उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिला स्थित चुनार में एक मस्ज़िद के इमाम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर न सिर्फ़ भद्दी टिप्पणी की बल्कि उनकी कई फोटो को भी आपत्तिजनक रूप से एडिट कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वो खुद को ‘इस्लामिक स्कॉलर’ बताता है। सोशल मीडिया पर उसके द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर लोगों ने उसका विरोध किया। लोगों द्वारा मना किए जाने व विरोध दर्ज कराने के बावजूद इमाम ने वो पोस्ट हटाने से मना कर दिया। बाद में थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया है। इमाम का नाम आबिद अली हुसैन है।
पीएम का अपमान करने वाले आबिद की फेसबुक प्रोफाइल
ख़बरों के अनुसार, पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए एयर स्ट्राइक के खिलाफ इस व्यक्ति ने कई आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट की थीं, जो कि भद्दी और अश्लील होने के साथ प्रधानमंत्री मोदी के चरित्र तक उँगली उठा रही थीं। ये तस्वीरें किसी सॉफ़्टवेयर की मदद से मैनिपुलेट की गई थीं।
इस मामले को लेकर चुनार पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। उसने पीएम मोदी का अपमान करने के लिए उनकी फोटो को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की फोटो के साथ एडिट कर फेसबुक पर पोस्ट किया। उसने एक के बाद एक ऐसी कई भद्दी फोटोज शेयर की। मूल रूप से बिहार का रहने वाला इमाम आबिद पर निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:
आईपीसी की धारा 153 ए (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, और सद्भाव बनाए रखने के ख़िलाफ़ पूर्वाग्रहपूर्ण कार्य करना।)
295 ए (जानबूझकर किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य।)
किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाने के उद्देश्य से, उसके धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करना।
505 (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाला बयान देना।)
“मिर्जापुर: भारत ने पीओके में आतंकियों पर की कार्यवाई तो गुस्से में पीएम मोदी को फेसबुक पर गाली लिखने लगा मस्जिद का इमाम, गिरफ्तार।
जलालपुर माफी गांव स्थित एक मस्जिद मे इमाम मो. आबिद हुसैन पर 153-A, 295, 502 के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गय… https://t.co/PzArds1ehA“
27 वर्षीय इमाम आबिद के ख़िलाफ़ चुनार थाने में भाजपा जिला युवा मोर्चा के अध्यक्ष मोहन यादव व अन्य की शिकायतों के बाद ये मामले दर्ज किए गए। आबिद को एफआईआर फाइल होने के तुरंत बाद गिरफ़्तार कर लिया गया। वह लगभग एक दशक पूर्व बिहार से मिर्ज़ापुर आ कर बस गया था। उसे 2012 में जलालपुर गाँव स्थित मस्ज़िद का इमाम बनाया गया था।
उधर एक अन्य मामले में बाराबंकी के एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को भी पुलवामा हमले को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के कारण उसके पद से ससपेंड कर दिया गया। उसने एक व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से यह ओछी हरकत की थी। इस बारे में विशेष जानकारी देते हुए शिक्षाधिकारी वीपी सिंह ने कहा:
“बड़वन के सरकारी प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर सुरेंद्र कुमार ने मंगलवार रात को एक व्हाट्सएप ग्रुप में पुलवामा हमले को लेकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। बुधवार को मुझे जानकारी मिली और संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को इस पर गौर करने के लिए कहा गया। बीईओ द्वारा उसे (हेडमास्टर को) दोषी पाए जाने के बाद हमने यह कार्रवाई की।”
पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत की दंडात्मक कार्यवाही के बाद अनुच्छेद 35-A और 370 को हटाने को लेकर बहुत सी बातें कही जा रही हैं। इन दोनों विवादास्पद अनुच्छेदों को हटाने के पक्ष, विपक्ष और कठिनाईयों के बारे में लेख पर लेख प्रकाशित किए जा रहे हैं।
बहुत से विचार पढ़ने के बाद यही समझ में आता है कि अधिकांश जानकारों और लेखकों ने अपने हिसाब से अनुच्छेद 35-A की व्याख्या की और अपनी धारणा को स्थापित करने के लिए तर्क प्रस्तुत किए लेकिन तथ्यों को सही प्रकार सामने नहीं रखा। अनुच्छेद 35-A को हटाना कितना आवश्यक है यह समझने के लिए इसके औचित्य और उत्पत्ति को समझना होगा। अनुच्छेद 35-A की उत्पत्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 में निहित शक्तियों में है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 से अधिक विवादित कोई अन्य अनुच्छेद कभी नहीं रहा। अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर जितना विवाद है उससे अधिक इसकी गलत व्याख्या की जाती रही है। इस अनुच्छेद की व्याख्या में अनर्गल तर्क देने वाले बुद्धिजीवी यहाँ तक कहते रहे हैं कि 370 ‘कश्मीर को असाधारण स्वायत्तता’ प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा जाता है कि 370 ‘कश्मीर को विशेष राज्य’ का दर्ज़ा देता है।
इस प्रकार के तर्क अपने आप में कितने हास्यास्पद हैं इसकी पड़ताल करने के लिए संविधान को पढ़ना आवश्यक है। भारतीय संविधान के भाग-21 में ‘Temporary, Transitional and Special Provisions’ के अंतर्गत अनुच्छेद 370 एक ‘अस्थाई’ (temporary) प्रावधान है। अपने मौलिक स्वरूप में यह अनुच्छेद संख्या ‘306-ए’ था जब इसे संविधान सभा में लाया गया था। वह 17 अक्टूबर 1949 का दिन था जब अनुच्छेद 306-ए को गोपालस्वामी आयंगर चर्चा के लिए संविधान सभा में लेकर आए थे।
गोपालस्वामी आयंगर इस अनुच्छेद को क्यों लेकर आए थे इसपर हम लेख में आगे बात करेंगे। फ़िलहाल यह समझें कि जब संविधान बनकर तैयार हो गया था तब भाग-21 में ‘Temporary’ और ‘Transitional’ शब्द ही थे। ‘स्पेशल’ शब्द तेरहवें संशोधन से 1962 में जोड़ा गया था। इस दृष्टि से किसी राज्य के लिए जिन्हें विशेष (special) प्रावधान कहा जाना चाहिए वह तो अनुच्छेद 371 (A से लेकर I तक) है जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर पूर्वी राज्य, गोवा और आंध्र प्रदेश के विकास के लिए तमाम प्रावधान किए गए हैं। यदि जम्मू कश्मीर एक अस्थाई अनुच्छेद 370 को लेकर किसी ‘विशेष’ दर्ज़े का दावा कर सकता है तो अनुच्छेद 371 A-I तक में विशेष राज्य का दर्ज़ा पाने वाले राज्यों को तो भारत से अलग ही हो जाना चाहिए।
स्वायत्तता की बात करें तो जम्मू कश्मीर राज्य को लेकर विगत 70 वर्षों में शब्दों की गजब बाजीगरी की गई है। हमेशा ‘कश्मीर’ की स्वायत्तता की बात की जाती है जबकि राज्य का नाम ‘जम्मू और कश्मीर’ है। पूरे जम्मू कश्मीर राज्य में जम्मू, कश्मीर घाटी, मीरपुर, मुज़फ्फ़राबाद, गिलगित, बल्तिस्तान, सियाचिन, शक्सगाम घाटी, लेह और लदाख का क्षेत्र सम्मिलित है।
यह सच है कि गिलगित-बल्तिस्तान और मीरपुर-मुज़फ्फ़राबाद के क्षेत्र पर पाकिस्तान का अनधिकृत कब्जा है और चीन का भी जम्मू कश्मीर राज्य के एक बड़े भूभाग पर कब्जा है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम जब भी बात करें तो कश्मीर की बात करें और बाकी क्षेत्रों का नाम भी न लें। कश्मीर घाटी की जनसंख्या भले ही अधिक है लेकिन इसका क्षेत्रफल पूरे जम्मू कश्मीर राज्य की तुलना में बहुत कम है। फिर भी 70 वर्षों तक इस क्षेत्र ने समूचे जम्मू कश्मीर राज्य की राजनीति और उससे उपजे अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को गढ़ा है।
अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को स्वायत्तता प्रदान करता है या नहीं इसे समझने के लिए भारत स्वाधीनता अधिनियम (India Independence Act 1947) और उस अधिमिलन पत्र (Instrument of Accession) को देखना होगा जिस पर महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को हस्ताक्षर किए थे। भारत स्वाधीनता अधिनियम के अनुसार दो डोमिनियन बनने थे- इंडिया और पाकिस्तान। लगभग साढ़े पाँच सौ रियासतों में से कुछ सबसे बड़ी रियासतों को अधिमिलन पत्र के द्वारा इंडिया और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने का अधिकार दिया गया था।
आज ऐसा भ्रम फैलाया जाता है कि रियासतों को तीन विकल्प दिए गए थे जिनमें स्वतंत्र रहने का विकल्प भी था लेकिन यह सत्य नहीं है। रियासतों को भारत और पाकिस्तान इन्हीं दो डोमिनियन में से एक को चुनना था वह भी इस शर्त पर कि रियासत जिस डोमिनियन में जा रही है उसकी सीमा उस डोमिनियन से लगनी चाहिए। इसी शर्त के चलते हैदराबाद पाकिस्तान का भाग नहीं बन पाया और बलूचिस्तान भारत में सम्मिलित नहीं हो पाया।
जम्मू कश्मीर की स्वायत्तता को लेकर एक भ्रम यह भी फैलाया जाता है कि भारत में जम्मू कश्मीर राज्य का विलय पूर्ण रूप से नहीं हुआ था। इसके पीछे तर्क दिए जाते हैं कि राजा द्वारा अधिमिलन पत्र में तीन विषय ही सरेंडर किए गए थे- रक्षा, विदेश मामले और संचार। यह तर्क पूरी तरह से गलत है क्योंकि महाराजा हरि सिंह ने केवल अधिमिलन पत्र पर ही हस्ताक्षर नहीं किए थे बल्कि उन्होंने स्टैन्ड्स्टिल एग्रीमेंट (Standstill Agreement) पर भी हस्ताक्षर किए थे जिसमें उन्होंने रक्षा, विदेश मामले और संचार के अतिरिक्त भी बाकी सारे विषय भारत को सरेंडर कर दिए थे।
इसके साथ ही 25 नवंबर 1949 को महाराजा हरि सिंह के पुत्र और जम्मू कश्मीर राज्य के रीजेंट कर्ण सिंह ने आधिकारिक घोषणा कर भारतीय संविधान को स्वीकार किया था। अर्थात 26 नवंबर को भारत की संविधान सभा द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित तथा आत्मार्पित करने से एक दिन पहले जम्मू कश्मीर राज्य ने भारतीय संविधान को अपनाया था।
इन तथ्यों से मुँह फेरकर यह कहना कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज़ा देता है और यह कश्मीरियों का अधिकार है और इसके आधार पर जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष और स्वायत्त राज्य बताना वामपंथी गिरोह की चालबाज़ी है और कुछ नहीं। अब सवाल यह उठता है कि यदि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को भारत से अलग नहीं करता तो इसे लेकर इतना विवाद क्यों है? इसकी पड़ताल के लिए हमें पुनः 17 अक्टूबर 1949 के दिन संविधान सभा में गोपालस्वामी आयंगर द्वारा दी गई दलीलों को देखना होगा।
उस दिन संविधान सभा में गोपालस्वामी आयंगर ने जब अनुच्छेद 306-A (जो बाद में 370 कहलाया) प्रस्तुत किया तब उनसे इसके औचित्य पर सवाल किए गए। इस पर आयंगर ने जो उत्तर दिया वह ग़ौर करने लायक है। आयंगर ने कहा कि चूँकि जम्मू कश्मीर राज्य में युद्ध की स्थिति है और राज्य के एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है इसलिए भारत का संविधान जस का तस पूरा वहाँ लागू नहीं किया जा सकता इसलिए जैसे-जैसे राज्य की स्थिति सामान्य होती जाए वैसे-वैसे संविधान के प्रावधान एक-एक कर के वहाँ लागू किए जाने चाहिए।
इस प्रकार अनुच्छेद 370 में यह लिखा गया कि जम्मू कश्मीर राज्य में भारतीय संविधान का केवल अनुच्छेद 1 लागू होगा और बाकी प्रावधान समय-समय पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा कुछ परिवर्तन और अपवादों सहित लागू किए जाएँगे। इस प्रकार भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के 200 से अधिक अनुच्छेद और अन्य प्रावधानों को संवैधानिक आदेश (Constitution Order) द्वारा जम्मू कश्मीर राज्य में लागू किया है।
लेकिन आज भी भारत के बहुत से ऐसे कानून हैं जो जम्मू कश्मीर में लागू नहीं हुए हैं जिसके लिए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारें ज़िम्मेदार हैं। उदाहरण के लिए भारतीय दण्ड संहिता (IPC) जम्मू कश्मीर में लागू नहीं है, इसके स्थान पर राजाओं के जमाने का रणबीर पीनल कोड लागू है। अनुच्छेद 370 की आड़ में कुछ ऐसे भी संवैधानिक आदेश लागू किए गए जिनके कारण अनुच्छेद 35-A जैसे असंवैधानिक प्रावधान जोड़े गए। नेहरू और इंदिरा ने 370 की आड़ में शेख अब्दुल्ला से विभिन्न करार किए जिनकी न कोई वैधानिकता थी न ज़रूरत। उन्हीं करारों के चलते जम्मू कश्मीर राज्य को अलग झंडा और न जाने क्या-क्या दे दिया गया जिसके कारण बाद के सालों में अलगाववाद को हवा मिली। भारत के विभाजन के समय जनता की राय लेने जैसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी। केवल राजा को ही यह तय करना था कि वह अपने राज्य सहित किस डोमिनियन में जाएगा। फिर भी आज तक कश्मीरी जनता के जनमत संग्रह की बात की जाती है।
इन सब विसंगतियों के लिए तत्कालीन सरकारें ज़िम्मेदार हैं। ऐसा भी नहीं है कि अनुच्छेद 370 को हटाया नहीं जा सकता। यह भारतीय संविधान का एकमात्र अनुच्छेद है जिसमें इसके हटाने के प्रावधान भी लिखे हैं। अनुच्छेद 370 के क्लॉज़ 3 में लिखा है कि राष्ट्रपति इसे जम्मू कश्मीर की संविधान सभा से सलाह लेकर कभी भी हटा सकता है।
जम्मू कश्मीर की संविधान सभा तो अब रही नहीं इसलिए भारत की संसद इसे हटा सकती है क्योंकि 370 संविधान का एक अनुच्छेद है और संसद द्वारा संविधान के किसी भी भाग को संशोधित करने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 368 में उल्लिखित है। उच्चतम न्यायालय ने केशवानंद भारती के केस में यह निर्णय दिया था कि संविधान के मौलिक ढाँचे के अलावा संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है।
उच्चतम न्यायालय ने 2016 के अपने निर्णय में भी यह कहा है कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को भारतीय संविधान से बाहर किसी भी प्रकार की स्वायत्तता प्रदान नहीं करता। सन 1964 में संसद में 370 के दुष्परिणामों को लेकर दस घंटे बहस हुई थी जिसमें इस अनुच्छेद को हटाने को लेकर पूरी संसद एकमत थी लेकिन तत्कालीन राजनैतिक नेतृत्व में इतना हौसला नहीं था कि इसे हटा सके। इस अनुच्छेद को लेकर न्यायालय में कई मामले लंबित हैं जिनपर पड़ने वाली तारीखों में क़ानूनी दाँवपेंच खेले जाते हैं और जानबूझकर 370 को बरकरार रखने के प्रयास किए जाते हैं जबकि इस अनुच्छेद की आयु और औचित्य दोनों पूरे हो चुके हैं।
आखिरकार पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के पायलट को भारत को वापस सौंपने की बात कर दी है। मीडिया का ‘क्यूट तंत्र’ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को मसीहा साबित करने में जुट चुका है। सागरिका घोष तो जज्बातों में इतना बह गई कि इमरान खान की घोषणा के अगले ही पल ट्वीटकर अपनी वैचारिक विकलांगता का प्रमाण दे डाला, जो यह साबित करता है कि वो किसी लोकतंत्र, सेना या सिपाही की लड़ाई नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अपनी विचारधारा को श्रेष्ठ साबित करने की जंग लड़ रही है।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि आख़िरकार साबित हो गया कि लिबरल्स की देशभक्ति ‘मस्कुलर राष्ट्रवाद’ से ऊपर है। वो ये ट्वीट करने के लिए 2 दिन भी रुक गई यही बड़ी बात मानी जानी चाहिए। उन्हें पढ़ने वालों के लिए ये सुकून देने वाली बात होती अगर वो एक बार भी पाकिस्तान की तरफ से रोजाना दोहराई जाने वाली आतंकवादी घटनाओं के साथ-साथ हाफ़िज़ सईद पर भी कार्रवाई करने की अपील करते।
वहीं NDTV की एक पत्रकार ने आज शाम ही ट्वीट कर जेनेवा संधि पर बात करने वालों का मजाक बनाते हुए लिखा है, “कल से भक्तों को गूगल पर जेनेवा संधि सर्च करते हुए देखकर मजा आ रहा है।” ऐसे लोग पत्रकारिता में स्थापित होकर बैठे हैं, ये बात सबसे ज्यादा चौंका देने वाली है। इसका सीधा सा जवाब ये हो सकता है कि ‘भक्त’ प्रॉपेगैंडा से ज्यादा अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं इसलिए वो हर संभावना के प्रति आशावान हैं।
Lovely to see bhakts googling “Geneva Convention” since yesterday.
कल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के प्रेस में दिए गए ‘शान्ति वार्ता के प्रयास’ के बयान पर तमाम मीडिया गिरोह कल से ही स्खलित हुए जा रहा था। मीडिया गिरोह का नाम लेते ही अगर आपके दिमाग में तुरंत बरखा दत्त, सागरिका घोष जैसे पत्रकारिता के नाम पर कलंकों के नाम स्वतः स्मरण हो आते हैं, तो आप एकदम सही खेल रहे हैं।
ये वही मीडिया का समुदाय विशेष है जो जैश-ए-मोहम्मद द्वारा प्रायोजित फिदायीन हमले में 40 भारतीय सैनिकों की निर्मम हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज करता है कि आखिर 56 इंच अब क्यों चुप है उसे पाकिस्तान पर करने में क्या समस्या आ रही?
इसके कुछ ही दिन बाद जब सेना अपने रौद्र रूप में आकर जवाबी कार्रवाई में इन्हीं आतंकवादियों के अड्डों को तबाह करने की बात कहती है तो पहले यह सबूत माँगता है और उसके बाद दुहाई देता है कि नरेंद्र मोदी का यह हिंसक तरीका सही नहीं है। आतंकवादियों के लिए इनके मन में अचानक से ममता फूट पड़ती है।
फिर 2 दिन बाद अपने 300-400 लाडले आतंकवादियों की मौत से बौखलाया पाकिस्तान अपनी औकात में आकर भारतीय सेना में घुसकर उधम मचाने का प्रयास करता है और दावा करता है कि एक भारतीय पायलट उनकी कैद में है। भारत का यही बिन पेंदी का मीडिया गिरोह एक बार फिर सक्रिय होकर नरेंद्र मोदी को निशाना बनाकर शान्ति और सहिष्णुता की माला जपना शुरू कर देता है। इसके बाद यह मीडिया तंत्र वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक को ‘नरेंद्र मोदी का अहंकार और चुनाव जीतने की लालसा’ बताता है।
हक़ीक़त ये है कि समाज और मीडिया अपनी संवेदनशीलता खो चुका है। अपने मुद्दे इस कारण से नहीं चुनता है कि ये वाकई में कहना सही या गलत होगा बल्कि इस वजह से चुनता है कि किस के विरोध में अपने अजेंडा को दिशा देनी है।
अक्सर भारतीय मीडिया तंत्र का एक बेहद बड़ा वर्ग ‘सत्संग’ और अपने ‘ताकतवर आदर्श लिबरल’ होने के नाम पर पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करने दिए जाने की वकालत करता नजर आता है। यह मुद्दा कभी राहत फ़तेह अली खान की वजह से गर्माता है तो कभी किसी अन्य पाकिस्तानी कलाकार की वजह से। इन आदर्श लिबरलों का मानना हमेशा यही रहा है कि ‘कला’ की सीमा नहीं होती है।
मजे की बात ये है कि कल भारतीय वायुसेना के पायलेट अभिनन्दन की तस्वीरें मीडिया में आने के बाद से ही, वही पाकिस्तान के भिखारी कलाकार भारतीय सेना पर अभद्र टिप्पणियाँ करते हुए अपनी कुंठा खुलेआम व्यक्त कर रहे हैं। उन्हीं में से एक नाम है वीणा मालिक का जो भारतीय TV सीरियल बिग बॉस में आ चुकी हैं। वो लगातार अपने ट्वीट के जरिए बॉलीवुड से लेकर भारतीय सेना को निशाना बना रही है।
क्या ये सिर्फ एक संयोग है कि वीणा मलिक उन्हीं लोगों का मजाक बनाते देखी गई जिन्हें अक्सर हमारे देश की ‘मीडिया का समुदाय विशेष’ अपना निशाना बनाता है? जैसे कंगना रानौत, अक्षय कुमार और निःसन्देह, भारतीय सेना। वास्तव में यह सिर्फ मामला वीणा मलिक जैसी वाहियात हस्तियों के बारे में नहीं बल्कि इनके उन प्रशंसकों को लेकर है जो इस सबके बावजूद इनके लिए अपने दिल में अलग जगह रखते हैं।
इनकी वकालत करने वाले लोग वही हैं जो अपने सैनिकों की चिंता करने वालों को ‘भक्त’ कहते हैं। सस्ती लोकप्रियता और चर्चा में बने रहने के लिए अक्सर TV कलाकार और मीडिया तंत्र इस तरह की हरकत करता हुआ आए दिन नजर आता है। वरना यह मात्र संयोग तो नहीं हो सकता है कि राजदीप सरदेसाई से लेकर बरखा दत्त और सागरिका घोष हर सुबह उठते ही जनता की गालियाँ सुनकर हैं। स्पष्ट है कि ये लोग सिर्फ चर्चा में बने रहने की लालसा के कारण ऐसा करते हैं, जिनका कि वास्तविक मुद्दे से कोई लेना देना नहीं होता है।
पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की है। इसमें कई ऐसे बड़े क़दम शामिल हैं जिनसे ये स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री की अगुआई में चल रही केंद्र सरकार बड़ी ही मुस्तैदी के साथ पाकिस्तान को जवाब देने की जुगत में है।
अपने इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी आज विज्ञान भवन में शांति स्वरूप भटनागर प्राइज के लिए पहुँचे। वहाँ उन्होंने अपने संबोधन में सीधे और सरल शब्दों में कहा कि अभी-अभी एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ है जो एक प्रैक्टिस थी, लेकिन रियल अभी बाक़ी है। उनके इन शब्दों को अगर एक फ़िल्मी डॉयलॉग से जोड़कर देखें तो वो ये होगा, ‘ये तो ट्रेलर था, लेकिन पिक्चर अभी बाक़ी है’। पीएम मोदी के संबोधन में छिपा संदेश पाकिस्तान के लिए था जिसमें पायलट प्रोजेक्ट का ज़िक्र हाल ही में की गई एयर स्ट्राइक के लिए था और पूरी तरह से सबक सिखाने का मतलब रियल एक्शन से है। यानि अगर आतंकवाद को पालने वाले अपनी हरक़त से बाज नहीं आए तो उसका ख़ामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे पाकिस्तान।
आज यह बात सभी जानते हैं कि आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है न सिर्फ़ भारत के लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी। इसमें एक बात तो सर्वविदित है कि पाकिस्तान आतंकवाद को न सिर्फ़ पनाह देता है बल्कि अपनी छत्रछाया में आतंकियों को फलने-फूलन के पूरे अवसर भी उपलब्ध कराता है। पाकिस्तान का यह डर ही था कि उसने भारत के डर से LOC के पास से आतंकियों के लॉन्च पैड्स खाली करा लिए थे। 26 फ़रवरी को भारत की ओर से हुए एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने अपने गढ़ में छिपे आतंकवादियों को रावलपिंडी से बहावलपुर में छिपने का रास्ता दिखाया, ये भी पाकिस्तान के थर्रा जाने का साक्षात दर्शन है।
पुलवामा हमले के दौरान 40 भारतीय जवानों के हिस्से आई वीरगति समूचे देश के लिए अविस्मरणीय है। अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारत की ओर से प्रतिक्रियात्मक गतिविधियों में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति को स्पष्ट कर दिया। सत्ता पर आसीन होते ही पीएम मोदी ने देश-दुनिया को यह चेता दिया था कि सीमापार से संचालित आतंकी गतिविधियों के ख़िलाफ़ हमारी नीति और नीयत दोनों स्पष्ट हैं।
14 फरवरी को पाकिस्तान के छद्म वार की जहाँ देश और दुनिया में कड़ी आलोचनाएँ हुईं वहीं भारत के प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले दुनिया के किसी भी कोने में नहीं छिप सकते, उनका बच पाना नामुमकिन है।
#WATCH PM Modi says, “Main aatanki sangathanon ko kehna chahta hun ki woh bahut badi galti kar chuke hain, unko bahut badi kemaat chukani padegi.” pic.twitter.com/XBL9YLZrVC
#WATCH PM Narendra Modi pays tribute to CRPF soldiers who lost their lives in #PulwamaTerrorAttack, says, “logon ka khoon khaul raha hai, yeh main samajh raha hun. Humare suraksha balon ko purn swatantra de di gayi hai.” pic.twitter.com/kxdCIKe88q
प्रधानमंत्री ने अपनी कथनी और करनी में भेद न करते हुए देश की जनता को यह दिखा दिया कि उन्हें वास्तव में देश के हित-अहित की चिंता है। इसी का नतीजा एयरस्ट्राइक के रूप में पूरी दुनिया ने देखा। पीओके में भारतीय वायु सेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने तो ध्वस्त हुए ही साथ ही वायु सेना ने अपने मात्र 12 मिराज-2000 विमानों ने चंद मिनटों में 300 से अधिक आतंकियों को भी मार गिराया गया।
अगर हम बात करें कि पुलवामा हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी की जो तमाम प्रतिक्रियाएँ आईं वो भले ही सीधे और सरल शब्दों के आवरण में सामने आए हों लेकिन उनके मायने बेहद ही गहन और गंभीर थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ अभियान के तहत नमो एप के ज़रिये देशभर में करीब 15 हजार स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैं कभी नहीं चाहता कि मेरी कोई निजी विरासत हो। इस देश के ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति के घर में विकास का जो दीपक जला है, यही मेरी विरासत है।’ इसके उन्होंने आगे कहा, “सेना को हमने न केवल सशक्त बनाया, बल्कि देश की रक्षा के लिए उन्हें खुली छूट दी, यही मेरी विरासत है।”
इससे पहले 26 फरवरी को दिल्ली मेट्रो का सफर करके इस्कॉन मंदिर पर पहुँच कर उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी और वजनी भगवत गीता का अनावरण किया। 670 पृष्ठों वाली 800 किलोग्राम की भगवत गीता के लोकार्पण के दौरान उन्होंने कहा, “मानवता के दुश्मनों से धरती से बचाने के लिए प्रभु की शक्ति हमेशा हमारे साथ रहती है। यही संदेश हम पूरी प्रमाणिकता के साथ दुष्ट आत्माओं, असुरों को देने का प्रयास कर रहे हैं।”
26 फरवरी को ही राजस्थान में रैली के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वीर रस से भरी कविता को शामिल किया और कहा कि सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूँगा, मैं देश नहीं रुकने दूँगा, मैं देश नहीं झुकने दूँगा, मेरा वचन है भारत माँ को, तेरा शीश नहीं झुकने दूँगा, सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूँगा… इन पंक्तियों का सीधा मतलब देश की मान-मर्यादा और गौरव से है। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात को भी पूरे जोश के साथ कहा कि देश से बढ़कर उनके लिए कुछ नहीं है, देश की सेवा करने वालों को, देश के निर्माण में लगे हर व्यक्ति को आपका ये प्रधान सेवक नमन करता है।
PM Narendra Modi in Churu, Rajasthan: Today I repeat what I said back in 2014 – Saugandh mujhe is mitti ki main desh nahi mitne doonga, main desh nahi rukne doonga. Main desh nahi jhukne doonga….Mera vachan hai Bharat maa ko, tera sheesh nahi jhukne doonga… pic.twitter.com/lChHOJm94Z
इतने के बाद भी विपक्ष द्वारा बेबुनियादी मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेतृत्व वाली सरकार को बेवजह के मुद्दों पर घेरा जाना कहाँ तक सही जान पड़ता है, यह वो प्रश्न है जिसका जवाब बाहर नहीं बल्कि अपने अंतर्मन में झाँककर खोजने की आवश्यकता है। और इसके लिए एक सार्थक प्रयास कम से कम एक बार तो ज़रूर ही करना चाहिए।
भारत पिछले कुछ समय में मोदी के नेतृत्व में कितना बदला है इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि पहले के नेताओं के पाकिस्तान ऑब्सेस्ड भाषणों से दूर अब बड़े से बड़े हमलों के बाद भी पाकिस्तान का नाम लिए बग़ैर, जो करना होता है, वो कर दिया जाता है। ये पूरी तरह से, नई नीति के तहत पाकिस्तान की समस्या और पाकिस्तान जैसे क्षुद्र देश को देखने जैसा है।
पाकिस्तान की अहमियत मोदी के लिए इतनी भी नहीं है कि उसके द्वारा किए गए हमलों के जवाब में एयर स्ट्राइक होने पर एक भी बार कहीं सीधा बयान दे। पूरे प्रकरण में मोदी ने अपनी रैलियों से लेकर, कई कार्यक्रमों के दौरान कहीं भी पाकिस्तान पर किए गए स्ट्राइक का सीधे ज़िक्र नहीं किया। जैसे कि जिस सुबह यह हुआ, उस दिन मोदी ‘गाँधी शांति पुरस्कार’ दे रहे थे, और दोपहर में दुनिया की सबसे बड़ी गीता के दर्शन कर रहे थे।
एयर स्ट्राइक की पुष्टि भी विदेश मंत्रालय के सचिव द्वारा कराई गई। ये अपने आप में योजनाबद्ध तरीके से एक संदेश देना है कि एक आतंकी राष्ट्र पर की गई कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री तो छोड़िए, रक्षा मंत्री या विदेश मंत्री भी बयान नहीं दे रहा, बल्कि मंत्रालय का सचिव उसे हैंडल कर रहा है। ये पाकिस्तान को उसकी जगह दिखाने जैसा है।
इसी तरह का वाक़या यूएन में भारत की जूनियर अफसर ईनम गम्भीर द्वारा पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के भाषण पर जवाब देने पर याद आता है। उरी हमलों के बाद पाकिस्तान को धिक्कारते हुए, नवाज़ शरीफ को जवाब देने के लिए ईनम को आगे करना भारत की नीति में बदलाव की ओर इशारा करता है।
मोदी ने तब बोला, जब उन्हें बोलना चाहिए था। वो समय था हमारे बलिदानियों के सम्मान का, उनके परिवार और पूरे देश को बताने के लिए कि सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। तब मोदी ने आतंक के ख़ात्मे की बात की थी। ये कहा था कि सेना के लोगों को पूरी छूट दी गई है कि वो इसे अपने तरीके से हैंडल करें।
उसके बाद चाहे एयर स्ट्राइक्स हों, या फिर हमारे एक पायलट द्वारा पाकिस्तानी जेट को मार गिराने के बाद उनकी सीमा में पकड़ा जाना, मोदी ने कभी भी एक भी शब्द सीधा नहीं बोला। सिर्फ सूक्ष्म तरीके से संदेश दिए कि जिनके हाथों में क्षमता है, जो इस मुद्दे पर काम कर सकते हैं, वो अपना काम कर रहे हैं, और पाकिस्तान इतना बड़ा नहीं हुआ है कि भारत का प्रधानमंत्री उसे भाव देता रहे।
उसके उलट पाकिस्तानी खेमे में उनके पीएम से लेकर सारे बड़े नेता और आला अधिकारी लगातार बयान देते पाए जा रहे हैं। कल की घटना के बाद जहाँ इमरान खान के चेहरे पर खुशी थी, वहीं उन्होंने पुरानी पाकिस्तानी धूर्तता का चेहरा लेकर शांति के पहल की बात की। पाकिस्तान के पीएम ने न सिर्फ लगातार युद्ध की विभीषिका को लेकर अपने तर्क दिए, बल्कि यहाँ तक स्वीकारा कि उनके द्वारा भारतीय पीएम को किए गए फोन कॉल की कोशिश पर कोई रिस्पॉन्स नहीं आया।
कल रात ही कराची से लेकर स्यालकोट, रावलपिंडी आदि बड़े शहरों में खलबली मची हुई थी क्योंकि भारतीय कोस्ट गार्ड और नेवी की मूवमेंट की ख़बर पाकिस्तान पहुँची। सिंध क्षेत्र की असेंबली में किसी भी तरह के युद्ध के हालात को लेकर तैयारी की बातें हो रही थीं, क्योंकि वहाँ कई विदेशी रहते हैं जो चीन एवम् अन्य देशों के हैं। हॉस्पिटलों को तैयार रहने कहा गया था, और सोशल मीडिया पर लगातार कराची के ऊपर पाकिस्तानी जेट की गर्जना सुनाई दे रही थी।
इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान जानता है कि उसके सामने क्या विकल्प हैं। वहाँ का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि छद्म युद्ध आज के भारतीय नेतृत्व के सामने विकल्प नहीं क्योंकि उनके योद्धाओं को भारतीय सेना साल में 250 की दर से निपटा रही है। नर्क के गुप्त सूत्र यह भी बताते हैं कि वहाँ हूरों की सप्लाय कम पड़ गई है।
सेना द्वारा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों को मारने के तरीके भी बदल गए हैं। अब वो घरों को घेरकर, आतंकियों द्वारा घर के लोगों को बंधक बनाने की बात पर नहीं रुकते, बल्कि घर को ही आग लगा देते हैं। पत्थरबाज़ों पर लगातार पैलेट गन का इस्तेमाल होने से, उनके अलगाववादी नेताओं को उनकी जगह बताने से लेकर हर वो काम किए जा रहे हैं ताकि भारतीय धरती से पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों को मदद न मिले।
मोदी के नेतृत्व में भारत ऐसे ही बदला है। मानवाधिकार लॉबी सिकुड़ी है क्योंकि उन्हें देश का हित सोचने वाले लोग अब ढूँढकर जवाब देना सीख गए हैं। साथ ही, ऐसे तमाम एनजीओ पर सरकार ने कड़ा एक्शन लिया जो बाहर के पैसों पर भारत के अंदर आतंकी या देशविरोधी गतिविधियों को हवा देते थे।
मोदी के नेतृत्व का दूसरा पहलू यह भी रहा है कि राजनीति ने सेना पर अपना प्रभाव जताया नहीं। मोदी ने सुनिश्चित किया कि सेना का काम, आतंकियों से निपटने का कार्य, पाकिस्तान को जवाब देने की योजना बनाना नेताओं का कार्य नहीं है। नेताओं का काम उनकी बात को समझना और सिर्फ उन्हें भारतीय हितों को सुनिश्चित करते हुए, सेना को स्वतंत्रता से कार्य करने देना है।
इससे पहले हम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या सेनाध्यक्षों के नाम याद किया करते थे, लेकिन आज के दौर में उनकी कार्रवाई भी हम देख रहे हैं। आज के दौर में भारतीय सीमाओं से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक हमारे सुरक्षा बलों के अफसर एक्शन में दिखते हैं। हो सकता है कि इसका एक कारण सोशल मीडिया रहा हो, लेकिन लगातार आतंकियों और नक्सलियों के प्रभाव से मुक्त होते भारत में उनका बहुत बड़ा हाथ है।
इन सबके बीच तीसरा पहलू है हमारे घर के उन चिराग़ों का जो अपने अंदर का तेल पर्दों पर छिड़क कर बत्ती उधर घुमा देते हैं। पत्रकारिता का यह धूर्त समुदाय विशेष अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के ‘नैतिक रूप से बेहतर जगह’ पर होने की बात कर रहा है क्योंकि उसने हमारे पायलट को लौटाने की बात की है। ऐसा नहीं है कि राजदीप सरदेसाई को जेनेवा कन्वेन्शन या भारत द्वारा लगातार की जा रही इंटरनेशनल डिप्लोमैटिक कोशिशों की जानकारी नहीं है, लेकिन बात जब भारत और पाकिस्तान की हो तो, ऐसे सड़े हुए पत्रकार कहाँ खड़े होते हैं, यह किसी से छुपा नहीं है।
We in India may not like this, but in terms of pure optics, @ImranKhanPTI at the moment is winning the day by taking the moral high ground .. we have a strong case on terror but too many of our leaders busy calculating votes at the moment..
एक क्यूट पत्रकार ने लिखा है कि ‘इसमें मोदी की जीत कैसे है?’ खैर इस पत्रकार का तर्क इतना बेकार है कि इसे जवाब देना भी अपने शब्द बेकार करने जैसा है। इसलिए, आप बस ट्वीट पढ़ लीजिए कि ऐसे लोग जो लिख रहे हैं वो इसलिए लिखते हैं क्योंकि इनके लिए धान और गेहूँ में अंतर नहीं। क्या अभिसार शर्मा, कुछ भी ब्रो?
अभिनन्दन लौट रहा है तो इसमे मोदीजी की जीत कैसे हो गयी। उन्होने तो एक शब्द नही बोला। आज बूथ संवाद मे भी न ही उनके कुछ समर्थक तो चाहते थे वो शहीद हो जाये। कुछ भी ? #AbhinandanMyHero
तीसरी क्यूटाचारी हैं सगारिका जी, जिन्हें पत्रकार इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो टीवी पर आती थीं। इसके अलावा उनका एक ट्वीट या लेख ऐसा नहीं होता जिसे बेकार की श्रेणी में रखकर ‘बेकार’ शब्द का अपमान न किया जाए। इनके अनुसार जो हो रहा है, वो काफी नहीं है, बल्कि डिफ़ेंस मिनिस्टर कहाँ हैं, वो कुछ क्यों नहीं करती नज़र आ रही।
Shocking that @narendramodi has so far not uttered a word on Wing Commander #Abhinandan, that his party colleague has implied surgical strike was for BJP's political benefit, that Defence Minister has so far been missing in action. Thank god Indira Gandhi was PM during Bangladesh
ऐसे गिरोह की समस्या यही है कि जब मंत्री बोले तो कह दिया जाए कि इसका राजनीतिकरण हो रहा है, और जब सारे काम हो जाएँ, कोई बयान न दे, तो पूछा जाता है कि मंत्री कहाँ हैं। और अंत में चाटुकारिता के उच्चतम स्तर पर इंदिरा गाँधी को याद कर लिया गया।
धूर्त गिरोह के सदस्यो! पाकिस्तान को उसकी औक़ात बताना भारत का मक़सद है, न कि उसे इतना महत्व देना कि प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री अपने सारे कार्य छोड़कर परेशान होकर पूरे देश को यह संदेश दे कि भारत तनाव में है। मोदी तनाव में नहीं है क्योंकि मोदी को अपनी सेना और उसकी क्षमता पर विश्वास है। मोदी राष्ट्राध्यक्ष है, न कि स्टूडियो में बैठा एंकर जिसका चौबीस घंटा पाकिस्तान-पाकिस्तान रटने में जा रहा है।
बोलचाल की भाषा में कहें तो मोदी को लिए पाकिस्तान की अहमियत @#&% जितनी ही है। इसलिए उसकी बात करके, उस पर रिएक्शन देकर, भारत को अपनी महत्ता नीचे करने की आवश्यकता नहीं। भारत एक बड़ी अर्थ व्यवस्था है, प्रभावशाली देश है, अंतरराष्ट्रीय जगत में वो एक आगे बढ़ती शक्ति है, वो अब दूसरे देशों से अपनी बात गर्दन तान कर करता है। पाकिस्तान क्या है?
पाकिस्तान गधे और भैंस बेचकर अपना घर चलाने वाला गुंडा देश है, जिसके बड़े शहरों से बिजली चली जाती है और अपने ही जेट की आवाज सुनकर वहाँ के लोग ‘अल्ला रहम करे’, ‘अल्ला खैर करे’ करने लगते हैं क्योंकि उनको भी पता है कि भारत क्या कर सकता है।
पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच आर्मी, नेवी और वायुसेना प्रेस को सम्बोधित कर रहे हैं। आज गुरुवार (फरवरी 28, 2019) सुबह तीनो सेनाओं के प्रमुखों ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाक़ात की। कल बुधवार (फरवरी 27, 2019) को पाकिस्तान द्वारा भारतीय पायलट को हिरासत में लेने के बाद यह पहला मौका है जब द्वारा प्रेस को सम्बोधित किया जा रहा है। चूँकि यह एक काफ़ी संवेदनशील मुद्दा है, इसीलिए राजनेताओं की जगह सेनाधिकारी ही प्रेस को सम्बोधित करेंगे।
मुख्य बातें:
27 फरवरी को पाकिस्तान के जेट को बड़ी मात्रा में आते देखा, हमारे सुखोई, मिग मिराज ने उनका पीछा किया उनका हमला नाकाम किया: आरजीके कपूर
पाक ने कहा कि उसने जानबूझकर ओपन स्पेस पर बम गिराया जबकि वह हमारे मिलिटरी इन्सटॉलमेंट को टार्गेट कर रहे थे
पाकिस्तान ने कहा कि हमारा एफ16 नहीं था जबकि हमारे पास सबूत है, उनकी मिसाइल हमारी राजौरी एरिया में मिली
पाक ने 26 फरवरी की सुबह और रात में अनप्रवॉक्ड सीजफायर वॉयलेशन किया, हमारे मिलिट्री इंस्टॉलेशन को टार्गेट करने की कोशिश की, हमने उनका हमला नाकाम किया: मेजर जनरल सुरेंद्र सिंह बहल
बालाकोट अटैक से आतंकवादियों के कैंप डैमेज हुए हैं इसके सबूत हैं, संख्या के बारे में बताना जल्दबाजी होगी: इंडियन आर्मी
पाकिस्तान ने जो टुकड़े दिखाए हैं वह मिग 21 के नहीं हैं, वह पाक के एफ 16 के हैं: इंडियन एयरफोर्स
‘आतंकी ठिकानों पर अटैक करने के सबूत हमारे पास हैं’ : जैश के आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई पर सेना ने कहा कि हमारे पास सबूत हैं कि जो हम जो करना चाहते थे, टारगेट को जितना डिस्ट्राय करना चाहते थे। वो हमने किया। अब सरकार के ऊपर है कि वो एविडेंस देना है कि नहीं।
हमारी लड़ाई आतंकवाद के साथ है। जब तक पाकिस्तान इन्हें सपोर्ट करता रहेगा, तब तक हम आतंकी कैंम्पों को टारगेट करते रहेंगे। पिछले दो दिनों में 35 सीजफायर हुए हैं। लेकिन हम दुश्मन को वैसे ही जवाब दे रहे हैं।
भारतीय वायुसेना ने कहा, “हम खुश हैं कि हमारा पायलट वापस आ रहा है, एक बार वह आ जाए तब हम देखते हैं कि आगे क्या किया जा सकता है।”
‘पाकिस्तान ने F-16 के इस्तेमाल किया, इसका क्या सबूत है’ – इस सवाल के जवाब पर कहा गया कि जिस मिसाइल से भारत की सीमा पर अटैक किया गया वो सिर्फ F-16 से ही संभव है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम्राम मिसाइल का टुकड़ा दिखाया गया, जिससे पाकिस्तान ने अटैक किया था। सेना के प्रवक्ताओं ने कहा कि ये मिसाइल सिर्फ F-16 से ही फायर की जा सकती है। पाकिस्तान के पास और दूसरा कोई ऐसा विमान नहीं है जिससे इस मिसाइल को फायर किया जा सके।
बालाकोटा में वायुसेना हमले के बाद से भारत-पाक की स्थिति और भी अधिक संवेदनशील हो गई है। जो दोनों देशों की जनता के मन में कई सवाल खड़े कर रही है। हालाँकि जनता के सभी सवालों का जवाब दोनों देशों की सरकार द्वारा दिया जाना है। इन सवाल-जवाब के सम्प्रेषण के बीच जिस मीडिया को सिर्फ माध्यम के रूप में अपनी भूमिका को निभाना होता है, वही मीडिया हेडलाइन और खबरों के जरिए न सिर्फ पाकिस्तान में बल्कि विश्व भर के अपने पाठकों के लिए माहौल का निर्माण कर रहा है। आज हम ऐसी ही चुनिंदा खबरों पर गौर करेंगे। शुरुआत भारतीय मीडिया से।
भारतीय मीडिया के हाल
एक तरफ जहाँ पर पुलवामा हमले के बाद से भारतीय मीडिया के विशेष समुदाय से जुड़े लोगों के सुर बलिदान हुए जवानों की जाति पूछ-पूछकर बदले की गुहार कर रहे थे। वहीं वायुसेना के एक्शन के बाद से #saynotowar पोस्ट कर रहे हैं। भारत में तो खैर सरकार और मीडिया समूहों (अधिकाँश) के बीच इतनी गहरी खाई है कि वास्तविकता जनता तक आते-आते एक सम्पादकीय का रूप धारण कर लेती है। फिर, जो परोसा जाता है वही पाठक ग्रहण करता है और वही ट्विटर पर ट्रेंड बन जाता है।
पाकिस्तानी मीडिया: खबरों के एंगल से बदलना चाहता है हकीकत
पाकिस्तान इस समय भारतीय वायुसेना के हमले से इतना अधिक घबराया हुआ है कि वहाँ के मीडिया कवरेज में खबरों की हैडिंग और सब-हैडिंग में उसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है।
पाकिस्तान इस बात को अच्छे से जानता है कि भारत में केवल सरकार और सेना ही नहीं बल्कि देश के लगभग हर नागरिक के मन में पाकिस्तान और वहाँ पल रहे आतंकवाद के ख़िलाफ़ नफरत और बदले का भाव पनप रहा है। पूरा विश्व इस समय आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारत के समर्थन में आ गया है। चारों ओर से दबाव की स्थिति बनने के कारण, पाकिस्तानी मीडिया अमन शांति की बातें कर रहा है। ताकि ऐसे संदेश देकर वास्तविक मुद्दे को बरगलाया जा सके।
हमले की बात करने वाले इमरान चाहते हैं अब मोदी से बात करना
पाकिस्तानी मीडिया में अगर अभी कुछ देर पहले की ख़बर को देखा जाए तो अंदाजा लगेगा कि कुछ दिन पहले तक बदला लेने की बात करने वाले इमरान खान नरेंद्र मोदी से शांति पर बात करने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तानी मीडिया का लगभग हर समूह यह खबर दिखा रहा है। अपने खबर में वो जिस एंगल को पेश करने की कोशिश कर रहे हैं उसमें यह है कि उनके पीएम बात करने को तैयार हैं लेकिन क्या नरेंद्र मोदी इसके लिए तैयार हैं?
डॉन की खबर का स्क्रीन शॉट
पाकिस्तान मीडिया फिलहाल इस समय पर जोरो-शोरों से प्रमाण देने पर तुला हुआ है कि उसे शांति और अमन चाहिए… शायद पाकिस्तान इस बात को अच्छे से जानता है कि अब भारत किसी भी कीमत पर चुप नहीं रहने वाला है। यह एक ख़बर की बात नहीं है, पूरी वेबसाइट भारत संबंधित खबरों से भरी पड़ी है।
Dawn पाकिस्तान की सबसे मशहूर न्यूज़ वेबसाइट है। देख सकते हैं कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हर ख़बर भारत से संबंधित है।
भारतीय पायलट के वीडियो की खबरें
इस समय पाकिस्तानी मीडिया में भारतीय पायलट के हर बयान को खबरों का हिस्सा बनाया जा रहा है। ऐसा करके पाकिस्तान केवल सहानुभूति इकट्ठा करने का प्रयास कर रहा है ताकि लोग पाकिस्तान की उन्मादी हरकतों को भुलाकर अपना सारा ध्यान उसके अमन-शांति वाले रवैये पर लगाएँ। आपको बता दें कि यूएन में हुई जेनेवा संधि के तहत पाकिस्तान इस बंधन में बंधा हुआ कि उसे हमारे पायलट को भारत को सौंपना ही होगा।
पाकिस्तान ऑब्ज़र्वर का स्क्रीन शॉट
पाकिस्तान ने आज इसकी घोषणा भी कर दी है कि कल (मार्च 1, 2019) को भारतीय पायलट को वापस भेजा जाएगा। और ऐसा इमरान खान के शांति प्रस्ताव के कारण नहीं बल्कि जेनेवा संधि के साथ-साथ भारतीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण मुमकिन हो पाया है।
Alexa रेटिंग के अनुसार thenews.com.pk पाकिस्तान की दूसरी सबसे बड़ी न्यूज़ साइट है। यहाँ भी एक ख़बर को छोड़कर बाकी हर ख़बर भारत के संदर्भ में है।
जेट क्रैश होने की झूठी अफवाहें
पाकिस्तान में इस समय इंडियन एयरफोर्य के जेट को गिराए जाने की फेक तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। जबकि भारत में इन ख़बरों का फैक्टचेक करके पोल खोली जा चुकी है।
जेट क्रैश की झूठी खबरें फैला रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान इस समय उस स्थिति से गुजर रहा है कि अगर वो कुछ करता है तो भी आफ़त है और नहीं करता है तो भी उसके लिए मुश्किल है। अपनी खबरों और हेडलाइन से पूरे विश्व में अमन-शांति के प्रयासों को जगजाहिर करने वाला पाकिस्तान मौक़ा मिलते ही कुछ दिन बाद फिर से अपनी धरती पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण के लिए जगह उपलब्ध कराएगा।
tribune.com.pk पर भी हर ख़बर भारत से जुड़ी
ऐसे में अगर वाकई में भारत के साथ पाकिस्तान को बातचीत से मसले को सुलझाना है तो इसमें क्या बुराई है कि वो मसूद अज़हर (जो पुलवामा और प्लेन हाईजैक जैसी घटनाओं से जुड़ा है) को भारत को सौंप दे। पूरा विश्व जानता है कि मसूद भारत का गुनहगार है लेकिन फिर भी पाकिस्तान उसके ख़िलाफ़ किसी प्रकार का एक्शन लेने से कतराता है। क्यों?
पाकिस्तानी मीडिया का इन मुद्दों पर न बोलना बताता है कि वो किस तरह अपने देश की सरकार के दबाव में मीडिया के मूल तत्वों को खत्म कर रही है। जिस मीडिया का काम दुनिया के समक्ष सच्चाई को दिखाना है वो इस समय अपनी हुक्मरानों की वाणी बोलने में लगा हुआ है।
“तुम कौन सा जहाज उड़ा रहे थे?” पायलट- “यह मैं आपको नहीं बता सकता।” “तुम किस मिशन पर थे?” पायलट- “यह मैं आपको नहीं बता सकता।”
ये स्टेटमेंट हैं पाकिस्तानी सेना से घिरे हुए उस पायलट के, जिसके भारतीय होने का दावा कल से पाकिस्तान की सेना कर रही है और साथ ही कह रही है कि पाकिस्तानी सेना उसकी अच्छे से देखभाल कर रही है। (ताज़ा खबरों के अनुसार उन्हें भारत को कल सौंपा जाएगा।)
यह तो है पाकिस्तान की सूचनाओं का हिस्सा। लेकिन अब देखते हैं भारत के ऐसे मीडिया गिरोह की हेडलाइन, जो केजरीवाल की तरह ‘मम्मी कसम’ खाकर ‘एकदम मारक मजा’ देने का वायदा करते हैं-
लल्लनटॉप हेडलाइन 1 – “पायलट अभिनन्दन की पत्नी तन्वी …” लल्लनटॉप हेडलाइन 2 – “विंग कमाण्डर अभिनन्दन के पिता और पत्नी भी एयरफोर्स में रह चुके हैं” इस से भी ज्यादा ‘मारक मजा’ है, तीसरी हेडलाइन में- लल्लनटॉप हेडलाइन 3 – “क्षमा करें, पृष्ठ उपलब्ध नहीं है” (जो कि शायद इसलिए डिलीट कर दी गई होगी क्योंकि उसमें मारक मजा कम रहा होगा)
पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए पायलट पर डीप रिसर्च करते हुए दी लल्लनटॉप यूट्यूब का भी सहारा ले रहा था
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान द्वारा कल जारी किए गए इस वीडियो की ‘पॉपुलेरिटी’ और ‘रीच क्षमता’ भाँपकर ही शायद ‘दी लल्लनटॉप’ ने अपने पाठकों को ‘मारक मजा’ देने के लिए विदेश मंत्रालय और अन्य आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार ना करते हुए एक कदम जाकर अपनी ‘संवेदनशीलता’ का परिचय दिया और ‘स्वयं सरकार’ बनकर पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए पायलट से सम्बंधित सारी जानकारियाँ अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर डालीं।
‘दी लल्लनटॉप’ पायलट से सम्बंधित सभी जानकारियाँ सार्वजानिक कर चुका था‘मारक मजा ‘देने की अपनी कसम निभाती ‘दी लल्लनटॉप’ की खबर
सूचना के इस समय में, सतर्कता और संवेदनशीलता ही हमारा सबसे बड़ा रक्षाकवच हो सकते हैं। उस पर हमारी जिम्मेदारी तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब हम समाज में अफवाह-साथ भ्रामक और संवेदनशील जानकारी भेजने का माध्यम आसानी से बन सकते हैं। भारत के गृह मंत्रालय ने भी पुलवामा हमले के बाद तमाम मीडिया चैनलों और संस्थानों को संवेदनशील खबर फ़ैलाने से रोकने के दिशा निर्देश दिए थे।
सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों का मानना है कि वर्तमान में ‘दी लल्लनटॉप’ खबरों को ‘जरा हट कर’ पेश करने के कारण बहुत लोकप्रिय है। जिसमें हिटलर के जननाँग की जानकारी से लेकर आसमान से गिरने वाली लैट्रिन के भविष्य से सम्बंधित सभी जानकारियाँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
देश में लगातार घटने वाली आतंकवादी घटनाओं के कारण देश आज एक प्रकार के अघोषित युद्ध से गुजर रहा है। ऐसे में इस मीडिया पोर्टल का इस प्रकार से, बिना किसी पुख्ता सबूत के ही सेना और किसी भी सैनिक से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करना यह बताता है कि ये पत्रकारिता के गिद्ध हैं, जिनकी जिम्मेदारी बस अपनी दुकान चलाने और सरकार के खिलाफ गाली-गलौज करने तक ही सीमित है।
हालाँकि, लोगों के आक्रोश और विरोध के कारण शायद पायलट के परिवार और पिछली जानकारियों से सम्बंधित खबर को वेबसाइट से हटा लिया गया था। लेकिन तब तक यह खबर जरूरत से ज्यादा नुकसान कर चुकी थी। मानवीय स्वभाव के कारण लोगों ने जिज्ञासावश इस खबर को डिलीट किए जाने से पहले ही व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी से लेकर फेसबुक पेजों पर वायरल कर के खूब प्रचारित कर दिया था। यूट्यूब पर डाली गई इस सूचना के वीडियो को करीब 4 लाख से ज्यादा लोग देख चुके थे।
पाठकों के विरोध के बाद आज सुबह इस खबर को डिलीट कर दिया गया, URL में आप देख सकते हैं
कल ही मीडिया में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तान भारतीय सेना से सम्बंधित सूचनाएँ जुटाने के लिए इंटरनेट से लेकर मोबाइल तक पर जानकारी तलाश रही है। जिस पर ग्राम वासियों ने बताया कि वो देश के नागरिक होने के नाते अपनी जिम्मेदारी बखूबी जानते हैं और उन्होंने मोबाइल पर आने वाली कॉल्स को कोई भी जानकारी नहीं बताई।
अब सवाल ये है कि क्या देश का नागरिक होने के नाते एक गाँव में रहने वाले व्यक्ति की संवेदनशीलता और जागरूकता की तुलना शहर में बैठे इन पढ़े-लिखे लोगों से की जा सकती है?
AC कमरों में बैठकर नेताओं के बयानों को तोड़ना-मरोड़ना, अपने ‘प्रेरणास्रोतों’ के कदमों पर चलते हुए भ्रामक जानकारियाँ लिख कर उनके प्रॉपेगैंडा को दिशा देना और MEME बनाने वाले पेजों पर निबंध लिखना ही अगर ‘दी लल्लनटॉप’ गिरोह की पत्रकारिता है, तो वाकई में ये ‘अँधेरे को चीरती हुई सनसनी’ बनकर मारक मजा देने की अपनी कसम पर खरा उतर रहा है। शाबाश जैश-ए-लल्लनटॉप!
पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए वीडियो से बढ़ रहे आक्रोश को देखते हुए OpIndia.com संपादक नूपुर शर्मा ने जिम्मेदारी लेते हुए ट्विटर पर घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान द्वारा भड़काने और उकसाने के उद्देश्य से जारी की जाने वाली इस प्रकार की किसी भी अफवाह, सूचना और वीडियो को शेयर नहीं करेंगे।
Statement:
OpIndia stands by the Armed Forces and Government of India. We refuse to put out the brutal videos/images which are purported to be of the Indian Air Force pilot
सीमा के उस पार की चुनौतियों को हम सब जानते हैं लेकिन सीमा के भीतर के आतंकवाद के इस स्वरुप से लड़ना हमारी मुख्य चुनौती है। यदि पत्रकारिता से जुड़े हुए सभी लोग समाज के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को वास्तव में समझें और निभाएँ, तो शायद देश की सेवा में इतना योगदान भी हिमालयी योगदान माना जा सकता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय पायलट को लौटाने की घोषणा की है। इमरान खान ने यह बात पाकिस्तानी संसद में कही और कहा कि ये उनकी तरफ से शांति के लिए एक पहल की तरह देखा जाए। मीडिया की ख़बरों के अनुसार भारतीय पायलट को शुक्रवार को भारत को सुपुर्द किया जाएगा। ज्ञात हो कि बुधवार को पाकिस्तानी फ़ाइटर का पीछा करते हुए भारतीय मिग ने उसे गिरा दिया था, लेकिन पाकिस्तानी सीमा में पहुँचने के कारण उनके विमान को भी क्षति पहुँची और उन्हें पाकिस्तान ने पकड़ लिया।
Pakistan Prime Minister Imran Khan: As a peace gesture we are releasing Wing Commander Abhinandan tomorrow. pic.twitter.com/J0Attb6KDC
इससे पहले भारतीय रक्षा मंत्रालय ने यह साफ़ कर दिया था कि पाकिस्तान के मिलिट्री ठिकानों पर घुसपैठ के बदले उसने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय पायलट से बुरे व्यवहार को लेकर मंत्रालय ने पाकिस्तान पर जेनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। इन सबसे पाकिस्तान बैकफुट पर नज़र आ रहा है क्योंकि भारतीय पायलट की रिहाई को लेकर मोलभाव के उसके दिवास्वप्न को तगड़ा झटका लगा है। भारत ने साफ़ कर दिया था कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार तत्काल प्रभाव से अपने पायलट की रिहाई चाहता है और वह भी बिना किसी शर्त के।
इस बार पाकिस्तान के साथ कोई सौदा नहीं होगा, हम आतंक पर तत्काल और विश्वसनीय कार्रवाई करना चाहते हैं: शीर्ष सरकारी सूत्र#BREAKING
मोदी सरकार के कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा घिरे पाकिस्तान के लिए और कोई चारा बचा भी नहीं था। जेनेवा कंवेंशन के उल्लंघन का मतलब था पाकिस्तान का अलग-थलग पड़ जाना। अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान इतना बड़ा खतरा मोल लेने को शायद ही कभी तैयार था। इन सब के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में US, UK और फ्रांस के द्वारा जैश-ए-मुहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को ब्लैक-लिस्ट करने का प्रस्ताव भी पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संकेत था।
आपको बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को चौतरफा घेरा था। क्योंकि इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मुहम्मद ने ली थी। और जैश के आतंक का पूरा केंद्र ही पाकिस्तान स्थित है।
इन सब के बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों को जैश के द्वारा भारत पर एक और हमले की पुख्ता जानकारी मिली थी। इसी जानकारी के आधार पर भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी की रात को पाकिस्तान में घुस कर बालाकोट स्थित जैश के प्रमुख अड्डे को निशाना बनाया और करीब 300 आतंकियों का खात्मा किया था। इसके विपरीत 27 फरवरी को पाकिस्तानी एयर फोर्स ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय एयर फोर्स ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान का एक F-16 विमान मार गिराया। इस लड़ाई में IAF का भी एक मिग-21 दुश्मन का निशाना बना और उसके पायलट पाकिस्तान के कब्जे में हैं, जिन्हें छोड़ने की बात इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में की।
पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा किए गए ‘एयर स्ट्राइक’ के बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमे उसके एक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया गया। इस प्रक्रिया में एक भारतीय पायलट पाकिस्तान के कब्ज़े में आ गया। पाकिस्तान ने हिरासत में लिए गए पायलट का वीडियो सोशल एमडीए पर वायरल कर दिया, जिसके बाद लोगों ने उसे जेनेवा कॉन्वेंशन का पालन करने की हिदायत दी। इसके अनुसार, युद्धबंदियों (POW) के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होती है।
पाकिस्तान की हवाई घुसपैठ मिलिटरी के ठिकानों पर हमला था। हमारे पायलट के साथ भी वहां बुरा व्यवहार किया गया जो जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन हैः रक्षा मंत्रालय के अधिकारी
सबसे पहली बात तो यह कि भारतीय पायलट को पाकिस्तानी सेना दुबारा हिरासत में लिए जाने वाला वीडियो वायरल कर पाकिस्तान ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। पाकिस्तानी अधिकारी पहले भी दावा कर चुके हैं कि हिरासत में लिए गए पायलट के साथ इज्ज़त वाला व्यवहार किया जाएगा। बाद में वायरल हुए एक वीडियो में यह दिखाने की कोशिश भी की गई की पायलट सकुशल हैं और चाय पी रहे हैं। असल में, इस मामले में पाकिस्तान के हाथ बँध चुके हैं। लेकिन फिर भी पाकिस्तान ने एक अंतिम प्रयास करते हुए हिरासत में लिए गए पायलट को भारत के साथ मोलभाव करने के लिए इस्तेमाल करना चाहा।
Sources: Pakistan is trying to create a Kandahar type pressure but India will not give in, there will be no deal or talks on Wing Commander #AbhinandanVartaman‘s release. https://t.co/UdYTZwhxHg
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने यह साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान के मिलिट्री ठिकानों पर घुसपैठ के बदले उसने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय पायलट से बुरे व्यवहार को लेकर मंत्रालय ने पाकिस्तान पर जेनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। इन सबसे पाकिस्तान बैकफुट पर नज़र आ रहा है क्योंकि भारतीय पायलट की रिहाई को लेकर मोलभाव के उसके दिवास्वप्न को तगड़ा झटका लगा है। भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार तत्काल प्रभाव से अपने पायलट की रिहाई चाहता है और वह भी बिना किसी शर्त के।
Govt cleared there is no question of any deal or talk with Pak.
If Pakistan thinks they have a card to negotiate with then they are mistaken.
इस से दो चीजें जो निकल कर सामने आती है, वो भारत के रुख को काफ़ी स्पष्ट कर देती हैं। सबसे पहली बात तो यहकि भारत ने कंधार प्लेन हाईजैक से सीख ली है और किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने से साफ़ इनकार कर दिया है। कंधार आतंकियों और भारतीय गणराज्य के बीच का मसला था और पाकिस्तान इसमें एक किरदार होने के बावजूद बच कर निकल सकता था। लेकिन, भारतीय पोलोट वाला मसला सीधे दो देशों के बीच का है। अतः भारत आश्वस्त है कि अंतरराष्ट्रीय सस्तर पर पहले से ही अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान के पास इसे लेकर दम दिखाने की ताक़त नहीं बची है। तभी भारत ने ‘बिना किसी शर्त तत्काल रिहाई’ की माँग की है।
Pakistan doing a Kandahar, we will not allow this; we have an upper hand, P-4 has been firm: Top Govt. Sources
दूसरी बात यह कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने फिलहाल काउंसलर एक्सेस लेने से भी इनकार कर दिया है। यह कुलभूषण जाधव वाले मामले से अलग है जहाँ भारत ने काउंसलर एक्सेस के लिए काफ़ी मशक्कत की थी। कुलभूषण जाधव बस एक भारतीय नागरिक हैं जिनपर पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगाया और उन्हें सजा सुना दी गई। इस मामले में ऐसा नहीं है। भारत ने अपने पायलट को वापस लाने के लिए कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है लेकिन पाकिस्तान के सामने झुकने या इसे लेकर किसी भी प्रकार के मोलभाव से साफ़ इंकार कर दिया है।
इस बार पाकिस्तान के साथ कोई सौदा नहीं होगा, हम आतंक पर तत्काल और विश्वसनीय कार्रवाई करना चाहते हैं: शीर्ष सरकारी सूत्र#BREAKING
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवाद पर भारत का रुख नहीं बदलेगा- ऐसा स्पष्ट सन्देश दे दिया गया है। भारतीय पायलट को ‘Bargaining Chip’ की तरह प्रयोग कर के तनाव कम करने का सपना देख रहे पाकिस्तान को यह साफ़ कर दिया गया है कि दोनों देशों के बीच प्रमुख मसला आतंकवाद है और पाकिस्तान स्थित आतंकियों पर कार्रवाई (बातचीत के लिए जो शर्त तय की गई है) के बिना कोई बातचीत नहीं होगी। मुद्दा अभी भी पुलवामा है। मुद्दा अभी भी पुलवामा हमले को लेकर पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठन जैश व उसके सरगना मसूद अज़हर पर कार्रवाई का है।
कुल मिलाकर देखें तो भारत कोई ‘डील’ नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं करने पर पाकिस्तान को सबक सिखाने की भी पूरी तैयारी है। जिस तरह से अपने एयरस्पेस पर निगरानी रखते हुए पाकिस्तान ने कमर्सियल फ्लाइट्स को बंद कर रखा है, उसे पता है कि अगर जेनेवा कन्वेंशन के आधार पर काम नहीं होता है तो भारत के पास कड़ी सैन्य कार्रवाई करने का एक बड़ा मौक़ा मिल जाएगा- जो पाकिस्तान ‘afford’ नहीं कर सकता। गेंद पाकिस्तान के पाले में ही है लेकिन उसके पास फुल टॉस फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं है।