चाको और चाको टाइप्स चिरकुट लोग, भूल चुके हैं कि समय बदल गया है और गाँधी चालीसा का पाठ उन्हें सोनिया और राहुल की नज़र में तो 'अले मेला बच्चा' तक तो पहुँचा देगा लेकिन भारत की जनता से नहीं बचाएगा जिसने नेहरू और नकली गाँधियों के कुकर्मों को लगातार झेला है।
इस खबर के मूल हकीक़त को परखेे बिना इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना दिखाता है कि आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस प्रकार फेक न्यूज को फैलाने के लिए किया जा रहा है।
चीटिंग की ख़बर थी, लेकिन इसमें ‘विचित्र’ वाला कम्पोनेंट नहीं मिला। जैसे कि ‘लिंग में बाँधकर ले गए थे पुर्ज़े’ या ‘मलद्वार में रखा था कागज को’, जो कि लल्लनटॉप की विशेषता है। फिर खबर बनेगी कैसे जो लल्लनटॉप पत्रकार को मारक मजा दे दे!
इस तीन हिस्से वाली शृंखला में, नितिन गुप्ता (जो कि रिवाल्डो के नाम से भी जाने जाते हैं) कश्मीर समस्या को पुलवामा हमले के आलोक में देख रहे हैं। पहले एपिसोड में वो बता रहे हैं कि 'शिक्षा की कमी से आतंकवाद फैलता है' इस सोच का सच क्या है।
अरुण जेटली की मानें तो इस मामले में जिस तरह से 2007 और उसके बाद जाँच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, उससे साफ़ होता है कि कुछ संगठनों को बदनाम करने की कोशिश की गई ।
मिशेल द्वारा प्राप्त जानकारियों और रॉबर्ट वाड्रा पर भी नरेंद्र मोदी ने खुलकर बयान दिया। उन्होंने बताया कि मिशेल भ्रष्टाचार के बारे में बड़े खुलासे कर रहा है, लोग पकड़े जा रहे हैं। दामादश्री' पर पीएम मोदी का बयान- खुद को राजा-महाराजा समझते थे।
सत्तारूढ़ दल होते हुए भी, विपक्ष के साथ मिलकर काम करना एक प्रधानमंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी है। "यह कॉन्ग्रेस हो या ममता या मायावती, मैं उनके साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।"
2004, 2009 और 2014 के चुनावों में पहले तीन स्थान पर जो पार्टियाँ थीं, 2015 के विधानसभा चुनावों में वामपंथी पार्टी को जितनी सीटें (शून्य) मिलीं, और बेगूसराय के भूमिहारों द्वारा कमल छाप पर मुस्लिम को भी जिताने का पैटर्न, कन्हैया कुमार को तीसरे पोजिशन से आगे नहीं ले जाता दिखता।
खानदान विशेष के एहसानों और पुरस्कारों के बोझ तले दबा यह मीडिया गिरोह 2014 में सवाल नहीं पूछ पाया था, शायद तब तक कभी गाँधी परिवार ने इसे एहसास भी नहीं होने दिया था कि मीडिया का काम सवाल पूछना भी हो सकता है। सवाल पूछ पाने की यह वैचारिक क्रांति इस मीडिया गिरोह में 2014 के बाद ही देखने को मिली है।