सामाजिक मुद्दे

जब आप मुझे मेरे शब्दों के चयन पर ज्ञान देते हैं, उसी वक्त कोई ताहिर पेट्रोल बम बना रहा होता है

कट्टरपंथियों के घर के ऊपर युद्ध लड़ने के मकसद से पेट्रोल बम, एसिड, पत्थर और आग लगाने का सामान इकट्ठा दिख रहा है, और फिर भी आपको बताया जा रहा है कि ये 'हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों के सफाए की साजिश है', 'ये मुस्लिमों का पोगरोम है', 'ये मुस्लिमों का नरसंहार है'।

होलिका बहुजन और दुर्गा वेश्या: दानवी को दलित आइकॉन बता बाल हत्या को बढ़ावा देती JNU वाली जड़ता

पूतना और होलिका को खलनायिका से नायिका बनाने की कोशिश बाल-हत्या के महिमामंडन की कोशिश है। उसे ब्राह्मणवाद के विरोध के नाम पर ढका नहीं जा सकता। ब्राह्मण तो वे दधीचि थे, जिन्होंने वृत्रासुर को मारने के लिए अपनी अस्थियाँ दे दीं, वज्र का निर्माण करने वास्ते।

मेहनत और सम्मान से जीना वे क्या जानें, जिनके लिए पत्थर फेंकती औरतें हैं नारीवाद का चेहरा

हमें यकीन है कि ये महिलाएँ अपनी ऊर्जा बेफिजूल चिल्लाकर बर्बाद नहीं करती होंगी। इन्हें सरकारी योजना के तहत केवल दियासलाई की लालसा नहीं रहती होगी। ये पारिवारिक आय के लिए सिर्फ़ किसी पुरूष पर आश्रित नहीं रहती होंगी।

लदीदा, ताहिर, शाहरुख़, सलमान, इशरत…जिहादियों की नई पौध CAA विरोध के साथ तैयार

शाहीन बाग़ ने अपने चहेते मीडियाकारों के साथ मिलकर रोज थोड़ा-थोड़ा प्रयासों से दिल्ली में हिन्दुओं के खिलाफ नरसंहार की तैयारियाँ शुरू की। बीस साल के दिलबर नेगी की मौत हो, चाहे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का चार सौ बार चाकुओं से गोदा गया शरीर हो, इस सबकी पटकथा शाहीनबाग ने ही आधार दिया इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

दिक्कत कपिल मिश्रा से नहीं ‘इकलौते दीन’ का प्रभुत्व नहीं मानने वाले हर काफिर से है

डॉ. खान और उनके जैसे हर जिहादी की असली दिक्कत है काफ़िरों से उनकी नफ़रत। काफिरों को हिकारत भरी नज़रों से देखने और अपने जूतों तले रौंदने की 1200 साल पुरानी आदत। इसके आगे आज का काफ़िर झुकने से इनकार कर रहा है।

दिल्ली दंगों पर मेजर गौरव आर्या, वैभव सिंह और अजीत भारती की बातचीत | Ajeet Bharti Discusses Delhi Riots with Major Gaurav Arya and...

एंटी-सीएए प्रोटेस्ट तो एक छलावा भर था। असल में ये एक इस्लामिक प्रोटेस्ट था, जिसमें शामिल लोगों ने हिन्दुओं के प्रतीकों को अपमानित कर...

दिल्ली दंगों पर कपिल मिश्रा से अजीत भारती की बातचीत | Ajeet Bharti with Kapil Mishra on Delhi Riots

दिल्ली में हुए दंगों के लिए जिस तरह से तमाम वामपंथी मीडिया कपिल मिश्रा को जिम्मेदार बताने पर तुला है, वो बताता है कि फर्जी नैरेटिव गढ़ना...

Thappad से सीख: हर बार थप्पड़ हिन्दुओं के ही गाल पर क्यों? सेक्युलरिज़्म सिर्फ हिंदुओं की जिम्मेदारी नहीं

यह संभव नहीं है कि एक समुदाय विशेष हिन्दुओं के घरों को जलाने के लिए उन्हें चिन्हित करे, जलाए और बदले में हिन्दू जाकर उसे गले लगा आए। यह दंगा-साहित्य कुछ पुरस्कार जीतने के लिए लिखी गई किताबों तक सीमित रहे, मानवता के लिए उनका योगदान उतना ही काफी माना जाएगा।

‘दोनों तरफ के लोग हैं’: ‘दंगा साहित्य’ के दोगले कवियों से पूछिए कि हिन्दू ने कहाँ दंगा किया, कितने दिन किया?

इस नैरेटिव से बचिए और पूछिए कि जिसकी गली में हिन्दू की लाश जला कर पहुँचा दी गई, उसने तीन महीने से किसका क्या बिगाड़ा था। 'दंगा साहित्य' के कवियों से पूछिए कि आज जो 'दोनों तरफ के थे', 'इधर के भी, उधर के भी' की ज्ञानवृष्टि हो रही है, वो तीन महीने के 89 दिनों तक कहाँ थी, जो आज 90वें दिन को निकली है?

‘पिंचर’ बनाने वालों से डर नहीं लगता साहब, ‘IIT-IIM वालों से’ लगता है: एंटी CAA से जलता भारत

ओवैसी, शरजील इमाम, हुसैन हैदरी, इकबाल, जिन्ना, लादेन की फेहरिश्त में आप नाम जोड़ते जाइए उन सबका भी जो शायद आपके आसपास बैठा हो, जो आपके साथ काम करता हो, जिनका पेशा कुछ भी क्यों न हो लेकिन वो लगे हों उम्मत के लिए ही।

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