Thursday, April 2, 2026
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पत्रकार की गिरफ्तारी या बिजली-पानी की माँग… जानिए POK में सड़कों पर उतरकर लोग क्यों कर रहे बवाल, शहबाज सरकार का विद्रोह करने की खुली धमकी

POK में प्रदर्शन की वजह पाकिस्तान में बुनियादी सुविधाओं में भारी कमी है। आम लोगों को कई-कई दिनों तक बिजली नहीं मिलती, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बार-बार बंद कर दिया जाता है और साफ पानी जैसी जरूरी चीजों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी एक स्थानीय पत्रकार सोहराब बरकत की रिहाई की भी माँग कर रहे हैं।

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में जनता सड़कों पर उतरी है। सरकार के खिलाफ यह विद्रोह अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से आम सुविधाओं से त्रस्त लोगों का गुस्सा है, जिन्हें बिजली, पानी और इंटरनेट सेवा तक नहीं मिल पा रहा है। रावलकोट समेत पूरे पुंछ डिवीजन में ये प्रदर्शन पिछले एक हफ्ते से जारी है। जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने ‘शटर डाउन हड़ताल‘ का ऐलान किया।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दुकानें बंद कर दी, सड़के जाम कर दी और बड़े पैमाने में रैलियाँ निकाली। रैलियों में शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ ‘जब तक जनता तंग रहेगी, जंग रहेगी’, पानी चोरों और ‘बिजली चोरों’ जैसे नारे लगाए गए। इसके अलावा लोगों ने पत्रकार सोहराब बरकत की रिहाई की भी माँग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को अल्टीमेटम तक दे दिया कि अगर माँगे पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज होगा।

POK में प्रदर्शनकारियों की माँगे क्या हैं?

प्रदर्शन की वजह बुनियादी सुविधाओं में भारी कमी है। आम लोगों को कई-कई दिनों तक बिजली नहीं मिलती, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बार-बार बंद कर दिया जाता है और साफ पानी जैसी जरूरी चीजों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता। क्षेत्र में बेरोजगारी और महँगाई भी पुराना मुद्दा है।

प्रदर्शनकारियों की माँग बिजली और पानी को लेकर है। बिजली, जो पाकिस्तान पर कहर बनकर बरपी बाढ़ के चलते प्रभावित है। बाढ़ के चलते क्षेत्र में बिजली के खंभे गिर गए, जिनको अब तक शहबाज शरीफ सरकार ठीक नहीं कर सकी है। वहीं भारत के साथ सिंधु जल समझौता खत्म होने के बाद से ही पाकिस्तान पानी की बूँद-बूँद के लिए तरस रहा है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी एक स्थानीय पत्रकार सोहराब बरकत की रिहाई की भी माँग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों की पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी

व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, वकीलों और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं के गठबंधन जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। संगठन ने ही पाकिस्तानी सरकार को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर माँगे पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

रैलियों में घोषणा की गई कि दो मुख्य रास्ते बंद कर दिए जाएँगे। इनमें एक रास्ता ब्रीड स्टेशन की ओर जाने वाला और दूसरा शाहराह ए गाजी मिल्लत की ओर जाने वाला रास्ता है। संगठन ने आम लोगों से भी विरोध प्रदर्शन में जुड़ने की अपील की है।

चेतावनी से सीधे तौर पर पाकिस्तानी प्रशासन को बड़ा झटका लगा। जन आक्रोश को देखते हुए पाकिस्तान ने भारी संख्या में पुलिस सेना और अर्धसैनिक बल तैनात कर दिए हैं। यह साफ है कि POK की आवाज अब पाकिस्तान की प्रशासन को डराने का दम रखती है।

कौन और कहाँ है सोहराब बरकत?

सोहराब बरकत पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट सियासत (Siasat) में कार्यरत पत्रकार है। इसके अलावा वह एक यूट्यूब चैनल के होस्ट भी हैं। बरकत को 26 नवंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में जाते समय इस्लामाबाद एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकार सोहराब बरकत पर पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जाँच एजेंसी (NCCIA) ने सरकारी संस्थानों पर अपमानजनक टिप्पणी करने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है। NCCIA ने 05 अगस्त 2025 को बरकत पर इन आरोपों में मामला दर्ज किया था।

पत्रकार बरकत के वकील साद रसूल के मुताबिक, यह टिपप्णी विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की सदस्य सनम जावेद ने बरकत के साथ एक इंटरव्यू में की थी, जो सियासत के यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित हुआ था। अमेरिकी के संगठन पत्रकारों की सुरक्षा के लिए समिति (CPJ) ने बरकत की हिरासत को पाकिस्तानी अधिकारियों की मीडिया पर प्रताड़ना का उदाहरण बताया है।

POK में प्रदर्शन से पाकिस्तानी सरकार की असफलता?

POK में यह प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। तीन महीने में दूसरी बार POK के लोगों का सरकार के खिलाफ विद्रोह सामने आया है। अक्टूबर 2025 में ही हजारों लोगों ने 38 माँगों के साथ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन माँगों को मानने के बजाए पाकिस्तानी प्रशासन ने हिंसा चुनी। पाकिस्तानी रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं। इसमें 12 लोगों की मौत हुई थी।

POK में फैली ये अशांति पाकिस्तान में शहबाज शरीफ नेतृत्व वाली सरकार की कमजोरी और पाकिस्तानी प्रशासन की असफलता को उजागर करती है। ये वही पाकिस्तान है, जो दावा करता है कि वह भारत के खिलाफ कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन POK के लोग जिस परेशानियों से जूझ रहे हैं, उसे देखकर सरकार के दावे खोखले साबित होते हैं।

क्षेत्र के लोग दशकों से चले आ रहे शोषण, भ्रष्टाचार और तानाशाही जैसे हालातों से अब पूरी तरह थक चुके हैं और आवाज बुलंद कर रहे हैं। बावजूद पाकिस्तानी सरकार कोई ठोस सुधार या समाधान करने को तैयार नजर नहीं आ रही है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो POK में तनाव और बढ़ सकता है।

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पूजा राणा
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