विचार

रागा का रा-फेल राग: नशे-सी चढ़ गई ओए…

कभी-कभी तो दया आती है इस व्यक्ति पर, लेकिन फिर वो ख़ूनी, लुटेरा पंजा दिखता है भारतीय तिरंगे के तीन रंगों के साथ और...

200 साल बाद पहला कुम्भ मेला, जिसमें नहीं हुई भगदड़ से एक भी मौत

इतने विशाल जनसैलाब का सफलतापूर्वक प्रबंधन करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती मानी जाती थी। लेकिन मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने यह साबित कर दिखाया कि हिन्दुओं की आस्था को यदि प्राथमिकता और समय दिया जाए तो उन्हें आसानी से ही किसी आपदा में बदलने से रोका जा सकता है।

शाह का चक्रव्यूह: ‘एयर स्ट्राइक’ का सबूत माँग-माँग कर BJP के पिच पर खेल रहा विपक्ष

शाह ने एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिसमें उन्हें पता होता है कि विपक्षी नेता किस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने वाले हैं। उनकी पार्टी तैयार रहती है। वे 'सबूत-सबूत' चिल्लाते रहते हैं, शाह संगठन मज़बूत करने में लगे रहते हैं और एजेंडा सेट करते हैं।

एंटोनी साहब, आपने राष्ट्रहित नहीं, ‘कॉन्ग्रेस-हित’ के कारण राफेल सौदे में देरी की

एके एंटोनी ने कहा है कि उन्होंने राष्ट्रहित में राफेल सौदे में देरी की। राहुल गाँधी कहते रहे हैं कि मोदी ने डील बदल दी। जब डील में देरी हो गई और डील अधूरी ही थी तो हंगामा कैसा? इन्ही एंटोनी ने 2014 में राफेल की देरी के पीछे वित्त की कमी का हवाला दिया था।

टीवी ने रवीश को जो काम था सौंपा, इस शख़्स ने उस काम की माचिस जला के छोड़ दी (भाग २)

ये लोकतंत्र है, इसमें हर व्यक्ति की अभिव्यक्ति का मूल्य बराबर है। आपकी अभिव्यक्ति किसी सामान्य नागरिक की अभिव्यक्ति से ऊपर कैसे हो जाएगी? आपको लगता है कि जो ज्ञानधारा आप बहाते हैं, वही निर्मल है, और आम जनता सीवेज़ का पानी फेंक रही है।

लुटियन के दलालों को बस यही बात बहुत चुभती है

विशेषकर अंग्रेज़ी पत्रकार, एनजीओ, लेखक, चिंतक, बुद्धिजीवी और विचारक टाइप लोग मोदी से खफ़ा हैं, क्योंकि इस व्यक्ति को लुटियन दिल्ली में, इंडिया हैबिटैट सेंटर, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर जैसे ठिकानों में अड्डा ज़माने वाले लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है।

‘The Print’ को पीयूष गोयल से दिक्कत है क्योंकि वो जनता के लिए अफसरों की नहीं सुनते

गोयल ने अधिकारियों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए जीएसटी दर को कम करने का प्रस्ताव किया। अधिकारियों ने जीएसटी रेट कम नहीं करने की सलाह दी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया। 'द प्रिंट' को इस से धक्का लगा है।

जवानों के ख़ून की दलाली महागठबंधन के नेता कर रहे हैं, और इसका फल उनको शीघ्र मिलेगा

जबकि, ऐसे मौक़ों पर चुप होकर देश और सेना के साथ खड़े होने का बात कहते हुए अपने वोटर बेस को बचाने की जुगत भिड़ानी थी, महागठबंधन एक तरह से भाजपा की तैयार पिच पर खेल रही है, और अपना जनाधार सेना पर सवाल खड़े करते हुए खो रही है।

हम 2, हमारे 3: जैन समुदाय जनसंख्या वृद्धि वाले संकल्प की पड़ताल

एक शिक्षित समुदाय के बीच इस तरह का चलन शोभा नहीं देता। अगर आँकड़ों की बात करें तो पता चलता है कि पिछले एक दशक में जैन समुदाय की जनसंख्या में 50% की वृद्धि आई है। ऐसे में जैन समिति के बीच इस तरह की बेचैनी का कोई कारण नहीं बनता।

बिना जुबाँ लड़खड़ाए कश्मीर समस्या को इस्लामी आतंक जनित समस्या कहना ज़रूरी

कश्मीर में अलगाववाद को बल मिलता है पैन-इस्लामिज़म से, जो खिलाफत आंदोलन के या उससे भी पूर्व के उस विचार से प्रभावित है, जिसमें दुनिया के सभी मुस्लिमों को राष्ट्रीय सीमाओं से परे एक झंडे के नीचे खड़े होने को अपना आदर्श मानता है।

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