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6 साल में 111 केस: AAP ने राजनीतिक शुचिता की चिता जला दी

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के कई सारे माध्यमों पर अरविंद केजरीवाल व कुमार विश्वास का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक जगह अरविंद केजरीवाल को कुमार विश्वास कहते हैं कि तुम आंदोलन को लेकर गंभीर नहीं हो। इसी वीडियो के अंत में विश्वास यह भी कहते हैं कि यह इंसान बहुत बदमाश है।

यह वीडियो कुछ साल पहले की है, जब अन्ना आंदोलन के सिपाही अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास आदि चुनावी मैदान में हाथ आजमाने के लिए उतर रहे थे। उस समय कुमार विश्वास ने भले ही अरविंद के बारे में हँसी-मजाक में कुछ कहा हो लेकिन बाद में केजरीवाल वैसे ही निकले जैसा उन्होंने वीडियो में कहा था।

वह वीडियो जिसमें कुमार विश्वास अरविंद केजरीवाल को मजाक में ही पर आंदोलन को गंभीरता से लेने के लिए कहते हैं

रामलीला मैदान में जब अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हुआ था तब लोगों में एक उम्मीद जगी थी। देश भर में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक संदेश गया था। लेकिन जल्द ही अरविंद केजरीवाल के कर्मों की वजह से अन्ना व उनके साथियों द्वारा शुरू किए गए इस पवित्र आंदोलन से लोगों की उम्मीद टूट गई।

अरविंद केजरीवाल का नाम जब शुंगलू समिति की रिपोर्ट में आया तब अन्ना ने रालेगण-सिद्धि में पत्रकारों से बात करते हुए केजरीवाल के बारे में कहा “वह भ्रष्टाचार के खि़लाफ़ लड़ाई में मेरे सहयोगी थे, उस समय मैंने अनुभव किया कि शिक्षित नई पीढ़ी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने में सहायता कर सकते हैं। लेकिन यह एक बड़ा सपना था और मेरा सपना टूट गया।”

पत्रकारों से यह सब कहते हुए अन्ना को जो दर्द हो रहा होगा, उसे हम और आप भी महसूस कर सकते हैं। दरअसल केजरीवाल ने सिर्फ़ अन्ना का ही नहीं बल्कि देश भर की नई व पुरानी पीढ़ी के उन लाखों लोगों की उम्मीद को तोड़कर रख दिया, जिन्हें भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अन्ना के आंदोलन से थोड़ी बहुत भी उम्मीद जगी थी।

आम आदमी पार्टी को बने हुए क़रीब 6 साल हुए हैं। इन 6 सालों में भ्रष्टाचार मिटाने आई इस पार्टी के नेताओं पर अलग-अलग मामलों में कुल 111 मुक़दमे दर्ज़ हुए। आश्चर्य की बात तो यह है ख़ुद को ईमानदार बताकर राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल पर इस समय दर्जन भर मुक़दमे चल रहे हैं। यह बात अलग है कि उनकी पार्टी के नेताओं पर लगे क़रीब 64 मामले ख़ारिज हो गए।

राजनीति में किसी नेता पर मुक़दमा दर्ज़ होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन ख़ुद पर लगे आरोपों को सही बताकर माफ़ी माँगने लगे तो यह निश्चित रूप से बड़ी बात है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने कई बार किसी कॉलेज में पढ़ने वाले युवाओं के तरह ही जज़्बात में आकर अनाप-शनाप बयानबाज़ी की। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र यदि जज़्बात या बहकावे में आकर कुछ बयान देता है तो वह क्षम्य हो सकता है। लेकिन जब कोई नेता या मुख्यमंत्री अनर्गल बयानबाज़ी करके दो दिन बाद माफ़ी माँगने लगे तो यह निश्चित रूप से अक्षम्य व अशोभनीय है। बता दें कि केजरीवाल ख़ुद पर दर्ज़ मानहानी के 4 मामलों में माफ़ी माँग चुके हैं।

केजरीवाल की ही तरह उनकी पार्टी के अन्य 3 विधायकों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है, जबकि तीन विधायकों को अलग-अलग मामले में जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया है। आप विधायक प्रकाश जारवाल ने महिला छेड़छाड़ मामले में जहाँ कोर्ट में एक लाख रुपए का जुर्माना भरा, वहीं सहीराम पहलवान ने सरकारी कर्मचारी से मारपीट के मामले में 2 लाख रुपए का जुर्माना भरा है। दिल्ली सरकार के मंत्री संदीप कुमार व जितेंद्र सिंह तोमर पर लगे आरोप किसी से छिपे नहीं हैं। इसी तरह आप नेताओं से जुड़े कई मामले पिछले कुछ सालों में सामने आए हैं।

इतना ही नहीं एक मीटिंग के दौरान राज्य के मुख्य सेक्रेटरी के साथ मारपीट करने के आरोप में आम आदमी पार्टी के 13 विधायकों पर भी केस चल रहा है। जिस तरह से इन 6 सालों में आप पार्टी के नेताओं पर यौन शोषण से लेकर भ्रष्टाचार तक के आरोप लगे हैं, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि अन्ना के सत्याग्रह से पैदा हुए इन नेताओं ने ईमानदारी नाम की लुटिया डुबो दी है।

पुलिस के लिए ‘ठुल्ला’ जैसे शब्द इस्तेमाल करने पर भले ही केजरीवाल को कोर्ट से राहत मिली हो, लेकिन इस तरह के बयान से राजनीति जिस निचले स्तर पर गई है, वह किसी भी तरह से देश के किसी नागरिक को शोभा नहीं देता।

‘चूल्हा जलई ले नाले से पिया, नाला मा बड़ी आग है’… चाय के बाद अब बन रहा खाना

तारीख़ थी 10 अगस्त और दिन था ‘विश्व जैव ईंधन दिवस’ और प्रधानमंत्री मोदी गैर-जीवाश्म ईंधन के बारे में जागरूकता फैलाने वाले एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने एक ऐसे चाय बेचने वाले शख़्स का ज़िक्र किया, जो नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाता है।

पीएम ने कहा था, “मैंने एक अख़बार में पढ़ा था कि एक शहर में नाले के पास एक व्यक्ति चाय बेचता था। उस व्यक्ति के मन में विचार आया कि क्यों ना गंदी नाले से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल किया जाए। उसने एक बर्तन को उल्टा कर उसमें छेद कर दिया और पाइप लगा दिया। अब गटर से जो गैस निकलती थी उससे वो चाय बनाने का काम करने लगा।”

बता दें कि पीएम के इस बयान के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं ने इस पर तंज कसा। केजरीवाल ने कहा था कि देश का प्रधानमंत्री पढ़ा लिखा होना चाहिए। अब केजरीवाल को कौन बताए कि पीएम तो पढ़े-लिखे थे तभी उन्होंने ऐसा कहा। शायद अब ज़रूरत केजरीवाल को फिर से पढ़ाई करने की है, क्योंकि पीएम की बात सच हो रही है। दिल्ली-एनसीआर से सटे साहिबाबाद में नाले से निकलने वाली मीथेन गैस से चूल्हे पर खाना पकाकर ग़रीबों में बाँटा जा रहा है।

7 मित्रों की मेहनत ने बदल दी लोगों की सोच

साहिबाबाद के बृज विहार इलाके में रहने वाले 7 मित्र एक साथ मिलकर इस काम को अंजाम दे रहे हैं। रिपोर्ट की मानें तो प्रॉजेक्ट में अहम भूमिका निभा रहे वीरेंद्र नॉटियाल के अनुसार नाले में चार बड़े कंटेनर लगाए गए हैं, जिसमें गैस को इकट्ठा किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसे प्यूरिफाई करने के बाद 24 घंटे में रोज़ाना 2 से 3 घंटे जलने लायक गैस बन जाती है।  

इसके अलावा प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभा रहे हेमंत भारद्वाज कहते हैं कि नाले से निकलने वाली मीथेन गैस से काफी बदबू आती थी। इससे लोगों को कई बीमारियाँ हो रही थीं। हमने नाले को कवर करने के लिए कई बार निगम में आवेदन किया लेकिन प्रशासन से गुहार लगाने पर भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद हमने यूट्यूब की मदद ली।

नाले से मीथेन गैस निकालते हुए (फोटो साभार नवभारत टाइम्स)

यूट्यूब में बताए तरीक़े पर काम करते हुए मीथेन गैस से चूल्हा जलाने का प्लांट लगाया। इसमें क़रीब साढ़े ₹3 लाख का ख़र्च आया। हेमंत कहते हैं कि यहाँ लगाए गए चूल्हे से रोज़ाना शाम को 6 से 8 बजे तक ज़रूरतमंद बच्चों को खाना बाँटा जाता है।

‘जैविक कचरे’ के सही इस्तेमाल पर विदेशों में भी काम

आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है। 17वीं शताब्दी में जर्मन के हेनिग ब्राँड नाम के एक व्यापारी का सपना था कि वो मूत्र से सोना निकाले क्योंकि दोनों का रंग एक समान था। हेनिंग ने इसके बाद 1669 में फॉस्फोरस की खोज कर दी।

इसी कड़ी में कनाडाई जैव प्रौद्योगिकी व्यापारी लूना यू का भी सपना है कि वो ख़राब पड़े कचरे का सही इस्तेमाल कर कुछ ऐसा बनाएँ जो लोगों के काम आ सके। उनका लक्ष्य ख़राब कचरे (जैविक कचरे) जैसे- सेब कोर, चिकन हड्डियों को उपयोगी सामान में बदलाने का है। वो कहती हैं कि उनका लक्ष्य है कि वो इससे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बनाएँ। फ़िलहाल उन्हें अपने इस लक्ष्य को पूरा करने में थोड़ी मुश्किल आ रही है, क्योंकि इन कचरों को खाली पड़ी खोखली ज़मीन को भरने के लिए भेज दिया जाता है।

Mann Ki Baat: 2019 में PM मोदी के पहले रेडियो संदेश की ABCD

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (जनवरी 27, 2019) देशवासियों से ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से बात की। बता दें कि रेडियो पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम की यह 52वीं कड़ी थी, लेकिन 2019 का यह पहला प्रसारण था। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने कर्नाटक के टुमकुर ज़िले के डॉक्टर श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामी जी को श्रद्धांजलि देने से की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कठिन परिश्रम को सर्वोपरि बताया

  • कठिन परिश्रम करते हुए अपना दायित्व निभाते जाना, भगवान शिव के निवास-स्थान, कैलाश धाम में होने के समान है।
  • स्वामी जी ने अपने 111 वर्षों के जीवन काल में हज़ारों लोगों के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक उत्थान के लिए कार्य किया।
  • उनकी ख्याति एक ऐसे विद्वान के रूप में थी, जिनकी अंग्रेज़ी, संस्कृत और कन्नड़ भाषाओं पर अद्भुत पकड़ थी।
  • किसानों का हर तरह से कल्याण हो, ये स्वामी जी के जीवन में प्राथमिकता रहती थी। सिद्धगंगा मठ नियमित रूप से पशु और कृषि मेलों का आयोजन करता था।
  • वर्ष 2007 में, स्वामी जी के शताब्दी वर्ष उत्सव समारोह के अवसर पर हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम टुमकुर गए थे, तब उन्होंने पूज्य स्वामी जी के लिए एक कविता सुनाई थी।

चुनाव आयोग की व्यवस्था पर देश को गर्व होना चाहिए

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने देश के गणतंत्र दिवस को लेकर भी अहम बाते देशवासियों से की। इसके अंतगर्त उन्होंने ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ को केंद्र में रखकर चुनाव आयोग के महत्व पर प्रकाश डाला:

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे देश में चुनाव आयोग एक बहुत ही महत्वपूर्ण संस्था है, जो हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग है।
  • हमारा चुनाव आयोग जिस बखूबी से इसका आयोजन करता है इसे देखकर प्रत्येक देशवासी को चुनाव आयोग पर गर्व होना स्वाभाविक है।
  • हमारे देश में यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो एक पंजीकृत मतदाता है, registered मतदाता है – उसे मतदान करने का अवसर मिले।
  • अपने संबोधन में मतदान के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि अंडमान और निकोबार के द्वीप समूह के दूर-दराज़ के द्वीपों में भी चुनाव की व्यवस्था की जाती है।
  • इसके बाद  उन्होंने कहा कि गुजरात के गिर के जंगल में, एक सुदूर क्षेत्र में, एक पोलिंग बूथ, जो सिर्फ़ केवल 1 मतदाता के लिए है। चुनाव आयोग की इस व्यवस्था पर हमें गर्व है।
  • चुनाव आयोग हमारे लोकतंत्र की ख़ूबसूरती है। आगामी लोकसभा चुनाव में 21वीं सदी के प्रत्येक युवा मतदाताओं से अपने मताधिकार के पालन करने का आहवाहन भी किया।

नेताजी के बलिदान को देश कभी नहीं भुला सकता

कार्यक्रम में आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने देश की धरती को महापुरुषों से सुसज्जित बताया और उनके त्याग, बलिदान और उनके महत्वपूर्ण योगदान को अविस्मरणीय बताया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 23 जनवरी को मनाई गई जन्म जयंती पर उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उनके संघर्ष को कभी नहीं भूल सकता। इसके अलावा उन्होंने उनकी विलक्षण छवि को अपने संबोधन के ज़रिए देश की जनता से साझा किया।   

  • भारत की आज़ादी के संघर्ष में अपना योगदान देने वाले वीरों को समर्पित एक museum  संग्रहालय का उद्घाटन करने के सौभाग्य पर प्रधानमंत्री मोदी ने प्रसन्नता जताई।
  • उन्होंने संग्राहलयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन संग्रहालयों की एक-एक ईंट में, हमारे गौरवशाली इतिहास की खुशबू बसी है, जिसके चप्पे-चप्पे पर हमारे स्वाधीनता संग्राम के वीरों की गाथाओं को बयां करने वाली बातें हैं, जो इतिहास के भीतर जाने के लिए हमें प्रेरित करती हैं।
  • कई इमारतों को सुंदर संग्राहलयों में बदल दिया गया है जो आज़ादी से अब तक बंद पड़ीं थी। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और Indian National Army को समर्पित संग्रहालय; ‘याद-ए-जलियाँ’; और 1857 –Eighteen Fifty Seven, India’s First War of Independence को समर्पित संग्राहलय व पूरे परिसर को ‘क्रान्ति मन्दिर’ के रूप में देश को समर्पित किया गया है।
  • इसके अलावा प्रधानमंत्री ने एक वाक़्या साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि जब वो लाल किले में, क्रान्ति मंदिर में, वहाँ नेताजी से जुड़ी यादों के दर्शन कर रहे थे तब उन्हें नेताजी के परिवार के सदस्यों ने एक बहुत ही ख़ास कैप, टोपी भेंट की, जिसे कभी नेताजी स्वयं पहना करते थे।
  • 30 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने अंडमान और निकोबार में एक कार्यक्रम के दौरान ठीक उसी स्थान पर तिरंगा फहराया, जहाँ नेताजी सुभाष बोस ने 75 साल पहले तिरंगा फहराया था।
  • सुभाष चंद्र बोस ने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। “ दिल्ली चलो’,‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा”, जैसे ओजस्वी नारों से नेताजी ने हर भारतीय के दिल में जगह बनाई।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने बोस के उस अंदाज़ का भी ज़िक्र किया जब उन्होंने 1942 में रेडियो के माध्यम से ही ‘आज़ाद हिंद फौज’ और देश की जनता से संवाद किया था।
  • आजाद हिन्द रेडियो पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सामान्य जन के बीच काफी लोकप्रिय थे और उनके कार्यक्रमों से हमारे स्वाधीनता संग्राम के योद्धाओं को भी बहुत ताक़त मिली।

रवीन्द्रनाथ टैगोर को किया याद 

  • अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गुरुदेव टैगोर एक चित्रकार भी थे। उन्होंने कई पशु-पक्षियों के चित्र बनाए।
  • उनकी एक ख़ास बात थी कि गुरुदेव टैगोर ने अपने अधिकांश कार्यों को कोई नाम ही नहीं दिया। क्योंकि कि उनका मानना था कि उनकी पेंटिंग देखने वाला ख़ुद ही उस पेंटिंग को समझे, पेंटिंग में उनके द्वारा दिए गए संदेश को अपने नज़रिए से जाने।

MyGov.in पर जनता द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दिया

प्रधानमंत्री ने MyGov.in पर किरण सिदर द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कई मुख्य बातें कही:

  • हमारे space programme में देश के असंख्य युवा वैज्ञानिकों का योगदान है। हम इस बात का गर्व करते हैं कि आज हमारे स्टूडेंट्स द्वारा डेवलप किए गए सैटेलाइट्स और साउंडिंग रॉकेट्स अंतरिक्ष तक पहुँच रहे हैं।
  • 24 जनवरी को हमारे विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया ‘कलाम – सेट’ लॉन्च किया गया है। ओडिशा में यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए साउंडिंग रॉकेट्स ने भी कई कीर्तिमान बनाए हैं।
  • देश आज़ाद होने से लेकर 2014 तक जितने स्पेस मिशन हुए हैं, लगभग उतने ही स्पेश मिशन की शुरुआत बीते चार वर्षों में हुई हैं।
  • भारत ने एक ही अंतरिक्ष यान से एक साथ 104 सैटेलाइट्स लॉन्च करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है। और जल्द ही चंद्रायन-2 अभियान के माध्यम से चाँद पर भारत की मौजूदगी दर्ज कराने वाले हैं।

रेडियो पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की जल्द होगी शुरुआत

MyGov.in पर ही अंशुल शर्मा द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब को कार्यक्रम में शामिल करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 29 जनवरी को सवेरे 11 बजे ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के ज़रिए वो देश भर के विद्यार्थियों के साथ बातचीत करेंगे।

  • इस कार्यक्रम की ख़ास बात यह है कि इस बार स्टूडेंट्स के साथ-साथ पैरंट्स और टीचर्स भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले हैं। साथ ही इस बार कई अन्य देशों के स्टूडेंट्स भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
  • ‘परीक्षा पे चर्चा’ में परीक्षाओं से जुड़े सभी पहलुओं, विशेष रूप से स्ट्रेस फ्री एग्ज़ाम यानी तनाव-रहित परीक्षा के संबंध में प्रधानमंत्री स्वयं अपने नौजवान मित्रों से बात करेंगे।
  • सोशल मीडिया और नमो ऐप के माध्यम से देश की जनता इसका लाइव टेलिकास्ट भी देख सकते हैं।

“सबके लिए घर (Housing for all)” योजना पर प्रधानमंत्री मोदी ने कई बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इस योजना के तहत 23 राज्यों के करीब 40 लाख घरों को जिओ-टैग किया गया है। इसके साथ ही मनरेगा के तहत करीब साढ़े तीन करोड़ संपत्तियों को भी जिओ-टैग किया गया।

खेलो इंडिया के तहत युवाओं की भागीदारी पर ज़ोर दिया गया

रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खेलो के महत्व पर भी कई अहम बाते कही गई जिसमें खिलाड़ियों के संघर्ष का भी ज़िक्र किया गया:

  • खेलो इंडिया में कई युवा खिलाड़ी सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी महीने में पुणे में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 18 गेम्स में करीब 6,000 खिलाड़ियों ने भाग लिया।
  • मुक्केबाज़ी में युवा खिलाड़ी आकाश गोरखा और महाराष्ट्र की अंडर-21 महिला कबड्डी टीम की कप्तान सोनाली हेलवी का संघर्ष भी देश की जनता से साझा किया।
  • कर्नाटक से एक किसान की बेटी अक्षता बासवानी कमती ने वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीता। उसने जीत का श्रेय अपने पिता को दिया।
  • खेलो इंडिया की ये कहानियाँ बता रही है कि न्यू इंडिया के निर्माण में सिर्फ बड़े शहरों के लोगों का योगदान नहीं है  बल्कि छोटे शहरों, गाँव, कस्बों से आने वाले युवाओं-बच्चों का भी बहुत बड़ा योगदान है।

‘टॉयलेट चमकाने’ के अनोखे कॉन्टेस्ट पर जानकारी

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने टॉयलेट चमकाने के कॉन्टेस्ट के बारे में भी कुछ बातें कही जिनका सरोकार देश की जनता से सीधे तौर पर है।      

  • पिछले लगभग एक महीने से चल रहे इस अनोखे कॉन्टेस्ट में 50 लाख से अधिक शौचालयों ने हिस्सा ले भी लिया है।
  • इस अनोखे कॉन्टेस्ट का नाम है “स्वच्छ सुन्दर शौचालय”। लोग अपने शौचालय को स्वच्छ रखने के साथ-साथ उसे रंग-रौगन करके, कुछ पेंटिंग्स बना कर सुन्दर भी बना रहे हैं।
  • आपको कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से कामरूप तक की “स्वच्छ सुन्दर शौचालय” की ढ़ेर सारी फोटोज़ सोशल मीडिया पर भी देखने को मिल जाएँगी।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ‘स्वच्छ सुन्दर शौचालय’ की फ़ोटो को #MylzzatGhar के साथ सोशल मीडिया पर ज़रूर शेयर करने की अपील भी की।
  • 5,50,000 से अधिक गांवों ने और 600 ज़िलों ने स्वयं को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया है और ग्रामीण भारत में स्वच्छता कवरेज़ 98% को पार कर गया है।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी को पूज्य बापू की पुण्यतिथि का ज़िक्र किया और कहा कि उस दिन 11 बजे पूरा देश शहीदों को श्रद्धांजलि देता है। इसके अलावा उन्होंने देश की जनता से अपील की कि वो जहाँ कहीं भी हों, दो मिनट शहीदों को ज़रूर श्रद्धांजलि दें। अंत में प्रधानमंत्री ने 2019 की यात्रा को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने की कामना की और अपनी शुभकामनाओं और धन्यवाद के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

‘भारत माता की जय’ की गूंज, देश-विरोधी खालिस्तानी समर्थकों पर पड़ा कंटाप है!

देश जहाँ 26 जनवरी को अपना 70वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा था, वहीं दूसरी तरफ इसी महापर्व को अमेरिका में मना रहे भारतीयों को कुछ खालिस्तानी समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। दरअसल, कुछ भारतीय 26 जनवरी को तिरंगे की परेड निकालकर गणतंत्र दिवस मना रहे थे, तभी खलिस्तानी समर्थकों ने परेड का विरोध किया और परेड को बंद करवाने में जुट गए।

वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर सिख फॉर जस्टिस के करीब 15-20 लोगों ने इस परेड का विरोध किया। लेकिन भारतीय ध्वज लहराते हुए उत्साही भारतीयों के आगे वो बिल्कुल भी टिक नहीं पाए। रिपोर्ट की मानें तो खालिस्तानी समर्थक समूह ने योजना बनाई थी कि विरोध के दौरान वे भारतीय झंडे को जलाएँगे। बताया जा रहा है कि ज्यादातर प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी थे।

तिरंगे को जलाने की दी गई धमकी

भारतीयों से परेड रोकने को कहते हुए खालिस्तान समर्थकों ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर वॉशिंगटन में तिरंगा लहराया गया तो वह उसे जला देंगे।” समर्थकों ने कहा कि वह किसी भी हालत में यहां गणतंत्र दिवस कार्यक्रम नहीं होने देंगे।

भारतीय तिरंगा लेकर जब सड़कों पर उतरकर परेड कर रहे थे, तभी खालिस्तान समर्थकों ने उनका विरोध करते हुए परेड को बीच में ही रोक दिया। लेकिन सच्चे भारतीयों के सामने आखिर में खालिस्तान समर्थकों को हार माननी पड़ी। तमाम विरोध की बाद स्थानीय भारतीय आगे बढ़ते रहे और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते रहे।

झंडे को जलाने की बात का किया दावा

इस पूरे प्रकरण के बाद सिख फॉर जस्टिस ग्रुप की वेबसाइट ने दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने अमेरिका में भारतीय दूतावास के सामने भारतीय झंडा जलाते हुए अपना विरोध व्यक्त किया है। लेकिन अगर वहाँ की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सिख फॉर जस्टिस ग्रुप का यह दावा पूरी तरह से झूठा है। उनका विरोध बिल्कुल ही सफल नहीं हो पाया।

देश-विरोधी ताकतों को शायद यह अंदाज़ा न होगा कि जितनी नफ़रत उनके दिलों में हिन्दुस्तान को लेकर है, उससे कहीं ज्यादा प्यार हम भारतीय अपनी भारत माँ से करते हैं। बुराई न पहले कभी जीती है, न आगे कभी जीत पाएगी।

पद्म पुरस्कार: गुमनाम लेकिन महान लोगों के नाम से… अवॉर्ड ख़ुद हुआ सम्मानित!

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। सरकार ने इन पुरस्कारों के तहत 4 हस्तियों को पद्म विभूषण, 14 को पद्म भूषण जबकि 94 लोगों को पद्मश्री पुरस्कारों के लिए चयनित किया है। इस साल पद्म पुरस्कारों के घोषणा की सबसे अच्छी बात यह है कि देश भर के जिन लोगों को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया, उनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो गुमनाम हैं।

इस साल पद्म पुरस्कार के लिए चुने गए ज्यादातर लोग मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे। सरकार ने देश के इन महान लोगों को पद्म पुरस्कार देकर एक तरह से उनके जज्बे को सलाम किया है। आइए ऐसे ही कुछ महान लोगों के बारे में जानते हैं –

जमुना टुडू झारखंड की ‘लेडी टार्जन’

जमुना टुडू जमशेदपुर के चाकुलिया की रहने वाली हैं। जमुना को जंगल माफ़ियाओं से लड़कर अपना जंगल बचान के लिए 2013 में ‘फिलिप्स ब्रेवरी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। जमुना टुडू अपने क्षेत्र के जंगलों की हिफ़ाज़त के लिए अपने साथियों के साथ सुबह ही कुल्हाड़ी हाथ में लिए निकल जाती हैं, इसके बाद शाम को ही वापस घर लौटती हैं।

इस बीच यदि कोई माफ़िया जंगल में लकड़ी काटने के लिए आता है तो उसको टार्जन लेडी की चुनौती का सामना करना पड़ता है। कई बार जमुना माफ़ियाओं से लड़ते हुए ज़ख़्मी होकर घर लौटी हैं। यही वजह है कि सरकार ने जमुना के हिम्मत और हौसले को देखते हुए उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

लिस्ट में हजारीबाग के बुलु इमाम का भी नाम

देश भर के चुनिंदा लोगों को दिए जाने वाले इस राष्ट्रीय पुरस्कार की लिस्ट में हजारीबाग के बुलु इमाम का भी नाम है। 76 साल के बुलु ने सोहराय व कोहबर कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम किया है। बुलु देश-विदेश में 50 से अधिक प्रदर्शनी लगा चुके हैं। बुलु इमाम को इससे पहले गाँधी शांति पुरस्कार भी दिया चुका है।

मुज़फ्फरपुर वाली किसान चाची

मुज़फ्फरपुर के राजकुमारी देवी की शादी महज़ 13 साल में हो गई। बचपन से अपने ही परिवार की बंदिशों में पलने-बढ़ने और शादी के बाद ससुराल में दहलीज़ से बाहर पैर रखना भी उनके लिए गुनाह माना जाता था। लेकिन परिवार की माली हालत ने राजकुमारी को घर से निकलने के लिए मजबूर कर दिया है। घर और बाहर के लोगों की ताना सुनना राजकुमारी के लिए आम हो गया था। इन सबके बावजूद अपने मज़बूत इरादे की ताक़त पर राजकुमारी घर में अचार व मोरब्बा तैयार करती थीं और साइकिल से तैयार माल को बाजार में ले जाकर बेचती थीं। आज वही राजकुमारी गाँव की दर्जनों महिलाओं को रोज़गार दे रही हैं। वर्तमान समय में राजकुमारी देवी 16 तरह के प्रोडक्ट को तैयार करती हैं। सरकार ने राजकुमारी देवी के हिम्मत व हौसला के लिए इस पुरस्कार में उनका भी नाम जोड़ दिया है।

ओमेश कुमार भारती भी लिस्ट में

पेशे से डॉक्टर ओमेश पिछले 17 सालों से एंटी रैबीज़ वैक्सीन पर काम कर रहे थे। कुत्तों के काटने पर लोगों के इलाज को सस्ता बनाने के लिए डॉ भारती इस प्रयास में लगे हुए थे। डॉ भारती के इस रिसर्च के महत्व को समझते हुए ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ ने 2018 में उनके शोध को मान्यता दे दी। कभी 35,000 रुपए में रैबीज़ का इलाज डॉ भारती के शोध के बाद महज़ 350 रुपए में संभव हो पाया है। भारत सरकार ने डॉ भारती के रिसर्च के महत्व को समझते हुए उन्हें पद्म पुरस्कार की लिस्ट में शामिल किया है।

‘प्रियंका गाँधी को मानसिक बीमारी, हिंसक होकर लोगों को पीटती है’

बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस की नेता प्रियंका गाँधी की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “उसको एक बीमारी है, जो सार्वजनिक जीवन में अनुकूल और उपयुक्त नहीं है। उसको ‘बाइपोलैरिटी’ कहते हैं। यानी उसकी हिंसावादी चरित्र दिखाई पड़ती है, लोगों को पीटती है। पब्लिक को पता होना चाहिए कि कब संतुलन खो बैठेगी, किसी को पता नहीं।”

बात दें कि बीते दिनों प्रियंका गाँधी को आगामी 2019 के आम चुनाव में कॉन्ग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश पूर्व का प्रभारी बनाया गया है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि प्रियंका 4 फरवरी को कुंभ मेले में गंगा में डुबकी लगाने के बाद अपने राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत कर सकती हैं।

₹5,650 करोड़ से चीन पर नज़र: हिंद महासागर में ड्रैगन को घेरने की तैयारी

हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में अपने सैन्य बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले 10 वर्षों के लिए ₹5,650 करोड़ लागत की योजना को अंतरिम रूप दे दिया है। इसके ज़रिए अब अतिरिक्त युद्धपोत, विमान, ड्रोन, मिसाइल बैट्री और पैदल सैनिकों की तैनाती की राह सुलभ हो जाएगी। बता दें कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते क़दमों को रोकने के लिए इस योजना को अमल में लाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना पर रक्षा मंत्रालय में बड़े स्तर पर चर्चा की गई थी। आपको बता दें कि अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) हमारे देश की एकमात्र कमांड है, जिसके दायरे में ऑपरेशनल कमांडर के अंतर्गत आर्मी, नौसेना, भारतीय वायु सेना और तटरक्षक बल आते हैं।

जानकारी के मुताबिक़, इस योजना की समीक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता वाली डिफेंस प्लानिंग कमिटी ने भी की थी, जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल हुए थे। इसके अलावा 2027 तक भारतीय सेना की शक्ति में इज़ाफ़े के लिए एक व्यापक योजना पर भी काम चल जा रहा है।

सेना की शक्ति में इज़ाफ़े के लिए इस योजना के तहत क़रीब ₹5,370 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। फ़िलहाल, 108 माउंटेन ब्रिगेड का विकास करने के साथ नई वायु रक्षा प्रणाली, सिग्नल्स, इंजीनियर, आपूर्ति और अन्य ईकाइयों के अलावा वहाँ पहले से मौजूद तीन बटालियन (दो पैदल सेना और एक प्रादेशिक सेना) को जोड़ने के लिए एक नई पैदल बटालियन भी शामिल की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के 572-द्वीप समूह के दौरे से संकेत मिलता है कि कुछ योजनाएँ पिछले 30 दिनों के पहले से ही चल रही थीं। उदाहरण के लिए, पोर्ट ब्लेयर और कार निकोबार में दो मौजूदा प्रमुख हवाई अड्डों के अलावा, शिबपुर में नौसेना के हवाई स्टेशनों पर रनवे (गुरुवार को नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा द्वारा आईएनएस कोहासा के नेतृत्व में) पहले से चालू थे।

उत्तर में कैम्पबेल बे (INS बाज़), दक्षिण में बड़े विमानों द्वारा परिचालन में मदद करने के लिए 10,000 फ़ीट तक बढ़ाया जाएगा। 10 साल के बुनियादी ढाँचे के विकास के तहत कामोर्टा द्वीप पर 10,000 फ़ुट का एक और रनवे भी बनाया जाएगा। बता दें कि भारत ने सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू जेट, लंबी दूरी तक समुद्री गश्त के लिए पोसिडोन-8I विमान और हेरॉन-2 निग़रानी जैसे ड्रोन द्वीपसमूह में पहले से ही तैनात किए हुए हैं।

इसके अलावा डॉर्नियर-228 गश्ती विमान और MI-17V5 हेलीकॉप्टर भी जल्द ही ANC पर तैनात किए जाएँगे। हालाँकि 2001 में इसे स्थापित किए जाने के बाद ANC को लगातार सेना, नौसेना और वायु सेना और आंतरिक राजनीतिक-नौकरशाही की बेरुख़ी के अलावा फंड की कमी और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंज़ूरी की कमी की वजह से बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

इस प्रकार, एक मज़बूत ANC, जो संपूर्ण सैन्य बल और बुनियादी ढाँचे से लैस हो, प्रभावी रूप से इंडियन ओसियन रिजन (IOR) में चीन की कूटनीतिक चाल का मुक़ाबला करने के लिए एक अहम रोल अदा कर सकता है। भारत की ओर से चीन के क्षेत्र में नौसेना का विस्तार, जिसमें परमाणु पनडुब्बी भी शामिल हैं, को समय के साथ-साथ और भी बढ़ाया जाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत को इस क्षेत्र में नज़र बनाए रखने के लिए और ज़रुरी होने पर हस्तक्षेप करने के लिए ANC में अपनी सैन्य चौकियों को गंभीरता से लेना होगा।

‘नारी शक्ति’: साल 2018 का हिन्दी शब्द, ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल

26 जनवरी को जब राजपथ पर ‘नारी शक्ति’ का प्रदर्शन हो रहा था, उसी वक़्त जयपुर में भी इस पर चर्चा चल रही थी। चर्चा इसलिए क्योंकि साहित्य महोत्सव में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को साल 2018 का हिन्दी शब्द चुनना था। और पैनल ने आख़िरकार ‘नारी शक्ति’ शब्द पर मुहर लगा दी।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ़, जयपुर साहित्य उत्सव) में ऑक्सफोर्ड ने अपने बयान में कहा, “मार्च 2018 में अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर भारत सरकार द्वारा जब नारी शक्ति पुरस्कार के तहत महिलाओं की असाधारण उपलब्धियों को पहचाना और सराहा गया, तब से इस शब्द के प्रयोग में जबरदस्त उछाल आया है।” साथ ही ट्रिपल तलाक, सबरीमाला मंदिर विवाद, MeToo आंदोलन जैसे महिला सशक्तीकरण के मुद्दे भी इस शब्द को चुनने का आधार बने।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में ‘हिंदी वर्ड ऑफ दि ईयर’ का दर्जा ऐसे शब्द को दिया जाता है, जो पूरे साल काफी ध्यान आकर्षित करता है। इसके साथ ही लोकाचार, भाव और चिंता को भी प्रतिबिंबित करता हो। ऑक्सफोर्ड के अनुसार ‘नारी शक्ति’ शब्द संस्कृत से लिया गया है और इन दिनों अपने हिसाब से जीवन जी रहीं महिलाओं के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि “आधार” को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने साल 2017 का हिन्दी शब्द चुना था।

राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक भारत का न्यूक्लियर ट्रायड

न्यूक्लियर अस्त्र दो प्रकार के होते हैं- स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन (SNW) और टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन (TNW)। स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन किसी नगर की बड़ी जनसंख्या पर आक्रमण करने के लिए होते हैं। विश्व इतिहास में SNW का प्रयोग प्रथम और अंतिम बार अमेरिका ने जापान के विरुद्ध 1945 में किया था। जापान पर अमेरिका के परमाणु हमले के बाद से ही अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में निशस्त्रीकरण की बहस चालू हुई। कहा गया कि ग़ैर ज़िम्मेदार (अमेरिकी बुद्धिजीवियों की शब्दावली में गरीब) देश परमाणु अस्त्र बनाने की क्षमता विकसित न करें और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमीर देश अपने नाभिकीय हथियारों का ज़खीरा नष्ट करें।

चिर प्रतिद्वंद्वी अमेरिका और रूस ने अपने कितने SNW नष्ट किये इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है अलबत्ता इन देशों की आपसी खींचतान ने सामरिक जगत में एक नए प्रकार के अस्त्र को जन्म दिया। इसे टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन (TNW) कहा गया। इन अस्त्रों को विकसित करने के पीछे तर्क यह दिया गया कि चूँकि SNW से होने वाला विनाश बड़ा होता है इसलिए कम तीव्रता वाले छोटे TNW बनाए जाएँ जिनका प्रयोग युद्धकाल में जनता पर नहीं बल्कि शत्रु देश की सेना पर किया जाए। शीत युद्ध के समय इस प्रकार के हथियार अमेरिका और रूस द्वारा बड़ी मात्रा में विकसित किए गए और कहा जाता है कि शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात उन्हें नष्ट भी कर दिया गया।

अमेरिका और रूस ने भले ही अपने TNW नष्ट कर दिए हैं किंतु उनसे प्रेरणा लेते हुए पाकिस्तान ने ढेर सारे TNW विकसित किए गए हैं। किसी देश के द्वारा टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन विकसित करना यह दिखाता है कि वह युद्ध में परमाणु हथियार का प्रयोग पहले करने को आतुर है। भारत की 1998 में घोषित न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन में कहा गया कि हम युद्धकाल में न्यूक्लियर वेपन का प्रयोग पहले नहीं करेंगे। जब हम पर न्यूक्लियर हथियार से हमला किया जाएगा तब हम उसका मुँहतोड़ जवाब देंगे। पहले हमला न करने की नीति के चलते ही हमने टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन विकसित नहीं किए।

भारत ने पहले हमला न करने की नीति के साथ ही यह भी घोषणा की कि हम नाभिकीय अस्त्रों के प्रयोग में ‘credible minimum deterrence’ का पालन करेंगे। अर्थात हम पर इस बात के लिए विश्वास किया जा सकता है कि हम परमाणु हथियार का प्रयोग करना नहीं चाहते इसीलिए परमाणु हथियार विकसित करने की अपनी क्षमता में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ताकि कोई और देश हम पर परमाणु हमला करने से पहले सौ बार सोचे। इसी नीति पर चलते हुए भारत ने टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन ले जाने लायक डिलीवरी सिस्टम विकसित किए लेकिन TNW नहीं बनाए।

‘डेटरेन्स’ या निवारक का अर्थ यह हुआ कि हमने शत्रु देश को हम पर हमला करने से पूर्व ही अपने परमाणु अस्त्र की शक्ति दिखा कर रोक दिया। इसे सुनिश्चित करने के लिए हमने स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन और इन्हें ले जाने लायक डिलीवरी सिस्टम विकसित किए। किसी भी देश की सशस्त्र सेना के तीन मुख्य अंग होते हैं: जल, थल और नभ। इन तीन माध्यमों से नाभिकीय अस्त्र प्रक्षेपित करने की क्षमता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हर स्थाई सदस्य देश ने विकसित की है। “जल थल और नभ से परमाणु हथियार दागने की क्षमता को हम न्यूक्लियर ट्रायड विकसित कर लेने की संज्ञा देते हैं।”

भारत ने भी 1983 में प्रारंभ किए गए Integrated Guided Missile Development Program के अंतर्गत 26 दिसंबर 2016 को अग्नि-5 मिसाइल का पाँचवी बार सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। अग्नि-5 पाँच हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक न्यूक्लियर वेपन ले जा सकने वाली Intermediate Range Ballistic Missile है। जनवरी 2017 में हमने कम दूरी की IRBM अग्नि-4 का भी परीक्षण किया था। यह धरातल से धरातल पर मार करने वाली मिसाइलें हैं। अग्नि की क्षमता IRBM से आगे बढ़कर एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक मार करने वाली ICBM तक की है।

भारत ने अग्नि के विकास में Multiple Independently targetable Re-entry Vehicle तकनीक तक की महारत हासिल कर ली है। MIRV का अर्थ यह है कि एक बार लॉन्च होने पर मिसाइल कई अलग लक्ष्यों को एक साथ भेद कर समूल नष्ट कर सकती है। पूर्व डीआरडीओ अध्यक्ष वी के सारस्वत के अनुसार अग्नि शृंखला की मिसाइलें भविष्य में एंटी सैटेलाइट हथियार के रूप में भी विकसित की जा रही हैं। अग्नि के अतिरिक्त भारत के पास कम और मध्यम दूरी की पृथ्वी, धनुष और निर्भय सब सोनिक क्रूज़ मिसाइलें भी हैं। धनुष युद्धपोत से धरातल पर 350 किमी तक मार कर सकती है। प्रहार मिसाइल 150 किमी तक की टैक्टिकल रेंज में स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन ले जा सकने में सक्षम है।

चूँकि भारत ने पहले न्यूक्लियर वेपन प्रयोग न करने की नीति अपनाई है इसलिए हमने अपने मिसाइल लॉन्चर को Launch on Warning अथवा Launch through Attack क्षमता पर नहीं रखा है। एलर्ट का स्तर इंटेलिजेंस से प्राप्त सूचनाओं पर निर्भर होता है। हमें पाकिस्तान या उससे दूर के लक्ष्य (600-2000 किमी तक) को भेदने के लिए 8 से 13 मिनट का समय लगेगा।

वायुसेना की बात करें तो भारतीय वायुसेना के पास न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम जगुआर, मिराज-2000 और सुखोई-30 MKI युद्धक विमान हैं। फ्रांस से हाल ही में खरीदे गए राफेल विमान भी परमाणु बम गिराने में सक्षम हैं।

भारतीय नौसेना ने समुद्र से परमाणु अस्त्र प्रक्षेपित करने वाली सबमरीन का निर्माण भी किया है। नवंबर 5, 2018 को भारत की प्रथम स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिहंत ने समुद्र में गश्त लगाई थी। इसे Ship Submersible Ballistic Nuclear (SSBN) सबमरीन कहा जाता है। जल के भीतर होने से अरिहंत शत्रु की नज़र से लगभग ओझल ही रहेगी जिसके कारण भारतीय नौसेना को रणनीतिक लाभ होगा। अरिहंत 6000 टन की 367 फिट लंबी पनडुब्बी है जो K-15 बैलिस्टिक मिसाइल से लैस की जा सकती है। इस मिसाइल की रेंज 750 किमी तक मार करने की है। K शृंखला की इन मिसाइलों का नाम K से प्रारंभ होता है जो डॉ अब्दुल कलाम के नाम का द्योतक है। हालाँकि अभी यह रेंज कम है लेकिन डीआरडीओ Submarine Launched Ballistic Missile (SLBM) विकसित करने और इसे अरिहंत पर तैनात करने की ओर अग्रसर है जिसकी रेंज 5000 किमी तक बढ़ाई जा सकती है। भारत अब MTCR का सदस्य भी बन चुका है इसलिए रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइलों की तकनीक दूसरे देश को देने और अत्याधुनिक हथियारों की तकनीक किसी से लेने में भी अब कोई अड़चन नहीं आएगी।

CBI और ED का जालः मेहुल चोकसी को वेस्ट इंडीज से लाने के लिए जहाज तैयार!

पंजाब नैशनल बैंक में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाले भगोड़े आर्थिक अपराधी मेहुल चोकसी की देश वापसी के लिए सीबीआई और ईडी के अधिकारी वेस्टइंडीज जा सकते हैं। रिपोर्ट की मानें तो इस मिशन को पूरा करने के लिए एयर इंडिया के एक लॉन्ग-रेंज बोईंग विमान की मदद ली जा रही है। मेहुल चोकसी और जतिन मेहता जैसे भगोड़े आर्थिक अपराधी कैरेबियाई देशों की पेड नागरिकता का फायदा लेकर वहाँ के नागरिक बन गए हैं।

मेहता के पास सेंट किट्स ऐंड नेविस की नागरिकता है, जबकि चोकसी ने हाल ही में एंटीगुआ ऐंड बारबुडा की नागरिकता ली है। बता दें कि ये द्वीप 132 देशों में वीजा फ्री यात्रा की सुविधा प्रदान करते हैं। यहाँ भारत के आर्थिक अपराधियों द्वारा पैसे देकर नागरिकता लेने का चलन काफी पुराना है।

कैरेबियाई देश से उठाया जा सकता है चोकसी को

रिपोर्ट की मानें तो इन दोनों भगोड़े अपराधियों के किसी निश्चित ठिकाने का पता नहीं चल पाया है लेकिन चोकसी को कैरेबियाई देश जबकि नीरव मोदी को यूरोप से उठाया जा सकता है। इन द्वीपों के साथ भारत का प्रत्यर्पण समझौता नहीं है, जिसके चलते ये देश भगोड़े आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगार बन गया है। बता दें कि चोकसी पीएनबी में 13,700 करोड़ रुपए के घोटाले में आरोपित है।

चोकसी ने अपनी भारतीय कंपनियों – ‘गीतांजलि जेम्स’, ‘गिल इंडिया’ और ‘नक्षत्र’ के बढ़े हुए आयात संबंधी दस्तावेज़ प्रस्तुत करके पीएनबी बैंक को धोखा दिया है। जबकि विनसम डायमंड कंपनी के मालिक जतिन मेहता पर 3,969 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड करने का आरोप है।

आसानी से मिल जाती है पेड नागरिकता

डोमिनिसिया और सेंट लुसिया में महज 1 लाख डॉलर में ही नागरिकता और पासपोर्ट दे दिया जाता है। जबकि अगर पत्नी की भी नागरिकता चाहिए हो तो इसके लिए 1.65 लाख डॉलर का भुगतान करना होता है। वहीं, ग्रेनाडा इसी तरह का पासपोर्ट दो लाख डॉलर में देता है।