विचार

Action के Reaction से सहमे प्रोपेगेंडाबाज़, होली पर नहीं दे रहे पानी बचाने की सलाह

इन मठाधीशों को लगता था कि वे ही सबसे बड़े ज्ञानी हैं लेकिन अब एक बच्चा भी इनके तर्कों को काट देता है। इसीलिए अब वे क्रिया की प्रतिक्रिया से सहमे हुए हैं। उनका प्रोपेगेंडा अब कार्य नहीं कर रहा है। राष्ट्रवादियों के लिए यह एक बड़ी सफलता है।

‘चौकीदार चोर है’ कहने वाले राहुल गाँधी को 23 मई के बाद चौकीदारों से हो जाएगी ‘दहशत’

'चौकीदार' को 'चोर' कौन कह रहा है ? वही जो '5000 करोड़ रुपए' के 'नेशनल हेराल्ड केस' में ख़ुद अपनी माताजी सहित जमानत पर चल रहा है, जिनके जीजाजी देश के सबसे बड़े 'भू-माफिया' हैं, जिनके पिताजी की 'बोफोर्स घोटाले' में संलिप्तता थी?

महागठबंधन की गाँठें उभरकर दिखने लगी हैं; गाँठें कैंसर का परिचायक होती हैं

हिन्दी में कहें तो हताश कॉन्ग्रेस के लिए हाथ-पाँव मारकर, नदी में विसर्जन का नारियल निकालने के चक्कर में मरे हुए आदमी की काई जमी खोपड़ी का भी मिल जाना एक उपलब्धि ही है।

बॉलीवुड के ‘पाक’ कलाकार: संवेदना मौत से नहीं, ‘मस्जिद में मौत’ पर जागती है

हम उनके न्यूजीलैंड हमले पर दुख जाहिर करने पर सवाल नहीं उठा रहे। उठाएँगे भी क्यों? हम तो जानना चाहते हैं कि पुलवामा पर उनके चुप रहने के क्या कारण हैं? 'कर्मभूमि' की रक्षा पर तैनात सैनिकों पर हुए हमले से जिनका दिल नहीं पसीज़ा वो न्यूजीलैंड हमले पर एकदम से भावुक हो उठे! कैसे?

सस्ता सामान, आश्वासन टिकाऊ: चीन की दोमुँही विदेश नीति

CPEC के बुनियादी ढांचे पर चीन ने बहुत बड़ा निवेश किया है। इस निवेश की आड़ में चीन, पाकिस्तानी ख़ुफिया एजेंसी (ISI) और जैश को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रदान करता है। इसके बदले में उसे अपने प्रोजेक्ट में किसी भी तरह के आतंकवादी हमला न होने की गारंटी मिलती है।

मनोहर पर्रिकर के निधन पर ‘हँसने’ वाले इस्लामोफोबिया को बढ़ाते हैं

इससे साबित इतना ही होता है कि समाज में एक सम्प्रदाय के कुछ लोगों की सामूहिक संवेदनहीनता हर ऐसे मौके पर दिख जाती है। इस्लामोफोबिया का भाव आकाश से नहीं टपकता। यही वो मौके हैं जब वैसे लोग सोचने लगते हैं कि ये किस तरह के लोग हैं?

सर्जिकल स्ट्राइक्स से लेकर OROP तक: रक्षा मंत्री के रूप में मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल का विस्तृत विवरण

पर्रिकर ने रक्षा मंत्री का दायित्व सँभालते ही पूर्व में हुए अगस्ता-वेस्टलैंड जैसे घोटालों की जाँच बैठा कर भ्रष्टाचारियों में हड़कंप मचा दिया। कहते हैं, अगर भविष्य अच्छा करना हो तो अतीत में हुई गलतियों को सुधारना पड़ता है। पर्रिकर ने इसी को ध्येय बनाया।

‘मुझे मोदी से दिक्कत नहीं है, भक्तों से है’ – बोत हार्ड भाई, बोत हार्ड…

कुणाल ये नहीं समझ पाए कि उनसे बड़े-बड़े कॉमेडियन, जिन्होंने निजी आक्षेप भी किए, पोलिटिकल व्यंग्य और कटाक्ष भी किए, रीगन के इनॉगुरेशन तक में बोले, लेकिन उन्हें 'फक', 'शिट', 'L@udu', 'g**nd', 'l@ud@' कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी।

दिल्ली की शिक्षा व्यस्वस्था का सच: विज्ञापनों के चक्कर में छात्रों के भविष्य से खेल रहे हैं केजरीवाल

दिल्ली सरकार से पूछा जाना चाहिए कि अगर शिक्षा व्यवस्था पर ख़र्च किए गए रुपयों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं आ रहा तो फिर ये रुपए जा कहाँ रहे हैं?

मोदी… वाजपेयी नहीं हैं – मर्यादा की LoC और आधी रात घर में घुसकर मारने वाले में अंतर है

जब वाजपेयी सरकार गई तो उस वक्त अटल जी का घुटनों का ऑपरेशन हो चुका था, वे ठीक से चल भी नहीं पाते थे। लेकिन अभी का जो नेता है उसका दिल, दिमाग और घुटना एकदम ठीक और ठिकाने पर हैं, इसीलिए वह हवाई जहाज की खड़ी सीढ़ियों को भी दौड़ते हुए चढ़ जाता है।

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