मान लीजिए एक शिक्षक है, जो कक्षा में सबसे शांत और सहनशील बच्चे को बार-बार समझाता है कि उसे और सहनशील बनना चाहिए, उसे और झुकना चाहिए और चुप रहना चाहिए। लेकिन वही शिक्षक कक्षा में दूसरे कोने में हो रहे शोर पर आँखे मूँद लेता है। वजह यह नहीं कि उसे दिखता नहीं, बल्कि इसलिए कि वहाँ बोलना असहज है। यही रवैया सार्वजनिक विमर्श में भी दिखता है, जहाँ उपदेश हमेशा सहनशील पक्ष को ही दिए जाते हैं।
यहाँ शिक्षक का उदाहरण देना जरूरी हो गया था। क्योंकि ‘सेकुलर’ सागरिका घोष की भूमिका उसी शिक्षक की हो गई है। जो ईसाइयों का मसीहा बनकर कक्षा के सबसे शांत बच्चे ‘हिंदू धर्म’ पर उपदेश दे रही हैं। इन्होंने क्रिसमस पर ईसाइयों की हक की लड़ाई लड़ने का प्रण लिया है। तो अब जहाँ भी ईसाइयों पर बदसलूकी होती देखती है, पहुँच जाती अपना ट्विटर/एक्स अकाउंट लेकर ‘शांत बच्चे’ को डाँटने। आप देख सकते हैं कि 24 से 25 दिसंबर के उनके पोस्ट केवल ईसाइयों के हित को लेकर ही हैं।
हमे क्या ही करना? यह जरूर कहा जा सकता था। अगर बात केवल सागरिका घोष और ईसाइयों (शोर) की होती। लेकिन ईसाइयों के लिए लड़ते हुए सागरिका घोष बार-बार ‘शांत बच्चे’ को घसीट रही हैं। सागरिका ने हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों को ‘गुंडा’ बताया है। क्योंकि सागरिका को लगता है कि इसे सुनकर सहिष्णु धर्म का ‘शांत बच्चा’ क्या ही कर लेगा? इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ थोड़ी है, जो बेरहमी से पीट-पीटकर पेड़ पर टाँगकर जिंदा जला देगा।
सागरिका घोष ने क्रिसमस पर यजुर्वेद का दिया ज्ञान
तो इस ‘सहिष्णु धर्म’ को सागरिका घोष ‘गुंडे’ समझती हैं। यह उनके क्रिसमस की संध्या पर ईसाइयों की हक की लड़ाई लड़ते हुए किए गए एक पोस्ट में लिखा हुआ है। सागरिका कहती हैं, “प्रिय हिंदुत्व के गुंडो, आज दूसरे धर्मों पर हिंसा करने से पहले मुझे बताइए कि क्या आपने यजुर्वेद का शांति मंत्र पढ़ा है? अगर नहीं, तो इसे आज जरूर पढ़ें।”
Dear Hindutva thugs . Before you wreak violence on other religions today tell me if you’ve read the peace chant from the Yajur Veda. If not make it your essential reading for the day. #MerryChristmas2025
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) December 24, 2025
यहाँ सागरिका घोष ने यजुर्वेद के शांति मंत्र को एक समुदाय को नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल किया है। सागरिका को जानना होगा कि यह मंत्र सभी के लिए शांति की कामना करता है। बावजूद यजुर्वेद के शांति मंत्र को तंज और दूसरे धर्म के लोगों को अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया।
अगर सागरिका घोष सच में यजुर्वेद की भावना को समझतीं, तो शांति की यह सीख केवल क्रिसमस तक सीमित नहीं रहती। तब यह शांति बांग्लादेश में मंदिरो पर हो रहे हमलों पर भी दिखाई देती, हिंदुओं पर अत्याचार और पलायन पर भी उनकी आवाज उठती। लेकिन वहाँ यजुर्वेद नहीं आता, वहाँ शांति मंत्र की जरूरत महसूस नहीं होती।
क्रिसमस पर सागरिका घोष की हिंदू-विरोधी और ईसाई-हित की लड़ाई
सिर्फ यह अकेला पोस्ट नहीं है, जिसका इस्तेमाल सागरिका घोष ईसाइयों के हित की लड़ाई में इस्तेमाल कर रही है। बल्कि उनके ट्विटर/एक्स अकाउंट पर ऐसे पोस्ट की भरमार लगी हुई है। खुद को ‘सेकुलर’ बताने वालीं सागरिका घोष खुलकर ईसाइयों की आवाज बन रही हैं, वो भी हिंदुओं को निशाना बनाते हुए।
यहाँ सागरिका घोष भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन (CBCI) के संदेश का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोटो खींचने को लेकर तंज कस कर रही हैं। उन्हें लगता है कि केवल क्रिसमस ही शांति और मिलने-बाँटने का संदेश देने वाला त्योहार है। वह कहती हैं, ” पीएम मोदी, फोटो खिंचवाने से समुदाय एक साथ नहीं आएँगे।” पीएम से ईसाइयों के लिए न्याय भी माँगा।
A Christmas message that every Indian should embrace. This is a land that embraces ALL and embraces Christmas with its unique message of love and goodwill. This Christmas is not for photo ops by @narendramodi . Posing for photos will NOT bring communities together only STERN…
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) December 25, 2025
इसके बाद सागरिका घोष को पीएम नरेंद्र मोदी का क्रिसमस पर चर्च जाना भी पसंद नहीं आया। जबकि क्रिसमस की बधाई देते हुए, उन्होंने खुद कहा कि यह त्योहार सबके लिए और त्योहार का संदेश सब तक पहुँचना चाहिए। तो पीएम मोदी के क्रिसमस पर चर्च जाने से तो यह संदेश और ज्यादा फैलेगा।

लेकिन सागरिका घोष को देश के प्रधानमंत्री का चर्च जाना इसीलिए पसंद नहीं आया, क्योंकि यह उनके नैरेटिव पर पानी फेरने वाला काम हो गया। सागरिका को मुद्दा नहीं मिला, तो वो प्रधानमंत्री की तस्वीरें खिंचाने को लेकर ही बरस गईं। भाषा की मर्यादा लाँघते हुए सागरिका कहती हैं, “पीएम मोदी पाखंड और छल को एक कला की तरह पेश कर रहे हैं।”
यहाँ सागरिका किस पाखंड और छल की बात कर रही हैं? वही पाखंड, जिसमें ईसाई मिशनरी हिंदुओं को धर्मांतरण का लालच देती हैं या वही छल जहाँ मिशनरी स्कूलों में हिंदुओं का कलावा काट दिया जाता है। क्या सागरिका को यह नहीं पता था? इसके बावजूद एक सेकुलर देश का प्रधानमंत्री क्रिसमस पर चर्च जाते है पर इसमें भी सागरिका को परेशानी हो रही है।
इतना ही नहीं सागरिका घोष ने अपने ‘प्रोपेगेंडा पत्रकार’ पति राजदीप सरदेसाई के साथ मिलकर अपने नैरेटिव की खबरों को हवा भी दी। क्रिसमस से पहले राजदीप सरदेसाई के वीडियो को रीशेयर करते हुए दावा करती हैं कि BJP की नेता अंजू भार्गव एक दृष्टिबाधित लड़की पर चिल्ला रही हैं। लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया कि BJP ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है।
Why is the Church leadership in India not speaking out on these horrifying attacks? https://t.co/KEt3LuTWId
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) December 23, 2025
राजदीप सरदेसाई का कहना है कि क्रिसमस के आसपास ईसाइयों को धमकाया जा रहा है, बल्कि वह भूल गए कि ईसाई धर्मांतरण का मुद्दा सालभर रहता है। यहाँ सरदेसाई ने सालभर के मुद्दे को तो नजरअंदाज कर दिया, लेकिन क्रिसमस पर ईसाइयों के प्रति प्रेम दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
सागरिका घोष का दूसरे धर्म पर ज्ञान और हिंदू-विरोधी बयान
क्रिसमस पर जो सागरिका घोष ईसाइयों का मसीहा बनकर हिंदुओं को निशाना बना रही हैं, यह उनका कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार हिंदुओं और हिंदू परंपराओं को लेकर ऐसे निचले स्तर के बयान दे चुकी हैं।
लव जिहाद के मुद्दे पर सागरिका घोष का रवैया जानिए। इसे गंभीर सामाजिक चिंता को खारिज करते हुए ‘मानसिक उन्माद‘ की तरह दुनिया के सामने पेश करती हैं। और इससे निपटने का नया तरीका इजाद करते हुए इसका हल तुर्की के टीवी शो ‘एर्टुग्रेल’ को बताती हैं। मानो यह कोई सीरियल देखने से पैदा हुआ भ्रम हो, न कि जमीनी हकीकत।
यही नहीं, जब सेना से जुड़े एक जवाब पर लोगों ने सवाल उठाए, तो सागरिका घोष ने उस सैनिक को ही ‘मूर्ख‘ बता दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन इस्लामी आक्रांताओं ने इतिहास में हिंदुओं का नरसंहार किया, मंदिर तोड़े और जबरन धर्मांतरण कराए, वही सागरिका घोष को ‘देशभक्त’ और ‘नायक’ नजर आते हैं।
दिलचस्प यह है कि जब दूसरे धर्म से जुड़े संवेदनशील मुद्दे सामने आते हैं, तो या तो सागरिका पूरी तरह चुप्पी साध लेती हैं या दुनिया के सामने महान और शांति का प्रतीक बताकर पेश करती हैं। उनके लिए समस्या तभी समस्या है, जब उसमें हिंदू शामिल हों।
यजुर्वेद का शांति मंत्र हिंदुओं को नहीं, सागरिका घोष को पढ़ने की जरूरत
आखिर में सागरिका घोष को यह बताने की जरूरत है कि हिंदुओं ने यजुर्वेद का शांति मंत्र पहले से पढ़ रखा है। उसे पढ़ने और समझने की जरूरत आपको है, जो शांति का अर्थ भी अपने नैरेटिव के हिसाब से तय करती हैं। आज जब क्रिसमस के नाम पर हिंदुओं को यह समझ आने लगा है कि क्रिसमस उन पर थोपा जा रहा है, और वे इसके खिलाफ जागरुक हो रहे हैं, तो इससे सागरिको घोष को इतनी परेशानी क्यों हो रही है?
सागरिका घोष को यह समझना होगा कि हिंदू अब जान चुका है, यह वही शुरुआती दबाव का हिस्सा होता है, जो पहले त्योहार मनवाने से शुरू होता है और धीरे-धीरे धर्मांतरण की ओर आकर्षित करता है। फिर गरीब हिंदू परिवारों को निशाना बनाते हैं। कहीं दवा के लालच में तो कहीं इलाज के नाम पर। यह सब पैसों से होता है। हाल ही में शाहजहाँपुर में सामने आए ईसाई धर्मांतरण के मामलों से यह साफ है, जिसमें मिशनरियों को विदेशों से फंडिंग मिलती थी।
क्रिसमस पर हिंदुओं को सागिरका घोष का ज्ञान खूब दिखता है, लेकिन यह ज्ञान तब सामने नहीं आता जब बांग्लादेश में एक हिंदू युवक को इस्लामी कट्टरपंथी बेरहमी से पीट-पीटकर पेड़ से लटका कर जिंदा जला देते हैं। तब आपके ट्विटर अकाउंट पर न्याय की माँग करती एक भी पोस्ट नहीं दिखती। तब आपकी संवेदना अचानक गायब हो जाती है।
यही आपकी चयनात्मक न्याय के लिए आवाज है। कब हिंदुओं को निशाना बनाना है और कब ईसाइयों के लिए मसीहा बनकर खड़ा होना है। इसी चयन के सहारे देश में सेकुलरिज्म की एक नकली मानसिकता फैलानी की कोशिश की जाती है। इसीलिए यजुर्वेद का शांति मंत्र सागिरका घोष आप भी जरूर पढ़ें, ताकि शांति की बात हर धर्म के त्योहार पर की जा सके।


