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एयर स्ट्राइक का सबूत माँगता लिबटार्ड गिरोह, महाशिवरात्रि पर दूध चढ़ाने का विरोध करना भूला

हालिया इतिहास में यह पहली बार हुआ कि होली में वीर्य और पीरियड्स के ख़ून से भरे ग़ुब्बारों, दीवाली पर ओज़ोन लेयर बेधने और बृहस्पति ग्रह के वातावरण तक में गैस भरने वाले हिन्दू पटाखों, दुर्गापूजा की मूर्तियों द्वारा ‘इंटरस्टेलर’ फिल्म में पानी वाले ग्रह के समुद्र में मैथ्यू मकानहे के रोबोट के पैरों को लगभग फँसा लेने की बातों का विरोध करने वाले बुद्धिजीवियों के गिरोह ने महाशिवरात्रि के दौरान करोड़ों लीटर दूध के ‘बेकार चले जाने’ और भारत की गरीबी पर बात नहीं की।

इससे राष्ट्रवादियों में बहुत क्षोभ है। उन्होंने शाब्दिक असला-बारूद तैयार रखा था कि इन छद्म-बुद्धिजीवियों, लिबटार्डों और हिन्दू-विरोधी ताक़तों द्वारा एक भी विरोध की बात लिखी जाए, और उन पर डिजिटल धावा बोला जाए। लेकिन एयर स्ट्राइक के गलत समय पर होने के कारण लिबटार्ड गिरोह के गुर्गों को इधर सोचने का मौका ही नहीं मिला।

सुप्त सूत्रों से पता चला है कि आज सुबह जब लिबटार्ड गिरोह और पत्रकारिता के समुदाय विशेष के व्हाट्सएप्प चांसलर ने कैलेंडर का स्क्रीनशॉट भेजकर ग्रुप में इसकी जानकारी दी तो एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल गया। व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी चांसलर श्री रबिश जी ने नाराजदीप, एक्स-वाई चौक, लल्लनडाउन, स्कूपपूप, द स्प्रिंट, द डोन्ट थिंक, द एगरोल आदि के सम्मानित सदस्यों से उनके द्वारा ‘भारत की गरीबी के परिप्रेक्ष्य में हिन्दू पर्वों की आड़ में सामंतवादी और फासिस्ट सवर्णों द्वारा दूध की बर्बादी’ पर लिखे गए लेखों का विवरण माँगा।

ज़ाहिर है कि किसी ने लेख लिखने की ज़हमत नहीं उठाई थी। लल्लनडाउन ने आर्काइव से उठाकर एक लिंक दिया, जिस पर रबिश ने कहा, ‘चचा मुर्गा बन जाइए’। लल्लनडाउन के कर्मचारी को रबिश ने उनके हाल ही के दुष्कृत्य के लिए भी आड़े हाथों लिया जब उन्होंने स्मार्टीपैन्ट्स बनते हुए विंग कमांडर अभिनंदन के परिवार वालों की जानकारी सार्वजनिक कर दी थी जिसे बाद में उन्हें हटाना पड़ा था। 

हालाँकि, दूध की बर्बादी पर न लिख पाने का कारण गिरोह के सदस्यों ने बार-बार याद दिलाया कि एयर स्ट्राइक का सबूत अभी तक जारी नहीं हुआ है, और उनके अथक प्रयासों के बावजूद देश यह मानने को तैयार नहीं है कि हमारी सेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के देवदार के पेड़ उखाड़े, और कुछ नहीं। इस दलाली को रबिश ने आधे मिनट में ख़ारिज कर दिया और कहा कि तमाम सदस्यों को दिग्विजय सिंह और नवजात सिद्धू से सीखने की ज़रूरत है कि आसानी से फ़ौज की बड़ाई करते हुए, चुपके से यह कह दिया जाए, “अगर मारा है तो सबूत देने में क्या हर्ज है?”

जब तक ये सवाल जवाब चल रहा था तब तक ‘द एगरोल’ के पत्रकार ने ग्रुप में ही एक आर्टिकल लिखकर डाल दिया, ‘सेना के जवानों को नहीं मिलता है दूध, देश में करोड़ों लीटर दूध बहा दिए जाते हैं पत्थरों पर’। इस पर उसे ग्रुप के बाकी सदस्य जहाँ वाहवाही दे रहे थे, वहीं नाराजदीप नाख़ुश दिखे। उन्होंने कहा, “इसमें सेक्स वाला एंगल है ही नहीं जबकि ‘लिंग’ की पूजा होती है।” 

तब तक स्कूपपूप ने एक आर्टिकल का ड्राफ़्ट ग्रुप में डाला, “आठ सबूत कि भारतीय हिन्दू सेक्सुअल परवर्ट हैं।” इस आर्टिकल के तीन स्लाइड के बाद किसी ने पढ़ने की कोशिश नहीं की। लल्लनडाउन ने इसी बीच कहा कि स्कूपपूप उनका कालजयी आर्टिकल ‘हिटलर का लिंग था छोटा’ अपने रिलेटेड आर्टिकल्स में डाल सकता है। इस पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

पत्रकारिता के विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि हाशमी दवाखाना को जर्नलिज़्म में ऐसे ही लाते हैं

आगे व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी चांसलर श्री रबिश ने सुनाया, “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत!” ये बात उन्होंने अपना आवाज़ में रिकॉर्ड कर ग्रुप में डाली थी ताकि इम्पैक्ट ज़्यादा पड़े लेकिन आधे घंटे तक किसी ने सुना ही नहीं तो उन्हें गुस्सा आ गया, “अरे, अब क्या कर रहे हो? एक दिन बाद अब लेकर आ रहे हो आर्टिकल? इससे कैसे होगा हंगामा? कैसे फैलाएँगे हम हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर? यही तरीक़ा है माओवंशियों की पत्रकारिता का?”

इस पर लल्लनडाउन के सबसे घाघ पत्रकार ने कहा, “हें हें हें…”

“देखो दूबे, ये ठीक बात नहीं है। इसको कॉपी करने की रॉयल्टी लगती है, पेटेंट है मेरा!” रबिश ने याद दिलाया कि उनकी आइकॉनिक हँसी पर कॉपीराइट है। 

“अरे सर, हम तो बस यही कह रहे थे कि अभी अमेरिका में तो महाशिवरात्रि शुरू ही हो रही होगी। चला देते हैं आर्टिकल। हमारा जाल तो कितना फैला है आपको पता ही है। ग़रीबों के गोविन्दा से कहते हैं कि वाशिंगटन पोस्ट में गरीबी का एंगल लेकर लिख दे। अभी उन्होंने सबरीमाला पर भी धूर्तता, आई मीन बुद्धिमानी की थी।” लल्लनडाउन के प्रधान लम्पट ने कहा। 

“अंग्रेज़ी के अख़बारों में आ जाए तो इसे हम ग्लोबल पोवर्टी और मोदी से सीधा जोड़ सकते हैं कि मोदी ने जिस तरह से ‘हिन्दू आइडेंटिटी’ को जगाया है, और जिस तरह से ‘मिलिटेंट हिन्दुइज्म’ और ‘अल्ट्रा नेशनलिज्म’ की बातें हो रही हैं, उससे वो लोग भी शिवलिंग पर दूध चढ़ाने लगे हैं जो पहले घरों में अपने काम से मतलब रखते थे।” नाराजदीप ने एंगल दिया।

“यस… एग्जेक्टली। फिर मैं ना, वो ना, लिख दूँगी ना, कि ना… लोगों में अपने आप को ज़्यादा हिन्दू बताने का प्रेशर आ रहा है क्योंकि अगर वो मंदिर नहीं जाते हैं तो उनका सामाजिक बायकॉट होता है। फिर हम इंडिया स्पैंड का फर्जी डेटा डाल देंगे कि साम्प्रदायिक अपराध बढ़ रहे हैं। हम इसको सीधा इससे जोड़ सकते हैं कि मोदी और योगी जैसे नेताओं के आने से भारत में गरीबी बढ़ी है। हम बस लिख देंगे, इसका डेटा देने की भी ज़रूरत नहीं है क्योंकि पश्चिम वाले तो वैसे भी हमें गरीब ही मानते हैं। इसी का रोना रोकर तो मुझे लिखने का काम मिला। जो ही दो हज़ार देते हैं, एक आर्टिकल का, लेकिन मैं विचारधारा के लिए दृढ़संकल्प होकर काम कर रही हूँ।” ग़रीबों के गोविन्दा ने स्माइली भेजकर अपनी बात को विराम दिया।

रबिश ने इस बात का अनुमोदन किया और ‘द डोन्ट थिंक’, ‘द लायर’ और ‘द स्प्रिंट’ वालों को डाँट लगाई कि वो लोग भी कुछ कर लें। इस पर मिलिट्री मामलों के फर्जी जानकार शेखर कूप्ता ने कहा कि वो अपनी टीम से फोटोशॉप पर एयर स्ट्राइक के एरिया की ‘सैटेलाइट तस्वीरें’ बनवा रहे हैं। उसमें उन्होंने कहा कि जहाँ जैश का कैम्प था, उससे कहीं दूर जंगलों में बम गिरने से टूटे पेड़ों को दिखा देंगे ताकि पाकिस्तान की बात सच लगे। 

हमें यह जानकारी पतंजलि का विज्ञापन पाने वाले ‘प्राइम टाइम’ के प्रोड्यूसर से मिली जिन्हें हमने दस रुपया प्रति चैट स्क्रीनशॉट की दर से देने का वायदा किया। जिस तरह से उनके टीवी को लगातार घाटा हो रहा है, उन्होंने इस ऑफ़र को सहर्ष स्वीकार किया और रियल टाइम में स्क्रीनशॉट हम तक पहुँचाते रहे। 

वहीं, हमने इसी मसले पर कई राष्ट्रवादियों से बात की तो उनमें से एक ने बताया, “हमने तो काउंटर आर्टिकल तैयार रखा था कि शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण यह है कि पत्थर को सदियों तक उसके आकार में बचाए रखने के लिए वसा की ज़रूरत होती है, जो कि दूध, घी, या शहद आदि से पूरी होती है। लेकिन पूरे दिन आर्टिकल न आने से हमें दुःख हुआ है। फिर भी, हम इन लम्पटों की आदत जानते हैं, ये आएँगे ज़रूर। हम ने इसे अलग फ़ोल्डर में रख लिया है।”

दूसरे राष्ट्रवादी ने कहा कि उन्हें ऑपइंडिया की टीम पर भरोसा था कि वो इनके बैलून को पंक्चर करके तसल्लीबख्श करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे अतः उन्होंने इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।

बिना जुबाँ लड़खड़ाए कश्मीर समस्या को इस्लामी आतंक जनित समस्या कहना ज़रूरी

प्रत्येक महाशिवरात्रि, कश्मीर का इतिहास अपने गुनहगारों से कुछ प्रश्न करता है, मगर वो अनसुने रह जाते हैं। आखिर इतिहास की सुध लेने की परवाह किसे है? जनमानस की स्मृतियों में तो सिर्फ 1947 से निरंतर जलता कश्मीर ही बचा है। 5000 वर्षों के भव्य इतिहास का मानो लोप ही हो गया हो। वो तो भला हो कल्हण रचित “राजतरङ्गिनी” का, जिसने पुस्तकालयों में ही सही कश्मीर के उस वैभवशाली अतीत को ज़िंदा रखा।

अगर 14वीं शताब्दी के पूर्व और उसके बाद के कश्मीर का इतिहास देखेंगे तो उन लक्षणों की पहचान करना आसान हो जाएगा, जो कश्मीर की वर्तमान दुर्गति के कारणों की ओर इंगित कर सके। इस्लामिक सत्ता के पूर्व के कश्मीर का इतिहास, विकास और वैभव के शिखर पर विराजमान सभ्यता का इतिहास है, वहीं उसके बाद का इतिहास रक्तरंजित और निरंतर संघर्षों से भरा हुआ है।

वर्तमान प्रचलित नाम ‘कश्मीर’ का पहला उद्धरण पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी और उसकी टीकाओं में पाया जाता है। महाभारत और रामायण के अतिरिक्त नीलमत पुराण, कश्मीर का विवरण देने वाला प्रमुख संस्कृत ग्रंथ है। कम्बोजों तथा सारस्वत ब्राह्मणों द्वारा एक ऐसी सभ्यता का निर्माण हुआ, जहां अध्यवसायियों, कवियों, चिकित्सकों और शिक्षकों की भरमार थी और यह सभ्यता उत्तरोत्तर गौरव को प्राप्त होती रही, जब तक 14वीं शताब्दी में शाह मीर द्वारा कश्मीर पर कब्ज़ा नहीं कर लिया गया। इसके बाद ध्वंस और विनाश की एक ऐसी रीत चली, जिसने कश्मीर के सामाजिक ढाँचे को छिन्न-भिन्न कर दिया और उन्नति के सारे मार्ग अवरुद्ध कर दिए। कला, चिकित्सा और स्थापत्य का केंद्र कश्मीर साम्प्रदायिकता, घृणा और मार-काट की आग में झोंक दिया गया। 1989 का कश्मीरी पंडितों का पलायन तो घाटी से उनका सातवाँ पलायन था। शाह मीर, औरंगज़ेब, अब्दुल्लाओं और आज के जमात-ए-इस्लामी या बुरहान, इन सभी के द्वारा किया गया रक्तपात इस्लामिक वर्चस्व की मानसिकता की ही देन रही।

समस्या के समाधान हेतु पहले उसकी पहचान करना ज़रूरी होता है। कश्मीर में जो आतंकवाद की आग लगी है, उसमें पाकिस्तान इस्लामिक कट्टरपंथ रूपी पेट्रोल ही तो डालता है। शाह मीर और औरंगज़ेब की हिन्दू बनियों और ब्राह्मणों को सबक सिखाने वाली छवि का ही प्रसार किया जाता है। यदि हम कश्मीर समस्या का समाधान चाहते हैं, तो बिना ज़ुबाँ लड़खड़ाए इसे इस्लामिक आतंकवाद जनित समस्या कहना सीखना होगा। यह कहना होगा कि पाकिस्तान की चाल मात्र कश्मीर बनाम भारत बनाने की नहीं है, बल्कि मुस्लिम कश्मीर बनाम हिन्दू भारत बनाने की है। यही कारण है कि वहाँ कश्मीरी पंडितों के होने से उन्हें समस्या है। अगर ऐसा नहीं होता तो अलगाववाद की जड़ें हमें जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों जैसे कि जम्मू और लेह-लद्दाख में भी देखने को मिलतीं, जबकि ऐसा नहीं है।

कश्मीर में अलगाववाद को बल मिलता है पैन-इस्लामिज़म से, जो खिलाफत आंदोलन के या उससे भी पूर्व के उस विचार से प्रभावित है, जिसमें दुनिया के सभी मुस्लिमों को राष्ट्रीय सीमाओं को परे हटाकर एक झंडे के नीचे खड़े होने को अपना आदर्श मानता है। हालाँकि यह विचार कितना हास्यास्पद है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में सबसे ज्यादा तथाकथित इस्लामिक देश ही आपसी संघर्षों में उलझे हुए हैं।

यदि कश्मीर समस्या का निवारण चाहिए तो ऐसे इस्लामिक चरमपंथियों तथा उनके बनाए चरमपंथी विचार के प्रचार-प्रसार के ढाँचे को तोड़ना होगा। कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के मध्य ही नए आदर्शों और मूल्यों की स्थापना करनी होगी, जो भारतीय राष्ट्रीय विचार से साम्य रखते हों। प्रत्येक बुरहान के समक्ष राइफलमैन औरंगज़ेब खड़े करने होंगे। इस प्रकरण में उदारवादी मुस्लिमों की भूमिका और भी आवश्यक हो जाती है। यह अनिवार्य है कि मुस्लिम समुदाय का उदारवादी तबका मुखर होकर अपनी भारतीय पहचान के साथ खड़ा हो और कह सके कि उसकी धार्मिक या मज़हबी पहचान व राष्ट्रीय पहचान में अंतर्विरोध नहीं है।

प्रचार और प्रोपेगेंडा का उत्तर देने के लिए अपने दृष्टिकोण में स्पष्टता और निश्चितता लानी होगी, फिर किसी भी प्रकार के चरमपंथी प्रोपेगेंडे को तोड़ने के लिए सरकार और सरकारी एजेंसियों को भी अपने प्रचार तंत्र को उतना ही सुदृढ़ रखना होगा। स्कूली और उच्च शिक्षा तथा संचार प्रमुख माध्यम है, जिससे ‘भारत एक राष्ट्र’ के विचार को उस ‘कश्मीरी अवाम’ तक पहुँचाया जा सकता है, जो वहाँ गए पर्यटकों से पूछते हैं – तुम भारत से हो! इसके लिए ज़रूरी है कि भारत सरकार का इन पर पर्याप्त नियंत्रण हो। भारत का राजनैतिक नेतृत्व दृढ़ता दिखाए, जिससे कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास संभव हो, साथ ही शेष भारत के लिए कश्मीर के रास्ते खुले। यह सुनिश्चित करने के उपरान्त ही कश्मीर को इस्लामिक आतंकवाद के गड्ढे़ से निकाला जा सकेगा।

पलायन के उपरान्त विश्व भर में बिखरा कश्मीरी पंडित समुदाय जब हेराथ का (महाशिवरात्रि) का पर्व मना रहा होगा तो निश्चित तौर पर वे आक्रांताओं के प्रत्युत्तर में सतत जलती रहने वाली ज्योति का पुण्य स्मरण भी कर रहे होंगे। शायद शिवभक्तों को किसी दिन डल का किनारा और चिनारों की छाँव नसीब हो। कश्यप के पुत्रों के कश्मीर लौटने के उपरान्त ही कश्मीर में शांति के दिन लौटेंगे।

लेखक: शशांक शेखर सिंह

ONE NATION. ONE CARD: जानें फीचर्स और कैसे उठाएँ इसका लाभ, PM मोदी ने किया लॉन्च

कल सोमवार (मार्च 4, 2019) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन नेशन वन कार्ड’ की शुरुआत की। इस कार्ड का उपयोग किसी भी प्रकार की यात्रा के लिए किया जा सकता है। इसे बस, लोकल ट्रेन, मेट्रो- इन सभी में प्रयोग किया जा सकेगा। सबसे बड़ी बात यह कि एक ही कार्ड पूरे देश में मान्य होगा। सभी बैंकों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड में ख़ास फीचर जोड़ कर ऐसा किया जा सकेगा। इस फीचर के जुड़ते ही आप अपने कार्ड को शॉपिंग के अलावा मेट्रो वगैरह में यात्रा के लिए भी उपयोग कर पाएँगे।

अब बैंक जो भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड जारी करेंगें, उसमें ‘National Common Mobility Card’ फीचर जोड़ा जाएगा, जिस कारण आपका कार्ड किसी वॉलेट की तरह ही कार्य करेगा। इस से कई फ़ायदे होंगे। आपको अलग-अलग शहरों के लिए अलग-अलग कार्ड्स नहीं रखने पड़ेंगे। यात्रा का माध्यम बदलने पर कार्ड नहीं बदलना पड़ेगा। खुल्ले पैसों के झंझट से मुक्ति मिलेगी और कैशलेस इंडिया की तरफ ये एक बड़ा क़दम होगा। अभी यह सुविधा सिर्फ़ अहमदाबाद में ही लॉन्च की गई है लेकिन कुछ ही दिनों में इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

वन नेशन – वन कार्ड

कुछ महीनों पहले ही मोदी सरकार ने ‘वन नेशन वन कार्ड’ पॉलिसी का ऐलान कर दिया था। अब इसे अमली जामा पहनाया जा रहा है। इस कार्ड को पाने के लिए आपको अपने बैंक से संपर्क करना पड़ेगा। ये कार्ड 25 से भी अधिक बैंकों में उपलब्ध होगा, जिसमें एसबीआई और पीएनबी प्रमुख हैं। दिल्ली परिवहन निगम के बसों में भी अब स्मार्ट कार्ड्स चल निकला है। अहमदाबाद में पीएम मोदी ने इसके अलावा कई अन्य योजनाओं की भी शुरुआत की। सितम्बर 2018 में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने इस बारे में विशेष जानकारी देते हुए कहा था कि सभी राज्यों से इस बारे में तकनीकी पहलुओं पर राय माँगी गई और फिर इस कार्ड को डेवेलप किया गया।

इस नई पहल को ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट ‘स्वागत‘ ने विकसित किया है, जहाँ एक ओपन लूप ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम ‘स्वीकार‘ का इस्तेमाल किया गया है। यूजर्स इस दौरान इस कार्ड की मदद से एटीएम पर 5% और अन्य आउटलेट्स पर 10% तक का कैशबैक पा सकते हैं। इतना ही नहीं, इस कार्ड का प्रयोग पार्किंग एवं टोल भुगतान के लिए भी किया जा सकेगा। कुल मिला कर देखें तो ‘One Nation One Card’ से कई तरह के फ़ायदे हैं।

सिद्धू ने वायु सेना से पूछा, ‘पेड़ उखाड़ने गए थे क्या?’

नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर से विवादित बयान देकर भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकी कैम्पों पर की गई एयर स्ट्राइक का राजनीतिकरण करने की कोशिश की है। इस से पहले पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान का बचाव कर वो लोगों के निशाने पर आ चुके हैं। अबकी नवजोत सिंह सिद्धू ने एक तरह से भारतीय वायु सेना की क्षमता का भी अपमान किया है। आज सोमवार (मार्च 3, 2019) को किए गए एक ट्वीट में सिद्धू ने कहा:

“300 आतंकी मारे गए। हाँ या नहीं? तो इसका क्या उद्देश्य था? आप आतंकियों को मार गिराने गए थे या पेड़ों को? क्या यह चुनावी हथकंडा है? विदेशी शत्रु से लड़ने के नाम पर हमारे लोगों से छल हुआ है। सेना का राजनीतिकरण बंद कीजिए। ऊँची दुकान-फीका पकवान।”

नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री हैं। पुलवामा हमले के बाद उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर पंजाब विधानसभा तक- हर जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे। जनता के आक्रोश को देखते हुए सोनी चैनल ने उन्हें कॉमेडी कार्यक्रम ‘दी कपिल शर्मा शो’ से हटा दिया था। वहीं अब ख़बरें आ रही हैं कि लोगों का गुस्सा कम होते ही सिद्धू की शो में वापसी कराई जाएगी। इस शो के प्रोड्यूसर सलमान ख़ान हैं। कहा जा रहा है कि सिद्धू के साथ चैनल ने कभी करार आधिकारिक तौर पर ख़त्म ही नहीं किया था, बल्कि सिर्फ़ उन्हें शो से बहार रखा गया था।

नवजोत सिंह सिद्धू एयर स्ट्राइक का सबूत माँगने वाले अकेले नेता नहीं है। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी एयर स्ट्राइक के सबूत दिखाने की माँग की है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस तरह अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद सबूत जारी किए गए थे, कुछ ऐसा ही भारत सरकार को भी करना चाहिए। ज्ञात हो कि पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर किए गए एयर स्ट्राइक के बाद 300 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई।

अमित शाह ने एक बयान में 250 आतंकियों के मारे जाने की बात कही थी। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने उन पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या शाह के मुताबिक़ सेना झूठ बोल रही है? कवि कुमार विश्वास ने एयर स्ट्राइक का सबूत माँगने वालों को अपने अंदाज में जवाब देते हुए लिखा- “सैनिक के लिए शत्रु पर आक्रमण उसके पराक्रम-प्रदर्शन की सौभाग्य-रात्रि होती है! ऐसी आत्म-दीपित “सुहागरातों” के सबूत न तो माँगे जाते है और न ही दिए जाते हैं! कुछ महीनों में ये जगभर को स्वयं ही ज्ञापित हो जाते हैं

भारत में घुसने की कोशिश कर रहा था Pak ड्रोन, सुखोई ने मार गिराया

राजस्थान में सीमा पार से घुसपैठ कर रहे पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया। भारतीय एयर डिफेंस रडार द्वारा मिली जानकारी के बाद बीकानेर जिले के नाल सेक्टर इलाक़े में स्थित सीमा पर एक ड्रोन को सोमवार सुबह 11:30 बजे एयर फोर्स ने मार गिराया। उक्त पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय राडार ने डिटेक्ट कर लिया, जिसके बाद उसे मार गिराया गया। बीकानेर जिले के नाल सेक्टर इलाके में स्थित सीमा पर एक ड्रोन को सोमवार सुबह 11:30 बजे एयर फोर्स ने ड्रोन को मार गिराने के लिए सुखोई-30 एमकेआई का प्रयोग किया।

ज्ञात हो कि दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव के बाद पाकिस्तान से लगातार घुसपैठ की कोशिश हो रही है। पाकिस्तान सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ के अलावा लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। भारतीय सेना द्वारा इसका कड़ा प्रत्युत्तर दिया जा रहा है। याद हो कि 26 मार्च को गुजरात के कच्छ में ऐसे ही एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया था। उस दौरान इजराइल से लाए गए एयर डिफेंस सिस्टम ‘स्पाइडर’ के प्रयोग से उस ड्रोन को डिटेक्ट किया गया था। इसके बाद डर्बी मिसाइल ने उस ड्रोन को मार गिराया।

आज सोमवार (मार्च 3, 2019) को यह ड्रोन सोमवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे पाक सीमा की तरफ से आया और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते हुए अनूगढ़ सेक्टर से भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहा था। इस ड्रोन को देखते ही हरकत में आई वायुसेना ने इसे मार गिराया। भारतीय वायु सेना ने जेट विमानों से मिसाइलें दागी। आपको बता दें कि 27 फरवरी को भी पाकिस्तान के 10-12 फाइटर जेट्स ने राजस्थान के अनूपगढ़ इलाके में हवाई अंतरिक्ष उल्लंघन का प्रयास किया था, लेकिन वायु सेना की सतर्कता से पाकिस्तान की यह हरकत नाकाम रही।


चौतरफा घिरा पाकिस्तान, ईरान ने भी दी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की चेतावनी

पाकिस्तान स्थित आतंकी कैम्पों पर भारत द्वारा की गई ‘एयर स्ट्राइक’ के बाद ईरान ने भी वहाँ कुछ इसी तरह की कार्रवाई करने की धमकी दी है। ईरान सरकार ने पाकिस्तान से कड़े शब्दों में कहा है कि वो आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करे वरना अंजाम बुरा होगा। बता दें कि इस से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर कई वैश्विक नेता पाकिस्तान को उसकी ज़मीन पर लगातार पनप रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुके हैं। भारतीय एयर स्ट्राइक के बाद ईरान ने पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है क्योंकि वह भी सीमा पर पाक समर्थित आतंकियों से पीड़ित है।

आइआरजीसी कुर्द सेना के प्रमुख जनरल कासिम सोलेमानी ने पाकिस्तान सरकार व वहाँ के सैन्य प्रतिष्ठान को आगाह करते हुए कहा:

“मैं पाकिस्तान की सरकार से सवाल करना चाहता हूँ कि आप किस ओर जा रहे हैं? सभी पड़ोसी देशों की सीमा पर आपने अशांति फैला रखी है। क्या आपका कोई ऐसा पड़ोसी बचा है जहाँ आप असुरक्षा फैलाना चाहते हैं। आपके पास तो परमाणु बम हैं, लेकिन आप इस क्षेत्र में एक आतंकी समूह को खत्म नहीं कर पा रहे जिसके सदस्यों की संख्या सैकड़ों में है। पाकिस्तान को ईरान के सब्र का इम्तेहान नहीं लेना चाहिए।”

आतंकवाद के मुद्दे पर ईरान और भारत इस तरह से एक ही तरफ हैं। हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान के रिश्ते अच्छे रहे हैं। भारत ने ईरान से तेल की एवज में चावल और चीनी देने का भी निर्णय लिया है। व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ भारत और ईरान का सम्बन्ध काफ़ी प्राचीन रहा है। बता दें कि जिस दिन पुलवामा में हमारे 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे, उसी दिन ईरान में भी पाक पोषित आतंकियों ने एक आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था।

13 फरवारी को पाकिस्तान से सटी ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान सीमा में एक आत्मघाती हमले में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के 27 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में पाकिस्तानी ज़मीन पर पल रहे आतंकियों का हाथ सामने आया था। इसके बाद से ही ईरान ने सख़्त तेवर अपना लिया। कुर्द सेना के कमांडर ने कहा कि अगर समय रहते पाकिस्तान नहीं चेता तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। भारत द्वारा पाकिस्तान में घुस कर एयर स्ट्राइक करने के बाद अब पाक से ट्रस्ट सभी पड़ोसी आवाज उठा रहे हैं।

उधर अफ़ग़ानिस्तान से भी पाक के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। अफ़ग़ानिस्तान तो पाकिस्तान से इतना ट्रस्ट है कि उसने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर कहा है कि पाकिस्तान वहाँ कुछ ज़्यादा ही हस्तक्षेप कर रहा है। भारत द्वारा एयर स्ट्राइक के बाद चीन ने भी लगभग हाथ खड़े करते हुए पाकिस्तान की किसी भी प्रकार की मदद नहीं की। इमरान ख़ान और तालिबान के बीच बैठक को लेकर भी अफ़ग़ानिस्तान ख़फ़ा है। कुल मिला कर देखें तो पड़ोसियों के कड़े तेवर के बाद पाकिस्तान के पास अब आतंकी सगठनों पर कार्रवाई करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है।

ओडिसा में पटनायक को झटका, BJP में शामिल हुए पूर्व BJD सांसद बैजयंत जय पांडा

ओडिसा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल को झटका देते हुए पूर्व सांसद बैजयंत जय पांडा ने भाजपा का दामन थाम लिया है। हालाँकि, उन्होंने 9 महीने पहले ही बीजेडी छोड़ दी थी। उसके बाद से वह पार्टी के ख़िलाफ़ ख़ासे मुखर रहे थे। पांडा ने पीएम मोदी और राजग सरकार की योजनाओं की तारीफ़ करते हुए कई लेख भी लिखे। उनके कई दिनों से भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। ओडिसा के तटीय इलाक़ों में प्रभाव रखने वाले पांडा की उपस्थिति से भाजपा आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों में काफ़ी उम्मीद लिए बैठी है।

बीजद द्वारा निलंबित किए जाने के बाद पांडा ने लोकसभा व पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। पांडा ने भाजपाध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात कर पार्टी मुख्यालय में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी वहाँ मौजूद थे। इसके बाद अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा:

“नौ महीने का आत्मचिंतन और सहयोगियों एवं लोगों से व्यापक विचार विमर्श हुआ। सभी ओर से प्राप्त समर्थन के लिए आभारी हूं। महाशिवरात्रि के पवित्र अवसर पर मैंने भाजपा में शामिल होने तथा नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के अनुरूप ओडिशा और भारत की सेवा करने का निर्णय लिया है।”

इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेस में उन्होंने ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य में शासन व्यवस्था का स्तर काफ़ी तेजी से नीचे गिर रहा है। महिलाओं व बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध बढ़ रहे हैं। 2009 और 2014 में केंद्रपाड़ा लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले पांडा उस से पहले 9 वर्षों तक राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। संसद में अपनी सक्रियता के लिए जाने जाने वाले पांडा ने 2017 के ओडिसा पंचायत चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद बीजद को आत्मविश्लेषण की सलाह दी थी।

वैसे, यह अचानक नहीं हुआ है। जून 2018 में जब उनके पिता बंसीधर पांडा का निधन हो गया था, तब प्रधानमंत्री मोदी ने संवेदना पत्र भेजा था। इस से अभिभूत पांडा ने ट्वीट कर पीएम को धन्यवाद कहा था।

इसके बाद से ही भाजपा और पांडा में नज़दीकियाँ बढ़ने लगी थीं। ओडिसा में विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ ही होने की संभावना है। बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पिछले 19 वर्षों से राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

एयर स्ट्राइक के दौरान बालाकोट आतंकी कैम्प में सक्रिय थे 300 मोबाइल: NTRO का बड़ा ख़ुलासा

भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर की गई एयर स्ट्राइक में क़रीब 300 से ज़्यादा आतंकियों के मारे जाने का सबूत सामने आया है। ANI के अनुसार, नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) के सर्विलांस से खुलासा हुआ है कि जब बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की, उस समय वहाँ पर 300 के क़रीब मोबाइल फोन सक्रिय थे। इससे साफ़ होता है कि भारतीय वायुसेना ने जिस समय बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों पर हमला किया, उस समय वहाँ पर 300 के आसपास आतंकी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक NTRO ने भारतीय वायुसेना को बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में 300 के क़रीब मोबाइल फोन सक्रिय होने की जानकारी दी थी। इसके अलावा बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में 300 के आसपास आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी RAW ने भी उपलब्ध कराई थी। ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी सैटेलाइट के जरिए जैश के बालाकोट कैंप में काफी संख्या में आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी जुटाई थी। कुछ सूत्रों के हिसाब से ये संख्या 300-700 तक हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आतंकी कैंप में नए रिक्रूट हुए आतंकियों से मोबाइल छिन ली जाती है। वहाँ सिर्फ सीनियर आतंकियों को ही मोबाइल रखने की छूट होती है।

तीनों एजेंसियों की जानकारी के बाद भारतीय वायुसेना के मिराज लड़ाकू विमानों ने जैश के कैंप पर एयर स्ट्राइक की थी। भारतीय वायुसेना का बालाकोट मिशन पूरी तरह सफल रहा था। भारत द्वारा की गई ‘एयर स्ट्राइक’ से बौखलाए पाकिस्तान ने इसके बाद भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र में हवाई हमला किया, जिसका भारतीय वायुसेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया। इस हवाई भिड़ंत में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-16 लड़ाकू विमान को भी मार गिराया था।

इस दौरान भारतीय वायुसेना का मिग-21 विमान भी हादसे का शिकार हो गया था। साथ ही इसको उड़ा रहे विंग कमांडर अभिनंदन वर्द्धमान पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में पहुँच गए थे, जहाँ उनको पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वो अभिनंदन को तुरंत रिहा करे। भारत के सख़्त रुख के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा और वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान को विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने का ऐलान करना पड़ा। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की घोषणा के बाद शुक्रवार को अभिनंदन को अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत को सौंप दिया गया। फिलहाल दिल्ली में विंग कमांडर अभिनंदन का मेडिकल चेकअप और इलाज चल रहा है।

आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक को लेकर राजनीतिक पार्टियाँ लगातार मोदी सरकार को घेर रही हैं। साथ ही कई राजनीति पार्टियों और उनके नेताओं ने बालाकोट एयर स्ट्राइक में आतंकियों के मारे जाने के सबूत मांगे हैं। ऐसे में यह खबर मोदी सरकार के लिए राहत भरी हो सकती है। इससे पहले जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई ने भारत की एयर स्ट्राइक की तबाही का रोना रोया था। इसका ऑडियो भी सामने आया था। हाल ही में दिग्विजय सिंह, ममता बनर्जी, नवजोत सिंह सिद्धू सहित कई नेताओं ने आतंकियों के मरने के सबूत माँगे थे।

DD न्यूज़ ऑफिस में बाँटी गई थी मिठाइयाँ, जब मोदी को नहीं मिला था US वीजा: किताब में खुलासा

डीडी न्यूज़ यानी कि दूरदर्शन समाचार का यूपीए सरकार द्वारा 2004-2014 के बीच किस तरह से दुरुपयोग किया गया था, इसका  खुलासा डीडी न्यूज़ के एंकर और पत्रकार अशोक श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक “नरेंद्र मोदी सेंसर” में हुआ है।

यह पुस्तक मुख्य रूप से नरेंद्र मोदी के एक साक्षात्कार के बारे में है, जो 2014 के लोकसभा चुनावों में डीडी न्यूज पर प्रसारित किया गया था। यह साक्षात्कार अशोक श्रीवास्तव द्वारा संचालित किया गया था, लेकिन इसका प्रसारण काफी देर से और सेंसर करने के बाद किया गया था।

प्रसारित होने के बाद भी, यह विवादों में घिर गया क्योंकि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने डीडी न्यूज़ द्वारा सेंसर की गई इस गलतफहमी को और भी ज्यादा फैला दिया था। अशोक श्रीवास्तव उस साक्षात्कार के आसपास की घटनाओं से जुड़े तारों को याद करते हुए अपनी किताब में यह भी बताते हैं कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा एक सार्वजनिक संस्थान का इस्तेमाल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को निशाना बनाने के लिए किया गया था।

इस पुस्तक के अनुसार दूरदर्शन का इस्तेमाल यूपीए सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों के समर्थन में सामग्री बनाने के लिए भी किया गया था। उस समय दूरदर्शन में काम कर रहे कुछ लोग वहाँ के ‘पावर सेंटर’ बन गए थे। पत्रकारिता करने वाली यह सरकारी जगह बहुतों को शर्मिंदगी महसूस करवाने के लिए 9 दिसंबर को मिठाईयाँ बाँटकर सोनिया गांधी का जन्मदिन भी मनाती थी।

अशोक श्रीवास्तव बताते हैं कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्हें वीजा देने से मना कर दिया गया था तो मिठाईयाँ बांंटकर उन्हें और उनके जैसे कुछ और पत्रकार, जो कि वहाँ पर काम करते थे, को काफी शर्मिंदगी महसूस करवाई गई थी।

हालाँकि, किसी ने भी इस तरह की प्रथाओं के खिलाफ कुछ नहीं बोला क्योंकि ‘पावर सेंटर’ में कॉन्ग्रेस के सदस्य थे और ‘दूरदर्शन के कर्मचारी’ इस बात के गवाह थे कि दर्जनों पत्रकार – मुख्य रूप से जो दीपक चौरसिया के साथ शामिल हुए थे, को 2004 में मज़बूरन इस्तीफा देना पड़ा था, जब कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आई थी। इसीलिए कोई भी पत्रकार कॉन्ग्रेस के खिलाफ कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

इतना ही नहीं, इस किताब का दावा है कि साल 2007 के गुजरात चुनाव के दौरान दूरदर्शन के संवाददाता संपादकीय सलाह के तौर पर एक ‘कंसलटेंट’ और तीस्ता सीतलवाड़ से आदेश लेते थे। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनावों के बाद इस ‘पावर सेंटर’ की विशेष शक्तियाँ कम हो गई थीं। संभवतः ऐसा कॉन्ग्रेस की आंतरिक राजनीति के कारण हुआ था। लेकिन फिर भी यह ‘पावर सेंटर’ मोदी पर निशाना बनाने के लिए तुली हुई थी।

दूरदर्शन में मोदी से जुड़ी अच्छी खबरों पर और उनके द्वारा किए गए कार्यों पर बैन लगना जारी रहा। जिसके कारण अशोक श्रीवास्तव को उस समय काफ़ी हैरानी हुई, जब पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार को आगे बढ़ाने को कहा।

हिंदी में लिखी यह किताब इस बात का सबूत है कि कॉन्ग्रेस के समय में मीडिया किस हद तक ‘स्वतंत्र’ थी। इस किताब से मालूम चलता है कि आज मीडिया पर खतरा बताने वाली बातें भी केवल एक प्रोपेगेंडा का ही हिस्सा है।

यह किताब इस बात की भी याद दिलाती है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी का इस्तेमाल किया गया था और 2019 के आते-आते भी स्थितियाँ बदली नहीं हैं। चीजें आपके सामने हैं, उस समय प्रियंका को प्रचारक के रूप में उतारा गया था और अब महासचिव का चेहरा दिया गया है।

महाशिवरात्रि पर तनाव: शिव-प्रतिमा को लेकर चश्मुद्दीन के गैंग ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों से की मारपीट

आगरा में महाशिवरात्रि के अवसर पर साम्प्रदायिक तनाव भड़कने की ख़बर आई है। ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, लोहामंडी के मोहल्ला पुरानी गढ़इया में खाली जमीन पर वाल्मीकि बस्ती के लोग भगवान शिव की प्रतिमा स्थापना करना चाहते थे। लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया। बताया जाता है कि प्रतिमा स्थापना की तैयारी काफ़ी दिनों से ज़ोर-शोर से चल रही थी। आज सोमवार (मार्च 4, 2019) को सांप्रदायिक तनाव ने मारपीट का रूप ले लिया, जिसके कारण तीन थानों की पुलिस को घटनास्थल पर कैम्प करना पड़ा।

उक्त खाली ज़मीन किदवई पार्क के पीछे मोहल्ला पुरानी गढइया में स्थित है। यहीं के अखाड़ा मोहल्ले का एक परिवार मूर्ति स्थापना का विरोध कर रहा था। मामले की शुरुआत तब हुई जब चश्मुद्दीन ने इस ज़मीन पर दावा ठोकते हुए कहा कि यह ज़मीन उसकी है और वह प्रतिमा स्थापना नहीं करने देगा। इधर वाल्मीकि बस्ती के कुसुम साहू ने बताया कि उक्त ज़मीन नजूल की है। 300 गज की इस ज़मीन के बारे में चश्मुद्दीन का कहना है कि पूरा मोहल्ला मिल कर इस पर कब्ज़ा करना चाहता है। चश्मुद्दीन ने दावा किया कि ये उसके पुरखों की ज़मीन है और उसके पास इस से जुड़े दस्तावेज भी हैं।

स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद थाने को को सूचना दी गई और पुलिस के पहुँचने से पहले वाल्मीकि बस्ती के लोगों ने प्रतिमा की स्थापना कर दी थी। प्रतिमा स्थापना की सूचना मिलते ही चश्मुद्दीन गिरोह के लोगों ने आकर मारपीट शुरू कर दी। इलाक़े में अफरातफरी मचने के बाद पुलिस वहाँ पर पहुँची। उस समय दोनों पक्षों के बीच पथराव हो रहा था। पुलिस के आने पर पथराव करने वाले तो भाग गए लेकिन मारपीट नहीं थमी। पुलिस के सामने भी मारपीट चलती रही।

स्थिति बेक़ाबू होने पर लोहामंडी, जगदीशपुरा और हरीपर्वत- इन तीनों थाने की फोर्स पहुँच गई। इसके बाद जाकर लोगों को वहाँ से हटाया जा सका। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों से दस्तावेज दिखाने को कहा गया है, जिसके बाद झगड़े के कारणों का पता चलेगा। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी इस विवाद की वजह नहीं पता।