Saturday, April 4, 2026
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयरक्षा संबंधों को पीएम मोदी ने बताया 'बेहद अहम': पढ़ें- उन सैन्य उपकरमों के...

रक्षा संबंधों को पीएम मोदी ने बताया ‘बेहद अहम’: पढ़ें- उन सैन्य उपकरमों के बारे में, जो भारत-इजरायल डील में हुई शामिल

भारत और इजरायल के बीच पार्टनरशिप का मकसद भारतीय शहरों और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को एक बहुत असरदार डिफेंस शील्ड के साथ बढ़ाना है, जो S-400 जैसे लंबी दूरी के सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (25 फरवरी 2026) को इजराइल के तेल अवीव पहुँचे। भारत-इजराइल संबंधों में इसके साथ ही नए अध्याय की शुरुआत हुई। 9 साल के बाद दूसरी बार पीएम मोदी इजराइल गए। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रक्षा, व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ एक-दूसरे के सहयोग को नई ऊँचाई देना चाह रहे हैं।

इस दौरे से भारत और इज़राइल एक अहम रक्षा समझौते पर साइन करने के करीब पहुँच सकते हैं, जो उनकी सुरक्षा साझेदारी को अगले लेवल पर ले जा सकता है। पिछली डील्स में हथियार खरीदने पर ज्यादा जोर था। लेकिन इस बार एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर पर बातचीत हुई है। ये ऐसे सिस्टम हैं, जिन्हें इजराइल ने कथित तौर पर अब तक किसी दूसरे देश के साथ शेयर नहीं किया है।

मजबूत रक्षा साझेदारी बेहद जरूरी- पीएम मोदी

इजरायल के संसद नेसेट को संबोधित करते हुए PM मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग कितने अहम हैं। उन्होंने रक्षा सहयोग को भारत-इजरायल संबंधों का एक ‘जरूरी पिलर’ बताया।

उन्होंने कहा, “आज की अनिश्चित दुनिया में, भारत और इजराइल जैसे भरोसेमंद पार्टनर्स के बीच एक मजबूत रक्षा साझेदारी बहुत जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत के साथ व्यापार बढ़ाने, निवेश करने और साझा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा देने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। पीएम के मुताबिक, पिछले साल गाजा सीजफायर ने सहयोग के नए मौके खोल दिए हैं। उनका संदेश साफ था कि भारत और इजराइल एक-दूसरे को बढ़ते सिक्योरिटी खतरों का सामना कर रही दुनिया में भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर देख रहे हैं।

डिफेंस डील में क्या-क्या शामिल

अधिकारियों के मुताबिक, PM मोदी इस दौरे के दौरान इजरायल में बने मिसाइल सिस्टम के लिए एक बड़े ऑर्डर को फाइनल कर सकते हैं। हालाँकि विस्तार से इसके पब्लिक डोमेन में होने की उम्मीद नहीं है। मोटे तौर पर यह समझा जा रहा है कि इस सहयोग के दो मुख्य हिस्से होंगे, डिफेंसिव सिस्टम और आक्रामक हथियार।

माना जा रहा है कि डिफेंस सिस्टम में जिस पर बातचीत हो सकती है, उसमें इजराइल के कुछ सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। इनमें इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और एल्बिट सिस्टम जैसी कंपनियों द्वारा विकसित किए गए सिस्टम हैं।

आक्रमण करने वाले हथियारों में एडवांस्ड प्रिसिजन और लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक सिस्टम शामिल होने की संभावना है। इनमें राफेल की SPICE 1000 गाइडेंस किट, एल्बिट सिस्टम्स की रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, आइस ब्रेकर नेवल क्रूज मिसाइल और IAI की सुपरसोनिक एयर LORA मिसाइल शामिल हो सकती हैं।

हालाँकि भारत सरकार की दिलचस्पी इन सिस्टम को सिर्फ खरीदने में नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में भी है। योजना है कि इस सिस्टम को ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत भारत में बनाया जाए और भविष्य में ‘सुदर्शन चक्र’ नाम के मल्टी-लेयर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट में इस्तेमाल किया जाए। इसके 2035 तक पूरा होने की उम्मीद है।

आयरन डोम और इसका कॉम्बैट रिकॉर्ड

बातचीत में जिस सिस्टम पर सबसे ज्यादा चर्चा होने की उम्मीद है, वह है इजराइल का आयरन डोम। इसके अंतर्गत एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम, डेविड्स स्लिंग शामिल हैं। इसमें 300 km तक की मीडियम-रेंज मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने की क्षमता है। इसमें 4 से 70 km के बीच कम दूरी के रॉकेट को नष्ट करने की क्षमता है।

हमास के साथ बार-बार होने वाली लड़ाइयों के दौरान इन सिस्टम ने अपने परफॉर्मेंस से दुनिया भर का ध्यान खींचा है। गाजा से रॉकेट हमलों के दौरान, आयरन डोम सिस्टम ने इजरायली शहरों को निशाना बनाने वाले हजारों रॉकेट को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया, जिससे आम इजरायली के जान-माल को कम नुकसान हुआ।

आयरन डोम में कम दूरी के रॉकेट का जल्दी पता लगाने और नष्ट करने की क्षमता है, जिसने इसे दुनिया के सबसे विश्वसनीय एयर डिफेंस सिस्टम में से एक बना दिया है। भारत जैसे लंबे बॉर्डर और समुद्र तट वाले देश में ऐसा सिस्टम बहुत काम का है।

आयरन डोम के अलावा, भारत ने इजरायल के नए आयरन बीम सिस्टम में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। दुश्मन देशों के खिलाफ ये तेज स्पीड वाला डिफेंस सिस्टम बेहद घातक है। इजरायल की डिफेंस कंपनी राफेल एडवांस्ड सिस्टम्स एंड एल्बिट ने इसे तैयार किया है। ये लेजर हथियार हवा में दुश्मन की ओर से आ रहे मोर्टार, ड्रोन और रॉकेट को समय रहते इंटरसेप्ट कर लेता है।

इस पार्टनरशिप का मकसद भारतीय शहरों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को पुख्ता बनाना है। इसका मकसद 2030 तक एक ऐसा नेशनल सिक्योरिटी सिस्टम बनाना है जिसे अधिकारी ‘अभेद्य’ बताते हैं।

भारत के मिसाइल शील्ड को मज़बूत करना

भारत में एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम की माँग पाकिस्तान के साथ हाल के तनाव से मिले सबक के बाद आया है। पिछले साल मई में पाकिस्तान ने कथित तौर पर भारतीय मिलिट्री और सिविलियन एसेट्स को निशाना बनाने की कोशिश में तुर्की के ड्रोन और चीनी PL-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों का इस्तेमाल किया था।

भारत पहले से ही रूस के S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम, इज़राइल द्वारा डेवलप किए गए बराक सिस्टम और स्वदेशी आकाश सिस्टम का इस्तेमाल करता है। हालाँकि अधिकारियों का मानना ​​है कि आयरन डोम और आयरन बीम जैसी एक्स्ट्रा लेयर्स देश के एयर डिफेंस नेटवर्क को और मज़बूत बना देंगी और उन्हें भेदना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।

15,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी जमीनी सीमा और 7,500 किलोमीटर से ज्यादा लंबी समुद्री सीमा की रक्षा के लिए भारत को एक बड़े और इंटीग्रेटेड शील्ड की जरूरत महसूस होती है। आइडिया यह है कि पूरे भारत में एक मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम बनाया जाए जो कम दूरी के रॉकेट और ड्रोन से लेकर लंबी दूरी की मिसाइलों तक के खतरों से निपट सके।

एडवांस्ड स्ट्राइक सिस्टम पर बातचीत हो सकती है

गोल्डन होराइजन को खरीदने पर भी बातचीत हो रही है, जिसे स्पैरो टारगेट मिसाइल फ़मिली का अगला वर्जन माना जा रहा है। यह मिसाइल की एक खास क्लास है जिसे एयरक्राफ्ट से लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे इंडियन एयर फोर्स के सुखोई-30MKI जेट के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है।

यह 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच स्ट्राइक रेंज और Mach 5 तक की स्पीड के साथ, यह सिस्टम अंडरग्राउंड बंकरों सहित मजबूत मिलिट्री टारगेट को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। इतनी तेज स्पीड पर इसे इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल हो जाता है। भारत की ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल लगभग Mach 3 की रफ़्तार से चलती है और इसे दुनिया की सबसे तेज़ ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक माना जाता है। ऐसे में गोल्डन होराइजन भारत की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकता है।

हथियारों से इतर एक बड़ा सिक्योरिटी विजन

एक और बड़ा डेवलपमेंट एक बड़े सिक्योरिटी अलायंस की घोषणा हो सकती है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हाल ही में मिडिल ईस्ट के आसपास ‘अलायंस का हेक्सागन’ बनाने की बात कही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि इस ग्रुप में भारत के साथ अरब देश, अफ्रीकी देश के अलावा ग्रीस, साइप्रस और दूसरे एशियाई पार्टनर शामिल हो सकते हैं।

उनके अनुसार, इसका मकसद इस इलाके में ‘रेडिकल एक्सिस’ के खिलाफ एकजुट होना है।

भारत और इजराइल के बीच यह रिश्ता दशकों में बना है। इजरायल लंबे समय से भारत के मुख्य हथियार सप्लायर में से एक रहा है। आज यह पार्टनरशिप खरीद-फरोख्त से आगे बढ़कर ड्रोन और मिसाइल सिस्टम जैसे हथियारों की जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग करती है।

PM मोदी का दौरा इस बात का संकेत है कि यह रिश्ता एक नए दौर में जा रहा है, जिसमें एडवांस्ड डिफेंस कोऑपरेशन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और एक बड़ी स्ट्रेटेजिक सोच शामिल है, जो दुनिया में अनिश्चितताओं से भरी होती जा रही है।

(मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Shriti Sagar
Shriti Sagar
Shriti Sagar writes short, sharp, and verified content for fast-paced digital audiences. Trained in English Journalism at IIMC, she specializes in explainer packages, trending topics, and public interest content.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

इस्लामिक देश ईरान में नहीं मिटी हिंदू आस्था, पढ़ें- बंदर अब्बास के 134 साल पुराने भगवान विष्णु के मंदिर की दास्ताँ

ईरान के बंदर अब्बास में एक अनोखा हिंदू मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में, लगभग 1892 के आसपास हुआ था।

बर्तन के बदले तो नहीं बेच रहे पुराना फोन, इस्तार की गिरफ्तारी से खुला ‘मदरबोर्ड स्कैम’: जानें- कैसे साइबर अपराधियों का हथियार बन सकती...

लोग 'कबाड़ से जुगाड़' में अपना डेटा सस्ते में बेचते रहेंगे, इस्तार आलम जैसे अपराधी फलते-फूलते रहेंगे। प्राइवेसी के प्रति जागरूक होना जरूरी है।
- विज्ञापन -