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दुबई में ‘असहिष्णुता’ पर बोल रहे हैं राहुल, कोलकता में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता फ़िल्म रिलीज़ पर कर रहे तोड़फोड़

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का विवादों से गहरा नाता है। अपने विवादित बयानों के ज़रिए वो आए दिन सुर्ख़ियों में छाए रहते हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसमें वो एक बार फिर अपनी धुर-विरोधी पार्टी को बदनाम करने की साज़िश रचते दिखे।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने दुबई में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के चैंपियन के रूप में ख़ुद को दिखाने की कोशिश की। संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर गए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुबई में एक रैली को संबोधित किया जहाँ उन्होंने देश के प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए दावा किया कि भारत ‘असहिष्णुता’ को साढ़े चार साल से देख रहा है। मोदी सरकार को घेरते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि आज भारत असहिष्णुता और बँटवारे की स्थिति का सामना कर रहा है, उससे भारत कभी सफल नहीं हो सकता।

दिलचस्प बात यह है कि राहुल गाँधी पिछले साढ़े चार वर्षों में असहिष्णु होने का आरोप लगाकर देश को बदनाम कर रहे थे, जबकि उनकी अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता उन सिनेमाघरों को तबाह करने पर तुले हुए थे, जो ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ नामक फ़िल्म की स्क्रीनिंग कर रहे थे। गुंडागर्दी के बेहद निंदनीय प्रदर्शन में, कोलकाता के युवा कॉन्ग्रेस नेताओं ने सेंट्रल कोलकाता में हिंद आईनॉक्स (Hind Inox) के बाहर न सिर्फ़ हंगामा किया बल्कि फ़िल्म की स्क्रीनिंग को रोकने के लिए दो जगहों पर स्क्रीन को फाड़ भी दिया।

एक अन्य घटना में, मध्य प्रदेश के इंदौर में, कॉन्ग्रेस और युवा कॉन्ग्रेस ने फ़िल्म की स्क्रीनिंग के विरोध की घोषणा की थी, जिसके कारण स्थानीय पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी। युवा कॉन्ग्रेस नेताओं की महाराष्ट्र इकाई ने फ़िल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के निर्माताओं को एक पत्र भेजा था, जिसमें फ़िल्म रिलीज़ होने से पहले उनके द्वारा एक विशेष स्क्रीनिंग की माँग की गई थी, ताकि वे इसे सेंसर कर सकें।

इस तरह के हिंसात्मक विरोध और तमाम व्यवधान के अलावा, कॉन्ग्रेस के पारिस्थितिकी तंत्र ने अदालत में कई याचिकाएँ दायर करके फ़िल्म को रिलीज़ होने से रोकने की कोशिश की गई। पंजाब के एक कान्ग्रेसी नेता ने फ़िल्म की रिलीज़ को रोकने के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख़ किया। जनवरी 3, 2019 को, सुधीर कुमार ओझा नाम के एक वकील ने फ़िल्म के अभिनेताओं के ख़िलाफ़ कुछ बड़े लोगों की छवि को नुक़सान पहुँचाने संबंधी मामला दर्ज़ किया। एक ऐसी ही दलील दिल्ली हाई कोर्ट में एक फ़ैशन डिज़ाइनर पूजा महाजन ने अपने वकील अरुण मंत्री के ज़रिये भी दायर की।

देश के बँटे होने का दावा करने वाले राहुल गाँधी उस समय कहाँ थे, जब उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को मुस्लिमों की पार्टी होने जैसा विवादित बयान दिया था। राहुल कब से इतने परिपक्व हो गए कि वो देश को असहिष्णु और बँटा हुआ करार दे सकें।

बेरोज़गारी जैसा मुद्दा उठाकर क्या वे ख़ुद इस बात का प्रमाण देने में सक्षम हैं, कि कॉन्ग्रेस शासन में रोज़गार मुहैया कराने जैसी कितनी योजनाएँ वास्तविक स्तर पर फलीभूत हुईं। वहीं, बात करें मोदी सरकार की तो अनेकों ऐसी योजनाएँ फलीभूत हुईं हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार को युवाओं की चिंता ही नहीं बल्कि उनके लिए स्किल इंडिया, मेक-इन-इंडिया जैसी तमाम योजनाओं को साकार रूप भी दिया है, जो कॉन्ग्रेस की सोच से भी परे थीं।

इन परिस्थितियों में, राहुल गाँधी के बयान किसी बचकानी हरक़त से कम नहीं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि राजनीतिक परिवेश में पलना-बढ़ना ही काफ़ी नहीं होता बल्कि जनता के समक्ष परिपक्वताभरा व्यवहार भी करना होता है, बजाए जनता को भ्रमित करने के उन्हें सही तथ्यों और आँकड़ो से भी अवगत कराना चाहिए।

सपा-बसपा सीटों के बंटवारे के बाद, मीडिया की बेचैनी को महसूस कर पा रहे होंगे जयंत चौधरी!

लोकसभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखते हुए बुआ और भतीजे की राजनीतिक जोड़ी ने उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे का ऐलान कर दिया है। 12 जनवरी 2019 को अपने प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान अखिलेश यादव व मायावती ने 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही। इस तरह यदि दोनों ही राजनीतिक पार्टियाँ 38 सीटों पर चुनाव लड़ती हैं, तो महज 2 सीट ही गठबंधन के दलों के लिए बच जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मायावती ने अमेठी और रायबरेली की संसदीय सीट को कॉन्ग्रेस के लिए छोड़ने का ऐलान किया है।

राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने उत्तर प्रदेश के 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा पेश किया था। अब गठबंधन में अखिलेश व मायावती के इस फ़ैसले के बाद अजित सिंह की पार्टी रालोद का गठबंधन में शामिल होने की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है या उन्हें कम सीटों पर संतुष्ट करना होगा। कुछ दिनों पहले मीडिया द्वारा सीटों के बंटवारे पर पूछे गए सवाल को टालते हुए जयंत चौधरी ने कहा, “सीटों के बंटवारे की बेचैनी मीडिया को है। सारी बातें साफ़ होंगी, सस्पेंस बनाए रखें।”  

इस बयान से भले ही जयंत ने सवाल को टाल दिया हो, लेकिन इस सवाल के मायने और मीडिया की बेचैनी को जयंत सपा-बसपा द्वारा सीटों के बँटवारे की घोषणा के बाद अच्छी तरह से समझ रहे होंगे।

रालोद ने पाँच सीटों पर दावा पेश किया था

अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल ने उत्तर प्रदेश के पाँच लोकसभा सीटों पर दावा पेश किया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन पाँच लोकसभा सीट में बागपत, अमरोहा, हाथरस, मुजफ्फरनगर और मथुरा है। मायावती पहले भी रालोद को दो से ज्यादा सीट देने के मूड में नहीं थी। लेकिन अब जब सपा-बसपा ने सीटों के बंटवारा कर लिया है, तो शायद रालोद को इस गठबंधन का हिस्सा बनना मंजूर न हो।

उत्तर प्रदेश में गेस्ट हाउस कांड के बाद दोनों ही दलों (सपा-बसपा) में दूरी पैदा हो गई थी। 25 साल बाद एक बार फ़िर से यूपी में सपा-बसपा ने गठबंधन किया है।

कॉन्ग्रेस-रालोद का साथ पुराना है

कॉन्ग्रेस-रालोद उत्तर प्रदेश में पहले भी गठबंधन करके चुनाव लड़ चुके हैं। वर्तमान समय में राजस्थान की कांग्रेस सरकार का रालोद हिस्सा है। ऐसे में इन दोनों दलो को साथ आने में कोई समस्या नहीं होगी। पिछले लोकसभा चुनाव में रालोद खाता तक नहीं खोल पाई थी। हालाँकि, बाद में कैराना में हुए उपचुनाव में सपा और बसपा के समर्थन से आरएलडी उम्मीदवार की जीत हुई।

10% कोटा बिल को अदालत में चुनौती देने वाली NGO का यू-टर्न

सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने सबंधी विधेयक को गुरुवार (जनवरी 10, 2019) को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने वाली NGO ने यू-टर्न लेते हुए अब इस विधेयक का स्वागत किया है। बता दें कि इस बिल को संसद में पास हुए अभी 24 घंटे भी नही हुए थे तभी ‘यूथ फॉर इक्वलिटी (YFE)’ नामक NGO ने इसके ख़िलाफ़ उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी थी। अपनी याचिका में इस क़ानून को रद्द करने की मांग करते हुए संस्था ने कहा था कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है और आरक्षण के लिए बनाए गए 50 प्रतिशत के दायरे को पार करता है।

अब यू-टर्न लेते हुए इस NGO के प्रेसिडेंट डॉक्टर कौशल कान्त मिश्रा ने इस विधेयक का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मूल रूप से ये विधेयक एक स्वागत-योग्य कदम है। उनके इस बयान से छह घंटे पहले ही संस्था के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा था कि उन्होंने इस विधेयक को अदालत में चुनौती दी है।

संस्था के दोहरे रवैये से लोगों को पता नहीं चल पा रहा है कि आख़िर YFE इस विधेयक के समर्थन में है या फिर ख़िलाफ़ है। एक तरफ़ इसके अध्यक्ष इस विधेयक का स्वागत कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वो इसके खिलाफ याचिकाकर्ता भी हैं। एक तरफ वो इसे गरीबों के हित में बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अदालत में इसे संविधान के ख़िलाफ़ बताया है।

YFE ने गुरूवार को देश की शीर्षतम अदालत में दायर की गई याचिका में कहा था:

“यह संशोधन पूरी तरह से संवैधानिक मानदंड का उल्लंघन करता है क्योंकि संविधान में कहा गया है कि सिर्फ़ आर्थिक स्थिति ही आरक्षण पाने का आधार नहीं हो सकती। इंद्रा साहनी केस में 9 सदस्यों वाली पीठ ने ये निर्णय दिया था। ये संशोधन उच्चतम न्यायलय के फ़ैसले के ख़िलाफ़ है, इसीलिए इसे रद्द कर देना चाहिए।”

वहीं यू-टर्न लेते हुए उन्होंने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा:

“ये विधेयक स्वागत योग्य है क्योंकि इसमें जाति नहीं, गरीबी को आधार बनाया गया है।”

रालोद नेता अजित सिंह ने मोदी, योगी को बोला बैल, बछड़ा; स्मृति ईरानी को कहा हट्टी-कट्टी गाय

राजनीति में खुद को फिर से स्थापित करने के लिए जद्दोजहद कर रहे राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख अजित सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘बैल और बछड़ा’ कहकर चर्चा में आ गए हैं। बृहस्पतिवार (जनवरी 10, 2019) को  मथुरा के कोसीकलाँ कस्बे में ‘किसानों से संवाद’ कार्यक्रम के दौरान एक जनसंवाद रैली को संबोधित करते हुए अजीत सिंह ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को भी नहीं बख्शा और उन्हें ‘हट्टी-कट्टी गाय’ बता दिया।

ख़ास बात यह है की रालोद पार्टी नेता अजीत सिंह की यह असभ्य टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब राष्ट्रीय महिला आयोग कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी को केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण पर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने के लिए नोटिस भेज चुका है।

जनसंवाद रैली में अजीत सिंह ने कहा, “मैं आजकल अखबारों में पढ़ रहा हूँ कि आजकल आपके गाय-बैल-बछड़े खूब घूम रहे हैं। इन्हें आप लोग स्कूल-कॉलेजों में बंद कर रहे हो। जिन्हें लोग कहते हैं कि ये मोदी-योगी घूम रहे हैं, सच है क्या?’’ अजीत सिंह ने इसके आगे कहा, ‘‘कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि हट्टी-कट्टी गाय आ गई, स्मृति ईरानी भी घूम रही है।” उन्होंने ‘मोदी हाय-हाय’ और ‘मोदी बाय-बाय’ के नारे लगाते हुए कहा कि देश के किसानों और उद्योगपतियों को नोटबंदी के कारण नुकसान उठाना पड़ा।

भाजपा नेता योगेश गोस्वामी ने कहा है, “अजित सिंह ने ऐसा कर के संविधान का अपमान किया है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केन्द्रीय कपड़ा मंत्री मंत्री राजनीतिक चेहरे हैं और संवैधानिक पदों पर बैठे हुए हैं, ऐसे लोगों पर अभद्र टिप्पणी करना संविधान का अपमान करना है”

पिछले कुछ समय से विपक्ष के नेताओं में प्रधानमंत्री और NDA सरकार के नेताओं को लेकर व्यक्तिगत अभद्र टिप्पणियाँ करने का चलन बढ़ा है।

मणि शंकर अय्यर 2017 के गुजरात चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच आदमी’ कह चुके हैं। यह पहली बार नहीं है जब मणि शंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कोई जातिगत टिप्पणी की हो, 2014 लोकसभा चुनावों में भी वो नरेंद्र मोदी को ‘चायवाला’ कहकर उनको नीचा दिखाने की कोशिश करना चाहते थे। हालाँकि, यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वरदान साबित हुई और ‘चायवाला’ के ‘टैग’ ने उन्हें जनता के बीच और ज्यादा लोकप्रिय बना दिया था।

2014 लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ अमेठी से चुनाव लड़ने वाली वर्तमान केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी विपक्ष से लेकर कुछ मीडिया हाउस तक का आसान निशाना रही हैं। शायद ऐसा उनके एक सशक्त और वाक्पटु नेता के रूप में बढ़ते हुए व्यक्तित्व के कारण भी हो रहा है। हाल ही में एक वामपंथी मीडिया संगठन ‘द टेलीग्राफ’ ने स्मृति इरानी के राहुल गाँधी को लेकर दिए एक बयान को गलत तरीके से पेश कर के ये लिखकर उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई कि स्मृति इरानी ने राहुल गाँधी के ‘पौरुष’ पर प्रश्नचिन्ह लगाए। शायद अपने पूर्वग्रहों के कारण द टेलीग्राफ ‘पुरुषार्थ’ और ‘पौरुष’ में भेद करने में असफल रहा होगा।

शाह फै़सल – ‘पसंद हैं पाकिस्तानी PM इमरान और दिल्ली CM केजरीवाल’

जम्मू-कश्मीर कैडर IAS अफ़सर शाह फै़सल ने 9 जनवरी को अपने पद से इस्तीफ़ा देते हुए इस बात का हवाला दिया था कि भारत समेत कश्मीर में ‘हिन्दुत्ववादी तत्वों’ में ख़तरनाक वृद्धि हो रही है और हर जगह समुदाय विशेष के लोगों को मारा जा रहा है।

उसी फै़सल ने आज अपने पसंदीदा व्यक्तियों की बात करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और दिल्ली के मुख्यमंत्री में अरविंद केज़रीवाल का नाम लेकर कहा है कि वो उनसे अत्यंत प्रभावित हैं।

उनका कहना है – “मैं सच में इमरान खान और केज़रीवाल से बहुत ज्यादा प्रभावित हूँ, लेकिन हम बेहद तनावग्रस्त क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जहाँ पर कार्य करना इतना भी आसान नहीं होता है। इस जगह ने अपनी लेजिटिमेसी को बीते कुछ सालों में खो दिया है।”

ये पहली बार नहीं हैं, कि शाह फै़सल ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ़ में बात कही हो। इससे पहले, जब पिछले साल इमरान खान को सत्ता की कुर्सी मिली थी, तब भी फै़सल ने भारत पर आरोप लगाया था, कि नए प्रधानमंत्री के सुलह करने की कोशिशों पर भी भारत उलझा हुआ है।

बता दें कि पिछले साल भारत को ‘रेपिस्तान’ कहने वाले इस पूर्व आईएएस अधिकारी पर विभागीय जाँच बैठी थी। जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक विभाग ने देश की छवि को धूमिल करने पर और आईएएस के पद पर रहकर, शिष्टाचार को बनाए रखने में असफल होने के आरोप में इस जाँच को बिठाया था। जिसके बाद फै़सल ने इस जाँच का और विभाग द्वारा भेजे गए ख़त का बुहत ही बेशर्मी के साथ मजाक उड़ाया।

फिलहाल, अनुमान लगाया जा रहा है कि फै़सल राजनीति की तरफ़ अपना रुख़ करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्लाह ने इस्तीफ़ा देने के बाद उनका स्वागत भी किया है। हालाँकि, फैस़ल का कहना है कि वो हो सकता है आने वाले चुनावों में भाग लें, लेकिन किसी भी राजनैतिक पार्टी से जुड़ने से उन्होंने साफ़ मना किया है।

साथ ही उनका ये भी कहना है कि कश्मीर के लोगों द्वारा ही उनके आगे के भविष्य का निर्धारण होगा। बता दें कि फै़सल के इस्तीफे के बाद हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फ़ारूक़ ने ट्वीट के माध्यम से फ़ैसल का स्वागत करते हुए कहा था कि देश भर में मारे जा रहे मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन के तौर पर उनका इस्तीफ़ा स्वागत योग्य है। जिस पर शाह फै़सल ने उन्हें उनकी अमूल्य सलाह के लिए शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि वो उम्मीद करते हैं, उनमें वो ताक़त और लड़ने का जज़्बा रहे ताकि फै़सल भी उसी दिशा में काम कर पाएँ जिधर उमर फ़ारूक़ हैं।

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The Accidental PM: लुधियाना से कोलकाता तक कई जगह कॉन्ग्रेस का हिंसक प्रदर्शन

अनुपम खेर अभिनीत फ़िल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ शुक्रवार (जनवरी 11, 2018) को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई। फ़िल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला है। फ़िल्म ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे तमाम विरोध प्रदर्शनों के बावज़ूद पहले ही दिन बॉक्स ऑफ़िस पर तीन करोड़ रुपए से भी अधिक की कमाई की। वीकेंड्स पर इसकी कमाई में और उछाल आने की सम्भावना है।

वहीं ख़बरों के अनुसार लुधियाना और दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश तक जगह-जगह कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन किए गए। इस कारण कुछ सिनेमाघरों को मज़बूरन फ़िल्म का प्रदर्शन भी रोकना पड़ा। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेंट्रल कोलकाता के क्वेस्ट मॉल में स्थित आईनॉक्स मल्टीप्लेक्स में घुसकर भारी तोड़-फोड़ की और सिनेमाघर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। शाम के क़रीब आठ बजे कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता अपनी पार्टी के झंडों के साथ मल्टीप्लेक्स में पहुँचे और उन्होंने सिनेमाघर के परदे को फाड़ दिया। इस कारण तय समय पर फ़िल्म का प्रदर्शन नहीं किया जा सका।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता यहीं नहीं रुके। उन्होंने फ़िल्म देखने आए दर्शकों को भी डराया-धमकाया और उन्हें ऑडिटोरियम से बाहर जाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वो कहीं भी इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग नहीं होने देंगे क्योंकि इसमें कॉन्ग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं के प्रति अपमानजनक कंटेंट है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक़ उपद्रवियों का नेतृत्व कर रहे कॉन्ग्रेस नेता राकेश सिंह ने कहा;

“फिल्म हमारे वरिष्ठ नेताओं जैसे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह के प्रति अपमान है। हमने यहाँ स्क्रीनिंग रोक दी है। हम फ़िल्म को कहीं भी प्रदर्शित नहीं होने देंगे।”

IANS के मुताबिक़ उपद्रवी ‘राहुल गाँधी ज़िंदाबाद’ और ‘कॉन्ग्रेस पार्टी ज़िंदाबाद’ जैसे नारे भी लगा रहे थे। INOX के प्रवक्ता ने बताया कि मल्टीप्लेक्स के संचालकों को बाद में पुलिस की मदद लेनी पड़ी, जिसके बाद फ़िल्म का प्रदर्शन फिर से शुरू कराया जा सका।

लुधियाना में भी यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस भवन से लेकर जेएमडी मॉल तक प्रदर्शन किया। पंजाब कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक सिनेमाघर को घेर कर अभिनेता अनुपम खेर का पुतला भी दहन किया। मध्य प्रदेश में जबलपुर के समदड़िया मॉल में भी फ़िल्म के प्रदर्शन को लेकर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा जम कर हंगामा किया गया। इसी तरह इंदौर में भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा किया, जिस कारण वहाँ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।

अनुपम खेर ने कॉन्ग्रेस की ऐसी हिंसक नीति का विरोध ट्विटर पर एक वीडियो जारी करके किया। उन्होंने पुलिस व प्रशासन से ऐसे लोगों के साथ सख्ती से निपटने का अनुरोध किया है।

ड्रग्स की तस्करी में लिप्त 2 रोहिंग्या गिरफ़्तार, मिला आधार कार्ड भी

हैदराबाद के राचाकोंडा पुलिस ने दो रोहिंग्या मुसलामानों को ड्रग्स के साथ पकड़ा है। पुलिस ने उनके पास से ड्रग्स एवं नारकोटिक्स भी बरामद किए हैं। पकड़े गए दोनों रोहिंग्याओं के नाम अबीबुस रहमान और मोहम्मद रहीम बताया गया। पुलिस ने उनके पास से याबा ड्रग्स की 1400 टेबलेट्स बरामद की। इसे 150 रुपए प्रति टेबलेट के हिसाब से बेचा जा रहा था। बता दें कि ख़तरनाक याबा ड्रग्स भारत में पूरी तरह से बैन हैं। हैदराबाद में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब शहर में इस तरह की आपराधिक गतिविधियाँ सामने आ रही हैं।

ख़बरों के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि दो रोहिंग्या शहर में ड्रग्स तस्करी की गतिविधियों में संलिप्त हैं। इसके आधार पर बालापुर पुलिस स्टाफ ने इन दोनों को पकड़ा और इनकी तलाशी ली। तलाशी में पुलिस को बड़ी सफलता मिली और इन्हे रंगे हाथो गिरफ़्तार कर लिया गया।

पुलिस कमिश्नर महेश भगत ने समाचार एजेंसी एनआईए को इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया कि थाईलैंड और म्यांमार से तस्करी कर लाए जाने वाले इस ड्रग्स को ‘मैड ड्रग्स’ भी कहा जाता है। याबा ड्रग कैथरीन और मेथामफेटामाइन जैसे रासायनिक पदार्थों का ख़तरनाक मिश्रण होता है जोकि एक नशीली दवा है। अधिक जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर ने बताया;

“मोहम्मद रहीम के पास से एक आधार कार्ड भी सीज किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश का पता मौजूद था। ज़ब्त किए गए सामान की कुल क़ीमत 2 लाख रुपए से ज़्यादा बताई जा रही है।”

फ़िलहाल, पुलिस द्वारा इस मामले को धारा-8C के अंतर्गत दर्ज़ किया गया। इसमें आरोपितों पर एनडीपीएस एक्ट 1985, 199, 200, आईपीसी 420 धाराएँ लगाई गईं। पुलिस इस बात की जानकारी जुटाने में लगी हुई है कि आख़िर ये ड्रग्स कहाँ से लाया जाता है।

दरअसल, रोहिंग्या मुस्लिम भारत में म्यांमार और बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ कर यहाँ बस जाते हैं। सुरक्षा कारणों से इन्हें वापस भेजे जाने की लगातार मॉंग हो रही है और कई रोहिंग्याओं को वापस उनके देश भी भेजा जा चुका है। अब इनके आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने की ख़बरों के बाद सुरक्षा बलों के भी कान खड़े हो गए हैं। ख़बरों के अनुसार एक रोहिंग्या परिवार के पाँच सदस्यों को गुरुवार (जनवरी 10, 2018) को मणिपुर की सीमा से म्यांमार भेजा गया।

पानीपत की लड़ाई जितना ही अहम है लोकसभा चुनाव: अमित शाह

भाजपा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी का माहौल बना चुकी है। शुक्रवार रात (जनवरी 11, 2019) को रामलीला मैदान में भाजपा का 2 दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव से पहले अब तक के सबसे बड़े राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरूआत करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आने वाले लोकसभा चुनाव को विचारधारा की लड़ाई बताया है।

उन्होंने अपने भाषण में पानीपत की लड़ाई का ज़िक्र करते हुए बताया कि किस प्रकार उस समय मराठाओं की हार के कारण इस देश को 200 साल की गुलामी झेलनी पड़ी थी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि इस विचारधारा की लड़ाई में किसी भी तरह की चूक के लिए कोई जगह नहीं है, इसलिए कमर कस के मैदान में उतरें। उत्साहित भीड़ ने “अबकी बार, फिर मोदी सरकार” की नारेबाज़ी भी की।

भाजपा द्वारा यह राष्ट्रीय अधिवेशन 3 प्रमुख राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हार के बाद आयोजित किया गया है। ज़ाहिर सी बात है कि अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं और पार्टी सदस्यों में उत्साह का संचार करना होगा।

नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन के अवसर पर पार्टी अध्यक्ष ने राम मंदिर, सपा-बसपा गठबंधन, GST, और आरक्षण जैसे विषयों पर बात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश के चुने हुए प्रतिनिधियों की लगभग 12 हजार की भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली बार भी यहीं से जीत का संकल्प लिया गया था, इस बार भी इसी स्थल को चुना गया है।

उन्होंने लगभग 1 घंटे लम्बे अपने भाषण में कहा कि इस युद्ध में एक तरफ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और गरीब कल्याण की विचारधारा है और दूसरी तरफ स्वार्थ और सत्ता के लिए एकजुट लोगों का जमघट है, जिनके पास ना ही कोई नेता है और ना ही कोई नीति।

अमित शाह ने कहा, “कुछ युद्ध हार-जीत तक ही सीमित होते हैं। कुछ युद्धों का असर एक-आध दशक तक होता है, लेकिन कुछ युद्धों का प्रभाव सदियों तक रहता है। मैं मानता हूँ कि 2019 का युद्ध सदियों तक असर डालने वाला है और इसलिए यह युद्ध जीतना जरूरी है।” इस पर उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि 131 युद्ध जीतने वाले मराठा जब हारे थे तो 200 वर्षों तक की गुलामी झेलनी पड़ी थी।

पार्टी नेताओं को बताया आगामी चुनाव तैयारी का ख़ाका

रामलीला मैदान में भाजपा के 2 दिवसीय इस अधिवेशन में लोकसभा चुनावों को लेकर जिला स्तर तक के नेताओं को चुनावी अभियान की जानकारी दी जानी है।

राम मंदिर के प्रति है भाजपा प्रतिबद्ध

अमित शाह ने जैसे ही कहा कि पार्टी चाहती है कि जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर बने, सामने बैठी भीड़ उत्साहित हो गई। अमित शाह ने कहा कि भाजपा हर हाल में राम मंदिर बनाना चाहती है और वह इस कार्य के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने बताया की कॉन्ग्रेस लगातार राम मंदिर बनाने को लेकर विवाद कर के कार्य में विलम्ब कर रही है। जबकि भाजपा सुप्रीम कोर्ट में लंबित राम मंदिर के फैसले को जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास कर रही है।

सामान्य श्रेणी के गरीबों को आरक्षण देना ऐतिहासिक फ़ैसला

अमित शाह ने बताया कि सामान्य श्रेणी में आने वाले गरीबों को नौकरी और रोज़गार में आरक्षण देना मोदी जी का एतिहासिक फ़ैसला है। यह गरीब और वंचितों को समानता का अधिकार देगा। शाह ने कहा कि इस फैसले से करोड़ों युवाओं के विकास का रास्ता सरकार ने खोल दिया है।

विपक्ष पर साधा निशाना

राहुल गाँधी का ज़िक्र अमित शाह ने अपने भाषण में 2-3 बार किया। उन्होंने कहा, “मिशेल मामा पकड़े जाते हैं तो वह पसीने-पसीने हो जाते हैं, क्वात्रोची अंकल उनके घर जाते थे। दरअसल यह उनका भय है।” इसके आगे शाह ने कहा कि राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई, लेकिन फिर भी उन पर बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने नीरव मोदी, विजय माल्या जैसे लोगों के देश छोड़कर भागे जाने को लेकर भी राहुल गाँधी पर हमला करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस काल में वह यहीं सुरक्षित थे क्योंकि सत्ता में भागीदार बैठे थे। अब चौकीदार बैठा है तो ऐसे लोगों को डर है।

महागठबंधन का नहीं है कोई अखिल भारतीय असर

महागठबंधन के मुद्दे पर अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटा पाना नामुमकिन है। साथ ही ये भी कहा कि वो नरेंद्र मोदी को 1987 से जानते हैं और उनके नेतृत्व में कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं। अमित शाह ने कहा कि इन 5 सालों में देश का विकास व गौरव चार गुना बढ़ा है और देश की जनता मोदी जी के पीछे चट्टान की तरह खड़ी है। ना केवल भारत बल्कि दुनिया में मोदी जी जैसा लोकप्रिय नेता किसी और दल में भी नहीं है। उन्होंने कहा, “जिस उत्तर प्रदेश को लेकर विपक्ष में इतनी जद्दोजहद मची है, वहां भी भाजपा 73 से 74 हो सकती है लेकिन 72 नहीं।”

अधिवेशन में उद्घाटन के अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी और पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के साथ ही कई भूतपूर्व मुख्यमंत्री मौजूद थे।

बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह ने करण के चैट शो में की महिला-विरोधी टिप्पणी

करण जौहर के पॉपुलर चैट शो ‘कॉफ़ी विद करण’ के दौरान हार्दिक पांड्या को महिलाओं के बारे में अभद्र टिप्पणी करना मँहगा पड़ गया। महिलाओं के बारे में हार्दिक के इस टिप्पणी पर बीसीसीआई ने कड़ा कदम उठाया। इस चैट शो में हार्दिक पांड्या के साथ के एल राहुल भी हिस्सा ले रहे थे। यही वजह है कि इन दोनों पर जाँच पूरी होने तक बीसीसीआई ने क्रिकेट खेलने से बैन लगा दिया है।

हार्दिक और केएल राहुल के बाद कॉफ़ी विद करण के इसी चैट शो का एक विवादास्पद वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रणवीर सिंह महिलाओं के बारे में अभद्र टिप्पणी करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के ज़रिए लोग रणवीर को ट्रोल कर रहे हैं। हलाँकि, रणवीर की यह वीडियो पुरानी है, लेकिन सोशल मीडिया पर एक बार फिर से यह वीडियो वायरल हो रही है।

कॉफ़ी विद करण चैट शो में रणवीर ने ये कहा

कॉफ़ी विद करण के इस चैट शो में रणवीर ने करीना और अनुष्का के बारे में सेक्सिस्ट टिप्पणी की है। वीडियो में शो के दौरान रणवीर ने कहा, “मैं बचपन में जिस स्विमिंग क्लब में था वहाँ करीना कपूर आती थी। उनको स्विम सूट में देखते हुए मैं बच्चे से लड़का बन गया।” इसी शो में एक जगह रणवीर ने अनुष्का से कहा, “आप कहें तो मैं आपकी a** को पिंच कर सकता हूँ।”  शो के दौरान रणवीर से इस तरह की बात को सुनकर अनुष्का असहज हो गई। लेकिन शो में होने की वजह से उन्होंने इस बात को हँसी में टाल दिया।

चैट शो के दौरान इन दोनों ही बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने रणवीर के इस वीडियो को शेयर करते हुए जमकर आलोचना करनी शुरू कर दी।

राजद विधायक प्रह्लाद यादव की सरेआम गुंडागर्दी, जमीन विवाद में मार-पीट

बिहार के लखीसराय से एक वीडियो वायरल हो रही है। यह वीडियो राजद के सूर्यगढ़ा विधायक प्रह्लाद यादव की है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने प्रह्लाद यादव से जुड़े 34 सेकेंड के इस वीडियो को ट्वीटर पर साझा किया है। इस वीडियो में प्रह्लाद यादव एक शख्स को थप्पड़ मारते हुए दिख रहे हैं। यही नहीं कई बार माँ-बहन से जुड़ी गंदी गालियाँ देते हुए भी राजद विधायक को इस वीडियो में सुना जा सकता है। इस पूरे वीडियो को देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। एएनआई ने अपने ट्वीट में लिखा है कि इस मामले में एक मुकदमा रजिस्टर कर लिया गया है।

प्रह्लाद यादव की शह पर जीवन यादव ने नबालिग को बेरहमी से पीटा था

यह अक्टूबर 2016 की बात है। लखीसराय विधायक प्रह्लाद यादव से जुड़ी एक ख़बर मुख्यधारा की मीडिया आ रही थी। इस ख़बर में राजद विधायक प्रह्लाद यादव और उनके भाई के दबंगई की चर्चा की गई थी। दरअसल राजद विधायक के भाई ने राजा कुमार नाम के एक नाबालिग को जमकर पीटा था। अपने विधायक भाई की शह पर जीवन ने इस घटना को अंजाम दिया था। राजा विधायक और उसके भाई के आतंक का शिकार सिर्फ इसलिए हो गया था, क्योंकि उसने अपने जमीन पर विधायक के भाई द्वारा जबरन कब्ज़े का विरोध किया था। लखीसराय में प्रह्लाद यादव का आतंक कुछ इस तरह है कि लोग उसके ख़िलाफ़ बोलने के लिए मुँह तक नहीं खोलते।

2002 में विधायक के भाई पर 14 लोगों की हत्या का आरोप

जानकारी के लिए आपको बता दें कि प्रह्लाद यादव और उनके भाई जीवन यादव लखीसराय व आसपास जिला में बड़े बालू माफ़िया के रूप में जाने जाते हैं। 12 मई 2002 में बालू उठाव के दौरान जातिय रंजिश में 14 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस मामले में मोस्ट वांटेड विधायक प्रह्लाद यादव के भाई जीवन यादव पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।