Homeदेश-समाजरातभर लाशों को रौंदती रही गाड़ियाँ, सुबह ऊँगली और कान से पता चला ये...

रातभर लाशों को रौंदती रही गाड़ियाँ, सुबह ऊँगली और कान से पता चला ये भी मानव थे: सड़क से खुरचकर निकालने पड़े अवशेष

रात भर गाड़ियाँ लाशों को रौंदती रही। ऊँगली और कान देखकर लोगों को सुबह पता चला कि सड़क से चिपक गए अवशेष किन्हीं इंसानों के ही हैं। पुलिस को इन अवशेषों को खुरच-खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा।

सोमवार (15 जनवरी 2024) तक वे भी हमारी-आपकी तरह ही हाड़-माँस के इंसान थे। उनकी भी एक पहचान थी। लेकिन मंगलवार की सुबह तक कुछ नहीं बचा था, क्योंकि रात भर गाड़ियाँ इनकी लाशों को रौंदती रही। ऊँगली और कान देखकर लोगों को सुबह पता चला कि सड़क से चिपक गए अवशेष किन्हीं इंसानों के ही हैं। पुलिस को इन अवशेषों को खुरच-खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा।

ये कौन थे इसका पता लगाना तो बाद की बात है। ये लाशें पुरुषों की है या महिलाओं की यह भी पोस्टमार्टम से ही पता चल पाएगा। यह भी कि मरने वाले की उम्र क्या थी। इनमें से एक घटना गाजियाबाद की है तो दूसरी आगरा की।

एक लाश गाजियाबाद-हापुड़ हाइवे से बरामद की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वेव सिटी थाना क्षेत्र में सद्भावना कट के नजदीक यह दुर्घटना हुई थी। मंगलवार की सुबह सैर करते कुछ लोगों की नजर सड़क पर गई तो दुर्घटना का पता चला। करीब जाने पर ऊँगलियों से पता चला कि रात के समय दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि एक्सीडेंट के बाद इस व्यक्ति की लाश को रात भर वाहन रौंदते रहे, क्योंकि कोहरा घना था।

वेव सिटी पुलिस के अनुसार मौके से कुछ सिर के बाल, एक ऊँगली और कान का टुकड़ा मिला है। इसे भी खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा। मृतक के शरीर का कोई भी हिस्सा पूरा नहीं मिला है। यहाँ तक कि कपड़े भी नहीं। पुलिस के अनुसार कोहरे के कारण CCTV फुटेज से भी कुछ पता नहीं चल रहा। अब शिनाख्त के लिए आसपास के थानों से मिसिंग लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

इसी तरह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भी दुर्घटना हुई। मरने वाले को रातभर गाड़ियों ने इस तरह रौंदा कि मंगलवार की सुबह शव के अवशेष सड़क से चिपके हुए थे। बताया जा रहा है कि सड़क पर 10 मीटर तक शव के अवशेष बिखरे पड़े थे।फावड़े से खुरचकर अपशेष इकट्ठे किए।

रिपोर्ट में प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह के हवाले से बताया गया है कि टोल के आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला है कि 40 साल का एक विक्षिप्त युवक इस इलाके में घूमता था। ग्रामीण उसे खाने देते थे। माना जा रहा है कि रात में सड़क पार करते समय यही युवक किसी वाहन की चपेट में आ गया होगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मुफ्त इलाज का ढकोसला और महँगे मेडिकल बिल: कहाँ खर्च हो रहा है आम आदमी का पैसा?

सरकार ने उन दवाओं को इस प्राइस कंट्रोल से बाहर रखा है जिन्हें कंपनियाँ 'पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम' (PAPs) के तहत भारी छूट पर देती हैं।

आर्कबिशप पीटर मचाडो कौन हैं, जो चाहता है धर्मांतरण विरोधी कानून और गोहत्या कानून में बदलाव: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से क्या...

आर्कबिशप की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे से मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बैंगलुरु में हुई इस मुलाकात के बाद आर्कबिशप ने खुद अपनी माँगों को सार्वजनिक किया।
- विज्ञापन -