1931 के अनुसार, देश में 1.5 करोड़ से अधिक ब्राह्मण आबादी थी। रिपोर्ट बताती है कि तब बंगाल में 14 लाख से अधिक ब्राह्मण जबकि ओडिशा और बिहार में लगभग 9 लाख ब्राह्मण थे।
IAMC का यह नया सर्वेक्षण भी हिंदू अमेरिकियों को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित प्रयास है। इसके परिणाम और दावे संदेहास्पद हैं और सच्चाई से बहुत दूर हैं।
सुनील आम्बेकर ने स्पष्ट कहा कि जातीय जनगणना का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव और चुनावी राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए। यानी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।