न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि न्यायालय इस स्थिति से बेखबर नहीं है कि पीड़िता को इस हमले से जो भावनात्मक आघात पहुँचा है, उसकी भरपाई दोषियों को सजा देने या फिर किसी भी मुआवजे से नहीं की जा सकती।
फ़िरोज़ पारसी थे। क्या कॉन्ग्रेस इसीलिए फ़िरोज़ को याद नहीं करना चाहती क्योंकि उनका नाम आते ही उनके कारण नेहरू के मंत्री के इस्तीफा देने की बात फिर से छेड़ी जाएगी? क्योंकि बड़े कॉंग्रेस नेताओं व उद्योगपतियों के बीच संबंधों की बात फिर से चल निकलेगी?
रक्षा मंत्री रहते हुए मनोहर पर्रिकर ने यह सुनिश्चित किया कि रक्षा उत्पादन में भारतीय कंपनियों के हित सुरक्षित रहें। ऐसी नीतियाँ बनाई गईं जिससे भारतीय इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिले। मध्यम और छोटे उद्यमियों (MSME) को कैपिटल दिया गया जो पहले बड़ी इंडस्ट्री पर निर्भर थे।
इन मठाधीशों को लगता था कि वे ही सबसे बड़े ज्ञानी हैं लेकिन अब एक बच्चा भी इनके तर्कों को काट देता है। इसीलिए अब वे क्रिया की प्रतिक्रिया से सहमे हुए हैं। उनका प्रोपेगेंडा अब कार्य नहीं कर रहा है। राष्ट्रवादियों के लिए यह एक बड़ी सफलता है।
'चौकीदार' को 'चोर' कौन कह रहा है ? वही जो '5000 करोड़ रुपए' के 'नेशनल हेराल्ड केस' में ख़ुद अपनी माताजी सहित जमानत पर चल रहा है, जिनके जीजाजी देश के सबसे बड़े 'भू-माफिया' हैं, जिनके पिताजी की 'बोफोर्स घोटाले' में संलिप्तता थी?
हिन्दी में कहें तो हताश कॉन्ग्रेस के लिए हाथ-पाँव मारकर, नदी में विसर्जन का नारियल निकालने के चक्कर में मरे हुए आदमी की काई जमी खोपड़ी का भी मिल जाना एक उपलब्धि ही है।
हम उनके न्यूजीलैंड हमले पर दुख जाहिर करने पर सवाल नहीं उठा रहे। उठाएँगे भी क्यों? हम तो जानना चाहते हैं कि पुलवामा पर उनके चुप रहने के क्या कारण हैं? 'कर्मभूमि' की रक्षा पर तैनात सैनिकों पर हुए हमले से जिनका दिल नहीं पसीज़ा वो न्यूजीलैंड हमले पर एकदम से भावुक हो उठे! कैसे?