जरावता ने वहीं से जीत दर्ज की है, जहाँ पटौदी पैलेस है, मतलब जहाँ कुछ दिन पहले सैफ अली खान अपनी बेगम करीना कपूर खान के जन्मदिन को मनाने के लिए अपने बेटे तैमूर संग आए थे।
दिलचस्प यह है कि भले ही इसके उद्घाटन की तारीख 9 नवंबर की रखी गई है लेकिन सोशल मीडिया पर करतारपुर कॉरिडोर की चमचमाती झलक देखने को मिल गई है। ट्विटर पर बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने कॉरिडोर की वीडियो डाली है और...
रणजीत सिंह चौटाला के अलावा रणधीर गोलन, बलराज कुंडू, राकेश दौलताबाद और गोपाल कांडा ने भी राज्य में भाजपा सरकार बनाने के लिए अपने समर्थन की स्वीकृति दी है।
“कुल 307 ब्लॉकों में से निर्दलीय ने 217 ब्लॉक जीते, जबकि भाजपा को 81 ब्लॉक मिले। 1 ब्लॉक कॉन्ग्रेस के खाते में आए। वहीं 8 ब्लॉक पर जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स (JKNPP) पार्टी ने जीत दर्ज की।”
NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर ने असम में सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे से संबंधित खबर को पढ़ते हुए दावा किया कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग असम में सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के ख़ुद 6 बच्चे हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को क़रीब दो दिन पहले ख़ुफ़िया विभाग से इस तरह की जानकारी मिली है। जानकारी मिलने के बाद हिन्दू नेताओं, आरएसएस के पदाधिकारियों और राजनेताओं की सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
यह सही है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की सीटें गिरी है। लेकिन, इसी आधार पर नतीजों का आकलन करना तथ्यों को अपने ही चश्मे से देखना है। इसका एक पक्ष यह भी है कि यह अगले पॉंच साल के लिए भाजपा के लिए ही जनादेश है।
पिछले 10-15 सालों में जनता ने इस बात को बखूबी समझा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में सत्ता-सुख की लालसा रखने वाला केन्द्रीय नेतृत्व यानी गाँधी परिवार पर गाहे-बेगाहे भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं। आरोप लगने से लेकर इसकी सच्चाई आने तक जनता एक मतदाता के रूप में अपना काम कर चुकी होती है। क्यों, क्योंकि खून-पसीना एक कर टैक्स भरने वाली जनता और करे तो क्या करे?
यूँ तो हरियाणा चुनावों में आज अभी तक किसी को पूर्ण बहुमत मिलने के आसार नहीं दिख रहे लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री और 'आधुनिक चाणक्य' कहे जाने वाले अमित शाह ने ट्वीट करके कहा है कि हरियाणा में भाजपा की सरकार बनेगी।
BJP 46 के मैजिक आँकड़े से पीछे रह गई है। पीछे तो कॉन्ग्रेस भी रह गई है। लेकिन मामला अंतर का है, मामला गणित का है। और यही गणित दुष्यंत चौटाला के किंग मेकर बनने के सपने पर भी पानी फेर रही है। जीत की खुमारी में जो मन में आए बोल लें, लेकिन वो कम से कम इस बार किंग मेकर नहीं बनने जा रहे हैं।