सामाजिक मुद्दे

CAA-विरोधियों द्वारा मार दिए गए नीरज की मृत्यु में शादाब नाम वाला सेकुलर ग्लैमर नहीं है

नीरज प्रजापति JNU से नहीं थे, वो मूर्तियाँ बनाते थे और उसी से अपने घर का पेट पालते थे। लेकिन मृतक नीरज का परिवार आज भी आतंकवादी अफजल गुरु की यादों में खून रोने वाली मीडिया और लिबरल गिरोह की संवेदनाओं के इन्तजार में है।

औरतें हलाला को मजबूर, मर्दों के लिए बनी रहे 4 बीवियों की आजादी: जिल्लत से मुक्ति कब

कभी ससुर से तो कभी देवर से। कभी मौलवी से तो कभी जीजा से। हलाला को अभिशप्त औरतें आखिर कब पितृसत्तात्मक इस्लामिक कानून से मुक्ति की आवाज बनेंगीं।

आज शरजील है, तब मुहम्मद शफी था: उस समय भी हिंदू भेंट चढ़े थे, आज भी निशाना वही हैं

तब भी ऐसा ही मजहबी उन्माद था। इसी तरह के नारे और ऐसी ही साजिशें थी। उस समय इसकी आग में कश्मीर के हिंदू जले थे। आज नहीं चेते तो अगला नंबर आपका हो सकता है।

शाहीन बाग में हिन्दूविरोधी पोस्टर, मज़हबी नारे: अजीत भारती के सवाल | Ajeet Bharti on Shaheen Bagh’s Hinduphobia

शाहीन बाग में हिन्दुओं के पवित्र चिन्ह स्वास्तिक के साथ खिलवाड़ किया गया। हिन्दू महिलाओं को हिजाब में दिखाया गया, इस्लामिक नारे लगा कर...

शाहीन बाग की इन औरतों का हंगामा और संविधान देने वाली उन 15 महिलाओं का हासिल

संविधान का मसौदा तैयार करने में अहम किरदार निभाने वाली उन महिलाओं ने क्या सपना देखा था और शाहीन बाग की औरतें कैसी मिसाल पेश कर रही हैं। यह जानने के लिए 26 जनवरी से बेहतर दिन नहीं हो सकता।

संविधान और शरीयत में से शरीयत को चुन चुका है शाहीन बाग़

वास्तविकता आज बुरका पहनकर शाहीन बाग़ में अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए पत्रकारों की सामूहिक लिंचिंग कर रही है। सेकुलर शाहीन बाग़ आज ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्हम्दुलिल्लाह का स्वर बोल रहा है, और क्योंकि यह स्वर क्रांतिजीवों, JNU-मतावलम्बियों के श्रीमुख से निकला है, इसलिए प्रोग्रेसिव लिबरल भी उनकी हाँ में हाँ मिलाता नजर आ रहा है।

तिरंगे वाले हिजाब में हरे को ऊपर रखने के पीछे की मंशा क्या है?

तिरंगे में समाहित रंगों की आड़ में संदेश दिया जा रहा है कि शाहीन बाग कोई आम प्रदर्शन नहीं है। ये वो प्रदर्शन हैं, जहाँ वेदना के नाम पर अपने मनसूबों को इस्लामिक ताकतों ने खुलेआम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। औचित्य की लड़ाई को अब स्पष्ट तौर पर मजहबी लड़ाई बना दिया गया है...

CAA से नागरिकता पाने वाले 70-75% SC/ST, OBC गरीब, फिर रावण-कन्हैया जैसे इसका विरोध क्यों कर रहे

एससी/एसटी कमीशन के चेयरमैन ने बताया कि भारत में जिन शरणार्थियों को सीएए के तहत नागरिकता मिलने वाली है। उनमें 70 से 75 प्रतिशत दलित, ओबीसी और गरीब है। जिन्हें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भगाया गया था।

शाहीन बाग की औरतें: कब माँगेंगी हलाला से, माहवारी आते ही निकाह कर देने की रवायत से आजादी

"सहारनपुर जिले में महिलाओं का हलाला करवाने के लिए मदरसों में लड़कों को रखा जाता है। यही नहीं, उम्र और सुन्दरता के अनुसार वो महिलाओं के हलाला का पैसा लेते हैं।" अब सोचिए, इनकी स्थिति कितनी बदतर है। लेकिन फिर भी आवाज़ उस पर उठानी है, जिस पर इनका समुदाय इजाजत दे।

कट्टरपंथियों से किस बात की माफ़ी माँगें कश्मीरी हिन्दू? कि उनकी लड़कियों का गैंगरेप हुआ, निर्मम हत्या की गई?

आज विधु कहते हैं कि सब कुछ भुलाकर उन लोगों से कश्मीरी पंडितों को गले मिल लेना चाहिए, प्रेम करना चाहिए और सब भुला देना चाहिए। एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार कहते हैं कि निर्देशक ने वर्षों की इस चुप्पी को तोड़ने के लिए सिर्फ एक 'सॉरी' की गुज़ारिश की है, उन्होंने बहुत ज्यादा तो नहीं माँगा।

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