करतारपुर गलियारे के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को 'लाइफटाइम अचीवमेंट' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन पेंच यह है कि इमरान को यह अवॉर्ड भारत विरोधी सिख चरमपंथ और खालिस्तानी आंदोलन से जुड़ी संस्था से मिला है, जिसके लिए लंदन के मेयर सादिक खान...
वायरल हुए वीडियो में, महिला को अरबी भाषा में बोलते हुए सुना और देखा जा सकता है। एक जगह वो यह कहती हुई नज़र आती है, "अगर उसका अबाया सुंदर होता, तो मैं उसके साथ छेड़खानी करती।"
पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने इमरान खान द्वारा आर्थिक संकट से उभरने के लिए दिए 5 समाधानों यानी दूध, अंडा, मुर्गा, भैंस-बकरी, नीलामी और गैस-तेल की खोज को नए पाकिस्तान के लिए 5 स्तंभ बताया है। और इनसे जुड़े इमरान खान के बयानों का जिक्र करते हुए उनकी ख़िल्ली उड़ाई हैं।
लेखक, indiafacts.org और अद्वैत एकेडमी के सम्पादक व धर्मशास्त्रों के जाने-माने टिप्पणीकार नितिन श्रीधर ने धर्म से जुड़े कई पक्षों पर ऑपइंडिया से बात की, जिसमें राजनीति, लोकतंत्र के बारे में दृष्टिकोण, हाल ही में आए सबरीमाला और राम मंदिर के फैसले, धर्म की व्यवहारिक परिभाषा आदि शामिल थे। पेश है इस साक्षात्कार के मुख्य हिस्सों का सारांश:
यह पंजाब के लिए स्वतंत्रता के समर्थन में कम से कम 5 मिलियन वोट प्राप्त करना चाह रहा था। जिसके बाद वह संयुक्त राष्ट्र से सम्पर्क करने की योजना बनाता। पंजाब पुलिस का कहना है कि SFJ और रेफरेंडम 2020 दोनों ही पाकिस्तान द्वारा समर्थित हैं।
"हिन्दू धर्मशास्त्र कौन पढ़ाएगा? उस धर्म का व्यक्ति जो बुतपरस्ती कहकर मूर्ति और मन्दिर के प्रति उपहासात्मक दृष्टि रखता हो और वो ये सिखाएगा कि पूजन का विधान क्या होगा? क्या जिस धर्म के हर गणना का आधार चन्द्रमा हो वो सूर्य सिद्धान्त पढ़ाएगा?"
तानाजी का ट्रेलर जैसे ही रिलीज हुआ... क्विंट ने इस पर एक लेख लिख मारा। माफ कीजिए, लेख नहीं - जहर लिखा है, जहर! 'लिबरल' नेहरू से लेकर 'मसकुलर' मोदी तक को ठूँस दिया है इसमें। अकबर इनके लिए 'द ग्रेट' हो जाता है लेकिन शिवाजी पर इनकी सुलग जाती है!
विवाह सम्पन्न होने के बाद मीरा ने अपना पारिवारिक जीवन त्यागकर वृंदावन जाने का फ़ैसला किया है। मीरा ख़ुद पेशे से एक प्राइवेट कंपनी में सहायक मैनेजर के पद पर थीं लेकिन अब...
सहिष्णुता, प्लूरलिज्म आदि अपने मूल को बचाते हुए, दूसरों को ससम्मान उनके मूल को बचाने में सहयोग देना है। इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि चूँकि उसे पता है कि मंदिर में घंटी बजाना होता है तो वो मंदिर की घंटी तक न पहुँचे तो हम उसे अपने सामने शिवलिंग पर लात रख कर घंटी तक पहुँचते देखते रहें, और कुछ न करें।
जब मुस्लिम और ईसाई एक तरफ अल्पसंख्यक होने के नाम पर अपना मजहब और उसकी शुद्धता बनाए रखेंगे और दूसरी तरफ भजन, गीत, संगीत के आभूषणों के साथ संस्कृत भाषा सीखकर आपके हिन्दू धर्म, सनातन मूल्यों, वैदिक साहित्य और अनुष्ठानों की अपने तरह की व्याख्या करेंगे। तब आप सर्वधर्म समभाव का झुनझुना बजाते रहिएगा।