ग़रीबों को सस्ता अनाज के लिए आवंटन दोगुना। मनरेगा का बजट हुआ तिगुना। बस्तियों में सड़कों का बिछा जाल। घर-घर में पहुँची बिजली। 10 लाख लोगों ने उठाया मुफ़्त चिकित्सा का लाभ। आर्थिक आधार पर आरक्षण।
एक प्रधानमंत्री की पहुँच अगर इतनी है कि वो एक साथ लाखों विद्यार्थियों से जुड़ जाए, तो क्या रवीश जी यह चाहते हैं कि 10,000 बच्चे इस साल आत्महत्या कर लें, तब तक सरकार हर स्कूल में काउंसलर की वेकन्सी निकाले?
अब पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है, जहाँ सबसे सस्ते मोबाइल टैरिफ उपलब्ध हैं। बजट में इस बात की जानकारी भी दी गई कि पिछले 5 वर्षों में मोबाइल डेटा के मासिक इस्तेमाल में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
संघ प्रमुख का मानना है कि यह समस्या किसी एक मंदिर, पंथ या राज्य की नहीं है बल्कि अन्य मंदिरों पर भी इसके दूरगामी परिणाम होंगे। यह वामपंथी ताक़तों के ख़िलाफ़ पूरे देश की लड़ाई है।
फ़िलहाल तो फैसल को अपनी राजनीतिक उड़ान में कई दिक़्कतों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि हिज़्बुल मुज़ाहिदीन संगठन ने शाह फैसल के राजनीति में आने के क़दम पर कड़ा ऐतराज जताया।
सभी के सभी 13 सभासद 'अल्पसंख्यक' समाज से आते हैं। कॉन्ग्रेस के लिए यह घाव तब भगंदर बन गया, जब ख़बर में यह भी है कि ना सिर्फ 13 सभासदों ने बल्कि अल्पसंख्यक समाज की कई महिलाएँ और पुरुषों ने भी 'कमल' को ही अपना लिया।
गाँधी जी की हत्या करने के आरोप में गोडसे पर मुकदमा चला था। उस मुकदमे की कार्यवाही में गोडसे ने अपनी बात पाँच घंटे लंबे वक्तव्य के रूप में रखी थी। यह वक्तव्य 90 पृष्ठों का था जो 1977 के बाद प्रकाशित हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अतिरिक्त यदि कोई इस बँटवारे का प्रखर विरोधी था तो वो गाँधी थे। मुस्लिम लीग की ज़िद के आगे कॉन्ग्रेस ने घुटने टेक दिए थे, न कि गाँधी ने।