"साइबर एक सीमाविहीन युद्धक्षेत्र है। यहाँ एक बार घुसपैठ कर लेने पर दुश्मन की विद्युत, आर्थिक, नागरिक उड्डयन, संचार आदि सभी क्षमताओं को एक ही झटके में ध्वस्त कर सकते हैं। इस लिए इलेक्ट्रॉनिक्स दुश्मन के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार भी और हमारी सबसे बड़ी कमजोरी भी।"
कॉन्ग्रेस शासनकाल में कई भीषण दंगे हुए, जिनको लेकर उन पर सवाल नहीं दागे गए। भाजपा शासनकाल में देश अपेक्षाकृत शांत है और ऐसी घटनाओं में कमी आई है। अगर हम 2011-2013 की बात करें तो उस दौरान भी कॉन्ग्रेस शासित राज्य सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा थे।
‘बेचारे रोहिंग्या’ का narrative बुनने वाले ‘अदृश्य’ अवैध अप्रवासियों द्वारा किए गए संभावित गुनाह की गठरी अपने सर बाँधेंगे? क्योंकि यही सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस समूह के अधिवक्ता बन जाते हैं। और इसलिए बन जाते हैं क्योंकि यह घुसपैठिए ‘समुदाय विशेष’ से होते हैं।
महत्वपूर्ण निर्णय के लिए डोभाल पण्डित नेहरू के कश्मीर मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने का उदाहरण देते हैं। उनके अनुसार उस निर्णय के कारण ही पीओके को पाकिस्तान के चंगुल से मुक्त नहीं कराया जा सका और कश्मीर ही भारत की सभी आतंकवादी समस्याओं के मूल में है।
मोदी सरकार द्वारा महिला सामर्थ्य पर दिखाया गया अटल विश्वास उस समय दिखा जब देश के 66 वें गणतंत्र दिवस के मौक़े पर तीनों सेनाओं के एक विशेष महिला दस्ते ने मार्च करते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया।
मेजर गोगोई के खिलाफ यह मामला जब प्रकाश में आया था तो टुकड़े-टुकड़े गिरोह के समर्थकों ने यह हवा बनानी शुरू कर दी थी कि मेजर गोगोई को कोई सजा नहीं मिलेगी क्योंकि उन्हें ‘राईट-विन्गर्स’ का समर्थन है। यह ख़बर उनके चेहरे पर सड़े अंडे की तरह है।
जैसे ही इंजन में खराबी आई, पायलट सूझबूझ दिखाते हुए विमान को आबादी से दूर ले गए। इससे क्रैश वाली साइट पर किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है। समय रहते पायलट ने खुद भी इजेक्ट कर लिया और वो सुरक्षित हैं।