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दृष्टिहीन सूरज सिंह जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के नए सरकारी वकील: मुश्किलों से जूझ पाया मुकाम, ब्रेल लिपि में ही शिक्षा-दीक्षा

सूरज सिंह ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए देश भर में एक वकील के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह इस क्षेत्र में 2011 से हैं। सिंह ने अपनी शिक्षा ब्रेल लिपि में पूरी की है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में दृष्टिहीन सूरज सिंह (Suraj Singh) को सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया है। वकील सूरज सिंह वही हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में दिव्यांग लोगों से सम्बंधित कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की माँग को लेकर हाई कोर्ट के बाहर धरना दिया था। सूरज सिंह दृष्टिहीन होने के बावजूद जम्मू में बतौर वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं।

सिंह की नियुक्ति को लेकर सरकार के सचिव आंचल सेठी ने आदेश में पारित किया था। सरकारी वकील के रूप में सूरज सिंह की नियुक्ति एक वर्ष की अवधि के लिए होगी और अदालत में उनके बेहतर कार्य को देखते हुए इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

अतिरिक्त सचिव आशीष गुप्ता द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो दृष्टिहीन वकील सूरज सिंह को नियुक्त कर दिव्यांग लोगों में भेदभाव को दूर करेगा, उनकी सहायता करेगा, प्रोत्साहित करेगा और उनका मार्ग प्रशस्त करेगा।”

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में अभ्यास करने वाले एकमात्र दृष्टिहीन वकील सूरज सिंह एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने आँखें ना होते हुए भी अपने सपनों को साकार किया। वह सिंह ही थे, जो जम्मू में हाई कोर्ट के बाहर लंबे समय तक धरने पर बैठे थे और दिव्यांग लोगों के लिए अधिनियम 2016 के तहत मान्यता प्राप्त अधिकारों को लागू करने की माँग कर रहे थे। इसके अलावा वह जम्मू में ऐसे वकीलों में शुमार हैं, जो बाकी वकीलों की तरह बड़े-बड़े मुकदमे लड़ने की ताकत रखते हैं।

बताया जाता है कि सूरज सिंह का जन्म कठुआ की तहसील लोहाई मलाल में हुआ था। उनके माता-पिता गाँव में जमींदारी करते हैं। उन्हें कभी भी इस बात का मलाल नहीं हुआ कि उनके पास दुनिया को देखने के लिए आँखे नहीं हैं। उन्होंने अच्छी शिक्षा पाने के लिए जम्मू का रुख किया और वहीं रह कर लॉ की पढ़ाई की। इस दौरान उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

सूरज सिंह ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए देश भर में एक वकील के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह इस क्षेत्र में 2011 से हैं। सिंह ने अपनी शिक्षा ब्रेल लिपि में पूरी की है। मालूम हो कि इस लिपि के आविष्कार ने दृष्टिबाधित लोगों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया है। सूरज सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुझे खुद पर गर्व है कि दृष्टिहीन होने के बावजूद मुझे अपने सपनों को साकार करने में कभी भी कोई भी दिक्कत नहीं आई।

वकील के साथ-साथ सिंह की एक राजनेता बनने की भी इच्छा है। सिंह कहते हैं, “मैंने वकील बनने के लिए जी तोड़ मेहनत की। अपने आपको यहाँ तक लेकर आया। उसी प्रकार मेरी इच्छा है कि मैं राजनीति के क्षेत्र में भी आऊं, मैं यहाँ खुद को एक बेहतर मंत्री रूप में देखना चाहता हूँ।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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