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RLD ने क्यों चुनाव आयोग से कहा, हेमा मालिनी के विज्ञापनों पर रोक लगाई जाए

हेमा मालिनी के ब्रांड प्रचार विज्ञापनों के खिलाफ रालोद चुनाव आयोग पहुँच गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी एल वेंकटेश्वरलु को लिखे पत्र में रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे ने यह माँग रखी है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मथुरा लोकसभा क्षेत्र की वर्तमान सांसद और आगामी लोकसभा चुनावों में इसी सीट से प्रत्याशी हेमा मालिनी जानी-मानी अभिनेत्री और नृत्यांगना भी हैं, और इसी नाते केंट नामक आरओ वॉटर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनी ने उन्हें इस उत्पाद के प्रचार के लिए अनुबंधित किया हुआ है।

अपने पत्र में हेमा मालिनी को दिखाने वाले केंट के विज्ञापनों का जिक्र करते हुए अनिल दुबे ने इन्हें चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। उन्होंने यह भी माँग की कि या तो इन विज्ञापनों पर रोक लगाई जाए, या इनके प्रसारण का खर्च हेमा मालिनी के चुनावी खर्च में शामिल कर दिया जाए।

उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी एल वेंकटेश्वरलु से संपर्क कर मीडिया ने इस मामले की प्रगति जाननी चाही तो उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले का जल्दी-से-जल्दी निपटारा कर दिया जाएगा।

अयोध्या विवादित ढाँचा मस्जिद नहीं, घर या मंदिर को जबरन छीनकर अल्लाह का घर नहीं बनाया जा सकता: महमूद मदनी

अयोध्या में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद में मस्जिद पक्ष को गहरा झटका लगा है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने बयान दिया है कि अयोध्या के विवादित ढाँचे को मस्जिद नहीं माना जा सकता। मदनी ने यह भी कहा कि श्रीराम देश की बहुसंख्यक आस्था के प्रतीक हैं। कट्टरपंथियों द्वारा श्रीराम के अनादर के बारे में उन्होंने दोटूक कहा कि इसकी इजाज़त कतई नहीं दी जा सकती।

मदनी के अनुसार किसी के घर या मंदिर को जबरन छीनकर अल्लाह का घर नहीं बनाया जा सकता। बीबीसी गुजराती के एक कार्यक्रम में अहमदाबाद में मदनी ने यह बयान दिया। साथ ही उन्होंने किसी को सेक्युलर, किसी को कम्युनल का ‘सर्टिफिकेट’ बाँटने पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार हर पक्ष का अपना एक नजरिया होता है।

किसी भी पक्ष की ‘हार’ न हो, इसलिए महमूद मदनी ने आपसी बातचीत द्वारा इस मामले का हल निकालने का भी सुझाव दिया। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायलय ने भी लगभग 60 साल से अदालत में चल रहे इस मामले को एक बार फिर बातचीत के सुपुर्द कर दिया है। साथ ही मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में एक मध्यस्थता पैनल का भी निर्माण मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने किया है।

सामान्यतः मौलाना मदनी प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोधी माने जाते हैं। वे चौधरी अजित सिंह के राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) द्वारा राज्यसभा भी भेजे जा चुके हैं, और मोदी के पक्ष में बयान देने वाले गुलाम मोहम्मद वस्तानवी की दार-उल-उलूम से रुखसती में भी उनका हाथ होने की खबर मीडिया में आई थी।

अयोध्या विवाद: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आपात बैठक, क्या इससे नया मोड़ लेगी मध्यस्थता की पहल?

अयोध्या मामले में एक ताजा मोड़ के तहत ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक आपात बैठक बुलाई है। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार रविवार सुबह ही वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है। हालाँकि, क्यों मीटिंग बुलाई गई है अभी इसका खुलासा नहीं किया गया है।

पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी 51 सदस्यों के अतिरिक्त सुन्नी सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड के प्रतिनिधियों के भी इस बैठक में शामिल होने की सम्भावना जताई जा रही है।

ज्ञात हो कि गत 13 मार्च को ही अयोध्या विवाद को लेकर बने मध्यस्थता पैनल ने अपनी पहली बैठक की जिसमें सभी पक्षों के विचार पैनल ने सुने। सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में बने इस पैनल के अन्य सदस्य आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर (आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के अध्यक्ष) व वरिष्ठ अधिवक्ता व मध्यस्थता विशेषज्ञ श्रीराम पाँचू हैं।

सुप्रीम कोर्ट में पाँच जजों की पीठ के आदेश पर गठित इस पैनल को मध्यस्थता के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं।

अब देखना ये है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा बुलाई गई इस आपात बैठक का क्या मतलब है और इसका मध्यस्थता पर क्या असर होगा?

इंडियन प्लेयर के जबरदस्त छक्के से टूट गई थी फाइव स्टार होटल की खिड़की और IPL में अब…

आईपीएल शुरू हो चुका है और उसके साथ ही क्रिकेट के सबसे रंगीन मौसम का आग़ाज़ भी हो चुका है। पहले क्रिकेट का नाम लेते ही रन, शतक और अर्धशतक की बातें होती थी लेकिन आईपीएल के उद्भव के बाद ये अब छक्कों-चौकों का त्यौहार बन चुका है। हर बाल पर बाउंड्रीज की चाहत लिए दर्शक भी इसी उम्मीद से टीवी और इंटरनेट से बँधे रहते हैं। और अगर हर बॉल पर छक्के लग रहें हों तो कहना ही क्या! बल्लेबाज भी आज हर बॉल को छक्के के लिए ऊपर उठाना चाहता है। अज़ीबोग़रीब शॉट्स के इस दौर में अगर छक्के लगाने से ही रन बन रहे हैं तो वही सही। दर्शकों का मनोरंजन बॉलर्स द्वारा विकेट लेने से नहीं होता बल्कि 6 बॉल पर 6 छक्के लगने से, यह अब एक जानी हुई बात है। कृष गेल, एबी डिविलियर्स और एमएस धोनी जैसे बल्लेबाज़ आज छक्के लगाने के लिए मशहूर हो चुके हैं और उनके क्रीज पर उतरते ही दर्शक मनोरंजन की उम्मीद में तालियाँ पीटता है, जो उसे मिलता भी है।

लेकिन, क्या आपको पता है कि पहले छक्के लगाना इतना आम नहीं था? जिस तरह से आज एक नया बल्लेबाज़ भी आकर समाँ बाँध देता है और बड़े से बड़े गेंदबाज़ों की भी धुलाई कर देता है, पहले ऐसा नहीं होता था। पहले छक्के क्रिकेट की दुनिया में सरप्राइज पैकेज होते थे। पहले के दिनों में छक्कों की वही अहमियत थी जो आज कमोबेश फुटबॉल में गोल की है। इसके लिए आपको एक वाकये से रूबरू कराने की ज़रूरत है। टेस्ट क्रिकेट की दुनिया के महानतम बल्लेबाज़ डोनाल्ड ब्रैडमैन ने जब अपने करियर का पहला छक्का मारा था, तब एडिलेड में त्यौहार जैसा माहौल बन गया था। ऐसी ही ख़ुशियाँ मनाई गई थीं, जैसी आज किसी देश द्वारा विश्व कप जीतने के बाद मनाई जाती है। ग्राउंड के बारटेंडर ने सारे दर्शकों को मुफ़्त में कोल्डड्रिंक और चिप्स बाँटे थे।

छक्कों का क्रिकेट की दुनिया में ऐसा महत्व हुआ करता था! इसी तरह जब भारतीय बल्लेबाज़ के श्रीकांत ने वेस्टइंडीज के ख़तरनाक गेंदबाज़ पैट्रिक पैटरसन की बॉल पर गगनचुम्बी छक्का मारा था, तब उस छक्के से तिरुवनंतपुरम के एक पाँच सितारा होटल की खिड़की का काँच टूट गया था। आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि उस छक्के के कारण टूटी हुई काँच को होटल मैनेजर ने सँजो कर रखा। उसने उसकी मरम्मत कराने से इनकार कर दिया। छक्कों की दुर्लभता के कारण लोगों की इनके प्रति दीवानगी भी ऐसी ही थी। ब्रैडमैन ने अपने पूरे टेस्ट व फर्स्ट क्लास करियर में सिर्फ़ 6 छक्के मारे। इसमें से एक भारत के ख़िलाफ़ था और बाकी इंग्लैंड के ख़िलाफ़। अब आईपीएल पर वापस आते हैं।

अगर आँकड़ों की बात करें तो मुंबई इंडियंस ऐसी टीम है जिसने जब भी कप जीता, उस सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाए। मुंबई ने आईपीएल के छठे सीजन में 117, आठवें सीजन में 120 और दसवें सीजन में 117 छक्के लगा कर ट्रॉफी अपने नाम किया। अर्थात यह कि मुंबई ने जिस भी सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाए, उसने ट्रॉफी हासिल की। कई टीमों के मामले में छक्के लगाना कप की गारंटी नहीं है। आईपीएल के पहले सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाली पंजाब रनर-अप भी नहीं रही। हाँ, चेन्नई सुपर किंग्स ने तीसरे सीजन में सर्वाधिक 95 छक्के लगा कर पहली बार ट्रॉफी अपने नाम की। अव्वल तो यह कि आईपीएल के पाँचवे सीजन में सर्वाधिक छक्के लगाने वाली आरसीबी (बेंगलुरु) सर्वाधिक 118 छक्के लगाने के बावजूद शीर्ष 4 में भी जगह नहीं बना पाई। यह दिखाता है कि छक्के हमेशा जीत की गारंटी नहीं होते।

आईपीएल में अबतक सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले बल्लेबाज़ (साभार: IPLT20)

पूरे आईपीएल की बात करें तो क्रिस गेल छक्कों के मामले में बाकी के बल्लेबाज़ों से काफ़ी दूर खड़े नज़र आते हैं। आईपीएल में 292 छक्के लगा चुके गेल के आसपास भी कोई नहीं है। अब तक 292 छक्के लगा चुके गेल के बाद दूसरे नंबर पर आने वाले डिविलियर्स और उनके बीच 100 छक्कों से भी ज्यादा का अन्तर है, वो भी तब, जब डिविलियर्स ने गेल से ज्यादा मैच खेल रखे हैं। छक्कों के मामले में यह गेल के प्रभुत्व की कहानी कहता है। भारतीय बल्लेबाज़ों में एमएस धोनी के सबसे ज्यादा छक्के हैं, जो डिविलियर्स के बराबर ही है। इसके बाद रैना और रोहित शर्मा आते हैं, जो उनसे ज्यादा दूर नहीं हैं। कुल मिलकर देखें तो छक्कों के कारण ही गेल और डिविलियर्स जैसे बल्लेबाजों को देखने के लिए दर्शक उमड़ पड़ते हैं, भले ही वे उनकी फेवरिट टीम से न खेल रहें हों।

अतीत में छक्के लगाना इतना आम नहीं हुआ करता था। अब छक्के सरप्राइज़ पैकेज नहीं रहे। अब छक्के लगाना महान बनने की निशानी नहीं होती। भारत के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ माने जाने वाले वीरेंद्र सहवाग ख़ुद छक्कों के मामले में आईपीएल में कभी अव्वल नहीं रहे। आईपीएल के तीसरे सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप हासिल करने वाले पहले भारतीय सचिन तेंदुलकर भी आईपीएल के किसी सीजन में छक्कों के मामले में अव्वल नहीं रहे। आईपीएल में छक्कों की पहली बरसात ब्रैंडन मैकुलम ने की थी। अगर पूरे सीजन की बात करें तो उस समय दुनिया के सबसे ख़तरनाक सलामी बल्लेबाज़ों में से एक माने जाने वाले सनथ जयसूर्या ने पहले सीजन में सर्वाधिक 31 छक्के लगाए थे। इसके बाद के सीजनों में हैडेन, गेल, मैक्सवेल, कोहली और पंत जैसे बल्लेबाज़ रहे। लेकिन, ये भी इस बात की गारंटी नहीं कि सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज़ की टीम ही फाइनल में जीत दर्ज करेगी।

लेकिन हाँ, अगर आप सबसे कम छक्के लगाते हैं तो आईपीएल में आपकी कोई गुंजाईश नहीं है। अभी तक संपन्न हुए 11 सीजनों में 7 बार ऐसा हुआ है जब सबसे कम छक्के लगाने वाली टीम सबसे निचले पायदान पर रही हो। अर्थात यह कि अगर किसी टीम या प्लेयर को आज की क्रिकेट में फिट बैठना है तो उसके पास छक्के लगाने की क्षमता होनी चाहिए। अगर फुल टॉस बॉल आ रही हो तो आपके पास उसे सीधे स्ट्रैट या एक्स्ट्रा कवर पर उठाने की क्षमता होनी चाहिए। ऑफ में आ रही शार्ट बॉल को पॉइंट पर उठाने की कला जाने बगैर आपको आईपीएल में वाहवाही नहीं मिल सकती। आजकल अंतिम समय तक इन्तजार करने के बाद गेंद को छक्के के लिए उठा कर विपक्षी टीम को चौंका देने का चलन भी बढ़ा है।

अब वो ज़माना गया जब डॉन ब्रैडमैन के एक छक्के पर दर्शकों को मुफ़्त में कोल्डड्रिंक और चिप्स नसीब होती थी। अब वो ज़माना भी गया जब श्रीकांत के छक्के से टूटी काँच को सहेज कर रख दिया जाता था। अब यह आम है। छक्के मनोरंजन की गारंटी है और मनोरंजन से आईपीएल का पूरा टूर्नामेंट चल रहा है। 12वाँ सीजन शुरू हो चुका है, लुत्फ़ उठाइए।

सपना चौधरी और कॉन्ग्रेस की आँख-मिचौली: जो झूठ बोले, उसको कौआ काटे

कॉन्ग्रेस की समस्याएँ कम नहीं हो रही हैं। पार्टी एक तरफ ये प्रचार कर रही थी कि सपना चौधरी ने कॉन्ग्रेस ज्वाइन कर लिया है और उन्हें मथुरा सीट से उम्मीदवार बनाया जा रहा है। वहीं आज हरियाणवी डांसर सपना चौधरी ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने की खबरों से पूरी तरह इनकार कर दिया है। उन्होंने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात का खुलासा किया।

सपना चौधरी ने कहा कि मीडिया में उनसे जुड़ी जो तस्वीरें चल रही हैं, वो बहुत पुरानी हैं। उन्होंने आगे कहा, “मेरी कॉन्ग्रेस में जाने की कोई इच्छा नहीं है। मैं कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार नहीं करुँगी और मेरी राज बब्बर से कोई मुलाकात नहीं हुई है।”

सपना चौधरी ने ट्विटर एकाउंट को लेकर भी सफाई देते हुए कहा कि मेरा कोई ट्विटर एकाउंट नहीं है। मीडिया में जो तस्वीरें चल रही हैं, वो बहुत पुरानी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं एक कलाकार हूँ और फिलहाल राजनीति में जाने या चुनाव लड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। आश्चर्य की बात यह कि कई बड़े पत्रकार भी इस ख़बर को बिना वेरिफाई किए ट्विटर पर चला दिए थे। हालाँकि इनमें से ज्यादातर पत्रकार को यह लगता है कि कॉन्ग्रेस से जुड़ी कोई भी ख़बर हो, उसे प्रमुखता देनी चाहिए – और भक्त यह दूसरों को कहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट (फेक) के अनुसार ये कहा जा रहा था कि सपना चौधरी ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा से मुलाकात की। जबकि सपना ने भविष्य में भी कॉन्ग्रेस से जुड़ने की बात से इनकार कर दिया है।

सपना चौधरी के इनकार के थोड़ी देर बाद अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक दस्तावेज प्रकाशित करके इस इनकार का जवाब दिया है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया है कि यह सपना चौधरी के नाम और उस पर उनके हस्ताक्षर के साथ कॉन्ग्रेस सदस्यता फॉर्म की प्रति है।

फॉर्म के साथ, कॉन्ग्रेस ने कलाकार द्वारा भुगतान सदस्यता शुल्क की रसीद की प्रति भी जारी की। यूपी कॉन्ग्रेस के सचिव नरेंद्र राठी ने दावा किया कि सपना चौधरी ने खुद ही सदस्यता फॉर्म भरा है। यह ध्यान दिया जा सकता है कि राठी की उपस्थिति में कुछ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने वाली सपना चौधरी की तस्वीरें कल मीडिया द्वारा प्रकाशित की गई थीं। हालाँकि, सपना चौधरी ने दावा किया कि प्रियंका वाड्रा के साथ फोटो पुरानी है, लेकिन सपना ने नरेंद्र राठी के साथ अपनी तस्वीरों पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।

‘मेरी दोनों बेटियों का धर्मांतरण कर दिया, अब मुझे गोली मार दो’

होली की पूर्व संध्या पर दो किशोर हिंदू लड़कियों, 13 वर्षीय रवीना और 15 वर्षीय रीना का अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अपने उम्र से बहुत बड़े दूसरे समुदाय के पुरुषों से जबरन शादी करने के लिए मजबूर किया गया। हिन्दू किशोरियों पर हुए इस अत्याचार ने पूरे विश्व में लोगों को पाकिस्तान में हिन्दुओं के हालात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया।

लड़कियों के पिता का दिल दहला देने वाला वीडियो अब वायरल हुआ है। इसमें वो बेबस होकर दहाड़े मारकर रो रहे हैं और पुलिस के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने का अनुरोध कर रहे हैं। इनकी दोनों बेटियों का अपहरण कर लिया गया है और उनका धर्मांतरण कर निकाह करा दिया गया।

रवीना और रीना नामक नाबालिग हिंदू लड़कियों के पिता पुलिस स्टेशन के सामने रोए, गिड़गिड़ाए और विरोध भी किए। वायरल हुए वीडियो में पिता को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “आप मुझे गोली मार सकते हैं, मैंने बहुत सब्र किया, लेकिन अब मैं अपनी बेटियों के वापस आने तक यहाँ से नहीं जाऊँगा”।

इसी बीच, सिंध प्रांत के कई हिंदुओं ने कथित तौर पर अपहरणकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करने से इनकार करने के बाद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान में हिंदू देश के सबसे वंचित और सबसे ज्यादा सताए गए अल्पसंख्यकों में से एक हैं।

घटना के बाद, केंद्रीय विदेश मंत्री ने रविवार को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में होली की पूर्व संध्या पर दो हिंदू लड़कियों के अपहरण पर विवरण मँगाया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त से घटना पर रिपोर्ट भेजने को कहा है।

प्रियंका गाँधी ने ट्वीट कर पूछा गन्ना पर, योगी आदित्यनाथ ने समझा दिया पूरा खेती-किसानी

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने किसानों को लेकर योगी सरकार और मोदी सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका ने रविवार (24 मार्च 2019) को उत्तर प्रदेश में गन्‍ना किसानों के बकाए के भुगतान की समस्‍या का जिक्र करते हुए एक ट्वीट किया। प्रियंका ने ट्वीट करते हुए लिखा, “गन्ना किसानों के परिवार दिनरात मेहनत करते हैं। मगर उप्र सरकार उनके भुगतान का भी जिम्मा नहीं लेती। किसानों का 10000 करोड़ बकाया मतलब उनके बच्चों की शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और अगली फसल सबकुछ ठप्प हो जाता है। यह चौकीदार सिर्फ अमीरों की ड्यूटी करते हैं, गरीबों की इन्हें परवाह नहीं।”

प्रियंका गाँधी के ट्वीट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया। इसका जवाब देते हुए सीएम योगी ने दो ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हमारी सरकार जब से सत्ता में आई है हमने लंबित 57,800 करोड़ का गन्ना बकाया भुगतान किया है। ये रकम कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है। पिछली सपा-बसपा सरकारों ने गन्ना किसानों के लिए कुछ नहीं किया जिससे किसान भुखमरी का शिकार हो रहा था।”

दूसरे ट्वीट में सीएम योगी ने पूछा, “किसानों के ये ‘तथाकथित’ हितैषी तब कहाँ थे जब 2012 से 2017 तक किसान भुखमरी की कगार पर था। इनकी नींद अब क्यों खुली है? प्रदेश का गन्ना क्षेत्रफल अब 22 प्रतिशत बढ़कर 28 लाख हेक्टेयर हुआ है और बंद पड़ी कई चीनी मिलों को भी प्रदेश में दोबारा शुरू किया गया है। किसान अब खुशहाल हैं।”

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से प्रियंका समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़कर कॉन्ग्रेस के सरोकारों और चिंता को दिखाने की कोशिश कर रही हैं। चाहे वह भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर से मिलना हो या फिर गंगा में नाव यात्रा और मंदिरों में दर्शन-पूजन। इस नाव यात्रा के दौरान भी प्रियंका ने किसानो का हवाला देकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि चौकीदार गरीबों के नहीं, बल्कि अमीरों के होते हैं। बता दें कि राफेल डील को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पीएम मोदी के लिए ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया। जिसके जवाब में पीएम मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपेन की शुरुआत की थी।

चुनावी स्नैपशॉट: वोट उसी को जो दाढ़ी के साथ पैडिक्योर, मैनिक्योर और फेशियल भी कराएगा

ऋतुराज वसंत प्रेमी हृदयों को व्याकुल करने को प्रकट हुए, एवं मौसमी प्रेमियों ने चहुँओर हरित वातावरण से उत्साहित होकर, निकटवर्ती कवियों को धर दबोचा और उचित दरों पर पर प्रेम पत्र लिख कर पठाए ही थे। कठोर हृदय समाज की तनी हुई भृकुटियों से छुपते-छुपाते पत्र कमल-नयन, चंदन-वर्ण प्रियतमा की खिड़की पर पत्थर मे लपेट कर अभी भेजे ही गए थे। हाय, प्रेम पत्र के वाहक ढेले को फेंकने वाले प्रेमी के पाजामे के पायचों को जीर्ण शीर्ण करने वाले कुत्तों की गगनभेदी गर्जना और प्रेमी का हृदयरोगियों सा निनाद अभी थमा भी ना था।

ऐसे समय में जब प्रेमिका का उत्तर आया ही था और प्रेम प्रसंग उस खंड मे प्रविष्ट हो रहा था जब सत्तर के दशक के दक्षिणी फ़िल्मों के निर्देशक मटकों की क्यारियाँ और उत्तर के निर्देशक पुष्प-युगल ढूँढ लेते थे, चुनाव की घोषणा हो गई और आचार संहिता लागू हो गई। सब कुछ जहाँ जैसा था थम गया। प्रेमिका की आती हुई स्वीकृति अब मई की प्रतीक्षा में है। फटा पाजामा थामे हुए प्रेमी मेघदूतम के यक्ष की भाँति चुनाव स्लोगनो के माध्यम से प्रियतमा को सँदेश भेजने पर विचार कर रहा है किंतु आचार संहिता को ले कर असमँजस में है। पति के लिए प्रेम-पूर्वक पकौड़े बनाती हुई पत्नी आचार संहिता की आड़ मे पुन: लौकी की सब्ज़ी पर स्थिरप्रज्ञ हो गई है। पति मैनिफ़ेस्टो में साड़ियाँ फ़िट कर के जीवन को पुन: पकौड़ा-युक्त बनाने की जुगत में है।

देश में चुनावों की घोषणा हो गई। सोशल मीडिया पर पाँचजन्य के उद्घोष के साथ ट्विटर-वीरों ने धनुष सँधान कर लिए हैं, कीबोर्ड-रूपी गाँडीव धारण किया युवा पार्थ उत्साहपूर्वक युद्ध क्षेत्र का अवलोकन कर रहे हैं। महारथी टैग-रूपी शब्द-बाण छोड़ते हैं जो धनुष की टँकार के मध्य अनगिनत हैशटैगों का रूप धारण कर के आकाश को आच्छादित कर देते हैं।

युद्ध क्षेत्र एक सेना से दूसरी सेना की ओर आते-जाते महारथियों के पदचापों से गुँजायमान है। महान वीर ध्वजों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। कुछ योद्धा अपनी छोटी-छोटी युद्धभूमी बना कर उसी में लड़ रहे हैं। इंद्रप्रस्थ के प्रतापी सम्राट महायुद्ध की अक्षौहिणी सेनाओं के मध्य अपनी टिटिहरी सेना लिए हुए उतरे हैं, और युद्ध क्षेत्र के मध्य शक्ति प्रदर्शन की परेड करते हुए, योद्धाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, जैसे अधेड़ होता अभिनेता मुष्टिकाएँ भींच कर, माँसपेशियाँ अकड़ा कर एक्शन सिनेमा के निर्माता को आकर्षित करने का प्रयास करता है। सैनिक वेशभूषा-धारी रिंकिया के पापा रथ ले कर पाकिस्तान सीमा की ओर प्रस्थान करने को आतुर दिखते हैं। दिल्ली सल्तनत इस चुनावी संग्राम में ओखला से बदरपुर के मध्य सीमित होती जान पड़ती है। केजरीवाल जी इसी उहापोह में हैं कि धरना करना है या नहीं करना है और अगर धरना नहीं करना है तो क्या करना है। यह चुनाव पाठ्यक्रम से बाहर हुआ जाता है। दिल्ली में कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल जी के साथ गठबँधन से लगभग मना कर दिया है और विधि का विधान या ऊपर वाले का बेआवाज लट्ठ देखिए कि वहाँ उत्तर प्रदेश में बहनजी ने कॉन्ग्रेस को लगभग मना कर दिया है।

कॉन्ग्रेसी खेमे में अपनी ही चिन्ताएँ हैं। राजकुमार अपने घातक अस्त्रों को पिछले चुनावों में उपयोग कर के शरहीन प्रतीत हो रहे हैं। मंदिरों में चंदन लगवाने और चर्चों में बीफ बँटवाने के बाद युवराज के पास फैंसी ड्रेस के विकल्प समाप्तप्राय हैं। तरकश के राफ़ेल इत्यादि तीर रामानंद सागर के धारावाहिक के शस्त्रों की भाँति जगमगा कर धराशायी हो चुके हैं। युवराज्ञी की नाक की नानी से समानता का प्रारम्भिक उत्साह भी पत्रकारों की भद्द उड़वा कर और कार्यकर्ताओं के पिंक बाबासूट बनवाने के बाद बोरियत की कगार पर है। युवराज्ञी उत्पाती युवकों को दल में ले कर ईवीएम वाले दौर में बैलेट बॉक्स वाले युग के शौर्य की पुनर्स्थापना करने में प्रयासरत है। जिस प्रकार संध्या होते ही बछड़े माता के पास लौट आते हैं, चुनावी संध्या में भीम आर्मी के विकट वीर और हार्दिक पटेल जैसे महान योद्धा कॉन्ग्रेस की गौशाला की ओर लौट रहे हैं। सपा ‘पार्टी ही परिवार है’ और ‘परिवार ही पार्टी है’ के सिद्धांत पर पार्टी चलने दी जाए।

पार्टी प्रवक्ताओं ने अपनी कुर्सियों के पीछे मोटी-मोटी किताबें जमा ली हैं। जिनके पास किताबें नहीं हैं, उन्होंने पुस्तक की फ़ोटो वाले वॉलपेपर लगवा लिए हैं। प्रवक्ता सीरीज़ के वॉलपेपर मार्केट में वास्तविक पुस्तकों और साक्षात प्रवक्ता से अधिक डिमांड में है। चैनलों का माहौल देखते हुए सत्तर के दशक के बूथ कैप्चरिंग वाले बलिष्ठ पहलवान आज वॉलपेपर लगा कर प्रवक्ता बनने को तैयार हैं। सावन में प्रकट होने वाले मेंढकों की भाँति बैनर, पोस्टर वालों के साथ चुनाव विश्लेषको की नई खेप टीवी चैनलों पर उतर आई है। योगेन्द्र यादव और जीवीएल सरीखे सेफ़ॉलॉजिस्ट गरारे कर के वाणी की सौम्यता का अभ्यास कर रहे हैं। पुस्तक वाले वॉलपेपर की इस वर्ग में भी खासी डिमांड देखी जा रही है।

एक दिशा से जहाँ ‘चौकीदार चोर है’ का उद्घोष होता है, ‘मैं भी चौकीदार’ का जयघोष दूसरे खेमे से उठ कर उसे डुबा देता है। इस सब के बीच चुनाव आयोग मंद स्वर में जनता के बीच ‘जागते रहो’ पुकारता हुआ लाठी खटका रहा है। जनता ऊँघ सी रही है और चुनावी घोषणापत्रों की प्रतीक्षा में कलर टीवी और लैपटॉप की ख़रीददारी रोके बैठी है। पड़ोस के छगनलाल जी ने दाढ़ी भी बनाना बंद कर दिया है इस प्रण के साथ कि उनकी दाढ़ी चुनाव तक प्रत्याशी ही बनवाएँगे, और उनका मत उसी प्रतिभाशाली प्रत्याशी के पक्ष में गिरेगा जो शेव के साथ पैडिक्योर, मैनिक्योर और फेशियल करा के देगा। नोटावीरों ने चुनाव की तारीख़ों का संज्ञान लेते हुए, लॉन्ग वीकेंड की व्यवस्था कर ली है। मुफ़्त वाय-फाय वाले होटल ढूँढ लिए गए हैं ताकी वहाँ से भारत के राजनैतिक और नैतिक पतन पर ब्लॉग निर्बाध रूप से लिखे जाएँ। राग दरबारी और कैम्ब्रिज एनालिटिका आपस में संघर्षरत हैं और श्रीलाल जी के शिवपालगंज में चुनाव आयोग की लाठी की खटखटाहट सुन कर वैद्यजी पूछते हैं, यह कैसा कुकुरहाव है, और लाठी को तेल चढ़ाते तृणमूल कॉन्ग्रेस के बदरी पहलवान उत्तर देते हैं, देश में चुनाव है।

हर परिवार को 10L दारू व ₹25000, नवविवाहितों को ₹10 लाख और 10 सोने का सिक्का: चुनावी घोषणापत्र

चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी वादे करने में किस प्रकार मर्यादा भूल जाते हैं, इसकी ताज़ा बानगी हमें इस लोकसभा चुनावों में देखने को मिल रही है। तमिलनाडु के एक निर्दलीय प्रत्याशी ने अपने क्षेत्र में हर एक परिवार को 10 लीटर शराब हर महीने बाँटने का चुनावी वादा किया है।

पेशे से दर्जी एएम शेख दाउद एरोड जिले के अन्त्यूर इलाके के मूल निवासी हैं। लोकसभा चुनावों में वो राज्य की तिरुपुर सीट से प्रत्याशी हैं।

उनके लम्बे-चौड़े वादों की फेहरिस्त सिर्फ दारू पर ही नहीं थमती। दाउद ने यह भी वादा किया है कि यदि वे लोकसभा सदस्य बन गए तो वे अपने क्षेत्र में हर गृहणी को ₹25 हजार मासिक देंगे। इसके अलावा उन्होंने नवविवाहित युगलों को ₹10 लाख और 10 सोने के सिक्के भी लोकसभा सदस्यों के विचाराधीन कोष से देने का वादा किया है।

“मेरे घोषणापत्र में जो 15-सूत्री कार्यक्रम है, वह जन-सामान्य में सबको फायदा पहुँचाएगा।” दाउद ने दावा करते हुए कहा।

10 लीटर शराब के वादे के बारे में दाउद का कहना है कि वैसे भी लगभग हर कोई आजकल पी ही रहा है। पर लोग नकली शराब पी रहे हैं और अपने स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं। दाउद का कहना है कि वह पुडुचेरी से उच्च गुणवत्ता वाली शुद्ध शराब लाकर लोगों में वितरित कराएँगे।

तिरुपुर में पानी की समस्या का भी जिक्र करते हुए दाउद कहते हैं कि वे सलेम जनपद के मत्तुर जलाशय से तिरुपुर को जोड़ती नहरें बनवाकर इस समस्या का समाधान करेंगे।

PMJAY: 2.2 लाख कैंसर रोगी लाभान्वित, बड़े कैंसर विशेषज्ञों से भी करा सकेंगे इलाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में कई योजनाओं को लागू किया। जिसका लोगों को काफी लाभ मिल रहा है। इन्हीं योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना। ये देश के गरीब लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है। इसके तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है।

अब इसके लाभार्थियों के लिए एक और ख़ुशख़बरी है। इसके लाभार्थी जल्द ही देश के बड़े कैंसर विशेषज्ञों से सलाह ले पाएँगे। देश भर के कैंसर विशेषज्ञों को ग्रिड से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। कैंसर विशेषज्ञों के ग्रिड से जुड़ने के बाद मरीज बड़े विशेषज्ञों के नेटवर्क से डिजिटल माध्यम से जुड़ जाएँगे।

नैशनल हेल्थ अथॉरिटी पार्टनरशिप के लिए नैशनल कैंसर ग्रिड से बातचीत कर रहा है, जो कि मुंबई के टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल से वर्चुअल ट्यूमर बोर्ड संचालित करता है। बता दें कि यह बोर्ड ग्रिड के माध्यम से (डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हॉस्पिटल्स में) जटिल कैंसर केसों को सुलझाता है और यह आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के लिए भी सर्वोत्तम इलाज मुहैया करा सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि अगर इस प्रस्ताव के लागू हो जाने से कुछ अस्पतालों में एक से अधिक प्रकार के इलाज उपलब्ध नहीं होने की समस्या से राहत मिलेगी। कैंसर विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत में कैंसर के लगभग एक चौथाई मामले ही ‘जटिल’ होते हैं, जिसका इलाज करना सरल नहीं होता।

इस मामले पर आयुष्मान भारत के डिप्टी सीईओ दिनेश अरोड़ा ने कहा, “हम 2-3 सप्ताह में नैशनल कैंसर ग्रिड से समझौता होने की उम्मीद कर रहे हैं। इससे ना केवल इलाज तक पहुँच आसान होगी, बल्कि यह सभी प्रकार के कैंसर के लिए स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल्स और गाइडलाइन्स बनाने में भी मददगार होगा।”

बता दें कि अब तक प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैंसर केयर के लिए 2.20 लाख लोग भर्ती हुए थे। इसमें से 1,53,000 मेडिकल ऑन्कोलॉजी के केस थे, जबकि 44,479 ने रेडियोथैरेपी, अन्य सर्जरी और पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी से थे।