"कमलेश सर, मेरा नाम संजय है। मेरी बहन को एक मुस्लिम लड़के ने अपने प्यार में फँसा लिया है।" - संजय बने मोइनुद्दीन ने कमलेश तिवारी को यही फर्जी कहानी सुना कर बातचीत को आगे बढ़ाया। उसकी कहानी सुलकर कमलेश आवेश में आ गए और...
"ये बेहूदा है कि हेलीकॉप्टर एक पुष्पक विमान है। उसमें तीन मॉडल मेकअप करके राम, लक्ष्मण और सीता बनकर आते हैं। फिर वहाँ मौजूद लोग उनकी पूजा करते हैं। मैं इस देश में ये सब नहीं देखना चाहता हूँ। ये वाहियात है।"
नृशंस हत्या का विरोध करने और हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करने के बजाय जमीयत-उलेमा-ए-हिंद हत्यारों के बचाव में सामने आया है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि हत्यारों को बचाने में जो भी कानूनी खर्च आएगा, उसे वो वहन करेंगे।
"राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार मुझे परेशान कर रही है। राज्य की पुलिस एक महिला के आत्महत्या के मामले में मेरी बेटी और परिवार के सदस्यों के फोन टैप कर रही है, साथ ही पीछा भी करती है। इस मामले में मुझे 2 बार क्लीन चिट मिल चुकी है, इसके बावजूद कॉन्ग्रेस सरकार ने इस केस को दोबारा से चालू किया है।"
दुबई में दिवाली समारोह के इस अनूठे कार्यक्रम में काफ़ी संख्या में लोग मौजूद थे। जैसे ही पुलिस बैंड ने लोगों के लिए ‘जन-गण-मन’ बजाया, भीड़ खड़ी हो गई और जब राष्ट्रगान ख़त्म हुआ उस वक़्त लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई, वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
अपनी दरिद्रता की स्थिति में भी याचक को निराश न करना पड़े, इसलिए घर में मौजूद एकमात्र खाने योग्य वस्तु का दान करते ब्राह्मणी को देख उनके मुख से देवी लक्ष्मी की स्तुति में एक स्त्रोत फूट पड़ा। उन्होंने माँ लक्ष्मी से उस परिवार की निर्धनता दूर करने के लिए जो प्रार्थना की, उसे 'कनकधारा स्त्रोत' के नाम से जाना जाता है।
समीकरण कि अगर भाजपा को सत्ता से बाहर रखना ही ध्येय है तो शिव सेना के 56, कॉन्ग्रेस के 44 और एनसीपी के 54 की सरकार आराम से बहुमत के लिए ज़रूरी 145 विधायकों के सामने 154 खड़े कर सकती थी। लेकिन.....
सबके अंत में एक ही मकसद: कमलेश तिवारी की गर्दन काटनी है। ये किसी व्यक्ति की सोच नहीं है, ये सामूहिक सोच है जो किसी व्यक्ति के माध्यम से फलित होती है। कमलेश तिवारी की हत्या अशफाक और मोइनुद्दीन ने ही नहीं, एक मजहब ने की है जो ऐसे लोगों को रोकना तो छोड़िए, उनकी निंदा तक नहीं कर पाता।
1996 और 2005 का हरियाणा विधानसभा चुनाव - दोनों बार ओम प्रकाश चौटाला हार गए। दिलचस्प कि दोनों बार चौटाला बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे थे। आखिर दोनों उन्हें हराया किसने - रणदीप सुरजेवाला ने। लोग उन्हें जाइंट किलर कहने लगे। लेकिन फिर वो राहुल गाँधी के करीबी हुए और इतिहास गवाह है कि...
इस ऑडियो में हत्यारे के पिता-बीवी दोनों लगातार अशफाक से गुजरात आने की गुजारिश करते सुनाई पड़ रहे हैं। लेकिन अशफाक कह रहा है कि गुजरात आना उसके लिए पॉसिबल नहीं हैं।