सामाजिक मुद्दे

जब तक हिन्दू बहुमत में है तभी तक रहेगा लोकतंत्र: भारत की आत्मा में श्रीराम बसे हैं, बाबर नहीं

गुरु नानक ने स्वयं अपनी आँखों से देखे बाबर के अत्याचारों का ऐसा दर्दनाक वर्णन किया है कि आज भी उसको पढ़ कर किसी का भी दिल पसीजे बिना नहीं रह सकता। उस अत्याचारी बादशाह की जामिया मिलिया जैसे राष्ट्रीय संस्थान में जयंती मनाई गई थी।

कुरान में बुर्का शब्द का कहीं भी वर्णन ही नहीं… ‘मर्दों की आँखों की दरिंदगी’ से बचाव वाला तर्क फिर कहाँ पैदा हुआ!

कुरान में हिजाब का जिक्र है, जिसमें महिला का चेहरा दिखता रहता है। बुर्का केवल कट्टरपंथी इस्लाम की सोच है जिसमें वो महिला को जबरदस्ती चेहरा ढकने के लिए बाध्य करते हैं। अरब देशों में बुर्का पहनने का चलन वहाँ पर चलने वाली आँधियों से बचने के लिए था। धीरे-धीरे उस क्षेत्र में इस्लाम धर्म के फ़ैलने के कारण बुर्का इस्लाम का अंग बन गया।

‘हराम की बोटी’ को काट कर फेंक दो, खतने के बाद लड़कियाँ शादी तक पवित्र रहेंगी: FGM का भयावह सच

खतने के जरिए महिलाएँ पवित्र होती हैं। इससे समुदाय में उनका मान बढ़ता है और ज्यादा कामेच्छा नहीं जगती। - यही वो सोच है, जिसके कारण छोटी बच्चियों के जननांगों के साथ इतनी क्रूर प्रक्रिया अपनाई जाती है।

महीनों से हिंदुओं पर हमले की योजना बना रही मुस्लिम भीड़ आख़िर पीड़ित कैसे? – 10 कहानियों से साफ होती तस्वीर

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में छोटे से लेकर बड़े तक, जवान से लेकर बूढ़े तक और महिलाओं से लेकर बच्चों तक - हर कोई शामिल था। इसे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लड़ाई एक दिन या CAA विरोध की नहीं बल्कि गजवा-ए-हिंद के सपने को साकार करने की थी।

जब आप मुझे मेरे शब्दों के चयन पर ज्ञान देते हैं, उसी वक्त कोई ताहिर पेट्रोल बम बना रहा होता है

कट्टरपंथियों के घर के ऊपर युद्ध लड़ने के मकसद से पेट्रोल बम, एसिड, पत्थर और आग लगाने का सामान इकट्ठा दिख रहा है, और फिर भी आपको बताया जा रहा है कि ये 'हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों के सफाए की साजिश है', 'ये मुस्लिमों का पोगरोम है', 'ये मुस्लिमों का नरसंहार है'।

होलिका बहुजन और दुर्गा वेश्या: दानवी को दलित आइकॉन बता बाल हत्या को बढ़ावा देती JNU वाली जड़ता

पूतना और होलिका को खलनायिका से नायिका बनाने की कोशिश बाल-हत्या के महिमामंडन की कोशिश है। उसे ब्राह्मणवाद के विरोध के नाम पर ढका नहीं जा सकता। ब्राह्मण तो वे दधीचि थे, जिन्होंने वृत्रासुर को मारने के लिए अपनी अस्थियाँ दे दीं, वज्र का निर्माण करने वास्ते।

मेहनत और सम्मान से जीना वे क्या जानें, जिनके लिए पत्थर फेंकती औरतें हैं नारीवाद का चेहरा

हमें यकीन है कि ये महिलाएँ अपनी ऊर्जा बेफिजूल चिल्लाकर बर्बाद नहीं करती होंगी। इन्हें सरकारी योजना के तहत केवल दियासलाई की लालसा नहीं रहती होगी। ये पारिवारिक आय के लिए सिर्फ़ किसी पुरूष पर आश्रित नहीं रहती होंगी।

लदीदा, ताहिर, शाहरुख़, सलमान, इशरत…जिहादियों की नई पौध CAA विरोध के साथ तैयार

शाहीन बाग़ ने अपने चहेते मीडियाकारों के साथ मिलकर रोज थोड़ा-थोड़ा प्रयासों से दिल्ली में हिन्दुओं के खिलाफ नरसंहार की तैयारियाँ शुरू की। बीस साल के दिलबर नेगी की मौत हो, चाहे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का चार सौ बार चाकुओं से गोदा गया शरीर हो, इस सबकी पटकथा शाहीनबाग ने ही आधार दिया इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

दिक्कत कपिल मिश्रा से नहीं ‘इकलौते दीन’ का प्रभुत्व नहीं मानने वाले हर काफिर से है

डॉ. खान और उनके जैसे हर जिहादी की असली दिक्कत है काफ़िरों से उनकी नफ़रत। काफिरों को हिकारत भरी नज़रों से देखने और अपने जूतों तले रौंदने की 1200 साल पुरानी आदत। इसके आगे आज का काफ़िर झुकने से इनकार कर रहा है।

दिल्ली दंगों पर मेजर गौरव आर्या, वैभव सिंह और अजीत भारती की बातचीत | Ajeet Bharti Discusses Delhi Riots with Major Gaurav Arya and...

एंटी-सीएए प्रोटेस्ट तो एक छलावा भर था। असल में ये एक इस्लामिक प्रोटेस्ट था, जिसमें शामिल लोगों ने हिन्दुओं के प्रतीकों को अपमानित कर...

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें