Homeदेश-समाजसब खुदाओं को इनकार, सिर्फ़ अल्लाह से इकरार, बगैर इसे माने मुस्लिम नहीं: सलमा...

सब खुदाओं को इनकार, सिर्फ़ अल्लाह से इकरार, बगैर इसे माने मुस्लिम नहीं: सलमा अंसारी को दो टूक जवाब

AMU के प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद का कहना है कि अगर कोई मुस्लिम है तो उसे सब खुदाओं को इनकार करना पड़ता है और सिर्फ़ अल्लाह से इकरार करना पड़ता है। और बगैर इसे माने कोई मुस्लिम नहीं हो सकता।

हाल ही में पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने चाचा नेहरु मदरसे में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मंदिर और मस्जिद का निर्माण करवाया। जिसके बाद सोमवार (जुलाई 15, 2019) को उस मदरसे के प्रांगढ़ में बने मंदिर में पूजा हुई और मुस्लिम बच्चों ने वहाँ नमाज पढ़ी।

हालाँकि सलमा अंसारी द्वारा उठाए गए इस कदम की हर ओर सराहना हुई लेकिन कुछ इस्लामी धर्मगुरुओं ने इसका खूब विरोध किया है। एक ओर जहाँ अलीगढ़ की पूर्व मेयर ने सलमा के विचार से प्रभावित होकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंदिर बनाने की माँग की तो वहीं AMU के प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद का कहना है कि अगर कोई मुस्लिम है तो उसे सब खुदाओं को इनकार करना पड़ता है और सिर्फ़ अल्लाह से इकरार करना पड़ता है। और बगैर इसे माने कोई मुस्लिम नहीं हो सकता।

मंदिर बनाने के विरोध में सिर्फ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने ही नहीं बल्कि सपा के पूर्व विधायक ज़मीरुल्लाह ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मदरसे में किसी मंदिर की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा करने पर कई और जगह भी लोग मदरसों में मंदिर बनाने की माँग कर सकते हैं।

हालाँकि सलमा अंसारी ने इन सभी धर्मगुरुओं की टीका-टिप्पणी को नजरअंदाज करते हुए इस मामले पर बोला, “मैं चाहती हूँ कि हिंदुस्तान के निर्माण में सबकी भागीदारी होनी चाहिए। यहाँ मैं केवल अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित हूँ। मॉब लिचिंग जैसे अपराध देश के ऊपर धब्बा हैं। मदरसा चलाते हुए इन चीजों को ध्यान रखने की जरूरत है।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -