गुरुग्राम में मुस्लिम युवक पर कथित हमले में गंभीर को काटा सेकुलरिज्म के कीड़े ने!

"गंभीर को भी सेकुलरिज्म के कीड़े ने काट लिया है।" लोगों ने उन्हें मीडिया की ख़बरों पर आँख बंद कर के विश्वास न करने की सलाह दी क्योंकि मीडिया द्वारा हमेशा...

गुरुग्राम में एक 25 वर्षीय युवक ने अपने साथ ज्यादती किए जाने का आरोप लगाया। अपने आरोप में मुस्लिम युवक ने कहा कि उसे कुछ लोगों ने जबरन “जय श्री राम” बोलने को कहा और ऐसा न करने पर पिटाई की। उक्त मुस्लिम युवक ने अपने आरोप में कहा कि उन लोगों ने उसकी इस्लामी टोपी भी फेंक दी। मोहम्मद बरकत आलम ने अपने आरोप में कहा कि ये घटना शनिवार (मई 25, 2019) की रात को तब हुई, जब वह अपने घर जा रहा था। युवक के अनुसार, उसे परेशान करने वाले लोगों ने कहा कि इस क्षेत्र में इस्लामी स्कल कैप पहन कर घूमने की अनुमति नहीं है।

गौतम गंभीर ने इस घटना की कड़ी निंदा की। क्रिकेटर से सांसद बने गंभीर ने हाल ही में पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली को 3,91,000 से भी अधिक मतों से हराया है। भाजपा के टिकट पर संसद पहुँचे गंभीर ने ट्विटर पर गुरुग्राम वाली घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “गुरुग्राम में एक मुस्लिम व्यक्ति को उसका स्कल कैप हटाने को कहा गया, उसे जबरन ‘जय श्री राम’ बोलने का नारा लगाने को कहा गया। यह निंदनीय है। गुरुग्राम प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए अनुकरणीय उदाहरण पेश करना चाहिए। हम एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हैं, जहाँ जावेद अख्तर ‘ओ पालन हारे, निर्गुण और न्यारे’ जैसे गीत लिखते हैं और राकेश ओमप्रकाश मेहरा ‘अर्जियाँ’ (‘दिल्ली 6’ फ़िल्म में) जैसे गाने बनाते हैं।

गौतम गंभीर के इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनसे भाजपा कार्यकर्ताओं की हो रही हत्यापर भी बोलने को कहा। लोगों ने उन्हें बिना मामले के तह तक गए हुए किसी भी घटना को सांप्रदायिक करार देने वाले ट्रेंड को लेकर आगाह किया। बता दें कि हाल ही में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जिसे पहले मीडिया ने सांप्रदायिक रंग दिया लेकिन बाद में पता चला कि ये आम आपराधिक घटनाएँ थीं। अपने पहले ट्वीट के 2 घंटे बाद गंभीर ने दूसरा ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए लिखा,

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

सेकुलरिज्म पर मेरे विचार का उद्भव माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन्त्र ‘सबका साथ-सबका विकास’ से होता है। मैं यहाँ सिर्फ़ गुरुग्राम वाली घटना की बात नहीं कर रहा, जाति और धर्म को लेकर की गई कोई भी ज्यादती निंदनीय है। सहिष्णुता और समवेशी विकास- इन दोनों विचारों पर हमारा देश आधारित है।

लोगों ने गंभीर को जवाब देते हुए कहा कि किसी बुरी घटना की निंदा करना ग़लत बात नहीं है, लेकिन एक छोटी घटना के कारण पूरे देश के लिए आम राय बना लेना ही मोदी-विरोधी प्रोपेगंडा का हिस्सा है, जिसके जाल में सेलिब्रिटी को फँसा लिया जाता है।

गौतम गंभीर को लोगों ने अमेठी में स्मृति ईरानी के ख़ास रहे भाजपा कार्यकर्ता की हत्या को लेकर ट्वीट करने को कहा। कई लोगों ने ट्विटर पर लिखा कि अब गंभीर को भी सेकुलरिज्म के कीड़े ने काट लिया है। कई लोगों ने उन्हें मीडिया की ख़बरों पर आँख बंद कर के विश्वास न करने की सलाह दी क्योंकि मीडिया द्वारा हमेशा किसी ख़ास समुदाय के लोगों को ही विक्टिम बता कर पेश किया जाता है। एक ट्विटर यूजर ने गंभीर को पीएम मोदी के भाषण की उस पंक्ति से घेरा जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग जब तक सुबह उठ कर राष्ट्र के नाम सन्देश नहीं देते, उन्हें चैन नहीं मिलता है।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

नयनतारा सहगल जैसे लोग केवल व्यक्ति नहीं हैं, प्रतीक हैं- उस मानव-प्रवृत्ति का, उस ध्यानाकर्षण की लिप्सा और लोलुपता का, जिसके चलते इंसान अपने बूढ़े हो जाने, और अपने विचारों का समय निकल जाने के चलते हाशिए पर पहुँच जाने, अप्रासंगिक हो जाने को स्वीकार नहीं कर पाता।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अरविन्द केजरीवाल

लड़की पर पब्लिकली हस्तमैथुन कर फरार हुआ आदमी: मुफ्त मेट्रो से सुरक्षा नहीं मिलती

आप शायद 'सुरक्षा' के नाम पर महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा करा सकते हैं, लेकिन आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि महिलाएँ वहाँ सुरक्षित हैं?
आसिया अंद्राबी

‘मैं हवाला के पैसे लेकर J&K में बवाल करवाती थी, उन्हीं पैसों से बेटे को 8 साल से मलेशिया में पढ़ा रही हूँ’

जम्मू-कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी सहित गिरफ्तार अलगाववादी नेताओं ने 2017 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। आसिया अंद्राबी ने कबूल किया कि वो विदेशी स्रोतों से फंड लेती थी और इसके एवज में...
हिन्दू धर्म और प्रतीकों का अपमान फैशन है क्योंकि कोई कुछ कहता नहीं

Netflix पर आई है ‘लैला’, निशाने पर हैं हिन्दू जिन्हें दिखाया गया है तालिबान की तरह

वो पीढ़ी जिसने जब से होश संभाला है, या राजनैतिक रूप से जागरुक हुए हैं, उन्होंने भारत का इतिहास भी ढंग से नहीं पढ़ा, उनके लिए ऐसे सीरिज़ ही अंतिम सत्य हो जाते हैं। उनके लिए यह विश्वास करना आसान हो जाता है कि अगर इस्लामी आतंक है तो हिन्दू टेरर क्यों नहीं हो सकता।
दि प्रिंट और दीपक कल्लाल

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।
जय भीम-जय मीम

जय भीम जय मीम की कहानी 72 साल पुरानी… धोखा, विश्वासघात और पश्चाताप के सिवा कुछ भी नहीं

संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ यह जानना-समझना जरूरी है। जो दलित वोट-बैंक तब पाकिस्तान के हो गए थे, वो आज क्या और कैसे हैं, इस राजनीति को समझने की जरूरत है।
हार्ड कौर, मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ

सस्ती लोकप्रियता के लिए ब्रिटिश गायिका ने मोहन भागवत को कहा ‘आतंकी’, CM योगी को बताया ‘Rape-Man’

"भारत में हुए सारे आतंकी हमलों के लिए मोहन भागवत ही ज़िम्मेदार हैं, चाहे वो 26/11 का मुंबई हमला हो या फिर पुलवामा हमला। इतिहास में महात्मा बुद्ध और महावीर ने ब्राह्मणवादी जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ाइयाँ लड़ी थीं। तुम एक राष्ट्रवादी नहीं हो, एक रेसिस्ट और हत्यारे हो।"
नितीश कुमार

अप्रिय नितीश कुमार, बच्चों का रक्त अपने चेहरे पर मल कर 103 दिन तक घूमिए

हॉस्पिटल का नाम, बीमारी का नाम, जगह का नाम, किसकी गलती है आदि बेकार की बातें हैं, क्योंकि सौ से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं। इतने बच्चे मर कैसे जाते हैं? क्योंकि भारत में जान की क़ीमत नहीं है। हमने कभी किसी सरकारी कर्मचारी या नेता को इन कारणों से हत्या का मुकदमा झेलते नहीं देखा।
औली-उत्तराखंड

200 करोड़ रुपया गुप्ता का, ब्याह गुप्ता के लौंडे का और आपको पड़ी है बदरंग बुग्याळ और पहाड़ों की!

दो सौ से दो हजार तक साल लगते हैं उस परत को बनने में जिस भूरी और बेहद उपजाऊ मिट्टी के ऊपर जन्म लेती है 10 से 12 इंच मोती मखमली घास यानी बुग्याळ! और मात्र 200 करोड़ रुपए लगते हैं इन सभी तथ्यों को नकारकर अपने उपभोक्तावाद के आगे नतमस्तक होकर पूँजीपतियों के समक्ष समर्पण करने में।
पाकिस्तान

ईश-निंदा में फ़ँसे Pak हिन्दू डॉक्टर लटकाए जा सकते हैं सूली पर… लेकिन ‘इनटॉलेरेंस’ भारत में है

जिन्हें अपने देश भारत के कानून इतने दमनकारी लगते हैं कि लैला जैसी डिस्टोपिया बनाकर वह मुसलमानों की प्रताड़ना दिखाना चाहते हैं, उन्हें केवल एक हफ़्ते पाकिस्तान में बिता कर आना चाहिए। आपके हिन्दूफ़ोबिक यूटोपिया जितना तो अच्छा नहीं है, लेकिन वैसे हिंदुस्तान का लोकतंत्र काफी अच्छा है...
पत्रकारिता के नाम पर संवेदनहीनता और बेहूदगी आम हो चुकी है

जब रिपोर्टर मरे बच्चे की माँ से भी ज़्यादा परेशान दिखने लगें…

नर्स एक बीमार बच्चे के बेड के पास खड़ी होकर कुछ निर्देश दे रही है और हमारे पत्रकार माइक लेकर पिले पड़े हैं! ये इम्पैक्ट किसके लिए क्रिएट हो रहा है? क्या ये मनोरंजन है कुछ लोगों के लिए जिनके लिए आप पैकेज तैयार करते हैं? फिर आपने क्या योगदान दिया इस मुद्दे को लेकर बतौर पत्रकार?

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

50,880फैंसलाइक करें
8,839फॉलोवर्सफॉलो करें
69,851सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: