराष्‍ट्र कॉन्ग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्‍ण विखे पाटील के बेटे सुजय विखे पाटील मंगलवार (मार्च 12, 2015) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए हैं। बीजेपी में शामिल होने के बाद सुजय ने पार्टी नेताओं की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह का इसके लिए शुक्रिया अदा करते हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों के ऐलान के बाद से ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। ऐसे में कॉन्ग्रेस के नेता एक-एक कर के पार्टी का साथ छोड़ते जा रहे हैं। ज्यादा दुखद बात यह है कि पार्टी छोड़ने का निर्णय लेने वाले अधिकतर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, जो अब कॉन्ग्रेस की राष्ट्रविरोधी हरकतों से तंग आ चुके हैं।

सुजय विखे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा जॉइन की। पिछले कुछ समय से इस बात की चर्चा हो रही थी, जिस पर आज आखिरकार विराम लग गया है। सुजय ने कहा, “मैंने यह फैसला अपने पिता के खिलाफ लिया है। मुझे नहीं पता कि मेरे पैरंट्स इस फैसले का कितना समर्थन करेंगे, लेकिन BJP के नेतृत्व में मैं अपना सब कुछ झोंक दूँगा ताकि मेरे माता-पिता गर्व महसूस कर सकें। CM (देवेंद्र फडणवीस) और बीजेपी विधायकों ने मेरे इस फैसले का पूरा समर्थन किया है।” 

कौन हैं सुजय विखे पाटिल?

सुजय विखे पाटिल कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे हैं। ऐसे में सुजय का भाजपा में शामिल होना कॉन्ग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ख़बरें ये भी हैं कि राधाकृष्णा पाटिल ने शरद पवार से अहमदनगर सीट अपने बेटे सुजय को देने के लिए मनाने की कोशिश की थी , लेकिन शरद पवार ने मना कर दिया था। साथ ही, यह सुझाव दिया था कि सुजय चाहें तो NCP के उम्मीदवार बन कर अहमदनगर से चुनाव लड़ सकते हैं।

कई और नेता भी हो सकते हैं BJP में शामिल

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पुत्र सुजय विखे पाटील के BJP में शामिल होने के साथ ही अहमदनगर से कई अन्य प्रमुख नेता और विधायक BJP में शामिल हो सकते हैं। मौजूदा संकेतों के अनुसार, सुजय विखे पाटील को शायद अहमदनगर लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़वाया जा सकता है। अहमदनगर को प्रसिद्ध विखे-पाटील परिवार का गढ़ माना जाता है और सुजय इस परिवार की चौथी पीढ़ी हैं। लोकसभा चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद से ही हर दिन कॉन्ग्रेस नेताओं का भाजपा का हाथ थामना कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव से पहले बड़ी मनोवैज्ञानिक हार के तौर पर देखा जा रहा है।

भारतीय सेना ने LOC पर तैनात किया ‘बोफोर्स’, मार गिराए पाकिस्तान के 5-6 सैनिक

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर आम लोगों और भारतीय सेना को निशाना बनाना पाकिस्तानियों को इस बार भारी पड़ गया है। भारतीय सेना ने पाक की इन हरकतों पर पिछले 10 दिनों में करारा जवाब दिया। इसके चलते पाकिस्तानी सेना को अपने 5-6 सैनिकों की जान गवानी पड़ी।

पाकिस्तान आर्मी के ये सैनिक रजौरी सेक्टर में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में मारे गए। एएनआई की खबर के मुताबिक पाकिस्तान को उसकी हरकतों का मुँह तोड़ जवाब देने के लिए वहाँ की चौकियों पर भारी गोले-बारूद से हमला हुआ, जिसमें पाकिस्तान को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा।

इस जवाबी कार्रवाई के बाद जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाक सेना की बातचीत को रिकॉर्ड किया तो मालूम चला कि पाक सेना के 5-6 जवान इस गोली-बारी में मारे गए।

बता दें कि नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से हो रही भारी फायरिंग के बाद भारतीय सेना ने बोफोर्स 155 मिलीमीटर गन को वहाँ तैनात किया था। इसी की मदद से उन्होंने पाकिस्तानी बंकरो के चिथड़े उड़ा दिए।

खास बात यह है कि इससे पहले भी पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने 1999 के करगिल युद्ध में बोफोर्स गन का इस्तेमाल किया था, जिसके कारण भारतीय सेना ऊँची चोटियों पर कब्जा जमाने में कामयाब हुई थी।

अब तो सच बोल दे… राहुल! डोभाल और मसूद पर अपनी माँ से क्यों नहीं पूछते

अक्सर झूठ बोलने वाले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी एक बार फिर से झूठ बोलते हुए पकड़े गए हैं। मसूद अज़हर को सम्मानपूर्वक सम्बोधित करने वाले राहुल गाँधी ने अपने भाषण में एक और झूठ बोला। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और पोस्ट्स के आधार पर झूठ बोलने वाले राहुल ने एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कंधार प्लेन हाईजैक काण्ड के दौरान अजीत डोभाल आतंकी मसूद अज़हर को छोड़ने कंधार गए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने राहुल के इस बयान का खंडन किया है। रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से साफ़-साफ़ कहा गया है कि अजीत डोभाल विमान से आतंकी मसूद को छोड़ने कंधार नहीं गए थे। उस समय आईबी में एडिशनल डायरेक्टर रहे डोभाल उस विमान में मौजूद ही नहीं थे, जिसमें आतंकियों को कंधार छोड़ा गया था।

अजीत डोभाल उस नेगोशिएशन टीम का हिस्सा थे जो आतंकियों से बातचीत कर किसी फाइनल डील पर पहुँचने की कोशिश कर रही थी ताकि 150 से भी अधिक नागरिकों को आतंकियों के चंगुल से छुड़ाया जा सके। तालिबानी आतंकियों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी पुस्तक ‘My Country, My Life’ में इसकी पुष्टि की है। तत्कालीन रॉ प्रमुख ए एस दुतल ने भी इस बात को दोहराया है। राहुल गाँधी ने एक ट्वीट में दावा किया है कि डोभाल आतंकियों को छोड़ने कंधार गए थे। राहुल गाँधी के इस दावे को यूथ कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया प्रमुख राधिका खेरा और कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रणदीप सुरजेवाला सहित कई नेताओं ने आगे बढ़ाया।

कंधार विमान हाईजैक कांड के दौरान विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह आतंकी मसूद अज़हर, उमर शेख और मुस्तक़ जरगर के साथ विमान से कंधार रवाना हुए थे। उनके साथ अधिकारी विवेक काटजू मौजूद थे। मसूद अज़हर ने उसके बाद पाकिस्तान पहुँच कर जैश-ए-मोहम्मद नामक आतंकी संगठन की स्थापना की। पठानकोट और पुलवामा में हुए हमले में इसी आतंकी संगठन का हाथ था। आतंकी उमर ने बाद में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या कर दी थी। नवभारत टाइम्स ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अपहरणकर्ताओं की धमकी को ध्यान में रखते हुए वाजपेयी सरकार ने तीनों आतंकियों को रिहा करने का निर्णय लिया। आतंकियों ने धमकी दी थी कि अगर उनकी माँगें नहीं मानी गई तो वे बंधक बनाए गए नागरिकों की हत्या कर देंगे।

रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा कि यह फ़ैसला कितना सही और कितना गलत था- इस पर बहस हो सकती है, लेकिन किसी अधिकारी का नाम लेकर उसे कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है। अधिकारी तो बस अपनी ड्यूटी कर रहे थे, जो सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई थी। आपको यह भी जानना चाहिए कि कंधार काण्ड को अंजाम देने वाले आतंकियों ने पहले तो भारत की विभिन्न जेलों में बंद 36 आतंकियों को रिहा करने के साथ-साथ 14 अरब रुपए की फिरौती भी माँगी थी। वाजपेयी सरकार की कूटनीति और भारतीय वार्ताकारों की काफ़ी मशक्कत के बाद आतंकियों की माँगों को कम किया गया। वार्ताकारों के पैनल में डोभाल के साथ आईबी में कार्यरत एनएस सिद्धू और वरिष्ठ रॉ अधिकारी सीडी सहाय भी शामिल थे। वार्ताकारों के काफ़ी मोलभाव के बाद आतंकी झुके।

आज कंधार-कंधार की रट लगाने वालों को अपनी पार्टी के दोनों सुप्रीम नेताओं- सोनिया गाँधी और डॉक्टर मनमोहन सिंह से पूछना चाहिए कि क्या उस बैठक में उन्होंने आतंकियों को रिहा करने और फँसे नागरिकों को छुड़ाने का विरोध किया था? अगर नहीं, तो राहुल गाँधी सहित आज के नेताओं को अपने सीनियर्स से कोचिंग लेकर उस समय की परिस्थितियों से अवगत होना चाहिए। रुबैया के अपहरण के बाद 5 आतंकी छोड़े गए थे। इसके एक दशक बाद 150 के लगभग यात्रियों की सकुशल वापसी के लिए 3 आतंकी छोड़े गए।

…क़सम ‘गुप्त-कोष’ वाले गुप्ता जी के अजगर की हम 7 में से 8 सीट जीत रहे थे : केजरी पर कुमार ने कसा तंज

केजरीवाल की नीति और रीति से देश वाकिफ़ हो चुका है। अब तो स्थिति यह हो गई है कि केजरीवाल किस मुद्दे पर कौन सा रंग दिखाएँगे, इस पर भी उनके ही पार्टी के नेता तंज करने से नहीं चूक रहे। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक डॉ. कुमार विश्वास ने तंज किया कि 23 मई को, जिस दिन लोकसभा चुनाव के नतीजे आएँगे उस दिन अरविंद केजरीवाल के बोल-बच्चन क्या होंगे। उन्होंने ट्वीट किया, “चुनाव-आयोग ने ऐसी तिथि में चुनाव कराए कि हमारे मुस्लिम वोटर तो रमज़ान की वजह से वोट डालने निकले नहीं थे, यूपी-बिहार वाले छुट्टी चले गए थे, कार्यकर्ताओं को लग्न-ब्याह में जाना पड़ गया था नहीं तो क़सम “गुप्त-कोष” वाले गुप्ता जी के अजगर की हम 7 में से 8 सीट जीत रहे थे।”

इससे पहले भी कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर तंज किया था, “ज़मानत ज़ब्त होने के डर से आत्ममुग्ध बौने ने चुनाव घोषणा के दिन ही “अमानत” छोड़ दी?”

वहीं कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन न होने पर भी कुमार विश्वास ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा था, “तो उन्होंने लगभग मना कर दिया जी”

मंचीय कवि कुमार विश्वास ने कुछ देर बाद एक और ट्वीट किया था। उन्होंने इस ट्वीट में बिना नाम लिए तंज कसा। हालाँकि, उनके इस ट्वीट को देखकर स्पष्ट अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका यह ट्वीट अरविंद केजरीवाल के लिए ही है।

बता दें कि चुनाव आयोग के चुनाव तारीखों की घोषणा के बाद, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि पवित्र रमजान के महीने में तीन चरणों का लोकसभा चुनाव कराना मुस्लिम समुदाय के लिए मतदान को कठिन कर देने की साजिश और भाजपा को फायदा पहुँचाने की कोशिश है।

वहीं ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इण्डिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मई में रमजान के दौरान लोकसभा चुनाव कराये जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए निर्वाचन आयोग से तारीखें बदलने पर विचार करने की माँग की है। जिसका कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन किया था।

इस मामले में आयोग की ओर से सोमवार (मार्च 11, 2019) को जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि रमज़ान के दौरान पूरे महीने के लिए चुनाव प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस दौरान ईद के मुख्य त्यौहार और शुक्रवार का ध्यान रखा गया है।