विचार

कंप्यूटर बाबा की सत्ता के गलियारों में वापसी, कमलनाथ ने आनन-फ़ानन में की नियुक्ति

पिछले साल जब कंप्यूटर बाबाजी को मार्च में शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, उस समय वह और योगेन्द्र महंतजी 15-दिवसीय नर्मदा स्कैम यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे।

गिलगित बल्तिस्तान: LoC के उस पार का भारत, जहाँ आज भी लोग भारतीय सेनाओं का इंतज़ार करते हैं

कुछ साल पहले तक दूरदर्शन समाचार गिलगित बल्तिस्तान क्षेत्र के मौसम की जानकारी भी देता था लेकिन अब वह जानकारी भी नहीं मिलती। जबकि यह स्थापित सत्य है कि नियंत्रण रेखा के उस पार के लोग बड़ी उम्मीदों से भारत की ओर देख रहे हैं।

महारानी वीणापाणि देवी के निधन से ममता का बिगड़ा चुनावी गणित, BJP के हिस्से में 1.5 करोड़ वोट!

मतुआ समुदाय की मार्गदर्शिका वीणापाणि देवी ठाकुर के निधन के साथ ही बंगाल का चुनावी गणित बदलता नज़र आ रहा है। एक पत्र में उन्होंने नागरिकता विधेयक को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना की थी। 1.5 करोड़ की जनसंख्या वाला मतुआ समुदाय वैष्णव सम्प्रदाय का हिस्सा है।

सत्ता पाकर शिक्षा को कैसे बर्बाद किया जाता है यह कॉन्ग्रेस से सीखना चाहिए

देश के किसी भी विश्वविद्यालय में किसी भी आमूल चूल बदलाव को फासीवाद का नाम देने वाले कांग्रेस और वामदलों ने एफटीआईआई के पूर्व चेयरमैन गजेंद्र सिंह चौहान का विरोध इतने निचले स्तर पर आकर किया था कि आखिरकार उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया।

होली के पर्व पर ‘पानी’ की तरह बर्बाद होती किराए की कलमों की स्याही

एक दिन की होली को पानी की बर्बादी घोषित करने वाले लोग आपको ये नहीं बताते कि तथाकथित शुद्ध जल आरओ (रिवर्स ओसमोसिस) से निकालना हो तो एक लीटर पानी निकालने में कम से कम नौ लीटर पानी बर्बाद होता है।

क्रिकेटर की मिलिट्री कैप हो गई ‘खतरनाक’, पाक अकुपाइड पत्रकार कब सुधरेंगे?

ऐसे ही लोग पत्थरबाजों के समर्थन में खोज-खोज कर आर्टिकल लिखने को तैयार रहते हैं लेकिन जैसे ही भारतीय सेना इनके ख़िलाफ़ कदम उठाती हैं तो इन्हें उससे गुरेज़ होता है।

दूध माँगोगे तो भी चीर देंगे: जब पाक की पूँछ के नीचे पेट्रोल डालकर भारत अपने काम करता रहा

इस बार भी पाकिस्तान ने अपने न्यूक्लिअर कमांड अथॉरिटी की मीटिंग बुलाकर ब्लफ खेलने की कोशिश की थी, लेकिन परिणाम में उसे भारत की चुप्पी की जगह, उसके अत्याधुनिक F16 को भारतीय मिग का शिकार होना पड़ा।

जब अदरक-लहसुन तहज़ीब का भार हिन्दुओं की रीढ़ तोड़ता है, तब मध्यस्थता होती है

पहले तो ऐसे मसलों पर बात ही नहीं होनी चाहिए, और अगर हो भी रही है तो खुदाई में निकले मंदिर और बक्सों में बंद सबूतों को बाहर लाकर, उस पर निर्णय हो, न कि दलाली से, जिसके लिए आपने मीडिएशन और मध्यस्थता जैसे सुनने में अच्छे लगने वाले शब्द बना दिए हैं।

लिप्सटिक नारीवाद: सिंदूर पोंछ दो, चूड़ियाँ तोड़ दो, साड़ियाँ खोल लो, ब्रा उतार दो

क्या पूरे नारीवाद का विमर्श अब इतने पर आकर गिर गया है कि कोई सिंदूर क्यों लगाती है, बिंदी क्यों चिपकाती है, ब्रा क्यों पहनती है?

अगर देश का अर्थ मोदी नहीं, तो लोकतंत्र का अर्थ भी गाँधी परिवार नहीं है

मीडिया गिरोह और देश के आदर्श लिबरल समूह की बौखलाहट साफ़ है। इसे पिछले 4 सालों में हर दूसरे दिन ये कहते हुए सुना गया है कि देश का मतलब नरेंद्र मोदी नहीं है। 

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें