विशेषकर अंग्रेज़ी पत्रकार, एनजीओ, लेखक, चिंतक, बुद्धिजीवी और विचारक टाइप लोग मोदी से खफ़ा हैं, क्योंकि इस व्यक्ति को लुटियन दिल्ली में, इंडिया हैबिटैट सेंटर, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर जैसे ठिकानों में अड्डा ज़माने वाले लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है।
गोयल ने अधिकारियों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए जीएसटी दर को कम करने का प्रस्ताव किया। अधिकारियों ने जीएसटी रेट कम नहीं करने की सलाह दी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया। 'द प्रिंट' को इस से धक्का लगा है।
जबकि, ऐसे मौक़ों पर चुप होकर देश और सेना के साथ खड़े होने का बात कहते हुए अपने वोटर बेस को बचाने की जुगत भिड़ानी थी, महागठबंधन एक तरह से भाजपा की तैयार पिच पर खेल रही है, और अपना जनाधार सेना पर सवाल खड़े करते हुए खो रही है।
एक शिक्षित समुदाय के बीच इस तरह का चलन शोभा नहीं देता। अगर आँकड़ों की बात करें तो पता चलता है कि पिछले एक दशक में जैन समुदाय की जनसंख्या में 50% की वृद्धि आई है। ऐसे में जैन समिति के बीच इस तरह की बेचैनी का कोई कारण नहीं बनता।
कश्मीर में अलगाववाद को बल मिलता है पैन-इस्लामिज़म से, जो खिलाफत आंदोलन के या उससे भी पूर्व के उस विचार से प्रभावित है, जिसमें दुनिया के सभी मुस्लिमों को राष्ट्रीय सीमाओं से परे एक झंडे के नीचे खड़े होने को अपना आदर्श मानता है।
अच्छे लोग जैश-ए-मोहम्मद को पनाह देने वाले इमरान खान में statesmanship देख लेते हैं। 100 लोगों का पोस्ट पढ़कर उन्हें पूरा हिन्दुस्तान खून का प्यासा दिखने लगता है और पाकिस्तान के 2 पोस्ट पढ़कर शान्ति की जन्मभूमि। अच्छे लोग...
सरकार डरा रही है, तो आप मत डरिए। आप अपनी स्टोरी कीजिए और आगे बढ़िए। सबूत होंगे तो देश का सुप्रीम कोर्ट चार बजे सुबह में भी खुलता है, आतंकियों के लिए। आप तो फिर भी पत्रकार हैं!
जमात ए इस्लामी (जम्मू कश्मीर) के नाम से 1942 में शोपियाँ में मौलवी गुलाम अहमद अहर ने स्थापित किया था जिस पर प्रतिबंध लगाया गया है। जमात ए इस्लामी (जम्मू कश्मीर) आरंभ से ही अलगाववादी संगठन रहा है जिस पर पहले भी (1990) में प्रतिबंध लग चुका है।
आपने ऑफिस जाना बंद कर दिया? आपने लोगों से बात करना छोड़ दिया? आप तो देशभक्त व्यक्ति हैं जो कि प्रधानमंत्री से ज़्यादा ध्यान देते हैं ऐसी बातों पर, फिर आप क्या कर रहे हैं संवेदना प्रकट करने के लिए? फेसबुक पोस्ट लिखकर, व्हाट्सएप्प में ये पूछ रहे हैं कि मोदी रैलियाँ क्यों कर रहा है?
एक समय हम 'खलनायक' संजू और शाहरुख़ जैसे बाल रखने लगे थे। 'डर' के कारण बच्चों के नाम 'राहुल'। समय बदला है। जब अभिनन्दन लौटे तो कई बच्चों का नाम अभिनन्दन रखे जाने की ख़बर है।