Saturday, April 4, 2026
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ईरान का वो न्यूक्लियर ठिकाना, जहाँ बंकर बस्टर बमों का पहुँचना भी मुश्किल: जानें- ‘पिकैक्स माउंटेन’ क्यों बनती जा रही युद्ध की दिशा तय करने वाली जगह

अगर यह ठिकाना सुरक्षित रहता है और ईरान यहाँ से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता रहता है तो अमेरिका और इजरायल के लिए अपना मुख्य लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।

ईरान और इजरायल-अमेरिका संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक-दूसरे पर जमकर मिसाइलें दागी जा रही हैं। हजारों लोगों की मौत हो गई और मिडिल ईस्ट के कई अन्य देश इससे प्रभावित हैं। एक ओर इजरायल और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से खत्म करने की कोशिश में जुटे हैं तो वहीं दूसरी ओर ईरान अपने परमाणु संसाधनों और तकनीक को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें पहले से कहीं अधिक गहराई में छिपाने की रणनीति अपना रहा है।

इसी रणनीति के केंद्र में एक रहस्यमयी जगह है जिसे खुफिया एजेंसियाँ ‘पिकैक्स माउंटेन’ के नाम से पहचानती हैं। यह स्थान अब इस युद्ध की सबसे बड़ी पहेली बन चुका है क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि इस ठिकाने को पूरी तरह नष्ट नहीं किया गया तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करना लगभग असंभव होगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगी अमेरिकी नजर

अमेरिका पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि युद्ध के दौरान उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता खत्म करना है। इसी उद्देश्य से अमेरिका और इजरायल पिछले कुछ समय से ईरान के कई परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते रहे हैं।

पिछले साल जून में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर‘ के तहत ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों ‘फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान’ पर शक्तिशाली बमों से हमला किया था। उस समय अमेरिका और इजरायल ने दावा किया था कि इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी क्षति पहुँची है।

हालाँकि, बाद में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों ने यह संकेत दिया कि ईरान ने अपने परमाणु ढाँचे को पूरी तरह समाप्त नहीं होने दिया बल्कि इन हमलों के बाद उसने अपने कई संवेदनशील कार्यक्रमों को पहले से अधिक गहराई में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया था।

‘पिकैक्स माउंटेन’ का रहस्य

अमेरिका के ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के सपने और परमाणु बम के बीच ‘पिकैक्स माउंटेन’ खड़ा है। यह स्थान ईरान के नतान्ज परमाणु केंद्र के पास जाग्रोस पर्वतमाला में स्थित है और स्थानीय तौर पर इसे ‘कुह-ए कोलांग गाज ला’ के नाम से भी जाना जाता है।

एक्सपर्ट का अनुमान है कि यह सुविधा पहाड़ के भीतर लगभग 330 फीट यानी करीब 100 मीटर की गहराई में बनाई गई है। यह गहराई ईरान के प्रसिद्ध फोर्डो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र से भी अधिक बताई जा रही है। यही वजह है कि सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस ठिकाने को हवाई हमलों से नष्ट करना बेहद कठिन हो सकता है। यानी यह एक ऐसा ठिकाना है जिसे बंकर बस्टर बम से भी नष्ट करना मुश्किल है।

सैटेलाइट तस्वीरों में इस स्थान पर भारी निर्माण गतिविधियाँ दिखाई दी हैं। पहाड़ के भीतर जाने वाले 2 सुरंगों के दरवाजों को मिट्टी और पत्थरों से और मजबूत किया गया है। इसके अलावा वहाँ खुदाई से निकले मलबे के बड़े ढेर और भारी मशीनरी भी देखी गई है जो इस बात का संकेत देती है कि अंदर अभी भी निर्माण और विस्तार का काम जारी है।

फरवरी 2026 की पिकैक्स माउंटेन की सैटेलाइट तस्वीर

ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम का सवाल

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के पास अभी भी 60% तक संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का एक बड़ा भंडार मौजूद है। यह मात्रा लगभग 900 पाउंड बताई जाती है। परमाणु विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी मात्रा में उच्च स्तर तक एनरिच्ड यूरेनियम को यदि और आगे रिफाइन किया जाए तो इससे कई परमाणु बम तैयार किए जा सकते हैं। बताया जाता है कि इतनी मात्रा करीब 11 बम बनाने के लिए पर्याप्त है।

यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को चिंता है कि यह सामग्री यदि पूरी तरह सुरक्षित और छिपी रही तो भविष्य में ईरान अपेक्षाकृत कम समय में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है।

खुफिया रिपोर्टों में यह आशंका जताई गई है कि ईरान ने इस यूरेनियम का कुछ हिस्सा फोर्डो संयंत्र और इस्फहान के परमाणु परिसर के बीच विभिन्न अलग-अलग जगहों पर रख दिया था। वहीं, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध के बीच यूरेनियम का बड़ा हिस्सा ‘पिकैक्स माउंटेन’ में छिपाया जा रहा है।

‘पिकैक्स माउंटेन’: यूरेनियम संवर्धन से आगे की सोच

अमेरिकी थिंक टैंक ‘फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज’ के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान नतान्ज के पास एक नया यूरेनियम संवर्धन संयंत्र तैयार करने की कोशिश कर रहा है। यदि ऐसा हुआ तो यह संयंत्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लंबे समय तक जीवित रखने में मदद कर सकता है।

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि पिकैक्स माउंटेन केवल यूरेनियम संवर्धन के लिए ही नहीं बल्कि सेंट्रीफ्यूज मशीनों के निर्माण के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। सेंट्रीफ्यूज वे मशीनें होती हैं जिनकी मदद से यूरेनियम को हाई लेवल तक संवर्धित किया जाता है। यदि ईरान इन मशीनों का उत्पादन सुरक्षित स्थान पर जारी रखता है तो किसी भी हमले के बाद वह अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू कर सकता है।

ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया

ईरान की सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ‘पिकैक्स माउंटेन’ में कोई परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं चल रहा है। उनका कहना है कि यह स्थान सेंट्रीफ्यूज प्रोडक्शन प्लांट के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कुछ समय पहले जब इस स्थान के बारे में सवाल उठाए गए तो ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने भी इस पर ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने इतना जरूर कहा कि ईरान ने अपने किसी भी परमाणु स्थल को पूरी तरह बंद नहीं किया है और भविष्य में वे जारी भी रह सकते हैं या बंद भी किए जा सकते हैं।

ईरान में जमीनी कार्रवाई करेगा अमेरिका

सैन्य विशेषज्ञों के बीच एक बड़ी बहस इस बात को लेकर चल रही है कि यदि यह फैसिलिटी वास्तव में इतनी गहराई में है तो इसे खत्म करने के लिए केवल हवाई हमले पर्याप्त नहीं होंगे। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के गहरे भूमिगत बंकरों को पूरी तरह निष्क्रिय करने के लिए जमीनी सैनिकों की कार्रवाई जरूरी हो सकती है।

इसका मतलब यह होगा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देश ‘पिकैक्स माउंटेन’ को पूरी तरह निष्क्रिय करना चाहते हैं तो उन्हें ईरान की जमीन पर विशेष बलों को भेजना पड़ सकता है। हालाँकि, यह विकल्प बेहद खतरनाक होगा क्योंकि इससे युद्ध का दायरा और अधिक बढ़ सकता है।

युद्ध की दिशा तय करने वाला ठिकाना

अभी तक ‘पिकैक्स माउंटेन’ सिर्फ एक गुप्त भूमिगत ठिकाना माना जा रहा था लेकिन अब इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम का सबसे सुरक्षित ठिकाना समझा जा रहा है। माना जा रहा है कि ईरान ने यहाँ अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण चीजें और संवर्धित यूरेनियम छिपाकर रखा है।

अगर यह ठिकाना सुरक्षित रहता है और ईरान यहाँ से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता रहता है तो अमेरिका और इजरायल के लिए अपना मुख्य लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, अगर किसी तरह इस ठिकाने को नष्ट या बंद कर दिया जाता है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बहुत बड़ा झटका लग सकता है और उसकी परमाणु क्षमता कई साल पीछे चली जाएगी।

यही कारण है कि ‘पिकैक्स माउंटेन’ अब सिर्फ एक पहाड़ी ठिकाना नहीं बल्कि इस पूरे युद्ध का ऐसा केंद्र बन गया है जिस पर आने वाले समय में बड़े फैसले और रणनीतियां निर्भर कर सकती हैं।

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शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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