अमेठी के रेलवे स्टेशन परिसर में राहुल गाँधी के विरोधस्वरूप एक पोस्टर लगाया गया है। इस पोस्टर में वह आतंकी मसूद अज़हर के साथ दिख रहे हैं। पोस्टर में राहुल गाँधी को जैश सरगना का पाँव छूते हुए दिखाया गया है।
राहुल गाँधी की हालात उस बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थी की तरह हुई पड़ी है, जिसे कल सुबह पेपर देने जाना है और वो आज शाम नोट्स बनाने बैठा है। उसे अभी सिलेबस भी खरीदना है, ‘मोस्ट इम्पोर्टेन्ट’ और वेरी-वेरी इम्पोर्टेन्ट सवाल लाल-नीले और तमाम रंगीन पेनों से रंग कर परीक्षा के मैदान में कूदना है।
बानगियों की कमी नहीं है यह जानने के लिए कि आखिर एक सेक्युलर समाज में ऐसी क्या कमी है जो अलगाववादियों को वह मंज़ूर नहीं, और जिससे कश्मीर को आज़ाद कराने के लिए बुरहान वानी और आदिल डार ने जान लेने और देने में कोई संकोच नहीं किया।
रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा कि यह फ़ैसला कितना सही और कितना गलत था- इस पर बहस हो सकती है, लेकिन किसी अधिकारी का नाम लेकर उसे कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है। अधिकारी तो बस अपनी ड्यूटी कर रहे थे, जो सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई थी।
रॉबर्ट वाड्रा की तरह राहुल गाँधी भी संजय भंडारी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। गाँधी परिवार का क़रीबी भंडारी एक हथियार डीलर है। राफेल सौदे के दौरान दसौं द्वारा उसे फटकार लगाई जा चुकी है।
500 आबादी वाले इस गाँव के 20 लोगों ने अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए पहाड़ काटकर 3 किलोमीटर की कच्ची सड़क बना दी। बच्चे अब 3 घंटे की जगह महज़ 30 मिनट में स्कूल तक का सफर तय कर लेंगे।
चुनाव आयोग भी फ़ेसबुक के साथ सहयोग करके चुनाव प्रक्रिया में उसकी भूमिका को मान्यता और स्वीकार्यता पाने में सहयोग कर रहा है। क्या चुनाव आयोग को फ़ेसबुक की यह सच्चाई पता है?