जानकारी मिली कि इस्लामी भीड़ हिंदुओं के घरों को अपना निशाना बना रही है। हमने अपने-अपने चारों बच्चों को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से निकाला और दूसरी गली में एक परिचित के घर पहुँचा दिया। हम इतने डर गए कि सोमवार को पूरे दिन और पूरी रात भूखे प्यासे बच्चों के साथ घर में कैद रहे।
मंदिर पर कब्ज़ा करने के साथ-साथ आसपास के घरों पर भी मुस्लिम भीड़ ने कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद मंदिर की छत से हिन्दुओं पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। साथ ही ताहिर हुसैन की इमारत की छत से भी पत्थरबाजी हो रही थी।
चाँदबाग़ में एक पुल है, जिसके दूसरी तरफ़ मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं। स्थानीय लोग इस पुलिया को 'बॉर्डर' भी कहते हैं। ताहिर ने घर इस तरीके से बनाया है कि उससे चारों ओर का इलाक़ा कवर हो और अंदर जो भी लोग हों, वे एकदम सुरक्षित रहें।
26 फरवरी का यह वीडियो ताहिर हुसैन की शह पर हुए दंगे का एक और सबूत है। पढ़िए, कैसे मंदिर में फँसे पंडित और उनकी पत्नी को कुछ हिंदुओं ने जान जोखिम में डाल बचाया। कहाँ हैं उनकी दो जवान बेटियाँ?
"हमारी बहन-बेटियों को भी लाठी उठानी पड़ी है। दंगाई आएँगे तो सबसे ज्यादा ख़तरा उन्हें ही है। हमने अपनी बहन-बेटियों को कह रखा है कि अगर हमें कुछ हो जाएँ तो वो पहले अपनी जान बचाएँ या ख़ुद मर जाएँ।"
23 फ़रवरी की शाम दंगाई शाहदरा में घुसे। दिलबर सिंह नेगी को निशाना बनाया। हाथ, पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया। इसके बाद वहॉं भगदड़ मच गई। नेगी के परिजन इतने दहशत में हैं कि अब भी मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
कुछ विडियो सामने आए थे जिसमें दंगाई ताहिर के छत से पत्थरबाजी करते और पेट्रोल बम फेंकते दिखे थे। अब उसके घर की छत से पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा मिला है। आरोप है कि आईबी कॉन्स्टेबल की हत्या उसके घर से निकली भीड़ ने ही की थी।
"मुस्लिम लोग जो सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, ये बहुत गलत कर रहे हैं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इन्होंने कई घरों का नाश कर दिया। इसमें एक घर हमारा भी बर्बाद हो गया।"
दिल्ली जब जल रही थी, तब मीडिया का एक वर्ग क्या कर रहा था? कोई दिल्ली पुलिस को गाली दे रहा था तो कोई कपिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहरा रहा था। जान भी गँवाए दिल्ली पुलिस और गाली भी वही सुने? जिस उपद्रव में गाँधी को फासिस्ट बताया गया, उसे गांधीवादी कैसे साबित किया जा सकता है?