तीखी मिर्ची

कटाक्ष… क्योंकि हर बात सीधी तरह से समझ में नहीं आती

श्री राबर्ट ठठेरा की डायरी का एक पन्ना

राबर्ट ठठेरा की ‘लाल डायरी’ लगी ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल के हाथ, गंभीर खुलासे

जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए ‘सॉल्ट न्यूज़’ से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके ‘वायरल’ होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया।
नरेंद्र मोदी राहुल गाँधी

देशहित में कॉन्ग्रेस को वोट देकर 10% सीटें जिताइए, आपको राफेल की कसम है

जैसे शेयरिंग सवारियाँ ढोने वाला ऑटो ड्राईवर, आवश्यकतानुसार ट्रैफिक पुलिस वाले की मुट्ठी गर्म कर देता है, और प्रभु का तीसरा नेत्र भी इस दुर्लभ संयोग को देखने से वंचित रह जाता है। वैसे ही मोदी ने बंद मुट्ठी करके ₹15 हजार करोड़ के दो स्पेशल नोट जूनियर अम्बानी की जेब में डाल दिया होगा।
बेरोजगार vs चौकीदार

कॉन्ग्रेस कर रही है बेरोजगारों की भर्ती, CD वाले से लेकर ‘कमरा’ वाले कतार में

चौकीदार vs बेरोजगार ट्विटर पर चौकीदार और बेरोजगार की लड़ाई में योद्धा अपने अपने शिविर से निकल चुके हैं। सबने अपने पिछले रिकॉर्ड और क्षमता के साथ न्याय करते करते हुए अपने-अपने टैग और प्रोफ़ेशन चुन लिए। इसमें चौकीदार बनी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेना और बेरोजगार बनी है कॉन्ग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता टीम! कॉन्ग्रेस के बेरोजगारों में सबसे पहला नाम जो नजर आया, वो है राहुल गाँधी के बाद पार्टी के दूसरे युवा नेता, कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद के कड़े प्रतिद्वंदी और ‘पाटीदार आंदोलन फेम’ हार्दिक...

मोदी… वाजपेयी नहीं हैं – मर्यादा की LoC और आधी रात घर में घुसकर मारने वाले में अंतर है

जब वाजपेयी सरकार गई तो उस वक्त अटल जी का घुटनों का ऑपरेशन हो चुका था, वे ठीक से चल भी नहीं पाते थे। लेकिन अभी का जो नेता है उसका दिल, दिमाग और घुटना एकदम ठीक और ठिकाने पर हैं, इसीलिए वह हवाई जहाज की खड़ी सीढ़ियों को भी दौड़ते हुए चढ़ जाता है।
मुलायम

अभी असली मजे ‘भक्त’ ही ले रहे हैं, बाकियों को आ रही है खट्टी डकारें

"भेन मायावती तो सुषमा स्वराज के बाद देश की दूसरी सबसे ग़जब की वक्ता हैं हीं, इसलिए उनकी बातेंऊँ सारी सही हैं, लेकिन एक सही बात आज हमहूँ कहि दे रहे हैं, चाहें तो लिख कें ले लेओ कि दुनिया इतें की वितें हे जाय, आवेगो तो मोदीअई"
राहुल गाँधी के अनेक रूप

कॉन्ग्रेस भारत का वो बेजोड़ विपक्ष है जिसकी तलाश राष्ट्रवादियों को 70 सालों से थी

मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए कॉन्ग्रेस अकेले मैदान में नहीं रही बल्कि उसने अपने गोदी मीडिया, सस्ते कॉमेडियन्स, न्यूट्रल पत्रकारों के गिरोह और अवार्ड वापसी गैंग जैसी घातक टुकड़ियों को भी इस प्रक्रिया में एड़ी-छोटी का जोर लगाने पर मजबूर किया।
महान दलित नेता श्री रावण जी फिर से गिरफ्तार, चुनाव आचार संहिता, धारा 144 के उल्लंघन का आरोप

एक और ‘रावण’ ने भंग की मर्यादा, ‘ब्राह्मणवादी’ पुलिस ने किया गिरफ्तार

देवबंद पुलिस द्वारा आचार संहिता और 144 के उल्लंघन में गिरफ्तार करते ही इस वज्रकाय योद्धा को अचानक तबियत ख़राब हो जाने के कारण अस्पताल ले जाना पड़ा।
राहुल गाँधी

मसूद अज़हर जी, जीजा जी, आपको लगता है मैं इस जन्म में सेंसिबल बात कर पाऊँगा?

राहुल गाँधी की हालात उस बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थी की तरह हुई पड़ी है, जिसे कल सुबह पेपर देने जाना है और वो आज शाम नोट्स बनाने बैठा है। उसे अभी सिलेबस भी खरीदना है, ‘मोस्ट इम्पोर्टेन्ट’ और वेरी-वेरी इम्पोर्टेन्ट सवाल लाल-नीले और तमाम रंगीन पेनों से रंग कर परीक्षा के मैदान में कूदना है।
पाक-प्रेमी

राजदीप ने बरखा, दुआ और गुप्ता की लगाई क्लास, सबने कहा – हेल हिटलर! Video में सब क्लियर है

पाकिस्तान के घर में घूसने की 'हिम्मत' कर दी प्रधानमंत्री ने! ऐसे में पाक-प्रेमी भला कैसे शांत बैठते! तय रणनीति के तहत वामपंथी पत्रकारों और विरोधियों ने एयर स्ट्राइक के बाद मोदी सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की। और...
शिवलिंग

एयर स्ट्राइक का सबूत माँगता लिबटार्ड गिरोह, महाशिवरात्रि पर दूध चढ़ाने का विरोध करना भूला

हमें यह जानकारी पतंजलि का विज्ञापन पाने वाले 'प्राइम टाइम' के प्रोड्यूसर से मिली जिन्हें हमने दस रुपया प्रति चैट स्क्रीनशॉट की दर से देने का वायदा किया।
राहुल गाँधी और प्रियंका

राजीव कंधे पर लाए थे कम्प्यूटर, सोनिया ने अभिनंदन को बिठाया था कॉकपिट में

याद रखिए, इस देश में जो भी हुआ वो कॉन्ग्रेस ने ही किया है। वरना आज भी सिर्फ पत्थर ही पत्थर होता। हम पत्थर खाते और पत्थर ही... समझने और कॉन्ग्रेस के आगे सिर झुकाने के बजाय अंड-बंड बोलना बंद कीजिए।
BBC हिंदी

‘बहनोई’ आतंकवादी के लिए BBC हिंदी का उमड़ा प्यार, पत्रकारिता को किया तौबा-तौबा!

पत्रकार रहीमुल्ला ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, यह कुछ हद तक समझा जा सकता है लेकिन आप दिल्ली में बैठ कर इसे काट-छांट सकते थे। लेकिन नहीं। 'बहनोई' की इज्जत में लिखे गए शब्दों पर संपादकीय कैंची कैसे?

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