Home Blog Page 870

‘डिलीट करो वीडियो’: सुनीता केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, पति का भाषण दिखाने के लिए रिकॉर्ड कर वायरल कर दी थी कोर्ट की कार्यवाही

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में फ़िलहाल जेल में बंद हैं। लोकसभा चुनाव प्रचार 2024 के लिए उन्हें जमानत मिली थी, लेकिन फिर उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा। अब उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया से एक वीडियो हटाने के लिए कहा है। असल में सुनवाई के दौरान जब अरविंद केजरीवाल खुद अदालत को संबोधित कर के अपना पक्ष रख रहे थे, तब का वीडियो सुनीता ने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया था।

अरविंद केजरीवाल को ED ने गिरफ्तार किया था। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने शनिवार (15 जून, 2024) को ये आदेश दिया। कोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर दाखिल की गई PIL पर सुनवाई करते हुए उन्होंने ये आदेश दिया। अधिवक्ता वैभव सिंह ने सुनीता केजरीवाल के अलावा अन्य AAP नेताओं व समर्थकों के खिलाफ भी जनहित याचिका दायर की थी, जिन्होंने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाया था।

इन सभी को अब ये वीडियो हटाना होगा। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 जुलाई, 2024 को होगी। कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को रिकॉर्ड और शेयर करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की भी माँग की गई है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद ट्रायल कोर्ट की जज को खतरा है। कोर्ट की कार्यवाही का ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने को याचिकाकर्ता ने साजिश करार दिया। साथ ही उन पर अदालत की अवमानना के 1971 वाले कानून के तहत सज़ा देने की माँग भी की गई है।

X, इंस्टाग्राम और फेसबुक को भी दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि इस तरह के कंटेंट वो खुद से ही हटाएँ। ये वीडियो 28 मार्च का है, जब केजरीवाल ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अपनी दलीलें खुद पेश की थीं। उस वीडियो में दिल्ली सीएम ने ED को भाजपा का वसूली वाला रैकेट बताया था। 2021 में हाईकोर्ट दिल्ली द्वारा बनाए गए नियमों के हिसाब से ऐसे वीडियो को प्रसारित करना अपराध है। याचिका में कहा गया था कि इससे पहले या बाद की सुनवाइयों में केजरीवाल ने खुद दलील नहीं पेश की, ऐसे में ये साजिश है।

महबूबा-महुआ को दिखा फासीवाद, आरफा ने बताया बहादुर: अरुंधति रॉय पर UAPA वाली कार्रवाई से कॉन्ग्रेस भी भड़की, देश को करना चाहती थी खंडित

दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने कश्मीर को भारत से अलग बताने वाली लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और कथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी जैसे लोग अरुंधती रॉय के पक्ष में खड़े हो गए हैं।

महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा, “अरुंधति रॉय विश्व प्रसिद्ध लेखिका और एक बहादुर महिला हैं, जो फासीवाद के खिलाफ एक शक्तिशाली आवाज के रूप में उभरी हैं। उन पर कठोर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारत सरकार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अपनी क्रूरता जारी रखे हुए है। कश्मीर के एक पूर्व लॉ प्रोफेसर पर मामला दर्ज करना भी हताशा का काम है।”

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में लिखा, “अगर अरुंधति रॉय पर UAPA के तहत मुकदमा चलाकर बीजेपी यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वे वापस आ गए हैं तो ऐसा नहीं है। वे कभी भी उस तरह वापस नहीं आएँगे जैसे वे पहले थे। इस तरह के फासीवाद के खिलाफ भारतीयों ने वोट दिया है।”

कॉन्ग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने एक्स पर लिखा, “मैं अरुंधति रॉय पर मुकदमा चलाने के लिए एलजी की मंजूरी की कड़ी निंदा करता हूँ। वह एक शानदार, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध लेखिका और एक अग्रणी बुद्धिजीवी हैं। बुद्धिजीवियों, कलाकारों, लेखकों, कवियों और कार्यकर्ताओं की असहमति को कुचलने पर फासीवाद पनपता है। बीजेपी असहमति जताने वालों को विचलित करने और अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए प्रतिदिन उनके लिए संकट पैदा करती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर यह हमला अस्वीकार्य है।”

वहीं, इस्लामी कट्टरपंथ पर चुप्पी साधने वाली कथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने भी अरुंधती रॉय का पक्ष लिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हमारी सबसे बेहतरीन सोच रखने वाली, हमारी सबसे बहादुर आवाज़ों में से एक, अरुंधति रॉय के साथ एकजुटता में! फासीवादी सबसे बुरे एवं कायर हैं।”

दरअसल, अरुंधती रॉय पर UAPA को मामला लगाया गया है, वह मामला साल 2010 से जुड़ा है। अरुधंति रॉय और डॉक्टर शेख शौकत हुसैन ने 21 अक्‍टूबर 2010 को एलटीजी ऑडिटोरियम, कॉपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली में ‘आजादी– द ओनली वे’ के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में उत्तेजक भाषण दिए थे।

सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा की गई और बात कही गई, उनमें ‘कश्मीर को भारत से अलग करने’ का प्रचार किया गया था। सम्मेलन में भाषण देने वालों में सैयद अली शाह गिलानी, एसएआर गिलानी (सम्मेलन के एंकर और संसद हमले मामले के मुख्य आरोपित), अरुंधति रॉय, डॉ. शेख शौकत हुसैन और अर्बन नक्सल वरवरा राव शामिल थे।

आरोप है कि गिलानी और अरुंधति रॉय ने इस बात का मजबूती से प्रचार क‍िया था क‍ि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं रहा और उस पर भारत के सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा क‍िया है। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत से आजादी द‍िलाने का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। इस सम्‍मेलन की शिकायतकर्ता की ओर से र‍िकॉर्ड‍िंग की गई थी, जोक‍ि उपलब्‍ध करवायी गई।

इस मामले की श‍िकायत कश्मीरी कार्यकर्ता सुशील पंड‍ित की ओर से कोर्ट में 28 अक्‍टूबर 2010 को गई थी। इसके बाद कोर्ट ने 27 नवंबर 2010 को एफआईआर दर्ज करने के न‍िर्देश द‍िए थे। श‍िकायत के एक माह बाद 29 नवंबर 2010 को सुशील पंडित की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था।

अपने ही गढ़ में ढेर हुए 8 नक्सली, छत्तीसगढ़ में वामपंथी आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 1 जवान बलिदान, ऑपरेशन जारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के सफाए का सबसे बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज में स्थित अबूझमाड़ के जंगलों में 4 दिनों से जारी ऑपरेशन में अब तक 8 नक्सली ढेर हो चुके हैं। इस ऑपरेशन में नारायनपुर जिले के अबूझमाड़ में जारी नक्सलियों के सफाए के अभियान में नारायणपुर, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी 53वीं वाहिनी के लगभग 900 से ज्यादा जवान शामिल हैं। इस बीच, नक्सलियों से मुठभेड़ में 1 जवान की वीरगति की भी सूचना मिल रही है, तो 2 सुरक्षाकर्मी घायल भी हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबूझमाड़ के कुतुल, फरसबेड़ा, कोड़तामडता इलाके में संयुक्त नक्सल विरोधी अभियान के तहत पिछले 2 दिनों से पुलिस और नक्सलियों के बीच रूक-रूक कर मुठभेड़ हो रही है। बीते 4 दिनों से फोर्स अबूझमाड़ के घनघोर जंगलों में सर्चिंग ऑपरेशन चला रही है।

नारायणपुर के एसपी प्रभात कुमार ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अबूझमाड़ में चल रहे एनकाउंटर में चार जिले की पुलिस शामिल है, जो नक्सलवाद का सफाया करने के प्रयास में जॉइंट ऑपरेशन चला रही है। नारायणपुर-कोण्डागांव-कांकेर-दन्तेवाड़ा की डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी 53वीं वाहिनी का बल इस मुठभेड़ में शामिल है। इस ऑपरेशन में अब तक 8 नक्सली ढेर हो चुके हैं, तो 1 जवान के भी वीरगति प्राप्त करने की सूचना मिल रही है। वहीं, 2 घायल भी हो गए हैं।

इससे पहले 7 जूनन 2024 को भी छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा के सीमावर्ती इलाके में नक्सलियों और डीआरजी के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 7 नक्सली ढेर हुए थे। यह नक्सल विरोधी अभियान सुरक्षाबलों ने उस वक्त शुरू किया था जब नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले की सीमा पर स्थित मुंगेडी और गोबेल क्षेत्र में एक गाँव में कई नक्सलियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी।

मुस्लिम बहुल गाँव में रामनवमी की शोभायात्रा पर 40 साल से प्रतिबंध: हिंदू कार्यकर्ता ने निकाली यात्रा तो झारखंड पुलिस ने किया गिरफ्तार, परिजन बोले- जय श्रीराम कहना गुनाह है?

झारखंड पुलिस ने शुक्रवार (14 जून 2024) को हजारीबाग जिले के हिन्दू कार्यकर्ता अमन कुमार उर्फ अमन बाबा को गिरफ्तार कर लिया। अमन पर 12 अप्रैल 2024 को रामनवमी की शोभा यात्रा निकालने का आरोप है। 40 वर्षों से बड़कागाँव-महुदी में कभी भी रामनवमी की शोभा यात्रा नहीं निकली थी, लेकिन इस साल अमन ने यह यात्रा निकाली थी। इसके कारण कॉन्ग्रेस-जेएमएम सरकार की पुलिस ने अमन सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

अमन की गिरफ्तारी के बाद उनकी माँ ने बताया कि रास्ते को लेकर हो रहे विवाद के चलते पिछले 40 वर्षों से बड़कागाँव में रामनवमी का जुलूस नहीं निकल पा रहा था। अमन को सनातन धर्म के लिए समर्पित बताते हुए उनकी माँ का दावा है कि उनके बेटे ने एक रथ बनाकर उसे अपने हाथों से हजारीबाग से राँची तक खींचा था। उनकी माँ का कहना है कि अमन की लोकप्रियता सरकार और कुछ नेताओं को नहीं पच रही थी।

अमन की माँ पूनम देवी का आरोप है कि अमन के प्रयासों से मिली प्रसिद्धि से बड़कागांव विधायक सहित कुछ अन्य लोगों को जलन हुई। बाद में अंचल अधिकारी बालेश्वर राम के कहने पर दर्जनों लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया गया, जिसमें अमन भी शामिल हैं। अमन इस से पहले भी बड़कागांव क्षेत्र में हिंदुत्व के मुद्दे उठाते रहे हैं। पूनम देवी ने पुलिस से उम्मीद जताई है कि जो तेजी उन्होंने उनके बेटे को पकड़ने में दिखाई वैसी ही कार्रवाई अवैध बालू खनन, भूमि घोटाले, आतंकियों और अपराधियों को पकड़ने में भी दिखाई जाए।

पूनम कुमारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमन की पत्नी डिम्पल मिश्रा, भाई ईशु कुमार और पिता सुबोध भी मौजूद थे। लोकसभा चुनावों को देखते हुए अमन की गिरफ्तारी टाल दी गई थी। अमन की माँ ने कहा कि झारखंड में लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को भी ठीक से नहीं पूरा कर पा रहे हैं। पूनम ने कहा, “क्या भारत में जय श्रीराम का नारा लगाना भी अपराध की श्रेणी में आता है? यह साफ़ है कि राज्य सरकार को अमन कुमार से खतरा था, क्योंकि वह लगातार हिंदुत्व के लिए काम कर रहा था। उसने चुनावों के दौरान हजारीबाग, चतरा, दुमका, गोड्डा, राँची लोकसभा और कई अन्य जगहों पर भाजपा का प्रचार किया, जिससे प्रदेश का प्रशासन डर गया।”

पूनम का दावा है कि JMM सरकार को डर सता रहा था कि कहीं आगामी विधानसभा चुनावों में अमन कुमार कोई उलटफेर न करवा दे। उन्होंने झारखंड सरकार को सलाह दी कि वो चतरा के बिरहोर परिवार के दो सदस्यों की कट्टरपंथियों द्वारा की गई निर्मम हत्या पर कार्रवाई करे। इसी के साथ पूनम ने हजारीबाग में माहेश्वरी परिवार की हत्या, सुजीत देव की हत्या और विश्वकर्मा परिवार के सदस्यों की मौत के मामलों में झारखंड पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की भी जानकारी माँगी।

रामनवमी का जुलूस रोकने के लिए पुलिस ने लगाए थे बैरिकेड

बताते चलें कि अप्रैल 2024 में निकली जिस शोभा यात्रा को निकालने के आरोप में अमन को गिरफ्तार किया गया है, उसे रोकने के लिए प्रशासन ने तमाम तैयारियाँ की थीं। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेड लगा कर पुलिस बल तैनात कर दिया था। इस दौरान पुलिस और श्रद्धालुओं में झड़प हुई थी। वाहनों में तोड़फोड़ के साथ पत्थरबाजी की गई थी, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे। पराली में आगजनी हुई थी, जिसे बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा था। इस हिंसा के चलते महुदी गाँव को छावनी में तब्दील कर दिए गया था।

तब अनुमंडल पुलिस अधिकारी कुलदीप कुमार ने दावा किया था कि किसी प्रकार का जुलूस नहीं निकला था। उन्होंने बताया था कि कुछ लोगों ने पूजा करने के बहाने विवादित मार्ग प्रयोग करने का प्रयास किया था। बताया जा रहा है कि जुलूस उसी प्रतिबंधित मार्ग से निकला था, लेकिन वापसी के दौरान पुलिस ने नाकेबंदी कर दी थी। इस नाकेबंदी को देख कर श्रद्धालु भड़क गए थे। इसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिस से हालत और खराब हो गए थे। गुस्साए लोगों ने पत्थर फेंक कर कुछ झोपड़ियों में आगजनी कर दी थी।

1985 से नहीं निकलता जुलूस

गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल बड़कागाँव महुदी में साल 1985 से ही हिन्दुओं की शोभा यात्रा नहीं निकलती। तब यह आदेश स्थानीय प्रशासन ने जारी किया था, जिसे अब तक लागू किया जाता है। अक्सर हिन्दू कार्यकर्ता इस प्रतिबंध को तोड़ने का प्रयास करते हैं। साल 2017 में भाजपा नेता यशवंत सिन्हा अपने लगभग 100 समर्थकों के साथ इस रास्ते से नवरात्रि की शोभा यात्रा निकालना चाहते थे। तब पुलिस ने उन्हें समर्थकों सहित गिरफ्तार कर लिया था। उस समय भी शोभा यात्रा में शामिल लोगों की पुलिस से झड़प हुई थी।

बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल की 4440 करोड़ की यूनिवर्सिटी को ED ने किया जब्त: दुष्कर्म से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप, अरब देशों में छिपा बैठा है माफिया

उत्तर प्रदेश के कुख्यात खनन माफिया और बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनाई गई यूनिवर्सिटी को जब्त कर लिया है। हाजी इकबाल फिलहाल फरार है और माना जाता है कि वह दुबई में कहीं छिपा हुआ है। वहीं, जब्त यूनिवर्सिटी का संचालन उसके भाई और बेटों कर रहे थे।

हाजी इकबाल पर अवैध खनन के अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई तरह के गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ देश की कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने उसकी जिस ग्लोकल यूनिवर्सिटी को जब्त किया है, उसकी इमारत एवं जमीन की कीमत लगभग 4,440 करोड़ रुपए है। वहीं, मोहम्मद इकबाल के चार बेटे हैं। बेटों और भाई के खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं और वे जेल में बंद हैं।

एजेंसी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग केस की जाँच एजेंसी ने एक कुर्की आदेश जारी किया था। इसके बाद 121 एकड़ जमीन और ग्लोकल यूनिवर्सिटी की इमारत को जब्त कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बयान में कहा कि ये संपत्तियाँ अब्दुल वाहिद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज हैं। इन पर मोहम्मद इकबाल और उनके परिवार के सदस्यों का कंट्रोल था।

हाजी इकबाल ने खनन के कारोबार हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति इकट्ठा की है। राज्य की हर सरकार में उसकी पैठ रही है। हाजी इकबाल ने मिर्जापुर इलाके में लोगों को डरा धमकाकर करीब 121 एकड़ जमीन खरीदी और उस पर एक आलीशान यूनिवर्सिटी बनाई थी। यह यूनिवर्सिटी शुरू से विवादों में रही है, क्योंकि इसे बरसती नदियों पर कब्जा करके अवैध तरीके से बनाया गया है।

साल 2017 में वह चुनाव हार गया। इस बीच सरकार की नजर भी उसके काले कारनामों पर पड़ी। इसके बाद हाजी इकबाल, उसके छोटे भाई महमूद अली तथा हाजी इकबाल के चारों बेटों, रिश्तेदारों और सहयोगियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। हाजी इकबाल, उसके सहयोगियों और परिजनों पर अवैध खनन, मनी लॉन्ड्रिंग, डरा-धमकाकर जमीन कब्जाने के साथ-साथ दुष्कर्म के आरोप भी हैं।

हाजी इकबाल को पुलिस ने गैंग लीडर बताया है। कार्रवाई शुरू होने के दौरान हाजी इकबाल देश छोड़कर फरार हो गया। वहीं, यूपी पुलिस ने हाजी इकबाल के छोटे भाई महमूद अली और हाजी इकबाल के बेटों एवं रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, लंबे समय तक हाजी इकबाल कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। उस पर पुलिस ने लाखों रुपए का इनाम घोषित किया है।

सीबीआई और ED ने भी अपनी जाँच में हाजी इकबाल पर कई मामले दर्ज किए हैं। हाजी इकबाल और उसके सहयोगियों की यूपी से लेकर उत्तराखंड तक अरबों रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है। उसके घरों को बुल्डोजर से गिरा दिया गया है। इसके बावजदू वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। माना जाता है कि वह दुबई या किसी अन्य अरब मुल्क में छिपा बैठा हुआ है।

कुछ महीने पहले हाजी इकबाल की एक फोटो मिडिल ईस्ट के एक बड़े उद्योगपति के साथ वायरल हुई थी। बाद में हाजी इकबाल ने अपने वकील द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की गुहार लगाई। हाजी इकबाल विदेश में बैठकर ही कोर्ट में पेश होता है। हाजी इकबाल को कुछ मामलों में राहत भी मिली है। हाजी इकबाल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला है।

‘राज्य में मौत का तांडव’: बंगाल के राज्यपाल ने कहा- चुनाव बाद की हिंसा पीड़ितों से नहीं मिलने दे रही ममता सरकार, HC पूछा- गवर्नर हाउस अरेस्ट हैं?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार चुनाव है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए यह अभिशाप बन गया है। बंगाल में हर चुनाव के बाद राजनैतिक हत्या का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोकसभा चुनाव 2024 के चुनाव खत्म होने के बाद एक बार फिर ऐसे ही आरोप लगाए जा रहे हैं। बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार में राज्य में कई जगहों पर मौत का तांडव हो रहा है।

राज्यपाल बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर संविधान की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार हिंसा के शिकार लोगों को राजभवन नहीं आने दे रही है। दरअसल, गुरुवार (13 जून) को पुलिस ने भाजपा नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और हिंसा के पीड़ितों को राजभवन जाने से रोक दिया था। पुलिस ने तर्क दिया था कि राजभवन के आसपास धारा 144 लागू है।

इसके बाद राज्यपाल बोस ने शुक्रवार (14 जून) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने इन सभी लोगों को राजभवन आने और मुझसे मिलने की लिखित इजाजत दी थी। इसके बावजूद उन्हें राजभवन आने से रोका गया। मैं ये जानकर स्तब्ध हूँ कि कुछ कारण बताकर इन सभी लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोका गया।”

राज्यपाल ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री संवैधानिक नियमों का उल्लंघन कर सकती हैं। मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे। राज्य में मौत का तांडव हो रहा है। पंचायत चुनावों के दौरान मैंने अपनी आँखों से ये सब देखा है। मैं राज्य में कई जगह गया था। इन चुनावों में भी हिंसा, हत्या, डराने-धमकाने के कई मामले सामने आए हैं।”

वहीं, शुक्रवार को पीड़ितों से मिलने के बाद राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने पीड़ितों की बात सुनी। गवर्नर होने के नाते वे निष्पक्ष होना चाहता हैं। इसलिए उन्होंने राज्य सरकार से भी रिपोर्ट माँगी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद वे अपनी राय देंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर पूछा है कि इजाजत दिए जाने के बावजूद पुलिस ने किस आधार पर पीड़ितों को राजभवन आने से रोका।

संविधान की बात करते हुए गवर्नर सीवी आनंद बोस ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 167 के मुताबिक किसी मुख्यमंत्री के लिए यह जरूरी है कि जब भी उनसे रिपोर्ट या जानकारी माँगी जाए तो वे दें। संविधान में यह भी लिखा है कि गवर्नर को यह अधिकार और कर्तव्य है कि वे मुख्यमंत्री को बताएँ कि कौन-सा मुद्दा मंत्रिमंडल के सामने रखना है।

वहीं, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति ने पुलिस के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि अगर राजभवन की तरफ से इजाजत मिलती है तो सुवेंदु अधिकारी और हिंसा पीड़ित लोग गवर्नर से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जस्टिस अमृता सिन्हा बंगाल सरकार से पूछा कि क्या गवर्नर को हाउस अरेस्ट में रखा गया है।

मदरसे में बच्चों से गुप्तांग धुलवाता है मौलवी, शौच के बाद नितंब साफ कराने का भी आरोप: अब्दुल हफीज के खिलाफ शिकायत, जाँच शुरू

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक मदरसे के मौलवी पर नाबालिग छात्रों से अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। मौलवी का नाम अब्दुल हफीज है। आरोपित अब्दुल बच्चों से अपना गुप्तांग धुलवाता है। एक बच्चे ने आरोप लगाया कि शौच के बाद मौलवी नितंब धुलवाता है। इनकार करने वह छात्रों को धमकाता भी है। कई छात्रों ने इस वजह से मदरसे में जाने से भी इनकार कर दिया है।

गुरुवार (11 जून 2024) कई ग्रामीणों ने जिले के पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर मौलवी पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। वहीं, मौलाना ने इन आरोपों से पल्ला झाड़ लिया है। अपनी सफाई में मौलवी ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और शिकायतकर्ताओं पर लीगल एक्शन लेने की बात कही है।

यह मामला बस्ती जिले के थाना क्षेत्र मुंडेरवा का है। इस क्षेत्र के गाँव परसा हज्जाम में काफी लंबे समय से अरबिया शम्सुल उलूम नाम का मदरसा संचालित हो रहा है। इस मदरसे में गाँव और उसके आसपास के कई नाबालिग बच्चे मज़हबी एवं दीनी तालीम हासिल करने जाते हैं। लगभग 3 साल पहले मुंडेरवा थाना क्षेत्र का मौलवी अब्दुल हफीज इस मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए रखा गया था।

दी गई शिकायत के अनुसार, मौलवी की नियुक्ति के पीछे भी कुछ लोगों द्वारा मदरसे पर कब्ज़ा करने की साजिश बताई गई है। इसमें आगे कहा गया है कि अब्दुल हफीज बच्चों को पढ़ाने का ढोंग कर रहा है, क्योंकि उसे गाँव के कुछ लोगों ने खिला-पिला कर रखा है। कुछ ही समय बाद बच्चे मौलवी द्वारा अपने साथ अत्याचार किए जाने की शिकायत करने लगे। इन पीड़ितों में एक बच्चा बिहार का भी है।

बच्चे ने फोन करके अपने घर बताया था कि मदरसे में अब्दुल हफीज शौच से लौटने के बाद बच्चों से अपना नितम्ब धुलवाता है। इसके साथ ही उसने अपने साथ गंदी हरकतें करने का भी आरोप लगाया है।पीड़ित छात्र के परिजनों ने इस शिकायत की फोन पर रिकॉर्डिंग भी कर रखी है। इसी रिकार्डिंग में बच्चे ने आगे कहा कि वो अब मदरसे में नहीं पढ़ेगा।

शिकायतकर्ताओं ने मदरसे में चल रही इन हरकतों से खुद को शर्मिंदा बताया है। आरोप यह भी लगाया गया है कि मौलवी अब्दुल हफीज को गाँव के ही सादिक अली के बेटे मुस्लिम, परवेज अहमद और तबब्कल हुसैन सहित कुछ अन्य लोगों का संरक्षण मिला हुआ है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि उलटे उनको ही फँसाने की साजिश रची जा रही है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद। इसमें मौलवी अब्दुल हफीज को शिकायतकर्ताओं ने बेहद शातिर बताते हुए आशंका जताई है कि वो गाँव वालों को आपस में ही लड़ना चाहता है। उस पर कई अन्य बच्चों के साथ भी बहला-फुसला कर उल्टी-सीधी हरकतें करने और विरोध करने पर धमकाने का भी आरोप है। इस शिकायती पत्र पर लगभग आधे दर्जन ग्रामीणों ने दस्तखत कर रखे हैं।

मुझ पर लगे आरोप निराधार, लेंगे लीगल एक्शन

मीडिया से बात करते हुए मौलवी ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया है। अब्दुल हफीज इसे मदरसे को बदनाम करने की साजिश करार दिया है और खुद को बदनाम करने वालों के खिलाफ लीगल नोटिस भेजने का एलान किया है। मौलवी ने अबरार अहमद, मोहम्मद सगीर, निसार, मोहम्मद हकीम, समसुद्दीन और यूनुस पर आए दिन खुद को धमकियाँ देने का आरोप लगाया।

मौलाना अब्दुल हफीज ने इन सभी लोगों से अपनी जान का खतरा बताया है। मदरसे के लीगल एडवाइजर शोएब आजम ने इस शिकायत को गाँव के मनबढ़ों द्वारा मदरसे पर कब्ज़े की साजिश कहा है। वहीं, इस मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों के परिजन बस्ती पहुँचकर बच्चे को वहाँ ले जाने के लिए आए हैं।

पटना में परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को दिए गए थे प्रश्न-पत्र, गुजरात को गोधरा में बेच डाला NEET का परीक्षा केंद्र: गुजरात पुलिस ने 5 को दबोचा, करोड़ों के लेनदेन की मिली जानकारी

गोधरा NEET धोखाधड़ी घोटाले की जाँच में पुलिस को 12 छात्रों, उनके अभिभावकों और दोषी व्यक्तियों के बीच करोड़ों रुपए के लेन-देन का पता चला है। जाँच में MBBS डिग्री के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) में धोखाधड़ी में सहायता के लिए धन लेनदेन की घटना सामने आई है। यहाँ परीक्षा सेंटर ही बेच दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जाँच में यह सामने आया है कि NEET के लिए खास परीक्षा सेंटर आवंटित करने के लिए 10 लाख रुपए दिए गए थे। इस मामले में अधिकारियों ने कई बैंक चेक भी बरामद किए हैं। आरोपितों से जब्त किए गए चेक पर अभ्यर्थियों के माता-पिता के फोन नंबर लिखे हुए हैं। इस तरह कुल 2.30 करोड़ रुपए (कुछ रिपोर्ट में 2.82 करोड़ रुपए) चेक मिले हैं और लगभग 12 करोड़ रुपए की वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

इस मामले के सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले के मुख्य आरोपित तुषार भट्ट की अंतरिम जमानत याचिका को भी गोधरा जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने पैसे देने वाले विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के बयान दर्ज कर रही है। यह रैकेट पुरुषोत्तम रॉय नाम के व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा था।

मामले में शामिल 12 छात्रों में से चार ने वडोदरा के परशुराम रॉय द्वारा संचालित रॉय ओवरसीज कंपनी के बैंक खाते में ₹66 लाख जमा किए। छात्रों ने तुषार भट्ट और परशुराम रॉय को ₹2.82 करोड़ के चेक भी दिए। जाँच में यह भी पता चला कि तीन छात्रों ने भट्ट और रॉय को खाली चेक दिए, जो नीट परीक्षा में कथित कदाचार के लिए एक बड़े मौद्रिक लेनदेन का संकेत देते हैं।

जाँच में पता चला है कि आरोपितों और विद्यार्थियों एवं उनके माता-पिता के बीच 12 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। इनमें से अकेले 2.30 करोड़ रुपए का लेन-देन परशुराम रॉय के साथ हुआ है। NEET परीक्षा में आरोपितों को लगभग 26 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था। इसके लिए उन्होंने हर छात्र से 10 लाख रुपए की रेट तय कर रखी थी।

ये गिरफ्तारी उस समय हुई जब NEET की परीक्षा लेने वाली एजेंसी NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1563 विद्यार्थियों के मार्क्स कैंसिल जाएंँगे। साथ ही कोर्ट को यह भी बताया था कि अगर ये अभ्यर्थी चाहें तो परीक्षा में फिर से भाग ले सकते हैं। इसकी परीक्षा 23 जून 2024 को आयोजित की जाएगी और उसका परिणाम 30 जून को जारी किया जाएगा।

बेच दिया गया था पूरा परीक्षा केंद्र

गुजरात के गोधरा के जलाराम स्कूल में NEET का परीक्षा केंद्र था। इसमें 30 छात्रों को गलत तरीके से परीक्षा दिलवाया गया। परीक्षा देने वालों में सिर्फ गुजरात के नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार और झारखंड के भी छात्र थे। दरअसल, इस पूरा सेंटर को मैनेज कर लिया गया था और बच्चों को पास कराने की जिम्मेदारी ली गई थी। इसके बदले एक-एक छात्र से 10-10 लाख रुपए लिए गए थे।

इस परीक्षा केंद्र के परीक्षार्थियों से कहा गया था कि उन्हें जितने सवाल आते हैं, उसे मार्क दें और बाकी को छोड़ दें। जो सवाल छोड़ दिए गए थे, उसे वहाँ के सेंटर के लोगों ने मार्क कर दिया। दरअसल, परीक्षा खत्म होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को भेजने के लिए लगभग तीन घंटे का वक्त लगता है। वहीं, परीक्षा खत्म होने के आधे घंटे में कई बड़े कोचिंग सेंटर सवालों के उत्तर ऑनलाइन जारी कर देते हैं।

इस सेंटर के कर्मचारियों को उन्हीं उत्तर की मदद से छात्रों की ओएमआर शीट पर सही उत्तर को मार्क करना था। इस तरह से ये सारे छात्र पास हो जाते, लेकिन यह सब हो पाता उससे पहले ही गोधरा के जिला प्रशासन को यह सूचना मिल गई। प्रशासन ने इस सेंटर को अपने कब्जे में ले लिया और उसके बाद प्रशासन की देखरेख में यहाँ फिर से परीक्षा हुई।

पटना में पेपर लीक

वहीं, पटना से खबर आ रही है कि 5 मई को होने वाली एग्जाम से पहले वाली रात को कई छात्रों को एक कमरे में पेपर सॉल्व करवाए गए थे। पटना में शास्त्री नगर इलाके में डीएवी स्कूल में नीट का सेंटर था। पुलिस ने एग्जाम के बाद इस सेंटर पर परीक्षा देने वाले आयुष नाम के एक छात्र को हिरासत में लिया था। उसने पूछताछ में बताया कि उसे परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र उपलब्ध हो गया था।

पटना के एक हॉस्टल में आयुष और उसके जैसे 25 और छात्रों को एग्जाम पेपर और आंसर उपलब्ध करवाए गए थे। परीक्षा से पहले वाली रात को इन सभी छात्रों को प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे। अगले दिन नीट के एग्जाम में हू-ब-हू वही सवाल आए। इसके लिए एक-एक छात्र से 20-20 लाख रुपए लिए गए थे। पटना पुलिस ने इस केस में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें छह छात्र, चार सेंटर्स और तीन अभिभावक हैं।

बता दें कि NEET परीक्षा में पेपरलीक मामले का आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों के अदालतों में मामला दर्ज किया गया है। विद्यार्थियों का कहना है कि पेपरलीक हुआ है, इसलिए पूरी परीक्षा को कैंसिल की जाए और इसका एग्जाम नए सिरे से हो। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA ने जवाब माँगा है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अगर गड़बड़ी मिलती है तो NTA की जवाबदेही तय की जाएगी।

जाकिर और शाकिर ने रात के अंधेरे में जगन्नाथ मंदिर में फेंका गाय का कटा सिर: रतलाम में हंगामे के बाद पुलिस ने दबोचा, बुलडोजर से घर ढहाया

मध्य प्रदेश के रतलाम के जावरा इलाके में शुक्रवार (14 जून 2024) को भगवान जगन्नाथ मंदिर परिसर में गाय का कटा हुआ एक सिर मिला। इसको लेकर स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध कर रहे हिंदुओं ने आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार करने की चेतावनी दी। इसके बाद लोगों के गुस्सा को देखते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके घरों को ध्वस्त कर दिया।

रतलाम जिले के जावरा में जगन्नाथ महादेव मंदिर के पुजारी सुबह मंदिर पहुँचे। मंदिर में पहुँचते ही पुजारी ने गाय के बछड़े का खून से लथपथ सिर देखा। इसकी सूचना उन्होंने तुरंत पुलिस और स्थानीय लोगों को दी। जानकारी मिलते ही लोगों में आक्रोश फैल गया। हिंदू संगठन के लोग और स्थानीय श्रद्धालु तुरंत मंदिर पहुँचे। इसके बाद विरोध में लोगों ने जावरा बाजार बंद करा दिया और सड़क जाम कर दी।

इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जावरा पुलिस थाने पहुँचे और आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने एवं उनकी तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। लोगों के गुस्सा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की। हालाँकि, भीड़ वहाँ से जाने से मना कर दिया तो पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठी चार्ज और आँसू गैस के गोले दागने पड़े।

इस बीच पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जाँच करके दो आरोपितों की पहचान कर ली। इसके बाद पुलिस उनके घरों पर पहुँची और उन्हें हिरासत में लिया। आरोपितों की पहचान जाकिर और शाकिर के रूप में हुई है। हिंदू समूहों ने आरोपितों की पहचान होने के बाद उनके घरों तक जुलूस निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी।

एएसपी राकेश खाखा के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि 13 और 14 जून की रात 2.41 बजे दो बदमाश मोटरसाइकिल पर आए और मंदिर में गोमांस के अवशेष फेंक कर भाग गए। इसके बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करके बदमाशों को पकड़ लिया गया। एएसपी ने बताया कि उनसे पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें किसी ने उकसाया तो नहीं था।

एएसपी राकेश खाखा ने बताया कि आरोपितों के मकानों में अवैध निर्माण के आरोप भी पाए गए थे। इसलिए जिला प्रशासन के सहयोग से उन मकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया है। मकान ढहाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। शुक्रवार (14 जून की) शाम को जगन्नाथ महादेव मंदिर का शुद्धिकरण किया गया और पूरे मंदिर की सफाई की गई।

स्थिति को देखते हुए शहर में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। हर चौराहे पर पुलिस को तैनात किया गया है। शहर काजी हाफिज भुरू भाईजान ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

NEET पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA को दिया नोटिस, सभी पक्षों से माँगा जवाब : छात्रों और उनके परिजनों से मिले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ‘SC जो भी फैसला देगा, हम लागू करेंगे’

राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। एक याचिका मामले की सीबीआई जाँच करने की माँग को लेकर है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि नीट-यूजी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इसमें कोई खामी या गड़बड़ी पाई गई तो परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी एनटीए की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

शिक्षा मंत्री प्रधान ने नीट विवाद पर कहा कि छात्रों की चिंताओं को निष्पक्षता और समानता के साथ दूर किया जाएगा। प्रधान की यह टिप्पणी इस साल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की आलोचना के बीच आई है। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर छात्रों के भविष्य के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया को समय पर आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।

धर्मेंद्र प्रधान ने दोहराया कि इस साल नीट-यूजी परीक्षा के दौरान पेपर लीक के आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। इस बीच, शुक्रवार (14 जून 2024) को उन्होंने कुछ नीट परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याएँ सुनीं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीट-यूजी की परीक्षा 4500 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की गई थी। उनमें से केवल छह परीक्षा केंद्रों पर ही गलत प्रश्न पत्र बँटने की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा, “केवल छह केंद्रों के कारण, हम पूरी परीक्षा प्रणाली की पवित्रता और विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठा सकते।”

धर्मेंद्र प्रधान ने इस बारे में ट्वीट भी किया और लिखा, “केंद्र सरकार NEET परीक्षार्थियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मैं छात्रों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनकी सभी चिंताओं का निष्पक्षता और समानता के साथ समाधान किया जाएगा। किसी भी छात्र को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और किसी भी बच्चे के करियर को खतरे में नहीं डाला जाएगा। NEET परीक्षा से संबंधित तथ्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में हैं। केंद्र सरकार छात्रों के हित के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाएगी। NEET की काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी और इस दिशा में बिना किसी भ्रम के आगे बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

इस बीच, नीट काउंसलिंग पर एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को हाई कोर्ट्स से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के अनुरोध वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की याचिका पर सभी पक्षों को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नीट-यूजी विवाद पर मामलों को विभिन्न हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की माँग वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की याचिका पर 8 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। एक याचिकाकर्ता ने सीबीआई जाँच की माँग की।

सुप्रीम कोर्ट में कुल 11 याचिकाएँ थीं, 4 NTA की तरफ से दाखिल की गई थीं। जिनमें अलग-अलग हाई कोर्ट में नीट परीक्षा से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई गई थी। 7 याचिकाएँ अलग अलग छात्रों ने दाखिल की है, इनमें पेपर लीक की सीबीआई जाँच करवाने, परीक्षा रद्द करने, ग्रेस मार्क्स ख़त्म करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में धाँधली जैसी शिकायतें की गई थीं। इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया और सब पर सुनवाई पहले की याचिकाओं के साथ 8 जुलाई को होगी।