तीखी मिर्ची

कटाक्ष… क्योंकि हर बात सीधी तरह से समझ में नहीं आती

लालू प्रसाद यादव

दूरदर्शी युगपुरुष, ‘चाराकंठ’ समाजवादी नेता लालू यादव – गोदी मीडिया छिपाता है, अमेरिका ने माना लोहा

90 के दशक में बिहार में किसी भी कार्य को करने के लिए, चाहे वो भवन निर्माण हो या दुकानदारी, सब के लिए एक अत्यंत ही 'सरल रंगदारी टैक्स' चुकाना पड़ता था। यह एक 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' जैसी व्यवस्था हुआ करती थी। जहाँ रंगदारी के एकमुश्त भुगतान के तुरंत बाद ही आप अपना काम करने के लिए स्वतंत्र हो जाते थे।
ट्रोल

ट्रोल-ट्रोलाचार्य संवाद: स्वधन्य पत्रकारों की वैचारिक नग्नता Vs वामपंथी षड्यंत्रों का रहस्योद्घाटन

थ्रेड में ट्रोल करने वाले अधम प्रकार के विस्तारवादी ट्रोल होते हैं। मध्यम कोटि के ट्रोल एक ट्वीट में चेतना शून्य कर देते हैं। उत्तम कोटि के ट्रोल एक वाक्य में ही अचेत कर देते हैं और सर्वोत्तम ट्रोल एक शब्द लिखकर ही नासिका लाल कर कर्णछिद्रों से धूम्र-वाष्प निष्कासन की प्रक्रिया का सूत्रपात कर देते हैं।
मणिशंकर अय्यर

भाजपा वाले मणिशंकर अय्यर को ढूँढ रहे थे, सच्चाई बाहर आई तो हँसते-हँसते पागल हो गए

यह व्यक्ति ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल के रडार में अपनी हरकतों की वजह से ही आया है। हमारे सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर हमें बताया कि यह व्यक्ति बह से शाम तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच ही रहकर उन्हीं के साथ घूम रहा है, लेकिन काम भाजपा का ही कर रहा है और अपनी ऊल-जुलूल हरकतों के कारण रोजाना चर्चा में बना है।
नेहरू-राजीव-राहुल गांधी

मिस्ट्रेसीकरण, ससुरालीकरण, राजनीतिकरण: दांडी यात्रा के बाद विन्ची-गाँधी यात्रा के 3 प्रमुख पड़ाव

जो मीडिया और क्रांतिजीव 5 साल तक मोदी की विदेश यात्राओं का लेखा-जोखा करते रहे, उन्हें नेहरू से लेकर राजीव गाँधी के भ्रमणों से रूबरू होना चाहिए, ताकि वो उसकी समीक्षा कर के बता सकें कि मिस्ट्रेसीकरण और ससुरालीकरण उनकी किसी विदेश नीति का हिस्सा थे?
रूहअफजा

रवीश का रूहअफजा – ठन्डे शरबत का गरम मामला

रवीश जी ने बताया कि भाजपा की रैली में आमरस और गठबंधन की रैली में रूहअफजा की माँग रहती है। उसके बाद से वे केवल रूहअफजा की सप्लाई ही करते हैं, क्योंकि उसका रंग लाल होता है, और जब हर ग्लास में रूहअफजा भरते हुए लाल सलाम कहते हैं तो उनकी आत्मा को ठंडक मिलती है।
अरविन्द केजरीवाल

आख़िरकार केजरीवाल को मिला हाथ का साथ, आपियों में खुशी की लहर

सूत्रों का तो ये भी कहना है कि जब भी केजरीवाल को कहीं पर थप्पड़ या घूँसा पड़ता है, तब-तब आम आदमी पार्टी के चंदों में व्यापक उछाल आता है। भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए महात्मा गाँधी ने अनशन का मार्ग चुना था और संत केजरीवाल ने मोदी के चंगुल से देश को छुड़ाने के लिए अगर अपनी कुटाई करवाने का मार्ग चुना है तो इसमें बुराई है क्या?
राहुल गाँधी, राजदीप

Exclusive: डिम्पल बाबा का अप्रकाशित गैर राजनीतिक इंटरव्यू

अब तुम मेरी कहीं डील करा दो ताकी मैं राष्ट्रहित में इस साक्षात्कार को दबा कर किसी पॉश इलाक़े में कोठी प्राप्त करूँ और महान पत्रकार के नाम से जाना जाऊँ। जब गर्मियों में उत्तर प्रदेश में चुनाव हो तो कश्मीर से रिपोर्ट करूँ।
ये तस्वीर मसूद अज़हर की नहीं है

कुणाल कामरा सस्ते कॉमेडियन ज़रूर हैं, लेकिन उन्हें ग्लोबल आतंकी बताना गलत: UN

हमारी राय यही है कि लोगों को सोशल मीडिया पर इस प्रकार की तस्वीरों को वायरल करने से बचना चाहिए। इसकी कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उन्हें कॉन्ग्रेस से जुड़े होने के बाद भी सही कॉमेडी ना कर पाने की वजह से टारगेट किया जा रहा है, जो कि निंदनीय है।
मोहल्ला क्लिनिक

कंटाप पड़ने के बाद केजरीवाल पहुँचे मोहल्ला क्लिनिक, जुगाली कर रही गायों ने किया इलाज से इनकार

भाड़े पर उपलब्ध फैक्ट चेकर्स के समूह फॉल्ट न्यूज़ ने उन्हें यकीन दिलाने में मदद करते हुए बताया कि मोहल्ला क्लिनिक को उन्होंने ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से सफलतापूर्वक उच्चस्तरीय सुविधा से लेस घोषित कर दिया है और अब UNESCO ने भी उसे सर्वश्रेष्ठ मोहल्ला क्लिनिक घोषित किया है।
सनी देओल

एन्टी नेशनल्स को चुन-चुनकर लाहौर छोड़ने के लिए बनेगा पृथक ‘तारा पाजी’ मंत्रालय

समर्थकों का तो यहाँ तक भी कहना है कि जिस तरह से ‘तारा पाजी’ ने गदर फिल्म में चारों ओर से दुश्मनों से घिरे होने के बावजूद भी हैंडपंप उखाड़ कर खलबली मचा दी थी, उन्हें भाजपा में जोड़ने में बहुत देर की गई है। राष्ट्रवादियों का कहना है कि मोदी जी ने...
नरेन्द्र मोदी जलदस्यु रूप में

मोदी की सारी रैलियों पर रोक, चुनावों तक जलदस्यु बन कर रहें: EC और SC

पहले विवेक ओबरॉय अभिनीत मोदी फिल्म पर रोक लगवाने के बाद विपक्षी दलों को यह तर्क सूझा कि अगर फिल्म पर रोक लगवाई जा सकती है, तो फिर आदमी पर क्यों नहीं। इसके तुरंत बाद ही गिरोह सक्रिय हो उठा।
रॉबर्ट वाड्रा

‘जीजाजी’ बने प्रचार समिति के अध्यक्ष: कई बड़े कॉन्ग्रेसी नेता इनके नीचे, जानें उनके Qualifications

रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी चुनाव प्रचार समिति तैयार कर ली है। इसके लिए कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने आवेदन दिया था लेकिन उनमें से कुछ को ही चुना जा सका। वाड्रा अब अपनी इस चुनाव प्रचार समिति के साथ भारत भ्रमण पर निकलेंगे। जानिए कौन-कौन हैं उनकी टीम में?

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