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हिन्दू रीति-रिवाजों से खिन्न कॉन्ग्रेसी गैंग ने आयुध पूजा को लेकर युवा तेजस्वी सूर्या को बनाया निशाना

कॉन्ग्रेस आईटी सेल ने आगामी लोकसभा चुनाव में दक्षिण बेंगलुरु से भाजपा प्रत्याशी तेजस्वी सूर्या को बदनाम करने के लिए उनके हिन्दू रीति-रिवाजों से पूजा करने को मुद्दा बनाया है। बता दें कि हिंदुत्व में आयुध पूजा का विधान है, जिसमें अस्त्र-शस्त्र की पूजा की जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विधि-विधान से आयुध पूजा में हिस्सा लेते रहे हैं। कॉन्ग्रेस को इस हिन्दू पद्धति से आपत्ति हो गई है। सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस समर्थकों व आईटी सेल के लोगों ने ट्वीट्स के माध्यम से तेजस्वी सूर्या पर निशाना साधा। इसके लिए पेड प्रमोशन का भी सहारा लिया गया। जैसा कि आप नीचे वाले ट्वीट में देख सकते हैं, जिसे प्रमोट किया गया है। प्रमोट करने से यह ट्वीट उन लोगों की टाइमलाइन पर भी दिख सकता है, जो उस यूजर को फॉलो नहीं करते।

प्रमोट किया गया ट्वीट

बता दें कि आयुध पूजा नवरात्री के दौरान की जाती है। इसमें हथियारों और अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की जाती है। माँ चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर राक्षस का वध किए जाने की याद में इस प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। ख़ासकर दक्षिण भारत में ये त्यौहार ज्यादा लोकप्रिय है। हाँ, इसकी प्रक्रिया में थोड़ी-थोड़ी भिन्नताएँ हैं लेकिन आयुध पूजा दक्षिण भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है। तेजस्वी भाजपा युवा प्रदेश मोर्चा के सचिव हैं। उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री बीके हरिप्रसाद के मुक़ाबले उतारा गया है। प्रखर वक्ता माने जाने वाले सूर्या संघ से जुड़े हुए हैं। वकील सूर्या भाजपा की सोशल मीडिया टीम का भी हिस्सा हैं। यहाँ से भाजपा के दिग्गज नेता अनंत सिंह जीता करते थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में, भाजपा के पास अपना गढ़ बचाने की चुनौती है।

28 वर्षीय तेजस्वी सूर्या आगामी चुनावों में सबसे युवा लोक सभा प्रत्याशियों में से एक हैं। सेक्युलर-लिबरल-लेफ्टिस्ट्स द्वारा भारतीय ख़ासकर हिन्दू पर्व-त्योहारों का मज़ाक उड़ाने और उसे बदनाम करने का सिलसिला चल निकला है। इन्हे कभी दीवाली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण नज़र आता है तो कभी होली को पानी की बर्बादी का कारण बताते हैं। कुछ दिनों पहले रूद्र हनुमान के चित्र को इन्होने निशाना बनाया था। इनका कहना था कि हनुमान के चित्र को देख कर हिंसा भड़कती है। इसी तरह एक पत्रकार ने बाघ की खाल पहनकर बैठे गणेश जी की मूर्ति को उग्रवादी बताया था। तेजस्वी के आयुध पूजा वाले चित्र को उनके तथाकथित ‘हिंसक अतीत’ से जोड़ा जा रहा है।

टेरर फंडिंग: 11 हुर्रियत नेताओं की संपत्ति होगी जब्त, गिलानी के दामाद का नाम भी शामिल

आतंक की फंडिंग से बनी प्रॉपर्टी पर मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर ली है। सरकार का ये ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ लश्कर के आका हाफिज़ सईद के पैसों से बनाई गई हुर्रियत नेताओं की प्रॉपर्टियों पर होगा। सरकार ने हुर्रियत के सभी नेताओं की प्रॉपर्टी जब्त करने का फैसला किया है। सरकार ने इसके लिए कई प्रॉपर्टी की पहचान भी कर ली है।

बता दें कि टेरर फंडिंग मामले में शामिल हुर्रियत के 11 नेता सरकार के निशाने पर हैं। इन नेताओं पर आतंक की फंडिंग के जरिए करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाने का आरोप है। इनमें हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद का नाम भी शामिल है, जिसका केस दिल्ली की कोर्ट में भी चल रहा है। हुर्रियत के इन नेताओं ने पाकिस्तान से घाटी और देश में आतंक फैलाने के लिए मिल रहे पैसों से ये प्रॉपर्टी खड़ी की है।

सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ फंटूश, नईम अहमद खान, फ़ारुख अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शहीदुल इस्लाम, पाक में मौजूद हिज्बुल चीफ सैय्यद सलाउद्दीन, अकबर खंडी, राजा मेहराजुद्दीन, पीर सैफुल्ला, ज़हूर अहमद वताली समेत 11 अलगाववादियों की संपत्ति जब्त होगी।

जानकारी के मुताबिक, सैयद अलीशाह गिलानी के दामाद की हॉउस न.119 HIG ग्रीन पार्क बेमिना रोड की प्रॉपर्टी जब्त होगी। शहीदुल इस्लाम की मजीब बाग, श्रीनगर की प्रॉपर्टी, फ़ारुख अहमद डार उर्फ़ बिट्टा कराटे की नसीम बाग, श्रीनगर की प्रॉपर्टी जब्त होने वाली है। इसके साथ ही नईम अहमद खान की श्रीनगर के इब्राहिम कालोनी में मौजूद प्रॉपर्टी, मोहम्मद अकबर खंडीय की मलोरा की इस्लाम उल बाना की प्रॉपर्टी जब्त होने वाली है।

सरकार की तरफ से कश्मीर घाटी में आतंकवाद पर नकेल कसने की पूरी कोशिश की जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 मार्च को प्रवर्तक निदेशालय ने टेरर फंडिंग मामले में जम्मू कश्मीर में सईद सलाऊद्दीन की 13 संपत्ति जब्त की थी। गौरतलब है कि टेरर फंडिंग के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम गिलानी और मीरवाइज उमर फारुक से भी पहले पूछताछ कर चुकी है।

‘खतना’ ने ली 5 महीने के मासूम की जान, दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत

इटली में एक 5 महीने के मासूम को उस समय अपनी जान से हाथ धोना पड़ा जब उसके माँ-बाप ने घर में ही उसका खतना करने का प्रयास किया। इसकी खबर की जानकारी इटली की मीडिया ने रविवार (मार्च 24, 2019) को दी।

एएनएसए न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक 5 महीने के बच्चे को शुक्रवार (मार्च 22, 2019) को बोलोन्या के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने के कारण हॉलीकॉप्टर से लाया गया, जहाँ उसी रात बच्चे की मौत हो गई। पूरे मामले की जाँच के लिए जाँच अधिकारियों ने बच्चे के शव का परीक्षण किया। जिसके बाद बच्चे की मौत के कारण का खुलासा हुआ।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि विदेशों में खतना के कारण किसी मासूम ने अपनी जान गवाई हो। पिछले साल दिसंबर में भी रोम में इस प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए एक 2 साल के बच्चे के शरीर से अधिक खून बह जाने के कारण मृत्यु हो गई थी। जबकि उस बच्चे का जुड़वा भाई भी लगभग मरने ही वाला था लेकिन गहन उपचार के बाद उसकी जान को बचा लिया गया था।

इस्लामिक मज़हब में खतना एक प्रचलित रिवाज है। हालाँकि, इटली में रोमन कैथोलिक लोगों द्वारा इसका अनुसरण नहीं होता लेकिन वहाँ रह रहे मुस्लिम शरणार्थियों के द्वारा ऐसा लगातार किया जाता है। इटली जैसे देश में कुछ लोगों के लिए डॉक्टर की देख-रेख में खतना कराना बहुत महँगी प्रक्रिया हैं। इसके अलावा इटली के कुछ अस्पतालों के डॉक्टर बच्चे के 4 साल पूरे होने से पहले खतना करने से भी मना कर देते है।

इस संदर्भ में पूरे मामले की गंभीरता को जानने के बाद भी इटली (AMSI) में विदेशी डॉक्टरों के संघ के संस्थापक, फोड ओदी ने स्वास्थ्य अधिकारियों से अपील की है कि वे सस्ते दामों पर खतने की अनुमति दें। बता दें कि इस रिवाज के चलते कई बच्चों ने अपनी जाने गवाई हैं, भारत में अभी पिछले महीने ही गलत तरीके से दो बार खतना होने के कारण नवजात की मौत हुई थी।

फुरकान और परवेज़ ने दुष्कर्म के बाद पंचायत में लगाई युवती की बोली, अश्लील वीडियो बनाकर पति को भेजा, गाँव में तनाव

यूपी के मेरठ में भरी पंचायत में एक दुष्कर्म पीड़िता की इज्जत की बोली लगाने का शर्मनाक मामला सामने आया है। दौराला क्षेत्र के एक गाँव में एक समुदाय विशेष के दो युवकों, फुरकान व परवेज ने युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी वीडियो बनाई और इसके बाद युवती की अश्लील वीडियो उसके पति को भेजकर उसकी शादी तुड़वा दी। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में पंचायत हुई तो आरोपित पक्ष ने युवती की इज्जत की बोली लगा दी। इस पर युवती के परिजनों ने आरोपित युवकों को पीट दिया, जिससे दोनों पक्षों में तनाव हो गया। सूचना पर पहुँचे SP सिटी, दौराला CO ने मामला शांत कराकर गाँव में PAC तैनात कर दी है।

थाना क्षेत्र के एक गाँव निवासी समुदाय विशेष के दो युवकों ने एक साल पहले गाँव की युवती से दुष्कर्म किया, उसकी अश्लील वीडियो भी बना ली। आरोप है कि दोनों युवक युवती को अश्लील वीडियो व फोटो को वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करते थे। कुछ दिनों पहले युवती की शादी हो गई। समुदाय विशेष के आरोपित युवकों ने अश्लील वीडियो उसके पति को भेज दिया। इससे युवती की शादी टूट गई और उसका पति उसे मायके छोड़ गया।

रविवार (मार्च 24, 2019) शाम युवती के परिजनों और आरोपित युवकों के परिजनों के साथ ग्राम प्रधान के आवास पर पंचायत हुई। पंचायत में कोई निर्णय नही हो पाया। सोमवार (मार्च 25, 2019) को फिर से पंचायत हुई। इस दौरान आरोपित युवकों के परिजनों ने युवती के परिजनों को ₹2.5 लाख देने की पेशकश की। इस पर युवती के परिजन भड़क गए और उन्होंने आरोपित युवकों के साथ मारपीट कर दी। गाँव में सांप्रदायिक झगड़े की सूचना पर पुलिस में हड़कंप मच गया।

इसके बाद एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह, सीओ दौराला जितेन्द्र सरगम, दौराला एसओ रितेश कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुँचे और किसी तरह लोगों को शांत कराया। पीड़ित युवती ने गाँव निवासी फुरकान व परवेज पर जबरन दुष्कर्म करने, अश्लील वीडियो व फोटो के बल पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए दौराला थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित युवकों को हिरासत में लिया है।

बता दें कि गाँव में दोनों पक्षों में समझौता कराने के लिए दो दिनों से पंचायत चल रही थी लेकिन सोमवार को पंचायत में फुरकान व परवेज द्वारा युवती की इज्जत की बोली लगाई गई तो मामला बिगड़ गया जिससे दोनों समुदाय के लोग-आमने सामने आ गए।

घटना के बाद गाँव में माहौल गर्म है। ग्रामीणों ने दोनों आरोपितों का सामाजिक बहिष्कार कर गाँव से निकालने की माँग की है। घटना से सभी ग्रामीण समुदाय विशेष के आरोपित फुरकान और परवेज के खिलाफ हैं। हालाँकि, किसी सांप्रदायिक हिंसा की आशंका को टालने के लिए अभी भी गाँव में पुलिस बल तैनात है।

राजीव-सोनिया के प्रस्तावक के बेटे कॉन्ग्रेस की ‘गद्दारी’ से दुखी, राहुल के खिलाफ लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

लोकसभा चुनाव 2019 के जरिए सत्ता में वापसी की राह देख रहे कॉन्ग्रेस को उनके ही गढ़ अमेठी में तगड़ा झटका लगा है। पीढ़ियों से कॉन्ग्रेस के वफादार रहे हाजी मोहम्मद हारून राशीद ने सोमवार (मार्च 25) को पार्टी नेतृत्व को ये घोषणा करते हुए चौंका दिया कि वह अमेठी से राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि हाजी मोहम्मद हारून राशीद के पिता हाजी सुल्तान खान जिले में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं। सुल्तान अमेठी निर्वाचन क्षेत्र से राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी के नामांकन के दौरान प्रस्तावकों में से एक रहे हैं। राशीद के पिता ने साल 1991 में राजीव गाँधी और 1999 के लोकसभा में सोनिया गाँधी के नामांकन पत्र पर बतौर प्रस्तावक हस्ताक्षर किया था।

हारून राशीद का कहना है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी में खुद को साइडलाइन महसूस कर रहे थे और स्थानीय नेतृत्व की वजह से अब पूरा समुदाय उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने बताया कि चुनाव में उतरने के पीछे अमेठी में विकास का ना होना है। राशीद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से अमेठी के विकास को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं हुआ। अमेठी की धरती पर आकर देखा जा सकता है कि ये कितना पिछड़ा हुआ है। इसके साथ ही राशीद ने कहा कि उन्होंने 70 साल से अधिक समय तक कॉन्ग्रेस को अपना समर्थन दिया, मगर अब उन्हें एहसास हो रहा है कि पार्टी अमेठी में विकास ही नहीं करना चाहती है। इसलिए उन्होंने अमेठी के बेहतर भविष्य के लिए राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

हारून का दावा है कि अमेठी में 6.5 लाख अल्पसंख्यक मतदाता हैं और वह सभी कॉन्ग्रेस के खिलाफ वोट करेंगे। गौरतलब है कि अमेठी में राहुल गाँधी को इस बार भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी से कड़ी टक्कर मिल रही है।

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में ED को मिली बड़ी कामयाबी, एक और दलाल सुशेन गुप्ता गिरफ्तार

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक और बड़ी सफलता मिली है। ED ने एक और बिचौलिए सुशेन मोहन गुप्ता को कल रात (मार्च 25, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। उसे आज दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गुप्ता से जाँच एजेंसी ED कई बार पूछ-ताछ कर चुकी है। मगर वह जाँच में सहयोग नहीं कर रहा था इसी वजह से उसे गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि गुप्ता अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे समेत कई रक्षा सौदों में शामिल रहा है। उसे मंगलवार को यहाँ विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। ईडी इस मामले में वकील गौतम खेतान और ब्रिटिश बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को पहले ही गिरफ्तार कर चुका है।

इससे पहले VVIP चॉपर सौदे के मामले में आरोपी बनाए गए दुबई के कारोबारी राजीव सक्सेना अब सरकारी गवाह बन गए हैं। सीबीआई की स्पेशल अदालत ने उन्हें सरकारी गवाह बनने की इजाजत दे दी थी। ED के अधिकारियों ने बताया कि मामले में हाल ही में सरकारी गवाह बने राजीव सक्सेना के खुलासों के आधार पर गुप्ता की भूमिका सामने आई। राजीव सक्सेना को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित किया गया था और ईडी ने यहाँ उसे गिरफ्तार किया था।

उन्होंने बताया कि ऐसा संदेह है कि गुप्ता के पास वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की खरीद में भुगतान संबंधी कुछ सूचनाएँ है और उसके संपर्कों का पता लगाया जाना है। उन्होंने बताया कि इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि एक जनवरी 2014 को भारत ने भारतीय वायु सेना को 12 AW-101 VVIP हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति करने के लिए ब्रिटेन की फिनमैकेनिका की अनुषंगी इकाई अगस्ता वेस्टलैंड के साथ सौदा रद्द कर दिया था। भारत ने उस पर सौदे की शर्तों का उल्लंघन करने और सौदा हासिल करने के लिए 423 करोड़ रुपए की रिश्वत देने के आरोप लगाए थे।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और ईडी ने मामले में कई आरोपपत्र दाखिल किए हैं और पूर्व वायुसेना प्रमुख एस पी त्यागी तथा उनके परिवार के सदस्यों समेत कई लोगों को बतौर आरोपित नामजद किया है।

जयाप्रदा भाजपा में शामिल, ‘भैया’ आजम खां के खिलाफ ठोक सकतीं हैं ताल

तमाम कयासों-अटकलों और हाँ-ना के बाद आखिरकार आज अभिनेत्री जयाप्रदा भाजपा में शामिल हो ही गईं। काफी समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे ऐसा कर सकतीं हैं। संकेत तभी ही मिल गए थे जब जयाप्रदा के राजनीतिक गुरु और सपा के पूर्व क्षत्रिय क्षत्रप अमर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान के तहत अपने ट्विटर हैण्डल पर ‘चौकीदार’ अपने नाम में जोड़ा था। दरअसल अपने पूरे राजनीतिक कैरियर में जयाप्रदा अपने गुरु अमर सिंह की ही लकीर पर चलती आईं हैं- जब अमर सिंह को सपा की आतंरिक कलह ने किनारे कर दिया था तो जयाप्रदा को भी पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।

एनटीआर लाए राजनीति में

आज जयाप्रदा की राजनीतिक निष्ठा यद्यपि अमर सिंह के साथ मानी जाती है पर एक समय एनटी रामा राव उन्हें तेदेपा (तेलुगु देशम पार्टी) में काफी आग्रह के बाद लाए थे। तेदेपा ने ही जयाप्रदा को 1996 में राज्यसभा भी भेजा। पर फिर जयाप्रदा और तेदेपा सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू के राजनीतिक मत नहीं मिले और जयाप्रदा ने तेदेपा से इस्तीफा दे दिया।

सपा में पारी  

समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद जयाप्रदा ने रामपुर लोकसभा सीट 85000 मतों से जीती। पर यहाँ उनके राजनीतिक गुरु बने अमर सिंह की रामपुर के ‘किंग’ आजम खां से नहीं बनती थी, इसलिए जयाप्रदा के भी रिश्ते आजम खां से कभी सहज नहीं रहे।

2010 में जब अमर सिंह को पार्टी के महासचिव रहते हुए भी अन्दर के ‘सपोर्ट’ की आवश्यकता पड़ी तो जयाप्रदा उनके पक्ष में खुल कर उतर आईं- और पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें भी सपा सुप्रीमो ने निष्कासित कर दिया।

2014 में उन्होंने रालोद का झंडा थामा और बिजनौर का लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के कुँवर भारतेन्द्र सिंह से पार न पा सकीं।

आजम खां से अदावत  

आजम खां और जयाप्रदा की तू-तू-मैं-मैं सपा के भीतर की ‘अर्बन लेजेंड’ है। 2004 में 85000 मतों से बाजी मारने वालीं जयाप्रदा की जीत का अंतर 2009 में गिरकर 30000 बचा। इसके पीछे भी आजम खां का ‘हाथ’ हटा लेना कारण माना गया।

आमतौर पर जयाप्रदा आजम खां को ‘भैया’ कहतीं हैं, पर विवादित फिल्म पद्मावत जब रिलीज हुई तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि फिल्म के खलनायक अलाउद्दीन खिलजी को देखकर उन्हें आजम खां याद आ गए। आजम खां भी जयाप्रदा को ‘नचनिया’ और ‘घुंघरू वाली’ कह चुके हैं।

अंध-क्षेत्रीयता: 85% आरक्षण माँग कर दिल्ली को कश्मीर बनाना चाह रहे हैं केजरीवाल

चाहे वो कोई भी पार्टी हो, स्थानीय राजनीतिक दल अक्सर अधिक के अधिक वोट पाने के चक्कर में अंध-क्षेत्रीयता को बढ़ावा देते हैं। चाहे वो महाराष्ट्र में शिवसेना या मनसे हो या फिर बंगाल में तृणमूल। इन दलों को ऐसा लगता है कि स्थानीय लोगों को ये एहसास दिला कर अपने पक्ष में लामबंद किया जा सकता है कि ‘बाहरी’ राज्यों के लोग कथित रूप से उनका हक़ मार रहे हैं। तमिलनाडु में हिंदी के विरुद्ध छेड़ा गया आंदोलन, कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को अलग धार्मिक संप्रदाय बनाने की कोशिश, महाराष्ट्र में बिहारियों को पीट कर भगाना, असम से उत्तर भारतीयों को निकालना- ये सब उसी अंध-क्षेत्रीयता के रूप हैं। लेकिन, अभी तक ये गूँज दिल्ली नहीं पहुँची थी। वैसे तो कश्मीर को छोड़ दें तो भारत का कोई भी नागरिक देश के किसी भी हिस्से में बस सकता है।

भारत के किसी भी नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में बिना रोक-टोक शिक्षा हासिल करने, नौकरी करने और रहने का अधिकार है। असम का कोई नागरिक तमिलनाडु में नौकरी कर सकता है। कोई बंगाली आंध्र प्रदेश के किसी कॉलेज में दाखिला ले सकता है। ऐसी ही हमारे देश की व्यवस्था है। और, दिल्ली तो इस विशाल देश की राजधानी है, देश का सबसे व्यस्त क्षेत्र है। यहाँ देश के कोने-कोने से लोग आते हैं और रहते हैं। लेकिन अब अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली को भी कश्मीर बनाने की वकालत शुरू कर दी है। आज कश्मीर अशांत है, वहाँ आतंकी हमले होते हैं, वहाँ से कश्मीरी पंडितों को भगा दिया जाता है, वहाँ सेना की तैनाती रखनी पड़ती है, यह सब क्यों?

ऐसा इसीलिए, क्योंकि कश्मीर में देश के दूसरे हिस्से के लोग बस नहीं सकते। वहाँ उन्हें ज़मीन ख़रीदने का अधिकार नहीं है। अगर भारत के अन्य हिस्से के लोग भी कश्मीर में जाकर बसते तो शायद आज कश्मीर की ये हालत न होती। कश्मीर पुराने समय में शांत था क्योंकि वहाँ विविधता थी, वहाँ हिन्दू, बौद्ध और मुस्लिम सभी थे। आज़ादी के बाद हमारे नीति-नियंताओं की लापरवाही के कारण वो विविधता ख़त्म हो गई। यहाँ हम केजरीवाल की बात करते हुए ये सब इसीलिए बता रहे हैं क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसा ही बयान दिया है जो इस डर को जायज बनाता है। आगे बढ़ने से पहले अरविन्द केजरीवाल के इस बयान को देखते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि उन्होंने क्या कहा और उसका परिपेक्ष्य क्या था?

अरविन्द केजरीवाल का 85% आरक्षण वाला रोना

पूर्वी दिल्ली से लोकसभा प्रत्याशी आतिशी के लिए चुनाव प्रचार करते हुए आप सुप्रीमो ने नौकरियों में दिल्ली के लोगों को आरक्षण देने की बात कही। पूर्ण राज्य का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठा रहे केजरीवाल ने अब नौकरियों के बहाने राजनीति खेलने की ठान ली है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि रोज़गार एक ऐसा मुद्दा है जिसका उपयोग कर किसी को भी बरगलाया जा सकता है। कॉन्ग्रेस भी इसी मुद्दे पर खेल रही है। उन्हें पता है कि बेरोज़गारी इस देश में दशकों से एक समस्या है और वो इसे अपना हथियार बनाना चाहते हैं। वो अपने हाथ में जो है, वो तो करते नहीं और जो हाथ में नहीं है, उसे करने का दावा कर चुनाव जीतना चाहते हैं। इसकी एक बानगी देखिए। जून 2018 में आई इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 42% पद रिक्त हैं।

शिक्षा व्यवस्था तो दिल्ली सरकार के आधीन है और केजरीवाल सरकार हैदराबाद से लेकर अंडमान-निकोबार तक विज्ञापन देकर दिल्ली के स्कूलों और विद्यार्थियों की सफता का अपने पक्ष में प्रचार करती है। दिल्ली के स्कूलों में 66,736 शिक्षकों के लिए जगह है लेकिन अभी इनमें से 38,926 सीटों को ही भरा जा सका है। दिल्ली सरकार की विफलता का आलम देखिए कि उन्होंने सिर्फ़ 58.2% सीटों को ही भरा। उसमे भी 17,000 से अधिक तो अतिथि शिक्षक हैं। आप बाकी के 41% सीटों पर भर्तियाँ कर योग्य लोगों को रोज़गार तो दे सकते हो न? उसके लिए तो पूर्ण राज्य की आवश्यकता नहीं है? तो फिर आरक्षण बीच में कहाँ से आ गया? दिल्ली के 1100 स्कूलों में 25,000 अतिरिक्त शिक्षकों की ज़रूरत है

जहाँ आपके पास 66,000 शिक्षकों के लिए जगह है, वहाँ आपके पास सिर्फ़ 21,000 रेगुलर शिक्षक हैं, मतलब सिर्फ़ 31% और आप पूर्ण राज्य बन जाने पर 85% आरक्षण की बात करते हो! अरविन्द केजरीवाल ने कहा:

“दिल्ली की नौकरियों और यहाँ के कॉलेजों में दिल्ली वालों को आरक्षण मिलना चाहिए। दिल्ली के छात्र/छात्राओं के लिए यहाँ के कॉलेजों में 85 प्रतिशत सीटें रिजर्व होनी चाहिए। दिल्ली के पूर्ण राज्य बनते ही मैं इसे लागू करूँगा। कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर दिया कि ठेके पर काम करने वालों की नौकरी पक्की की जाए लेकिन वो फाइल भी केंद्र सरकार लेकर बैठी है। दिल्ली पूर्ण राज्य बनेगा तो 24 घंटे में नौकरी पक्की करके दिखा देंगे।”

ख़ुद अरविन्द केजरीवाल का जन्म हरियाणा स्थित भिवानी में हुआ था। पढ़ाई के लिए वो पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में गए। नौकरी उन्होंने झारखण्ड के जमशेदपुर में की। समाज सेवा उन्होंने कोलकाता में की। राजनीति वो दिल्ली में कर रहे हैं। हाँ, इलाज कराने वो बंगलुरु जाते हैं। इसके लिए उन्हें किसी आरक्षण की ज़रूरत पड़ी क्या? बाहरी और स्थानीय की राजनीति का खेल शुरू कर चुके केजरीवाल राजनीति के दलदल में इतने गहरे उतर चुके हैं कि कहीं जनता उन्हें भी बाहरी बना कर निकाल न फेंके! जब मूल रूप से एक हरियाणवी दिल्ली का मुख्यमंत्री बन सकता है, पंजाबी परिवार से आने वाली कपूरथला में जन्मीं शीला दीक्षित दिल्ली की सबसे लम्बे कार्यकाल वाली मुख्यमंत्री रह सकती हैं, एक बिहारी (मनोज तिवारी) दिल्ली में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बन सकता है, तो दिल्ली के बाहर से आने वालों को यहाँ पढ़ने और नौकरी करने से क्यों रोका जाए?

महाराष्ट्र वाली घटना से सीखें केजरीवाल

2008 में कुछ ऐसा ही समय आया था जब मनसे और सपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प का मराठी क्षेत्रीय दलों ने ख़ूब फ़ायदा उठाया और परिणाम स्वरूप 15,000 से भी अधिक उत्तर भारतीयों को नासिक और 25,000 से भी अधिक को पुणे छोड़ कर जाना पड़ा था। इनमें से अधिकतर छोटे कामगार थे, टैक्सी ड्राइवर्स थे और छात्र थे। इस से हानि स्थानीय सिस्टम को होती है। इसकी एक बानगी देखिए। इन विवादों के कारण सबसे बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों में से एक इनफ़ोसिस ने 3000 पदों को चेन्नई शिफ्ट कर दिया था। इस से किसका घाटा हुआ? राजनीतिक दलों के इस अंध-क्षेत्रीयता वाले हंगामे के बीच पुणे को हानि हुई, जो चेन्नई का फ़ायदा बन गया। दिल्ली में तो भला कई कम्पनियाँ स्थित हैं, उनके दफ़्तर हैं, कारखाने हैं, कहीं केजरीवाल के आरक्षण वाली माँग के कारण दिल्ली कश्मीर न बन जाए।

कुल मिलाकर देखें तो अरविन्द केजरीवाल ने जब बात बनते नहीं देखा तो ये दाँव चल कर दिल्ली वासियों को अपने पाले में करने की कोशिश की है। आज जब एक ग्लोबल विश्व की परिकल्पना साकार होती दिख रही है, दुनिया तेज़ी से सम्पूर्ण डिजिटलाइजेशन की तरफ बढ़ रही है, अरविन्द केजरीवाल पुरानी संकीर्णता को ज़िंदा कर के चुनावी फसल काटने का बीड़ा उठाए हुए हैं। जिस दिल्ली ने देश के कोने-कोने से लोगों को बुला कर अपना बना लिया, उस दिल्ली में ये चुनावी संकीर्णता शायद ही चले। साथ ही AAP सरकार यह भी जवाब दे कि ग़रीबों को केंद्र सरकार द्वारा दिया गया 10% आरक्षण अभी तक दिल्ली में क्यों रोक कर रखा गया है?

‘आप इस्लाम कबूल करें, मेरी इच्छा है कि मैं जन्नत में आपके साथ रहूँ’, न्यूजीलैंड PM से किसने कही मन की बात?

न्यूजीलैंड की मस्जिदों पर हुए हमले के बाद न्यूजीलैंड की सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने मुस्लिम समुदाय के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की, जिस कारण यह सद्भावना का प्रयास दुनियाभर में सराहा गया है। लेकिन एक वीडियो सोशल मीडिया में आजकल चर्चा में है, जिसमें एक मुस्लिम युवक को भावनाओं में बहकर न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को इस्लाम स्वीकारने की सलाह देते हुए देखा जा रहा है। साथ ही, इस युवक ने यह इच्छा भी व्यक्त की है कि वो मिस अर्डर्न के साथ जन्नत में रहे।

एक मुस्लिम युवक और पीएम अर्डर्न के बीच एक संवाद वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को इस्लाम अपनाने के लिए आमंत्रित किया है। मिस अर्डर्न ने युवक को ध्यान से सुना और मुस्कुराते हुए इस्लाम में प्रवेश करने के उनके निमंत्रण का जवाब भी दिया।

शख्स ने कहा, “सच कहूँ, जिसने मुझे यहाँ लाया है वह आप हैं। मैं पिछले तीन दिनों से हर दिन रो रहा हूँ। मैं अल्लाह से एक दुआ कर रहा हूँ और मैंने कहा कि काश अन्य नेता आपके नेतृत्व कौशल को देख सकें और मेरी एक और इच्छा है कि मैं आशा करता हूँ कि एक दिन आप इस्लाम में प्रवेश करें। मेरी इच्छा है कि मैं जन्नत में आपके साथ रहूँ।”

इस पर, मिस अर्डर्न ने जवाब देते हुए कहा, “इस्लाम मानवता सिखाता है और मुझे लगता है कि यह मेरे पास है।”

विगत दिनों न्यूजीलैंड में हुए इस हमले में मारे गए परिजनों के साथ पीएम अर्डर्न की सहानुभूति की दुनियाभर में खूब प्रशंसा हुई। आतंकी हमले के बाद पीएम ने मस्जिद का दौरा किया और शोक में डूबे परिवारों से मुलाकात की। ऐसे ही एक पीड़ित परिवार से मुलाकात के लिए पीएम जब हिजाब पहनकर पहुँची तो विश्वभर के नेताओं ने उनकी खूब तारीफ की थी।

कड़ी मेहनत का भारत को मिला परिणाम, अक्षय ऊर्जा मामले में चीन से निकला आगे

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF)द्वारा सोमवार (मार्च 25, 2019) को जारी रिपोर्ट में बताया गया कि अक्षय ऊर्जा के मामले में 115 देशों की सूची में भारत ने दो पायदान की बढ़त बनाई है। इस सूची में भारत को 76वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। ब्रिक्स देशों में केवल भारत ही एक ऐसा देश है जिसकी स्थिति में अब तक इस मामले में सुधार देखा गया है। पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिहाज से भारत की अक्षय ऊर्जा बढ़ाने की यह गति निसंदेह की सराहनीय है। जिसका उल्लेख रिपोर्ट में भी है। भारत ने इस सूची में चीन को पछाड़ दिया है। चीन इस सूची में 82वें पायदान पर है।

भारत की अक्षय ऊर्जा मामले में हुई इस बढ़त के लिए राजनैतिक नेतृत्व की भी तारीफ़ जरूर होनी चाहिए। क्योंकि भारत सरकार द्वारा लगातार पर्यावरण के लिए उठाए जाने वाले कदमों के कारण ही भारत की अक्षय ऊर्जा की क्षमता 73 गीगावाट हुई है, जोकि देश की कुल ऊर्जा उत्पादन का 20 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जटिल और पुराने ऊर्जा सिस्टम होने के बावजूद भी भारत तेजी से अक्षय उर्जा की ओर कदम बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।

आज भारत में अक्षय ऊर्जा का उत्पादन अब परंपरागच ऊर्जा से अधिक होने लगा है। जिसका मुख्य कारण सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी है। देश में अक्षय ऊर्जा के विस्तार को देखकर लगता है कि भारत इस क्षेत्र में और अधिक तेजी से विकास करेगा। इसके लिए सुदूर के क्षेत्रों में सुरक्षाबल भी स्थानीय लोगों को अक्षय ऊर्जा के प्रयोंग के लिए जागरूक करने के लिए प्रयासरत है।

WEF की रिपोर्ट के अनुसार अक्षय ऊर्जा उत्पादन के मामले में शीर्ष स्थानों पर 10 यूरोपीय देश हैं।

  • स्वीडन
  • स्विटजरलैंड 
  • नॉर्वे
  • फिनलैंड
  • डेनमार्क
  • ऑस्ट्रिया
  • यूनाइटेड किंगडम
  • फ्रांस
  • नीदरलैंड
  • आइसलैंड

अक्षय ऊर्जा क्या है?

अक्षय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो प्रदूषण का कारण नहीं बनती, तथा जिनके स्त्रोतों का क्षय नहीं होता या फिर जिनके स्रोतों का पुन: इस्तेमाल होता रहा है। पवन ऊर्जा, जलविद्युत ऊर्जा, ज्वारभाटा से प्राप्त ऊर्जा, बायोमास, सौर ऊर्जा आदि अक्षय ऊर्जा के कुछ उदाहरण हैं।

कुछ समय पहले आए सरकार के आँकड़ों के अनुसार देश की अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 58, 300 मेगावॉट है। सरकार ने 2022 तक इसे बढ़ाकर 1,75,000 मेगावाट रखने का लक्ष्य रखा है। जिसमें 1,00,000 मेगावाट क्षमता सौर ऊर्जा की होगी। इसी के साथ बता दें कि आईए (अंतराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया था कि 2022 तक भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता दोगुने से अधिक हो जाएगी।