जिस राहुल गाँधी को अपने पार्टी के भीतर ही आए दिन खिसक रहे विधायकों की कानों कान खबर नहीं लगती, वह भी रोज विदेश नीति और फॉरेन पॉलिसी पर ज्ञान दे रहे हैं।
1979 में तत्कालीन ज्योति बसु सरकार की पुलिस व सीपीएम काडरों ने बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों के ऊपर जिस निर्ममता से गोलियाँ बरसाईं उसकी दूसरी कोई मिसाल नहीं मिलती।
कॉन्ग्रेस राज में ही चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा किया और अब चिल्ला भी वही रहे हैं। मगर अब लोग समझने लगे हैं। हमें अपनी सेना पर विश्वास रखना चाहिए और कॉन्ग्रेसियों के प्रपंच से बचना चाहिए।
यह स्पष्ट है कि आज के भारतीय जहाज के तल में एक बड़ा छेद है जिसे हमें दुरुस्त करने की आवश्यकता है। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो यह जहाज सागर में डूब सकता है।
भारत-चीन विवाद के बीच प्रधानमंत्री का लेह-लद्दाख पहुँच जाना सेना के लिए कैसा होगा इस बारे में कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। पुराने दौर में “दिल्ली दूर, बीजिंग पास” कहने वाले तथाकथित नेता पता नहीं किस बिल में हैं। ऐसे मामलों पर उनकी टिप्पणी रोचक होती।
इसका इतना बड़ा फर्क पड़ा कि अपनी सेना का गुणगान करने वाले चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स को बयान जारी करना पड़ गया कि यह गंभीर चिंता का विषय है। इसके लिए........