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लुटियन के दलालों को बस यही बात बहुत चुभती है

दिल्ली के लुटियन एरिया से, दिल्ली के लोग तो वाकिफ होंगे ही, लेकिन जो लोग दिल्ली के बाहर के हैं, उनके लिए इसका संक्षिप्त परिचय है कि अंग्रेज वास्तुकार एडवर्ड लुटियन द्वारा बसाई गई नई दिल्ली को ‘लुटियन दिल्ली’ कहा जाता है। आज वहाँ भारत सरकार के सभी मंत्रालय, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, मंत्री, सांसदों, जजों, ब्यूरोक्रेट्स और अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों के बंगले हैं, जिन्हें दिल्ली में ‘कोठियाँ’ कहा जाता है।

एक चीज, जो इस इलाके को खूबसूरत और खास बनाती है, वह है यहाँ के बड़े-बड़े चौराहे, जिनसे अमूमन चार से ज्यादा सड़कें जुड़ती हैं, जिसे स्टैण्डर्ड भाषा में तो रोटरी कहते हैं, पर दिल्ली की भाषा में गोल चक्कर कहा जाता है।

तो इन गोल चक्करों पर यूपीए के दौर में, अक्सर ऐसे लोग खड़े पाए जाते थे, जो आपका नाली बनाने से लेकर आपको कैबिनेट मंत्री बनवाने तक का हौसला, माद्दा और हुनर रखते थे। इन सबकी सीधी पहुँच सोनिया, राहुल, प्रियंका, और अहमद पटेल तक होती थी। ये लोग इतने साहसी होते थे कि क्लाइंट अगर जरा सा भी डाउटफुल दिखा तो ये उपरोक्त लोगों से आपकी आमने-सामने मुलाकात की हामी भर देते थे।

इन लोगों का एक गिरोह टाइप से होता था, जो जाहिर सी बात है, कुछ हद तक रसूख वाले लोगों से जुड़ा भी होता था। और ये लोग तमाम कामों को लेकर इन्हीं गोल चक्करों पर मिशन बनाकर निकलते थे। मान लीजिये किसी बोर्ड, अथॉरिटी, कमीशन आदि में कोई चेयरमैन या मेम्बर की जगह खाली है, जहाँ अच्छा बजट है, लाल बत्ती है और अन्य सरकारी ठाठ हैं, तो उस पोस्ट की एक फिक्स कीमत के साथ अलग-अलग लोग काम पर लग जाते थे।

वो दलाल अलग-अलग पार्टियों को इस काम के लिए फँसाते थे और सबको 10 जनपथ में मीटिंग करवाने का झाँसा देते थे। ये लोग सबसे टोकन मनी या पूरा पैसा वसूल लेते थे, जो लाखों से लेकर करोड़ों तक में हो सकता था। तो इस प्रकार एक पोस्ट के लिए ये गिरोह चार पार्टियों को घेर कर रखता था, लेकिन काम किसी पाँचवे का हो जाता था। बाकी लोग ठगे रह जाते थे और दलालों की चाँदी हो जाती थी।

यह एक ऐसा पॉपुलर कल्चर और सिस्टम था, जो यूपीए दौर में ही नहीं बल्कि लुटियन दिल्ली में दशकों से चल रहा था, और जो भी अन्दर-बाहर के लोग थे, वे यह मान चुके थे, कि यह लोकतंत्र का एक साइड इफ़ेक्ट है, इसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन इस मामले में मोदी सरकार ने एक लकीर खींची, जिसे हम कह सकते हैं कि दिल्ली की सत्ता – मोदी से पहले और मोदी के बाद। मोदी ने इस सिस्टम को खत्म करने के लिए, इस नेक्सस को खत्म किया। बेशक मोदी राज में ऐसे तमाम पद खाली रहे, उन्होंने अपने समर्थकों को भी उन पर नहीं बिठाया, लेकिन लाभ के ऐसे तमाम पदों को बोली लगाकर बेचने की परम्पराओं को पूरी तरीके से समाप्त किया।

मैं एक छोटा उदाहरण देकर समझाता हूँ कि मोदी सरकार बनने के बाद पीयूष गोयल पॉवर मिनिस्टर बने। उससे पहले सिंधिया उस विभाग के मंत्री थे। गोयल लुटियन दिल्ली के इस कल्चर को समझते थे, और वे मोदी की छवि और मंशा के अनुसार काम करना चाहते थे और इसलिए उन्होंने ज्वाइन करते ही सबसे पहले मंत्री ऑफिस से अटैच चतुर्थ श्रैणी कर्मियों को वहाँ से हटाया, जिसमें चाय वाले से लेकर ड्राईवर तक शामिल थे।

ऐसे लोग ऐसी जगहों पर बरसों से जमे होते हैं, मंत्रियों के कार्य करने के सिस्टम को अच्छे से समझते हैं, और मंत्रियों के इर्द-गिर्द रहने के एवज में लाखों कमाते भी हैं। साथ ही, बाकी लोगों को सख्त हिदायत दे दी गई कि मंत्री का नाम लेकर अगर कोई भी किसी अवैध गतिविधि में लिप्त पाया गया तो उसके नतीजे गंभीर होंगे। ऐसी ही प्रैक्टिस सरकार में अन्य लोगों द्वारा भी फ़ॉलो की गई।

यही वजह है कि आज आप लुटियन दिल्ली के किसी भी गोल चक्कर पर खड़े हो जाइए, कोई कितना भी रसूखदार बना रहे लेकिन किसी में यह कहने की हिम्मत नहीं है कि वह किसी काम के लिए आपकी मुलाकात नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और अरुण जेटली से करवा देगा, काम करवाना तो दूर की बात है। इस बात को मोदी सरकार के धुर विरोधी भी स्वीकार करते हैं।

यही वह सबसे बड़ी वजह है, जिस कारण लुटियन दिल्ली में ‘दलाली’ के काम से फलने-फूलने वाली पत्रकार जमात- विशेषकर अंग्रेज़ी पत्रकार, एनजीओ, लेखक, चिंतक, बुद्धिजीवी और विचारक टाइप लोग मोदी से खफ़ा हैं, क्योंकि इस व्यक्ति को लुटियन दिल्ली में, इंडिया हैबिटैट सेंटर, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर जैसे ठिकानों में अड्डा ज़माने वाले लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है। यह व्यक्ति ठेठ है, जो अपने काम और अपनी धुन में मगन रहता है। बस यही बात दलालों को बुरी लगती है।

EVM को फुटबॉल बना कर रख दिया है: मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा ने चुनाव नतीजों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को जिम्मेदार बताए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार (मार्च 05, 2019) को चुनाव आयोग की टीम के साथ जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर गए सुनील अरोड़ा ने कहा कि राजनीतिक दलों ने EVM मशीन को फुटबॉल बना कर रख दिया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “अभी कुछ महीने पहले कर्नाटक के अलावा 5 अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। जहाँ हर जगह अलग-अलग नतीजे देखने को मिले। मैं यह कहने के लिए क्षमा माँगता हूँ कि EVM को राजनीतिक दलों नें फुटबॉल बना कर रख दिया है। अगर रिजल्ट X आता है तो EVM अच्छा है और अगर Y आता है तो बुरा बता दिया जाता है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि EVM वोटिंग नहीं करता, बल्कि मतदाता करते हैं। इसलिए EVM की विश्वसनीयता पर संदेह करने का कोई कारण ही नहीं है। जब भी चुनाव आते हैं तो EVM को लेकर राजनीतिक दल सवाल उठाने लगते हैं।

कॉन्ग्रेस समेत अनेक विपक्ष दल EVM द्वारा चुनाव कराए जाने पर अपना विरोध जाहिर कर चुके हैं। ये दल अक्सर आरोप लगाते हुए पाए जाते हैं कि EVM के साथ छेड़छाड़ की जाती है, जिससे केंद्र में सत्‍तारूढ़ BJP सरकार को फायदा मिलता है। चुनाव आयोग कई मौकों पर EVM को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुका है कि इससे छेड़छाड़ संभव नहीं है।

स्कूल बस के नीचे आई बकरी, MP में समुदाय विशेष ने घेर कर की पत्थरबाज़ी, 9 बच्चे घायल

मध्य प्रदेश के इंदौर के काजी पलासिया में बच्चों की एक स्कूल बस के ब्रेक फेल होने से यह हादसा हुआ। ड्राइवर ने बच्चों की जान बचाने की कोशिश में बस को एक खेत में खड़ा कर दिया। उसी वक़्त खेत में चरने गई बकरियों में से एक की मौत हो गई।

इस बात से गुस्साए बकरी का मालिक रिजवाना उग्र हो गया और बस में घुसकर बस चालक मुकेश की पिटाई शुरू कर दी। बाद में उनके बेटे मोहम्मद अल्पेश ने अपने दोस्तों को फोन किया जिन्होंने स्कूल बस पर पथराव शुरू कर दिया।

उस समय बस के अंदर लगभग 50 छात्र थे। पथराव से बस की खिड़कियाँ टूट गई, जिससे स्कूली बच्चे चोटिल हो गए। बस में बच्चों के साथ जाने वाले शिक्षकों में से एक ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन वो भी असफल रहा।

पास के ही सरकारी स्कूल के एक सुरक्षा गार्ड ने आकर भीड़ को तितर-बितर किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बुलाया जिन्होंने आकर बच्चों को अस्पताल पहुँचाया। इस पत्थरबाज़ी बस के शीशे टूटने से 6 से 14 साल के नौ बच्चे घायल हो गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रफीक, शकील, राशिद, आरिफ, साबिर, हाकिम, नईम, नसीर, जावेद, नौशाद और मोहम्मद अल्पेश के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की गई, साथ ही रिजवाना के अतिरिक्त 8 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। हकीम के कहने पर चालक मुकेश के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

6 बातें जो पाक के 44 ‘कर्मचारी आतंकियों’ को हिरासत में लेने के बाद होगी

पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री शहरयार अफरीदी ने आज कहा कि मसूद अजहर के भाई मुफ्ती अब्दुल रऊफ और हम्माद अजहर समेत 44 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पाकिस्तान के मंत्री ने दावा किया है कि सोमवार को नेशनल एक्शन प्लान के तहत एक बैठक की गई, जिसमें यह तय किया गया कि प्रतिबंधित किए गए सभी संगठनों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाए।

भारतीय मीडिया को जानना चाहिए कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह हथकंडा कोई ‘स्टेट्समैन’ होने का उदहारण नहीं है। पाकिस्तान द्वारा इस तरह की कार्रवाई पहले भी कई बार की जा चुकी हैं, जब जकीउर रहमान लखवी और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को इसी तरह कैद किया गया और बिना किसी कार्रवाई के ही रिहा कर दिया गया था।

पाकिस्तान की पिछली हरकतों को देखते हुए हम बता सकते हैं कि उनके अगले स्टेप्स क्या हो सकते हैं

1- पूछताछ

पाकिस्तानी यह दावा करेगा कि वह आतंकवादियों का आतंकवाद में शामिल होने और योगदान के लिए पूछताछ कर रहा है। मामले पर ज्यादा खबर दिए बिना ही दिन बीतते जाएँगे। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाए जाने पर समय-समय पर वही पुराने घिसे-पिटे बयान जारी किए जाएँगे। इस सब नाटक के बीच, आतंकवादी पाकिस्तानी सेना द्वारा पेश की जाने वाली मेहमान नवाजी और ऐशो आराम का आनंद लेंगे।

2- छानबीन जारी है

इन सब प्रक्रियाओं के बाद एक बयान जारी किया जाएगा कि अधिकारी आतंकवादियों के खिलाफ आरोपों की गंभीरता से जाँच कर रहे हैं और उनके नेता दावा करेंगे की वो आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

3- अंतरराष्ट्रीय दबाव के कम होने तक ‘धैर्य प्रदर्शन’

वर्तमान में, पाकिस्तान FATF द्वारा ब्लैक लिस्टेड होने से बचने की कोशिश कर रहा है। इसे ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर होने के लिए अपनी योजना पूरा करने के लिए अक्टूबर तक का समय दिया गया है, जिसके बाद पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। FATF ‘ग्रे सूची’ में होने के अर्थ है कि किसी देश को अंतरराष्ट्रीय ऋण प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, कम से कम अक्टूबर तक पाकिस्तान आतंकवाद पर अपनी कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर होने का दिखावा करेगा।

4- चुपचाप रिहाई

एक बार FATF की ‘ग्रे सूची’ से पाकिस्तान को हटा दिए जाने के बाद, वो चुपचाप अपने आतंकवादियों को वापस छोड़ देगा क्योंकि आतंकवादियों को हिरासत में लिए जाने का कारण ही यही है। तब तक आतंकवादी पाकिस्तान के करदाताओं के रुपयों पर पूरी मौज भी कर चुके होंगे।

5- आतंकवादियों की ‘क्लीन चिट’ देकर विदाई

इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारी दावा करेंगे कि उनकी गहन जाँच से कोई नतीजा नहीं निकला है और उन्हें इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि आतंकवादी किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं। वे उन्हें एक बार फिर ‘शांति दूत’ घोषित करेंगे और इसके बाद उन लोगों का पीछा किया जाएगा जिन्होंने कभी उनकी ईमानदारी पर संदेह किया था। इस तरह से आतंकवादियों को ‘क्लीन चिट’ भी मिल जाएगी। जल्द ही वे अपने ‘काम’ पर वापस लग जाएँगे और मुस्लिमों से हिंदुओं के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए तैयार करेंगे।

6- फिर वही जिहाद की ज़िन्दगी – हमें क्या हम तो आतंकवादी हैं

घटनाएँ फिर अपनी सामान्य स्थिति में आ जाएँगी। आतंकवादी, अब वापस खुले में, अपने सामान्य ऑपरेशन को फिर से शुरू कर सकेंगे और पाकिस्तानी सरकार की मदद के लिए दुबारा भारत के खिलाफ अपनी आतंकवादी हरकतें शुरू कर देंगे। ‘क्लीन चिट’ प्राप्त आतंकवादी फिर से पाकिस्तानी सेना की मदद से सीमा पार से आतंकवादियों की तस्करी करने की कोशिश करेंगे और अपने मिशन, ‘Bleed India with a thousand cuts’ को आगे बढ़ाएँगे।

इस बात में कोई शक नहीं है कि पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर घुसकर भारतीय वायु सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद कुछ चीजें बदल चुकी हैं। लेकिन फिर भी आतंकवादी सिर्फ और सिर्फ भारत पर दुबारा हमला करने का मौका ढूँढ रहे होंगे।

पाक में मसूद अज़हर के भाई समेत 44 आतंकियों की गिरफ्तारी का सच क्या है?

पुलवामा हमले के बाद से ही पाकिस्तान पर लगातार आतंकवाद पर कार्रवाई करने का दवाब बन रहा है और इसी बीच पाकिस्तान की तरफ से खबर आई है कि आतंकी मसूद अजहर के भाई मुफ्ती अब्दुल रऊफ और हम्मार अजहर समेत 44 आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हालाँकि पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री शहरयार अफरीदी का कहना है कि ये कार्रवाई किसी दवाब में नहीं किया है, लेकिन ये बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान ने ये कार्रवाई दवाब में आकर किया है।

शहरयार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पाकिस्तान सरकार का ये एक्शन किसी बाहरी दबाव में नहीं हुआ है। ये कार्रवाई सभी प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ की गई है। शहरयार ने कहा कि भारत ने जो डोजियर सौंपा था, उसमें मसूद के इन दोनों भाईयों का नाम भी शामिल था। इसलिए इनके खिलाफ कार्रवाई की गई और फिर गिरफ्तार किया गया।

आतंकवाद को लेकर चारो तरफ से घिरा पाकिस्तान भले ही आतंकियों के गिरफ्तारी की बात कर रहा है, लेकिन इस पर विश्वास करना काफी मुश्किल है। हो सकता है कि पाकिस्तान इस बार भी लोगों की आँखों में धूल झोंक रहा हो, जैसा कि उसने पिछली बार किया था। बता दें कि पाकिस्तान ने पुलवामा हमले के बाद आतंकी हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा पर बैन लगाने की बात कही थी, जो कि बिल्कुल झूठी निकली। जब इससे संबंधित लिस्ट सामने आई, तो जो सच सामने निकलकर आया, वो ये था कि पाकिस्तान सरकार की तरफ से इस संगठन पर बैन नहीं लगाया गया था, सिर्फ निगरानी रखने की बात कही गई थी।

कर्नाटक: मंत्री ने मंदिर में दर्शन के लिए तोड़ी कतार, लड़की ने लगाई क्लास, मंत्री को माँगनी पड़ी माफी

सार्वजनिक स्थल पर किसी वीआईपी या वीवीआईपी के आने पर उन्हें प्रशासन की तरफ से विशेष सुविधा मुहैया कराना तो आम बात है और ऐसा होते हुए तो आपने अक्सर ही देखा होगा। मगर जब कर्नाटक के गृहमंत्री एमबी पाटिल सोमवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिर में दर्शन करने गए और उन्हें मंदिर में दर्शन के लिए स्पेशल एक्सेस दिया गया तो वहाँ का माहौल ही बदल गया।

दरअसल हुआ ये कि जब एमबी पाटिल कर्नाटक के विजयपुर के अमरगंदीशरा शिव मंदिर में दर्शन करने पहुँचे तो वहाँ काफी भीड़ थी। जिसकी वजह से प्रशासन उन्हें कतार से निकालते हुए वीआईपी एक्सेस देकर अंदर दर्शन करवाने ले जाने लगा। इसी बीच वहाँ कतार में खड़ी एक लड़की ने आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि आपको तो लाइन में आना चाहिए।

उस लड़की ने कहा, “हमलोग यहाँ पर लगभग एक घंटे से खड़े हैं। आप भले ही मंत्री हैं, लेकिन आपको भी कतार में खड़े होना चाहिए। आपको इस तरह से मंदिर के स्पेशल ट्रीटमेंट की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।”

लड़की के द्वारा आपत्ति जाहिर करने के बाद गृह मंत्री ने खुद आगे आकर उससे माफी माँगी और सफाई देते हुए कहा कि उन्हें दो अहम बैठकों में हिस्सा लेने जाना है और इन दोनों बैठकों में जाना बेहद ज़रूरी है। लिहाजा वो कतार में नहीं लग सकते हैं, क्योंकि उन्हें फ्लाइट भी पकड़नी है। इसलिए उन्हें वीआईपी एक्सेस देकर दर्शन करवाया गया।

एमबी पाटिल की बातें सुनकर लड़की ने उनकी तारीफ की और फिर उनके साथ फोटो भी क्लिक करवाई।

पाकिस्तान अभी भी नहीं सुधरा तो उन्हें बता दिया गया है कि हम क्या करेंगे: MP में मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (मार्च 05, 2019) को मध्य प्रदेश के धार में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विपक्ष वायु सेना की कार्रवाई पर सवाल उठा कर उसका मनोबल कम कर रहा है। मोदी ने कहा, “एयरस्ट्राइक पाक में हुए लेकिन इसका सदमा भारत में बैठे कुछ लोगों को लगा। विपक्ष के नेता उस दिन से इस तरह से चेहरा लटकाए हुए हैं, जैसे न जाने कौन सा दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो।”

भाषण की प्रमुख बातें निम्न हैं

  • भारत ने अब आतंकियों और उनके सरपरस्तों को डंके की चोट पर कह दिया है कि अब उनके सामने सुधरने के अलावा कोई चारा नहीं है। अगर वो फिर भी नहीं सुधरेंगे, तो फिर क्या किया जाएगा ये भी उनको बता दिया गया है।
  • पिछले दिनों वायु सेना के पायलट अभिनंदन पाकिस्तान में फँस गये। हमारी सरकार के प्रयासों से 48 घंटे के अंदर ही पाकिस्तान ने अभिनंदन को देश को लौटा दिया।
  • पूरी दुनिया ने कह दिया है कि हिंदुस्तान ने जो किया, वो सही किया लेकिन हमारे देश का दुर्भाग्य है कि यहाँ कुछ ऐसे लोग है जिन्हें ऐसा नहीं लगता।
  • आज सुबह ही इन महाशय (दिग्विजय सिंह) ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले को दुर्घटना करार दिया है, यानि एक्सीडेंट। यानि एक हादसा, जो बस हो गया। यही इनकी मानसिकता है।
  • नामदार परिवार के ये वही खास सिपहसालार हैं, जिन्हें आतंक को बढ़ावा देने वाले शांति दूत नजर आते हैं। ये वही महोदय हैं, जिनको दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी ओसामा भी शांतिदूत लगता था।
  • मत भूलिए, दिल्ली के बाटला हाउस में जब आतंकियों का एनकाउंटर हुआ था तो ऐसे ही एक और राजदरबारी ने दुनिया को बताया था कि आतंकी की मौत पर तब रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाने वालों के आँसू नहीं थम रहे थे।
  • क्या ऐसी कॉन्ग्रेस से हम उम्मीद कर सकते हैं कि वो आतंक के सरपरस्तों को खत्म करेगी? नहीं, आतंकवाद के खिलाफ नरमी के इसी कॉन्ग्रेसी रवैये की वजह से पहले आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब नहीं मिल पाया।
  • एयर स्ट्राइक पाकिस्तान में हुए, लेकिन सदमा भारत में बैठे कुछ लोगों को लगा है।
  • भारत भर में महा-मिलावट करने वाले लोग अब अंतरराष्ट्रीय महा-मिलावट करने में लगे हैं। सिर्फ अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर महा-मिलावट कर रहे हैं।
  • यहाँ ये लोग मोदी को गाली देते हैं, और वहाँ पाकिस्तान में इनके लिए तालियाँ बजती हैं। वहाँ के अखबारों की हेडलाइंस इनके बयानों से भरी पड़ी हैं, वहाँ के टीवी चैनलों पर इनके ही चेहरे दिखाई पड़ते हैं।
  • जब एयर-स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की बोलती बंद हो गई, पूरे विश्व में अलग-थलग पड़ गया तो उसकी इज्जत बचाने के लिए यही महा-मिलावटी लोग सामने आए।
  • कोई सबूत माँगने लगा, तो कोई आतंकियों की लाशों की संख्या पूछने लगा और तो और ये लोग पाकिस्तान को ही शांति का दूत बताने लगे। आपने देखा होगा कि यह अंतरराष्ट्रीय महा-मिलावट एक सुर में राग अलाप रही है।
  • आज जब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में देश एक हो रहा है, तब ये लोग देश को भ्रमित कर इस लड़ाई को कमजोर करना चाहते हैं।

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मालवा भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण है। धार लोकसभा में 8 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 7 कॉन्ग्रेस के पास हैं। जबकि 2013 के विधानसभा में यहाँ की 5 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। नवंबर-दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ क्षेत्र में भाजपा को सबसे कम सीटें धार जिले से ही मिली थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले यहाँ 16 फरवरी को सभा करने वाले थे, लेकिन पुलवामा हमले के बाद सभा को निरस्त कर दिया गया था।

घबराए पाकिस्तान ने LOC पर बढ़ाई हलचल, अतिरिक्त सेना व टैंकों की तैनाती

भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकियों पर ‘एयर स्ट्राइक’ करने के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान के हर एक वार का भारत की तरफ से मुँहतोड़ जवाब दिया गया। अब घबराए पाकिस्तान ने लाइन ऑफ कण्ट्रोल के पास सेना की तैनाती बढ़ा दी है। भारतीय वायु सेना से थर्राए पाक ने सीमा के पास सेना, बख़्तरबबंद वाहन और हाथियों की खेप पहुँचानी शुरू कर दी है। ‘टाइम्स नाउ’ ने गुप्त सूत्रों के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान अपनी सीमा पर रक्षा कतार को मजबूत करने में लगा हुआ है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी फ़ौज का एक जत्था बहावलपुर पहुँच कर वहाँ डेरा जमाए हुए है।

सियालकोट सेक्टर में पाकिस्तान ने अतिरिक्त सेना बल की तैनाती की है। सियालकोट में नियमित ब्लैकआउट हो रहे हैं। सशस्त्र बलों ने लाहौर हवाई अड्डे को अपनी कड़ी निगरानी में ले रखा है। इसके अलावा मुल्तान से बहावलपुर भरी संख्या में सैनिक भेजे गए हैं। बता दें कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अज़हर बहावलपुर का ही निवासी है। सेना के एक काफिले को कराची से खोकरपुर की तरफ जाते देखा गया है। सेना की एक टुकड़ी के हैदराबाद से मीरपुर जाने की भी ख़बर आई है।

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रडारों की सक्रियता में भी वृद्धि की है। फॉरवर्ड क्षेत्र के अस्पतालों को किसी भी आपात स्थिति ने निपटने हेतु तैयार रहने को कहा गया है। ज़रूरत पड़ने पर घायल सैनिकों को भर्ती कराने के लिए बेड्स आरक्षित रखने को कहा गया है। लड़ाकू विमान लगातार अभ्यास कर रहे हैं। इतना ही नहीं, स्थानीय प्रशासन ने सीमा पर रहने वाले नागरिकों को पीछे हटने को भी कहा है। सीमा को खाली कराने की कोशिशें जारी है। नरेंद्र मोदी के घर में घुस कर मारने के ताज़ा बयानों से भी पाकिस्तान सकते में है।

कुल मिला कर देखें तो ताज़ा एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को भारत की शक्ति का एहसास हो गया है और वह किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहता। पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिरा कर भारत ने यह भी बता दिया घर में घुस कर सक्षम है और किसी भी प्रकार की जवाबी कार्रवाई को विफल कर अपनी रक्षा भी कर सकता है। पाकिस्तान के कई ड्रोन सीमा पर ही मार गिराए गए हैं। इन सभी कारणों से पाकिस्तान काफ़ी सतर्कता बारात रहा है। पहले से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहे पाक को ईरान ने भी सर्जिकल स्ट्राइक करने की धमकी दी है।

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने समर्थकों से पीएम मोदी की हत्या का अह्वान किया

कर्नाटक के एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता चर्चा में हैं। नाम है – बेलुर गोपालकृष्णन। उन्होंने एक समारोह में अपने समर्थकों से पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या का अह्वान किया है। कर्नाटक भाजपा के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से कांग्रेस नेता का वीडियो ट्वीट किया गया है।

कर्नाटक भाजपा ने ट्वीट में कहा है कि देश के पीएम की हत्या के लिए उकसाना राष्ट्र के लिए खतरा है। उन्होंने गृहमंत्रालय और बेंगलुरु पुलिस से तुरंत कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है।

एक अन्य ट्वीट में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को भी निशाना बनाते हुए पूछा गया, “राहुल गांधी हम आपको याद कराना चाहते हैं कि आपने कभी कहा था कि आप नफरत की राजनीति का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन अब जब आपकी ही पार्टी के नेता ने खुले तौर पर लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए इस राष्ट्र के पीएम की हत्या का आह्वान किया है तो क्या आप उन पर कार्रवाई करेंगे? यदि आप स्पष्ट रूप से कार्रवाई नहीं करते हैं तो इसका मतलब है कि आप अपने नेता के शब्दों का समर्थन करते हैं?

दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद बेलुर गोपालकृष्णन भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। कॉन्ग्रेस में शामिल होने पर उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह एक झूठी पार्टी है। पार्टी में ईमानदार लोगों की कोई कद्र नहीं।

CPI (M) नेता ने की मोदी की तारीफ, दोबारा PM बनने को दी शुभकामना – पार्टी ने किया निलंबित

माकपा नेता नरसैया एडम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ क्या कर दी, उन्हें पार्टी की केंद्रीय समिति से निलंबित कर दिया गया। केन्द्रीय समिति कम्युनिस्ट पार्टी की निर्णय लेने वाली एक प्रमुख समिति होती है।

दरअसल माकपा के पूर्व विधायक नरसैया एडम ने जनवरी में सोलापुर जिले में एक आवास परियोजना को मंजूरी देने के लिए मोदी और फडणवीस की सराहना की थी। इसके साथ ही उन्होंने दोबारा मोदी को प्रधानमंत्री बनने के लिए शुभकामना भी दी थी। एडम राज्य विधानसभा में इसी क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे।

एडम को निलंबित किए जाने के मामले पर पार्टी के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसी तारीफ पार्टी की नीति के खिलाफ है। ऐसे में उन्हें तीन महीने के लिए पार्टी की केन्द्रीय समिति से निलंबित करने का निर्णय लिया गया है। हालाँकि अभी तक इस पर एडम की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आपको बता दें कि एडम का निलंबन 3 महीने के लिए किया गया है। उनका तीन महीने का निलंबन लोकसभा चुनावों के बाद ही समाप्त हो पाएगा। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक एडम पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के काफी करीबी हैं, लेकिन पार्टी का विरोधी धड़ा यह चाहता था कि एडम को प्रादेशिक सचिव के पद से हटाया जाए। उन्हें हटाया जाना बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। हालाँकि पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता का नाम दिया है, लेकिन इस निलंबन का असर लोकसभा चुनावों तक देखा जा सकता है। पार्टी की बैठकों में अब उन्हें जून या जुलाई में ही हिस्सा लेने का मौका मिल पाएगा, तब तक लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके होंगे।