रोहित शर्मा हों या तमाम बॉलीवुड स्टार्स, लगभग सभी ने हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों को अनदेखा किया, लेकिन रफाह पर इजरायल के जवाबी हमले को फिलिस्तीनियों पर इजरायली अत्याचार बताने वाला रोना जरूर रोया। ये अलग बात है कि ‘उम्माह’ वालों को छोड़ दें, तो बाकियों का रफाह या गाजा से उतना ही लेना देना है, जितना कि चीन के शिनजियाँग में मारे जा रहे उइगुर मुस्लिमों से। खैर, इन सबके बीच आईपीएल में गुजरात टाइटन्स के लिए खेलने वाले राहुल तेवतिया ने ‘असलियत’ के लिए आवाज उठाई है। राहुल तेवतिया ने पाकिस्तान में अत्याचार और दमन के शिकार ‘हिंदुओं’ की आवाज उठाई है।
राहुल तेवतिया ने ‘ऑल आईज ऑन रफाह’ के मुकाबले ”ऑल आईज ऑन हिंदूज इन पाकिस्तान” का विकल्प चुना और पाकिस्तान में उत्पीड़न और दमन के शिकार हिंदुओं की दुर्दशा की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने तर्क_भारत के इंस्टाग्राम पोस्ट को अपना इंस्टाग्राम स्टेटस बनाया। इस पोस्ट में पाकिस्तान में हिदुओं पर हो रहे अत्याचार से जुड़े तथ्य रखे गए हैं।
तथ्य_भारत के जिस इंस्टाग्राम पोस्ट को राहुल तेवतिया ने अपना स्टेटस बनाया है, उसमें बताया गया है ”पाकिस्तान में हर तीसरी हिंदू नाबालिग लड़की रेप पीड़िता है। उन्हें अपहृत कर मार दिया जाता है, अगर वो पाकिस्तान में इस्लाम नहीं अपनाती हैं। क्यों वैश्विक मीडिया, भारतीय सेलिब्रिटी और मानवाधिकार संगठन इस अहम मुद्दे पर खामोश हैं?”
इसकी अगली स्लाइड में लिखा है, ‘रफाह में 46 लोग मारे गए, पूरी दुनिया की मीडिया आँसू बहाने लगी, लेकिन लाखों हिंदू कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश में क्रूरता से नरसंहार का शिकार बना दिए गए, किसी ने इसे स्वीकार तक नहीं किया, इसे कवर करना तो दूर की बात।’ इस पोस्ट की अगली स्लाइड्स में पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में बताया गया है।
इस पोस्ट को राहुल तेवतिया ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर स्टेटस के तौर पर लगाया है। बता दें कि राहुल तेवतिया अपनी काबिलियत के दम पर 2021 में भारतीय टीम में भी चुने गए थे, लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। राहुल तेवतिया विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। वो एक ही ओवर में पूरे मैच को बदलने का दमखम रखते हैं और कई बार ये कारनामा करके वो दिखा भी चुके हैं। हालाँकि इस बार उन्होंने बल्ले से नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम पर एक ही पोस्ट से पूरे इकोसिस्टम को तहस नहस कर दिया है।
कर्नाटक का मंगलुरु मुस्लिम जनसंख्या के कारण संवेदनशील इलाका है। अब यहाँ का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सड़क पर ट्रैफिक रोक कर मुस्लिम भीड़ नमाज पढ़ रही है। वीडियो वायरल होने के बाद जब हिन्दू संगठनों और भाजपा ने विरोध किया, तब कॉन्ग्रेस के शासन वाली राज्य की पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की है। घटना कंकनाडी इलाके की है। शुक्रवार (24 मई, 2024) को जुमे के दिन मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर जुट कर नमाज पढ़ी थी।
इस कारण दोनों ओर से आने-जाने वाली गाड़ियाँ रुकी हुई थीं और ट्रैफिक में व्यवधान पैदा हो गया था। जहाँ नमाज पढ़ी गई, वहाँ सामने ही एक मस्जिद है। वहाँ से आने-जाने वाली गाड़ियों को इसके बाद दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने अब इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ IPC की धारा-341 (गलत तरीके से किसी को रोकना), 283 (सार्वजनिक रास्ते में बाधा डालना), 143 (गलत तरीके से भीड़ जुटाना) और 149 (विधि विरुद्ध जनसमूह) के तहत मामला दर्ज किया है।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हाथ पर धात धरे बैठी रही, जिसके बाद हिन्दू संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं की गई तो वो भी सड़कों पर और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ जुटा कर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। VHP (विश्व हिन्दू परिषद) नेता शरण पुम्पवेल ने भी सरकार को चेताया। पुलिस को कार्रवाई के लिए एक ज्ञापन भी सौंपा गया। भाजपा नेता व पूर्व मंत्री KS ईश्वरप्पा ने कहा कि हिन्दू समाज ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा और पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो दंगे भड़क सकते हैं।
Mangaluru, Karnataka: A group of Islamists were offering Namaz in the middle of the road, causing a traffic jam.
Mangaluru police have lodged an FIR against them and are investigating the matter.
VHP demanded strict action against them and said that if no action is taken, they… pic.twitter.com/8tbJ8bme0Z
शरण पुम्पवेल VHP के दक्षिण पंथ के जॉइंट सेक्रेटरी भी हैं। उन्होंने कहा कि समाज में वैमनस्य फैलाने के लिए ऐसी हरकतों को अंजाम दिया जा रहा है। दक्षिण कन्नड़ के सांसद नलिन कुमार कटील ने कहा कि ये घटना कॉन्ग्रेस राज में कानून की धज्जियाँ उड़ाने वाली है। उधर इस्लामी संगठन SDPI के जिलाध्यक्ष अनवर सादत ने कहा कि VHP इस मामले का इस्तेमाल कर के सनसनी फैला रही है। वहीं एक अन्य मुस्लिम नेता K अशरफ ने दावा किया कि कभी-कभार होने वाली चीजों का इस्तेमाल सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए किया जा रहा है।
शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के नेता जितेंद्र आव्हाड ने मनुस्मृति के श्लोक को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति की प्रतिया फाड़ी, लेकिन इस दौरान उन्होंने ऐसी गलती कर दी, जिसका उन्हें बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने मनुस्मृति को फाड़ने के दौरान ही भारत रत्न डॉ भीमराव आँबेडकर की तस्वीर भी फाड़ दी।
शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के नेता जितेंद्र आव्हाड महाराष्ट्र के म्हाड में ये प्रदर्शन कर रहे थे, जब उन्होंने बाबा साहेब आँबेडकर की तस्वीर फाड़ी। बाबासाहेब आँबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर बीजेपी ने काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता ने कहा, “उन्होंने बाबा साहब के पोस्टर फाड़ दिए। यह सिर्फ आँबेडकर का ही नहीं बल्कि पूरे दलित समुदाय का अपमान है।”
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने आँबेडकर की तस्वीर फाड़ने के लिए जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की माँग की। एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने माँग की कि आव्हाड को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए और राज्य सरकार को डॉ. बीआर आँबेडकर की तस्वीर फाड़ने और उसे रौंदने के लिए उनके खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करना चाहिए। पाटिल ने कहा, “मनुस्मृति को जलाने के नाम पर भागेंद्र (जितेंद्र) आव्हाड ने बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति को फाड़ दिया और उसे रौंद दिया।” पाटिल ने यह भी कहा कि आव्हाड को पार्टी से निकाल दिया जाना चाहिए।
शालेय अभ्यासक्रमात मनुस्मृतीचां समावेश करण्याचा प्रयत्न हे सरकार करत आहे.याचा विरोध म्हणून आज महाड येथील क्रांती स्तंभ येथे मनुस्मृतीचे दहन करून याचा निषेध केला. हे करत असताना अनवधानाने माझ्याकडून एक मोठी चूक घडली. मनुस्मृतीचे निषेध करणारे पोस्टर्स काही कार्यकर्त्यांनी आणले… pic.twitter.com/FjffRKPNOa
इस बीच, जितेंद्र आव्हाड ने महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए उनसे “बिना शर्त माफी” माँग ली। घटना के बारे में बताते हुए आह्वाड ने कहा, “भावनात्मक रूप से मनुस्मृति का विरोध करते हुए मैंने पोस्टर फाड़ दिया क्योंकि उस पर मनुस्मृति शब्द लिखा था। मुझे नहीं पता था कि उस पर बाबासाहेब की तस्वीर है। विपक्ष इस पर राजनीति करेगा। मैंने गलती की। मैं बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देने के लिए माफी माँगता हूँ!”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (30 मई, 2024) की शाम को लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम व 7वें चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर थमने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुँच रहे हैं, जहाँ 2 दिनों तक वो साधना में मगन रहेंगे। वो उसी जगह पर ध्यान धरेंगे, जहाँ कभी माँ पार्वती ने तपस्या की थी और जहाँ तैर कर पहुँचे स्वामी विवेकानंद ने अपने ‘स्व’ को जागृत किया था। वहीं उनके मन में ‘भारत माता’ का भी विचार आया, जिसने देश को एक किया।
विवेकानंद रॉक मेमोरियल के बारे में बता दें कि भारत की मुख्य भूमि से आधे किलोमीटर की दूरी पर समुद्र में स्थित है। जहाँ विवेकानंद को ज्ञान प्राप्त हुआ, उसी जगह पर 1970 में ये मेमोरियल बनाया गया। उसी शिला पर जहाँ माँ कन्याकुमारी (पार्वती) ने तपस्या की थी, मान्यता है कि आज भी वहाँ उनके चरणों के निशान हैं। कन्याकुमारी ही वो जगह है जहाँ बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिन्द महासागर का मिलन होता है। इस जगह का अपना एक आध्यात्मिक महत्व है।
क्या आपको पता है आज जो विवेकानंद रॉक मेमोरियल कन्याकुमारी का मुख्य आकर्षण है, उसका निर्माण RSS के सर-कार्यवाह (General Secratary) रहे एकनाथ रानडे ने करवाया था। एकनाथ रानडे ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख भी रहे। उन्होंने ‘विवेकानंद केंद्र’ नामक संस्था की भी स्थापना की। 19 नवंबर, 1914 को जन्मे एकनाथ रानडे का निधन 22 अगस्त, 1982 को हुआ था – अंतिम संस्कार भी कन्याकुमारी के विवेकानंदपुरम में ही किया गया।
एकनाथ रानडे: मानव-निर्माण और राष्ट्र-पुनरुत्थान के नेता
आइए, आपको एकनाथ रानडे और विवेकानंद रॉक मेमोरियल के बारे में और जानकारी देते हैं। एकनाथ रानडे त्याग और सेवा पर बल देते हुए मनुष्य-निर्माण एवं राष्ट्र-पुनरुत्थान के लिए प्रयासरत थे। जब उनका हार्ट अटैक के कारण निधन हुआ, तब वो तब वो मद्रास स्थित अपने दफ्तर में थे और कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद केंद्र जाने वाले थे। वो उस दौरान कश्मीर, दिल्ली, अजमेर, मुंबई, अहमदाबाद, नागपुर, पुणे और शोलापुर का दौरा कर के लौटे थे।
इस दौरान वो विवेकानंद केंद्र के शाखाओं का दौरा करते और वहाँ के लोगों से मिलजुल कर उन्हें प्रशिक्षित करते थे। आज पोर्ट ब्लेयर में विवेकानंद केंद्र विद्यालय संचालित हो रहा है, जो उन्हीं की देन है। उत्तर-पूर्व में उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए काम किया। अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित सुदूर तफरागाम तक में उन्होंने विद्यालय खोला। स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निर्माण में 6 साल लगे। इसका काम 1964 में शुरू हुआ था, जो 1970 तक चला।
11 सितंबर, 1970 को इसका उद्घाटन हुआ। अप्रैल 1980 में एकनाथ रानडे को हार्ट अटैक आया था, लेकिन वो किसी तरह मौत से जूझते हुए इससे बाहर निकले, जिसे डॉक्टरों तक ने चमत्कार बताया। वो इसे अपने दूसरा जीवन मानते थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के अमरावती के तिम्ताला में हुआ था। उनके पिता रामकृष्ण स्टेशन मास्टर हुआ करते थे। नागपुर में उनके बड़े भाई काशीनाथ छोटे-मोटे कारोबार करते थे, वहीं उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई।
एकनाथ रानडे का जीवन, विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए दान संग्रह
मध्य प्रदेश के सागर यूनिवर्सिटी से उन्होंने कानून की परीक्षा पास की थी। 1938 में नागपुर में रहने के दौरान ही वो RSS के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के संपर्क में आए और उन्हें संघ में बतौर प्रचारक चुना गया। जब पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) से पश्चिमी बंगाल में पलायन का दौर था, उस दौरान एकनाथ रानडे रामकृष्ण मिशन के संपर्क में आए। उन्होंने बंगाली भी सीखी। उस दौरान उन्होंने पूर्वी बंगाल से आए शरणार्थियों की सेवा की।
एकनाथ रानाडे के जीवन की संक्षिप्त में बात करें तो उन्होंने 1920 में नागपुर के फड़णवीसपुरा विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हासिल की। 1926 में RSS से जुड़े। 1932 में न्यू इंग्लिश हाईस्कूल से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1938 में दर्शनशास्त्र से BA किया। पहले वो जबलपुर में प्रचारक बने, फिर महाकौशल और मध्य प्रदेश में प्रान्त प्रचारक। 1953 में RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख और 1955 में सरकार्यवाह। 1962 में उन्हें संघ का अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख नियुक्त किया गया।
1963 में उन्होंने स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी पर ‘हे हिन्दू राष्ट्र उतिष्ठत! जाग्रत!!’ नामक पुस्तक की रचना की, जिसमें स्वामीजी के विचारों का संकलन था। विवेकानंद रॉक मेमोरियल की स्थापना के लिए किया गया उनका मैराथन प्रयास भी जानने लायक है। उन्होंने देश भर में घूम कर सबसे एक-एक रुपए इकट्ठे करने का अभियान चलाया। जब उनसे किसी ने कहा कि कई लोग हजारों रुपए भी देना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि ये मेमोरियल तो एक अकेला धनी-दानी व्यक्ति भी बनवा सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य है अधिकाधिक लोगों तक स्वामी विवेकानंद का सन्देश पहुँचाना।
उनका कहना था कि काम तभी बनेगा जब लोग सिर्फ दान के लिए दान न करें, बल्कि सउद्देश्य की सिद्धि के लिए दान करें। उनका स्पष्ट कहना था कि एक व्यक्ति से सिर्फ एक रुपया ही लिया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से ही एकनाथ रानडे से परिचित नहीं हैं, बल्कि उन्हें 70 के दशक में उनके साथ काम करने का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने 9 नवंबर, 1914 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एकनाथ रानडे के जन्मशती समारोह में संबोधन देते हुए बताया था कि कैसे विवेकानंद की प्रतिमा की एक-एक डिटेल का उन्होंने ध्यान रखा था।
मसलन, कौन से पत्थर का इस्तेमाल किया जाए जिससे समुद्री हवाओं के बावजूद प्रतिमा लंबे समय तक टिकी रहे, विवेकानंद की आँखें कैसी होनी चाहिए और उनमें क्या दिखना चाहिए, प्रतिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए कौन से केमिकल का इस्तेमाल किया जाए। पीएम मोदी ने बताया था कि उन्होंने हिंदुस्तान के हर कोने के लोगों में ये भावना जगाई कि उन्होंने विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए योगदान किया है। एकनाथ रानडे विवेकानंद जैसे कई ऊर्जावान युवक तैयार करना चाहते थे।
विवेकानंद रॉक मेमोरियल के पहले चरण का काम 1.20 करोड़ रुपए में पूरा किया गया था। ‘विवेकानंद मंडपम’ के भीतर सभा मंडपम और ध्यान मंडपम हैं। वहीं दक्षिण भारतीय संरचना श्रीपद मंडपम अलग से बनाया गया। एकनाथ रानडे के बारे में एक और बात जानने लायक है कि जब RSS पर महात्मा गाँधी की हत्या के बाद प्रतिबंध लगा था, तो प्रतिबंध हटाने के लिए तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ गुप्त बातचीत का भी वो हिस्सा थे।
कॉन्ग्रेस नेताओं और मिशनरियों ने डाला व्यवधान
RSS नेता HV शेषाद्रि ने अपनी पुस्तक ‘कृतिरूप संघ-दर्शन‘ में स्वामी विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के दौरान आए व्यवधानों का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि 1963 में जब तमिलनाडु सरकार ने विवेकानंद शिला स्मारक समिति को ये जमीन सौंप दी, उसके बाद वहाँ एक पट्टिका लगाई गई। लेकिन, मिशनरियों ने उसे तोड़ कर उसकी जगह कंक्रीट का बड़ा सा क्रॉस खड़ा कर दिया और गोवा में हिन्दुओं पर अत्याचार करने वाले पुर्तगाल के पादरी जेवियर का स्मारक बनाने की चेष्टा की।
कुछ निडर स्वयंसेवकों ने समुद्र तैर कर पार करने के बाद उस क्रॉस को हटाया। सरकार को वहाँ आसपास धारा-144 लागू करनी पड़ी। मन्नत पद्मनाभन को राष्ट्रीय स्मारक समिति का अध्यक्ष बनाया गया। एक तरह से 1962 ये युद्ध में चीन से हारे भारत के लिए ये विवेकानंद रॉक मेमोरियल संजीवनी बन कर आया। लाखों युवाओं तक स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों को पहुँचाया गया। 2 सितंबर, 1970 को तत्कालीन राष्ट्रपति VV गिरी उद्घाटन के दौरान मुख्य अतिथि थे।
ये एकनाथ रानडे का ही कमाल था कि हर विचारधारा के लोग इससे जुड़े और उस कार्यक्रम की अध्यक्षता M करुणानिधि ने की। उस समय हिन्दू विरोधी पेरियार जीवित ही था। अगर एकनाथ रानडे और RSS नहीं होता तो शायद आज उसे कम ‘सेंट जेवियर रॉक’ कह रहे होते और वहाँ जेवियर का स्मारक होता। उस समय भारत के संस्कृति मंत्री रहे हुमायूँ कबीर का कहना था कि इस मेमोरियल के निर्माण से उस जगह की सुंदरता खत्म हो जाएगी।
उस दौरान ईसाई मिशनरियों ने 22 फ़ीट का पत्थर, जिसे स्वामी विवेकानंद से जुड़े कार्यों के लिए लाया गया था, उसे भी तोड़ कर फेंक डाला था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भक्तवत्सलम ने भी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा वहाँ लगाने की अनुमति देने से शुरू में इनकार कर दिया था। एकनाथ रानाडे ने हुमायूँ कबीर से मुलाकात कर के उन्हें मनाया और उनसे CM को पत्र लिखवाया, तब जाकर ये कार्य संपन्न हुआ। इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को 323 सांसदों के हस्ताक्षर भी सौंपने पड़े थे।
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एस&पी ( S&P ) ने भारत का आउटलुक ‘स्टेबल’ से ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। एस&पी ग्लोबल ने बुधवार को अपने आउटलुक में बदलाव किया है। एस&पी ग्लोबल ने ओवरऑल रेटिंग को ‘BBB-‘ रखा है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत है, जिसका क्रेडिट मेट्रिक्स पर पॉजिटिव असर है। ये मोदी सरकार की मजबूति कार्यशैली को दर्शाने वाला फैसला दिखता है।
एस&पी ग्लोबल ने अपने नोट में कहा है कि पॉजिटिव आउटलुक हमारे नजरिए को दर्शाता है कि लगातार पॉलिसी में स्थिरता, बेहतर होते आर्थिक रिफॉर्म्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ऊँचा निवेश लंबी अवधि की विकास संभावनाओं को बनाए रखेंगे। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि मौजूदा फिस्कल और मॉनिटरी पॉलिसी से सरकार का कर्ज और ब्याज दोनों कम होगा, जिससे आर्थिक लचीलापन बढ़ेगा, नतीजतन अगले 24 महीनों के भीतर ऊँची रेटिंग देखने को मिल सकती है। पिछले साल मई में, एस&पी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की ग्रोथ पर स्टेबल आउटलुक के साथ भारत की ओवरऑल रेटिंग को ‘BBB-‘ की थी, तब रेटिंग एजेंसी ने भारत के कमजोर वित्तीय प्रदर्शन और प्रति व्यक्ति कम जीडीपी को जोखिम के रूप में बताया था।
फिस्कल डेफिसिट कम हुआ तो रेटिंग अपग्रेड
मतलब ये कि अगर फिस्कल डेफिसिट आगे जाकर काफी हद तक कम होता है तो रेटिंग एजेंसी भारत की रेटिंग को अपग्रेड कर सकती है, जो कि अभी ‘BBB-‘ पर बरकरार है। इससे सामान्य सरकारी कर्ज में कमी आएगी और ये जीडीपी के 7% से भी नीचे चली जाएगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और फिस्कल एडजस्टमेंट में लगातार पब्लिक इन्वेस्टमेंट आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है और भारत के कमजोर पब्लिक फाइनेंस में सुधार ला सकता है। साथ ही अगर सेंट्रल बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता में लगातार और पर्याप्त सुधार देखने को मिलता है, जैसे कि महँगाई को वक्त के साथ कम ब्याज दरों पर मैनेज कर लिया जाता है तो हम रेटिंग भी बढ़ा सकते हैं।
एस&पी ग्लोबल का कहना है कि सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च भारत के विकास की राह को आसान करेगा, हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव के नतीजों की परवाह किए बिना भारत में सुधार जारी रहेंगे। हालाँकि, एस&पी ग्लोबल ने ये चेतावनी भी दी है कि अगर पब्लिक फाइनेंस के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता में कमी देखने को मिलती है तो वो आउटलुक को फिर से स्टेबल भी कर सकते हैं।
बाकी रेटिंग एजेंसियों का क्या है नजरिया ‘बीबीबी-’
सबसे निचली निवेश श्रेणी रेटिंग है। एजेंसी ने पिछली बार 2010 में रेटिंग आउटलुक को ‘नकारात्मक’ से बढ़ाकर ‘स्थिर’ किया था।अमेरिका की एजेंसी ने कहा कि यदि भारत का राजकोषीय घाटा सार्थक रूप से कम होता है और परिणामस्वरूप सामान्य सरकारी ऋण संरचनात्मक आधार पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सात प्रतिशत से नीचे आ जाता है, तो वह रेटिंग बढ़ा सकती है। सभी तीन प्रमुख वैश्विक रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी, फिच और मूडीज ने भारत को सबसे निम्न निवेश ग्रेड रेटिंग दे रही है।
हालाँकि, फिच और मूडीज ने अपनी रेटिंग पर अब भी ‘स्थिर’ परिदृश्य कायम रखा है। निवेशक इन रेटिंग को देश की साख के मापदंड के तौर पर देखते हैं और इसका उधार लेने की लागत पर प्रभाव पड़ता है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का एक वीडियो सामने आया है, जो मुख्य न्यायाधीश रवि मलिथम के फेयरवेल के दौरान का है। उक्त कार्यक्रम में मध्य प्रदेश अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष DK जैन ने भी संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने जजों को ऐसी खरी-खरी सुनाई कि इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने इस दौरान कहा कि कई जज अधिवक्ताओं से असंयमित भाषा में बात करते हैं, ज़रा-ज़रा में ही प्रकरण को डिसमिस कर देते हैं।
उन्होंने इसे न्यायाधीशों की गरिमा के प्रतिकूल बताते हुए कहा कि एक अधिवक्ता एक समय में एक से अधिक न्यायालय में उपस्थित नहीं रह सकता है, ऐसे में प्रकरणों को पासओवर करने की बजाए इसे डिसमिस कर देना उचित नहीं है लेकिन ये आम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि फाइनल सेक्शन में घंटों इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आता है। अगर कोई डिफ़ॉल्ट आ जाता है तो इसकी भी गारंटी नहीं है कि उसमें सुधार के बाद प्रकरण लिस्ट किया जाएगा।
अधिवक्ता DK जैन ने जजों की मौजूदगी में कहा कि न्यायालय में हजारों प्रकरण सुनवाई के बिना लंबित हैं। उन्होंने जजों से सवाल दागा कि क्या ये उचित है? उन्होंने ये भी कहा कि हाईकोर्ट को आम लोगों की न्याय देने की बजाए प्रकरणों का बोझ कम करने में ज्यादा रुचि है। उन्होंने गर्मी छुट्टियों को लेकर भी हाईकोर्ट को घेरा और कहा कि बार का पूर्व अध्यक्ष जजों के साथ कंधा से कंधा मिल कर चलते थे, लेकिन उन्हें समस्याओं से अवगत कराने के लिए चुना गया है।
उन्होंने कहा कि फाइनल सेक्शन में ही न्यायाधीशों की प्रतिनियुक्ति कर दी जाए। उन्होंने कहा कि गर्मी की छुट्टियों को 5-10 दिन आगे बढ़ा दिया गया है, तब तक बच्चों के स्कूल खुल जाएँगे। उन्होंने कहा कि न्यायधीश इस पीड़ा को ज़रूर सुनेंगे, हमारे घर में परंपरा है कि घर के बड़े-बुजुर्ग जब भी बाहर जाते हैं तो घर के बच्चों को जी भर कर उपहार देकर जाते हैं। बता दें कि अब जस्टिस शील नागू अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश होंगे।
विथ ड्यू रिस्पेक्ट माई लॉर्डस! 'ऊंचे आसन पर बैठने से कोई ऊंचा नहीं हो जाता! .. कृपया अधिवक्ताओं का अपमान न करें!' ये हैं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के प्रेसिडेंट डी के जैन और मौक़ा है हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि मलीमथ के फेयरवेल का। pic.twitter.com/h5JKTA9V3v
— Prabhakar Kumar Mishra (@PMishra_Journo) May 29, 2024
बता दें कि मुख्य न्यायधीश ने भी अपने भाषण में कहा था कि हमारे काफी दुश्मन हैं, और वो हमारे करियर को प्रभावित करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। उन्होंने अपने बारे में कहा था कि मैंने हमेशा संविधान की सेवा की है। जाते हुए मुख्य न्यायाधीश से वकील डीके जैन ने कहा कि आप मिनटों में समस्याओं को सुलझाने का सामर्थ्य रखते हैं, जाते-जाते ऐसा कर दें। बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम जिसके तहत जज ही जज को चुनते हैं, के कारण न्यायपालिका विवादों में है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान की भारत ही नहीं बल्कि अपने दूसरे पड़ोसी अफगानिस्तान से भी नहीं बनती। अफगानिस्तान के बाशिंदों को पाकिस्तान पसंद नहीं है। अफगानिस्तान में आतंक फैलाने वालों को शरण देने के कारण पाकिस्तान की छवि काफी खराब हुई है। दूसरी तरफ भारत के लिए अफगानिस्तानियों के मन में कहीं ज्यादा इज्जत है। यह बात एक हालिया वीडियो से भी सिद्ध हो गई है। इस वायरल वीडियो में एक वृद्ध व्यक्ति पाकिस्तान पर हमले की बात करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक वीडियो में एक अफगानिस्तानी बुजुर्ग एक भारतीय से हमला करने को कहता दिखा है। वह भारतीयों को भाई बताता है और कहता है कि पाकिस्तान उनका दुश्मन है। इसके बाद वह बताता है कि भारत वाले पाकिस्तान को अपनी तरफ से मारें और अफगानिस्तानी पाकिस्तान को अपनी तरफ से कूटें।
An Afghan telling an Indian Youtuber,
"You guys attack from that side we (Afghanistan) will attack from this side and destroy Pakistan." pic.twitter.com/YDdfZFewRc
इस पर भारतीय ट्रेवल व्लॉगर कहता है कि उसे भारत से अफगानिस्तान के बीच एक सड़क चाहिए। जिसको लेकर बुजुर्ग फिर हमले की बात दोहराता है। बुजुर्ग कहता है कि पाकिस्तान को ऐसे मारो कि इन्हें गुम करदो। बुजुर्ग कहता है कि उस तरफ से भारत लड़ाई करे, अफगानिस्तान भारत के साथ है।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तबाही लाने वाले तालिबान को पाकिस्तान ने ही जन्म दिया था। पाकिस्तान ने सालों तक तालिबान को हथियार और पैसा दिया है। पाकिस्तान की जमीन पर पलने वाले आतंकी लगातार अफगानिस्तान की जनता को नुकसान पहुँचाते रहे हैं। पाकिस्तान ने हाल ही अपने मुल्क के भीतर रहने वाले अफगान शरणार्थियों को भी बाहर कर दिया था। लाखों अफगानों को पाकिस्तान से महीने भर के भीतर ही बाहर कर दिया गया था।
वहीं दूसरी तरफ भारत ने अफगानिस्तान में विकास कार्य करवाए हैं। भारत ने अफगानिस्तान में हाइवे और अस्पताल बनाए हैं। भारत ने अफगानिस्तान के बाशिंदों की खाद्य समस्या दूर करने के लिए गेंहू भी भेजा है। भारत ने बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थियों को भी जगह दी है। ऐसे में अफगानों के मन में भारत के लिए सम्मान है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद अब उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खबर है कि उनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डालकर एफआईआर दर्ज करने की माँग हुई है। इस याचिका में आरोप है कि उन्होंने मार्च माह में एक कोर्ट सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की जजों के साथ होती बातचीत को रिकॉर्ड किया था और बाद में वो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई थी।
PIL in Delhi High Court seeks FIR against Sunita Kejriwal for posting video clips of court hearings on social media
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका को पेशे से वकील वैभव सिंह ने दायर किया है। इसमें अदालत के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करने के लिए कार्रवाई की माँग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब 28 मार्च, 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री को ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया था तो सुनीता केजरीवाल और अन्य ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को अवैध रूप से रिकॉर्ड किया।
बाद में ये रिकॉर्डिंग #MoneyTrailExposedByKejriwal हैशटैग के साथ प्रसारित हुई। लोगों ने इसे केजरीवाल की धमाकेदार वीडियो कहकर शेयर किया था और दावा किया था कि इससे ईडी के बाकी सारे दावों की धज्जियाँ उड़ गईं। मालूम हो कि अब इसी वीडियो को रिकॉर्ड करने के बाबत ये याचिका डाली गई है।
याचिका में कहा गया है जिन परिस्थितियों में वीडियो रिकॉर्डिंग वायरल की गई, उससे राजनीतिक दलों द्वारा न्यायपालिका की छवि खराब करने और इस देश के आम लोगों को गुमराह करने की बू आती है ताकि लोग इसे देख यह सोचें न्यायपालिका किसके इशारे पर काम कर रही है।
बता दें कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होती वीडियो में दिख रहा था कि अरविंद केजरीवाल विशेष न्यायधीशों के सामने वीडियो सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे थे। वीडियो में वो अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ कह रहे थे कि उन्हें किसी कोर्ट ने दोषी भी नहीं करार दिया फिर भी उन्हें पकड़ लिया गया
बिहार में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं। अधिकाँश बिहार में तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुँच गया है। इतनी गर्मी के बावजूद स्कूल खोले जा रहे हैं। इस गर्मी की वजह से बिहार के अलग-अलग हिस्सों में 60 से अधिक बच्चों के बेहोश होने, बीमार पड़ने की जानकारी सामने आ रही है। इस बीच, लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवास ने बिहार सरकार से स्कूलों को तुरंत बंद करने की माँग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के अलग-अलग जिलों के सरकारी स्कूलों में भीषण गर्मी के कारण अब तक करीब 60 छात्राएँ बेहोश हो गयी हैं, जिनका इलाज जारी है। भीषण गर्मी के कारण पटना जिले के बाढ़ इलाके में 6 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गयी है, तो शेखपुरा में भी छात्राओं के बेहोश होने के बाद परिजनों ने सड़क ब्लॉक कर दिया। अभिभावकों ने माँग की है कि तुरंत स्कूलों को बंद किया जाए। शेखपुरा के अरियरी प्रखंड के मनकौल गाँव में अवस्थित उत्क्रमित मिडिल स्कूल में सुबह प्रार्थना के दौरान सात से ज्यादा छात्रा विहोश होकर जमीन पर गिर गई, इनमें से दो छात्राओं को गंभीर हालत में सदर अस्पताल पहुँचाया गया है।
ऐसी ही सूचना बेगूसराय से भी आ रही है, जहाँ एक दर्जन से अधिक छात्राएँ बेहोश हो गईं। बेहोशी के हालात में छात्राओं को उसे जगह से उठाकर इलाज के लिए मटिहानी पीएचसी में भर्ती कराया, जहाँ सभी छात्राओं का इलाज चल रहा है।
चिराग पासवान ने की स्कूलों को तुरंत बंद करने की माँग
इस मामले को लेकर चिराग पासवान ने सरकार से माँग की है कि स्कूलों को तुरंत बंद किया जाए। चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा, “मैं बिहार सरकार और माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं की इस तपती गर्मी में विद्यालय खुले रहने से बच्चों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आपके सरकारी अधिकारी के तुगलकी फरमान की वजह से बच्चें बेहोश हो रहे है , प्रतिदिन अस्पतालों में इलाज चल रहा है। ये कोई अत्याचार से कम नहीं हैं। नैतिकता के आधार पर जरूरी है बच्चों की सेहत का देखभाल करना। मैं बिहार सरकार से माँग करता हूँ कि इस भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों में अवकाश की घोषणा की जाए।”
मैं बिहार सरकार और माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं की इस तपती गर्मी में विद्यालय खुले रहने से बच्चों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आपके सरकारी अधिकारी के तुगलकी फरमान की वजह से बच्चें बेहोश हो रहे है , प्रतिदिन अस्पतालों में इलाज चल रहा… https://t.co/010QuRaJjd
— युवा बिहारी चिराग पासवान (@iChiragPaswan) May 29, 2024
एक तरफ शिक्षक और अभिभावक स्कूलों को बंद करने की माँग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बिहार के शिक्षा मंत्री केके पाठक ने एक सप्ताह पहले आदेश जारी किया था कि बिहार के शिक्षकों को सुबह 6 बजे ही स्कूल में हाजिर रहना होगा। उन्हें स्कूल में पहुँचकर ही सेल्फी फोटो अपलोड करके अटेंडेंट देनी होती है। यही नहीं, शिक्षकों को ग्रुप फोटो भी क्लिक करना होगा।
बिहार में पारा तोड़ रहा सारे रिकॉर्ड
इस समय पूरे बिहार में रिकर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। बिहार में तापमान ने पिछले 12 साल का रिकॉर्ड टोड़ दिया है। गया, औरंगाबाद और अरवल में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया है। औरंगाबाद में 48 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, तो अरवल में 46.9 और गया में 46.8 डिग्री तापमान दर्ज किया जा चुका है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को आजकल सार्वजनिक मंचों पर सहज नहीं देखा जा रहा है, जिसके बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि पूर्व IAS अधिकारी VK पांडियन ही सरकार और पार्टी का सारा कामकाज देख रहे हैं, नवीन पटनायक को उन पर पूरा भरोसा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के 7वें व अंतिम चरण से पहले ओडिशा के मयूरभंज, बालासोर और केंद्रपारा में ताबड़तोड़ जनसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ओडिशा CM के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई।
ओडिशा में लोकसभा व विधानसभा चुनाव के साथ हो रहे हैं, पिछले 24 वर्षों से यहाँ BJD की सरकार है और नवीन पटनायक मुख्यमंत्री हैं। उनके पिता बीजू पटनायक भी एक बार 60 के दशक में और फिर 90 के दशक में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वो एक कुशल पायलट भी हुआ करते थे। नवीन पटनायक के बारे में कहा जाता है कि उन्हें उड़िया तक ठीक से नहीं आती और ओडिशा का भौगोलिक ज्ञान भी उन्हें ठीक से नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी का जनाधार राज्य में मजबूत रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आजकल नवीन बाबू के सभी शुभचिंतक बहुत चिंता में हैं, वो ये देख कर बहुत परेशान हैं कि पिछले 1 वर्ष में नवीन बाबू की तबीयत अचानक से इतनी कैसे बिगड़ गई? उन्होंने कहा कि वर्षों से नवीन बाबू के करीबी रहे लोग उनसे मिलते हैं तो ओडिशा CM की तकलीफ की चर्चा करते हुए बताते हैं कि अब वो खुद से कुछ नहीं कर पा रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, करीबियों का मानना है कि नवीन पटनायक की तबीयत बिगड़ने के पीछे कोई साजिश भी हो सकती है।
PM नरेंद्र मोदी ने कहा, “नवीन पटनायक की तबीयत बिगड़ने के पीछे कोई षड्यंत्र है क्या? ये ओडिशा के लोगों को जानने का अधिकार है। कहीं इसमें उस लॉबी का तो हाथ नहीं है न, जो नवीन बाबू के नाम पर पर्दे के पीछे ओडिशा में सत्ता भोग रहे हैं? इस रहस्य से पर्दा उठना ज़रूरी है। इसकी जाँच आवश्यक है, इसीलिए 10 जून के बाद ओडिशा में भाजपा सरकार की विजय होगी तो हमारी सरकार एक स्पेशल कमिटी का गठन करेगी और ये जाँच करेगी कि अचानक नवीन बाबू की तबीयत क्यों गिरती जा रही है, उनकी तबीयत के साथ ये क्या हो रहा है। सारे तथ्य खोज कर निकाले जाएँगे।”
Every well wisher of Naveen Babu is worried at the sudden deterioration of his health in the last year. Is there any lobby behind this?
After our Government is formed in Odisha, a special committee will be formed to investigate this issue and bring out the complete truth. pic.twitter.com/dZFPKCizL5
मयूरभंज के बाद बालासोर में भी पीएम मोदी ने ये बातें दोहराई। उन्होंने जनता से भी पूछा कि नवीन पटनायक का स्वास्थ्य अचानक गिरने की जाँच होनी चाहिए कि नहीं, सारी सच्चाई सामने आनी चाहिए कि नहीं। VK पांडियन ने अक्टूबर 2023 में BJP ज्वाइन की थी। वो 2000 बैच के ओडिशा कैडर के अधिकारी हैं जो नवीन पटनायक के निजी सचिव भी रहे हैं। दिल्ली में पढ़ाई-लिखाई के बाद उन्होंने पंजाब में बतौर IAS नौकरी की, फिर एक उड़िया लड़की से शादी के बाद ओडिशा पहुँचे।
तमिलनाडु के रहने वाले VK पांडियन ने कालाहांडी के धरमगढ़ के सब-कलक्टर के रूप में 2002 में काम किया था। 2007 में वो मयूरभंज के DM बने। किसानों और विकास से जुड़े कार्यों को लेकर उन्हें राष्ट्रपति सम्मान भी मिला। 2011 में वो ओडिशा सीएम के सचिव बने। कई वीडियो में उन्हें कभी नवीन पटनायक के काँपते हाथों तो कभी काँपते पाँवों को नियंत्रित करते हुए देखा जा सकता है। 77 वर्षीय नवीन पटनायक के बाद उन्हें ही BJD में उनका उत्तराधिकारी माना जा रहा है।