पालघर में साधुओं की हत्या पर चुप। केरल में ईसाई लड़कियों के साथ 'लव जिहाद' पर चुप। चर्च में यौन शोषण पर चुप। लेकिन, 2 ननों के साथ पूछताछ क्या हुई राहुल गाँधी तिलमिलाने लगे। फिर मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन क्यों?
रेडियो चुप है। कोई ब्लैक स्क्रीन नहीं है। कहीं पेंट हुए चेहरे नहीं हैं और कोई मीम नहीं है। सिर्फ़ चुप्पी है। यही चुप्पी तुम्हारे रक्षक की हकीकत है। ये चुप्पी ही आज का शो है।
दोनों पक्षों के सामने आने से पहले ही 'सॉरी आसिफ' ट्रेंड होने लगता है, मीडिया उसका इंटरव्यू लेने लग जाता है, 'भीम आर्मी' उसके घर पहुँच जाती है और मंदिरों के विरोध में प्रोपेगंडा फैलाया जाता है - क्या ये सब कुछ ही देर में अचानक हो गया?
वे केवल बीजेपी को हराना चाहते हैं बाकी उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है कि कौन जीतता है। यहाँ तक कि अब्बास सिद्दीकी के बंगाल जीतने पर भी वे खुश हैं। उनका दावा है कि जब तक मोदी और भाजपा को अनिवार्य रूप से सत्ता से बाहर रखा जाता है। तब तक ही सही मायने में लोकतंत्र है।
असल में कॉन्ग्रेस नेता तो झूठ और सच के फेर में नहीं फँसते- वे तो बस वही बोलते हैं जो राहुल गाँधी को पसंद होता है। केरल की जनता के साथ भी राहुल यही प्रयोग कर रहे हैं।
'मछुआरों के लिए कोई मंत्रालय नहीं है' - जिस तरह से राहुल गाँधी दक्षिण भारत की समुद्री सीमाओं पर घूम-घूम कर झूठ फैला रहे हैं और पालतू मीडिया कोई फैक्ट-चेक नहीं कर रहा, इससे देश का नुकसान हो रहा है।
बस्तर से कॉन्ग्रेसी सांसद दीपक बैज ने जीडीपी के मुद्दे को मोदी की दाढ़ी से जोड़ दिया, कॉन्ग्रेसी नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने बंगाल-चुनाव के साथ तो वहीं तेजप्रताप यादव ने पेट्रोल के दामों के साथ।