HomeराजनीतिNCP सांसद फैजल की लोकसभा सदस्यता रद्द, जेल में काट रहे 10 साल की...

NCP सांसद फैजल की लोकसभा सदस्यता रद्द, जेल में काट रहे 10 साल की सजा: पूर्व मंत्री के दामाद पर तलवार, चाकू से किया था हमला

पूरा मामला साल 2009 का है। तब लोकसभा चुनाव के दौरान पीड़ित पदनाथ सालिह अपने पड़ोस में हो रहे एक राजनैतिक विवाद को खत्म करने गए थे। इसी दौरान मोहम्मद फैज़ल ने अपने साथियों सहित पदनाथ पर हमला बोल दिया। हमले में पदनाथ बाल-बाल बचे थे।

हत्या के प्रयास में 10 साल की सजा पाए लक्षद्वीप के NCP सांसद मोहम्मद फैज़ल को संसद में अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी है। अदालत ने इसी मामले में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी सांसद सहित कुल 4 लोगों को दोषी करार दिया है। फैज़ल के साथ दोषी करार दिए गए अन्य साथियों के नाम नूरुल अमीन, मोहम्मद हुसैन और बशीर थंगल हैं। यह हमला पूर्व केंद्रीय मंत्री पी एम सईद के दामाद पदनाथ सालिह पर हुआ था। लोकसभा सचिवालय ने मोहम्मद फैज़ल को अयोग्य घोषित करने वाली अधिसूचना भी शुक्रवार (13 जनवरी 2023) को जारी कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी मामले में कावरत्ती जिले की सेशन कोर्ट ने सांसद समेत सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका है। इस मामले से जुड़े एक वकील के मुताबिक मामला साल 2009 का है। तब लोकसभा चुनाव के दौरान पीड़ित पदनाथ सालिह अपने पड़ोस में हो रहे एक राजनैतिक विवाद को खत्म करने गए थे। इसी दौरान मोहम्मद फैज़ल ने अपने साथियों सहित पदनाथ पर हमला बोल दिया। हमले में पदनाथ बाल-बाल बचे थे। हमले में घायल पदनाथ का एक लम्बे समय तक निजी अस्पताल में इलाज चला था। इस केस में पुलिस ने मोहम्मद फैज़ल और उनके साथियों पर IPC की धारा 307 के तहत FIR दर्ज की थी।

आरोप है कि मोहम्मद फैज़ल और उनके साथियों ने हमले के लिए तलवार, छुरा और डंडों का इस्तेमामल भी किया था। हमले इस केस में पुलिस ने कुल 32 हमलावरों को आरोपित किया था। तब से यह मामला अदालत में ट्रायल पर था जिसमें दोनों पक्षों को सुन कर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद 11 जनवरी 2023 (बुधवार) से मोहम्मद फैज़ल लोकसभा की अधिसूचना के मुताबिक संसद से अयोग्य घोषित कर दिए गए। यह फैसला भारत के संविधान के अनुच्छेद 102 (एल) (ई) की नियमावली के साथ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और 1951 की धारा 8 के तहत लिया गया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -