मलाला का न्यूज़ीलैंड के मुद्दे पर दुख प्रकट करना और रवीना और रीना पर शांत हो जाना दिखाता है कि इंसान कितना ही प्रोग्रेसिव क्यों न हो जाए, लेकिन उसके भीतर मज़हब, और मज़हब का डर हमेशा जिंदा रहता है।
झूठ का पर्दाफाश होने के बाद भी ये उम्मीद मत रखिए कि दिल्ली के ठग और #बेगुसरायकाबकैत अपनी बेशर्मी के लिए कोई माफ़ी माँगेंगे। ये वो लोग हैं जो अपने गिरोह के लोगों या खुद की की हुई यौन शोषण, बलात्कार जैसी हरकतों पर भी चुप्पी साधते हैं।
भारतीय हितों के विरुद्ध पाकिस्तान और पाकिस्तान पोषित आतंकवाद के पक्ष में बैटिंग करना यह सोचने पर विवश करती है कि कॉन्ग्रेस ऐसा अनजाने में नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत नेहरू की नीति का अनुसरण करते हुए करती है।
कॉन्ग्रेस की चिड़चिड़ाहट का कारण केवल और केवल पीएम मोदी हैं। यह चिड़चिड़ाहट और बौखलाहट किसी न किसी रूप में सामने आती रहती है। इस बार यह झुंझलाहट पी चिदंबरम के रूप में सामने है।
एक रोती हुई माँ, बाहर विनती करता पूरा परिवार, मौलवियों-उलेमाओं द्वारा मस्जिद के लाउडस्पीकर से आग्रह, सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों को बचाने की कोशिश, इन सबके बीच आतंकियों ने कुछ ऐसा किया जो उनसे सहानुभूति रखने वालों की पोल खोल देगा।
भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता नेता बन सकता है, नेता से क्षत्रप, क्षत्रप से राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तक बन सकता है, लेकिन वह चाहकर भी पार्टी को हायजैक नहीं कर सकता है, चाहे वह कितना भी कद्दावर बना रहे।
ये बहुत ही धूर्त एडिटर का कमाल होता है जब वो लड़की के वक्षस्थल को घूरने को 'ग़लत बात' कहते हुए हेडलाइन बनाता है, और इमेज में वैसी ही तस्वीर लगाता है। इस आलोचना से वो अपने आप को इम्यून करना चाहता है कि 'मैं तो इस तरह के इमेज को शेयर न करने की सलाह दे रहा था'।
अरविन्द केजरीवाल के कारनामों का ताजा उदाहरण है उनका एक ट्वीट जिसमें एक प्रतीकात्मक चित्र में झाड़ू लिया हुआ व्यक्ति ‘स्वस्तिक’ चिह्न को खदेड़ कर भगा रहा है। इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस प्रकार का हिन्दू विरोधी चित्र केजरीवाल की टीम ने खुद बनाया हो।