जब-जब राजीव गाँधी के हत्यारों को माफ़ करने की बात सामने आती है, तो उन 20 लोगों को क्यों भुला दिया जाता है जिनके नाम के आगे गाँधी नहीं लगा हुआ था? चाहे सोनिया हों या प्रियंका गाँधी वाड्रा, आखिर किस हैसियत से ये लोग उन हत्यारों को रिहा करने या उनकी सजा कम करने की बात करती हैं?
एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि कर्नाटक गठबंधन का पहला लक्ष्य अधिकतम लोकसभा सीट जीतने का था लेकिन अब यह लक्ष्य फेल होता दिख रहा है, ऐसे में गठबंधन को जारी रखने में कोई भलाई नहीं है। एग्जिट पोल्स के अनुसार, 28 लोकसभा सीटों में से भाजपा 25 जीत सकती है।
अगर पार्टी और व्यक्ति को विचारधारा से आँका और परखा जाता है तो कन्हैया तो कम्युनिस्ट हैं, हम कैसे मान लें कि कल को देश के उच्च पद पर आसीन होने के बाद कन्हैया इस बात पर जोर नहीं देंगे कि सबको कम्युनिस्ट होना पड़ेगा? कैसे मान लें कि वो 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारे कथित तौर पर दोबारा नहीं लगाएँगे!
Exit Polls से बौखलाई शमा मोहम्मद ने कपिल सिब्बल समर्थित हार्वेस्ट टीवी चैनल पर बरखा दत्त द्वारा एंकर किए जा रहे डिबेट शो में कहा कि उत्तर भारतीय मतदाता दक्षिण भारतीयों की तरह शिक्षित नहीं हैं और वे व्हाट्सप्प मैसेज पर विश्वास करते हैं, मीडिया पर विश्वास करते हैं और जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।
"हमारे देश को एक ऐसी सरकार की ज़रूरत है जो सबको साथ लेकर चले और भाईचारा, शांति और समरसता को बढ़ावा दे। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, कुछ राजनीतिक पार्टियाँ ऐसी हैं जो धर्म के आधार पर राजनीति करती हैं। ये सही नहीं है और ऐसी पार्टियों को जाना पड़ेगा।"
इन चुनावों में राजीव गाँधी यकायक मुद्दा बन गए- चुनावी भी, चर्चा का भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भ्रष्टाचारी कहा, शेखर गुप्ता ने ‘डैशिंग, बाल-बच्चों वाला, युवा प्रधानमंत्री’, और सैम पित्रोदा के अनुसार उनकी जिंदगी में अर्थ ही राजीव गाँधी के भारत में कंधे पर कम्प्यूटर ढो कर लाने से आया।
इससे भी ज्यादा बीबीसी ने प्रियंका की तारीफ़ों के पुल बांधे हैं। प्रियंका ने आज तक अपनी लोकप्रियता साबित नहीं की है, एक भी चुनाव नहीं जीता है, अपनी देखरेख में पार्टी को भी एक भी चुनाव नहीं जितवाया है, फिर भी बीबीसी उन्हें चमत्कारिक और लोकप्रिय बताता है।
मंत्री मोहिंद्रा ने सिद्धू पर पीठ में छुरा घोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह बेवक़्त बयान देते जा रहे हैं। उन्होंने सिद्धू के बारे में कहा कि वो सिर्फ़ 2 सालों से ही कॉन्ग्रेस में हैं और अपना नियम झाड़ते हुए अपना अजेंडा लागू करना चाह रहे हैं।
"ये अधिकारीगण मायावती से शिष्टाचार मुलाक़ात के लिए पहुँच रहे हैं। इनमें से अधिकतर ऐसे हैं, जिन्होंने उनके मुख्यमंत्रित्व काल में काम किया था। इनमें से कुछ का सम्बन्ध बहुजन समाज से है। ये अधिकारी बहन जी को मौजूदा स्थितियों से अवगत भी करा रहे हैं।"