अमेरिका से शरण मॉंगने वाली इस्माइल फिलहाल अपनी बहन के घर ब्रुकलीन में रह रहीं हैं। उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों से बचकर वह अमेरिका आने में कैसे सफल हुईं। केवल इतना बताया है कि वो हवाई जहाज से अमेरिका नहीं पहुँचीं।
पाकिस्तान के संसदीय कार्य राज्य मंत्री अली मोहम्मद खान को फैसला वापस लिया जाना नागवार गुजरा है। उन्होंने ट्वीट कर स्कूल की बच्चियों के लिए बुर्का को अनिवार्य करने के फैसले को अच्छा कदम और इस्लाम तथा मदीना के उसूलों के हिसाब से बताया था।
"वे क्या करना चाहते हैं, यह उनकी इच्छा है। हमने उन्हें आतंक को मुख्यधारा बनाते देखा है। अब वे नफ़रत की भाषा को मुख्यधारा में इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह उनकी इच्छा है, अगर वे यही करना चाहते हैं। ज़हरीले शब्द अधिक समय तक नहीं चलते।"
एक यूजर कहता है, "और कितना नीचे गिरेंगे जनाब, इसके नीचे दोजख में ही जाना होगा।" जबकि दूसरा यूजर कहता है कि ऐसा ही (गिरना) पाकिस्तान सरकार के साथ होने वाला है। इस वीडियो को देखने के बाद ऐसे ही मजेदार कॉमेंट लोगों ने किए।
स्थानीय पुलिस के अनुसार यह हमला अमेरिका के राष्ट्रपति भवन White House से महज़ 2.1 मील (3.5 किमी) की दूरी पर हुआ है। हल्के रंग की निसान सेडान में बैठे संदिग्धों के पास AK असॉल्ट राइफल होने का संदेह पुलिस ने जताया है।
UNHRC ने पर्याप्त संख्या (16) में सदस्यों का समर्थन प्राप्त न कर पाने के चलते पाकिस्तान की जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव लाने की कोशिशों को ख़ारिज कर दिया है। हिंदुस्तान की यह बड़ी कूटनीतिक जीत है।
डेविड कैमरून ने अपनी पुस्तक में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के ब्रिटेन दौरे में वेंबले स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में साथ शिरकत करने की घटना को भी याद किया है। लिखा है कि यह वेंबले स्टेडियम में आयोजित सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक था।
RBI गवर्नर दास ने उम्मीद जताई कि सऊदी संकट कुछ समय के लिए है और महंगाई पर इसका सीमित प्रभाव होगा। दास ने कहा कि विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार को खर्चे कम करना होगा। दास ने भरोसा जताया कि महंगाई अगले 12 महीनों तक 4 % के नीचे बनी रहेगी।
Dawn में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा "नमृता चंदानी के गले पर पड़े 'निशान रस्सी के थे।' पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि 'आत्महत्या का मामला है लेकिन गला घोंटने के साफ निशान दिखाई देते हैं।"
जो लोग ह्यूस्टन में मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वे कश्मीर अलगाववादी हैं। वे खुलेआम भारत से कश्मीर की आज़ादी की गुहार लगा रहे हैं। और इस बार इनका साथ दे रहे हैं खालिस्तानी आंदोलन से जुड़े हुए सिख भी!