Tuesday, August 16, 2022
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कृषि कानून वापस होते ही महबूबा को दिखी आस, अनुच्छेद 370 वापस करने की माँग, सरकार पर संविधान के अपमान का लगाया आरोप

फिलहाल पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती नजरबंद चल रही हैं। उनपर घाटी में माहौल को खराब करने की कोशिश करने का आरोप है। जब से आतंकियों के खिलाफ सेना ने ऑपरेशन क्लीन शुरू किया है, तब से महबूबा केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक हो गई हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार (19 नवंबर 2021) को तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान करने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को लग रहा है कि केंद्र सरकार 370 को भी वापस लेगी। महबूबा ने कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इशारों में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने की माँग की।

महबूबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल भी उठाया। उन्होंने इसे चुनावी घोषणा करार देते हुए कहा कि चुनाव नजदीक देखकर बीजेपी ने यह फैसला लिया है। पीडीपी प्रमुख इसे चुनावी मजबूरी के तौर पर देखती हैं। महबूबा ने ट्वीट किया, “कृषि कानूनों को निरस्त करने का निर्णय और माफी एक स्वागत योग्य कदम है, भले ही यह चुनावी मजबूरियों और चुनावों में हार के डर से उपजा हो। विडंबना यह है कि जहाँ भाजपा को वोट के लिए शेष भारत में लोगों को खुश करने की जरूरत है, वहीं कश्मीरियों को दंडित और अपमानित करना उसके प्रमुख वोट बैंक को संतुष्ट करता है।”

एक अन्य ट्वीट में महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर संविधान के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “जम्मू-कश्मीर को खंडित और कमजोर कर भारतीय संविधान का अपमान केवल उनके मतदाताओं को खुश करने के लिए किया गया था। मुझे उम्मीद है कि वे यहाँ भी सही करेंगे और अगस्त 2019 से जम्मू-कश्मीर में किए गए अवैध परिवर्तनों को उलटेंगे।”

फिलहाल पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती नजरबंद चल रही हैं। उनपर घाटी में माहौल को खराब करने की कोशिश करने का आरोप है। जब से आतंकियों के खिलाफ सेना ने ऑपरेशन क्लीन शुरू किया है, तब से महबूबा केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक हो गई हैं। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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