Sunday, June 13, 2021

सामाजिक मुद्दे

‘शिखर पर जाने का शॉर्ट-कट नहीं, ऊपर जाकर नीचे गिरना सरल’ – युवाओं के लिए ‘गुरुजी’ का मंत्र

"भारतीय युवाओं को उमंग और सामर्थ्य से भरे हुए जीवन जीने की तैयारी करनी चाहिए। सुस्ती, ढिलाई... यह युवा के जीवन को कमजोर करती है और..."

उत्तराखंड के जंगलों में आग: अंग्रेजों की नीति Vs ग्राम समुदाय के पास जंगल का नियंत्रण – क्या है समाधान?

चीड़ के पेड़ हिमालय में आग फैलाने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी तो हैं पर उन्हें काट देना ही आग रोकने का समाधान नहीं है।

‘पानी तो बहाना है, मंदिर असली निशाना है’: महिलाओं के बाद अब बच्चों को बनाया जा रहा ढाल, नहीं कहेगा ‘सॉरी’ हिन्दू समाज

दोनों पक्षों के सामने आने से पहले ही 'सॉरी आसिफ' ट्रेंड होने लगता है, मीडिया उसका इंटरव्यू लेने लग जाता है, 'भीम आर्मी' उसके घर पहुँच जाती है और मंदिरों के विरोध में प्रोपेगंडा फैलाया जाता है - क्या ये सब कुछ ही देर में अचानक हो गया?

सचिन के नाम पर चुप्पी, मुबारक पर हंगामा: राँची में चोरी के आरोप में 2-2 मॉब लिंचिंग, हेमंत सरकार से सवाल क्यों नहीं?

झारखंड की राजधानी राँची में बाइक चोरी के आरोप में मॉब लिंचिंग की वारदात सामने आई है। बीते एक सप्ताह में वहाँ इस तरह की दूसरी घटना है।

Shero कौन: पीरियड का खून पोस्टर पर दिखाने वाली या देश के लिए अपना खून बहाने वाली बलिदानी?

आपकी शीरो (Shero) को पीरियड्स का खून फ्लॉन्ट करने में आज़ादी दिखती है, हमारी हीरो देश के लिए खून बहा आज़ादी की गाथा लिखती हैं।

ट्रंप पर बैन से खुश थे तो अब अपने गिरोह के लोगों पर लगे प्रतिबंध से नाराज क्यों हैं वामपंथी लिबरल्स?

ट्विटर के इस कदम का विरोध करने वाले ये वही 'निष्पक्ष' उदारवादी लोग हैं, जो कुछ ही दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट बंद किए जाने का जश्न मना रहे थे।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

चुनने की आजादी बेटियों का अधिकार, समानता की हकीकत को पुरुषों को स्वीकार करना होगा

24 जनवरी को 'राष्ट्रीय बालिका दिवस' (National Girl Child Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लड़कियों के सम्मान और महत्व को बढ़ावा देना है।

’15 साल में लड़कियाँ प्रजनन के लायक तो शादी 21 में क्यों’ – अपनी बहन-बेटी को किस उम्र में ब्याहेंगे ये कॉन्ग्रेसी नेता?

कॉन्ग्रेस नेता सज्जन सिंह ने कहा कि जब लड़कियाँ 15 साल में प्रजनन लायक हो जाती हैं तो शादी की उम्र 21 साल करने की क्या जरूरत है?

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