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गड्ढों वाली सड़क का केरल में अनूठा विरोध, जमा पानी से स्नान और योगः हाई कोर्ट ने कहा- सड़कों को ‘मरने की जगह’ नहीं बनने दे सकते

हालात को लेकर हाईकोर्ट ने कहा, "केरल में स्थिति की गंभीरता अब सबके सामने है। हम तब तक प्रतिक्रिया नहीं करते जब तक कि हम पीड़ित न हों या हमारे किसी परिचित को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।"

केरल (Kerala) में सड़क पर बने गड्ढे में गिरकर एक व्यक्ति की मौत के बाद हाईकोर्ट (High Court) ने सड़कों की मरम्मत को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए किसी और घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता। वहीं, सड़कों पर गड्ढों को लेकर केरल में एक ही अनूठे ढंग से विरोध प्रदर्शन किया।

राज्य के मलप्पुरम (Malappuram) जिले में एक व्यक्ति ने रास्ते में विधायक के सामने सड़क पर बने गड्ढे में हुए जल-जमाव में स्नान और योग किया। इस व्यक्ति के इस अनोखे अंदाज में सड़कों पर बने गड्ढों के विरोध का वीडियो वायरल हो रहा है।

सड़क की हालत को लेकर अनोखे अंजाम में विरोध करने वाले शख्स का नाम नजीम बताया जा रहा है और वह पाडिक्कड़ ग्राम पंचायत का रहने वाला बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि नजीम एक गड्ढे में बैठा है और अपने कपड़े धो रहा है। इस दौरान मंजेरी विधायक यूए लतीफ अपनी कार से वहाँ गुजर रहे थे। नजीम को देखकर लतीफ ने कार से उतर उससे बात करने की कोशिश की।

हालाँकि, नजीम ने विधायक लतीफ से बात करने से इनकार दिया और विरोध दर्ज कराने के लिए विधायक के सामने योग मुद्रा में खड़ा हो गया। नजीम का यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।

उधर, केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस देवन रामचंद्रन ने NHAI को फटकार लगाते हुए कहा, “हम न तो दूसरे शिकार की प्रतीक्षा कर सकते हैं, न ही हम केरल की सड़कों को मरने का मैदान नहीं बनने दे सकते- चाहे वह NHAI, PWD या स्थानीय सरकारी संस्थानों के अधीन हो।”

कोर्ट ने आगे कहा, “केरल में स्थिति की गंभीरता अब सबके सामने है। हम तब तक प्रतिक्रिया नहीं करते जब तक कि हम पीड़ित न हों या हमारे किसी परिचित को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।”

आगे इस तरह की किसी भी दुखद घटना को रोकने के लिए न्यायालय ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रमुख के रूप में जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले जिन सड़कों पर गड्ढे हैं, उसके जिम्मेदार इंजीनियर, ठेकेदार या कोई अन्य व्यक्ति, के खिलाफ कार्रवाई करें।

अदालत ने ये टिप्पणी साल 2008 में दाखिल की गई रिट पिटीशन पर सुनवाई के दौरान कही। इस याचिका में संबंधित अधिकारियों को उनके द्वारा बनाई गई सड़कों के रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी।

NHAI के स्थायी वकील एडवोकेट बिधान चंद्र ने कहा कि यह सड़क ‘बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर’ समझौते के तहत बनाया गया है और इसके रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी बनाने वाली की है। उन्होंने आगे बताया कि राज्य भर में राष्ट्रीय राजमार्ग के हर हिस्से की मरम्मत के लिए कदम उठाए जा चुके हैं, ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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