पीड़ित छात्र राजनीति शास्त्र विभाग में स्नातक थर्ड इयर का छात्र है। उसे कुछ उपद्रवी छात्रों ने पकड़ लिया और गाली गलौज करने लगे। इसके बाद छात्र अमरेश की जमकर पिटाई कर दी। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उसने सीएए के समर्थन में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।
ईकाई अध्यक्ष ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा पर प्रदेश में हिंसा फैलाने के लिए वित्तीय मदद करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि प्रियंका गाँधी प्रदेश में हिंसा भड़काने के लिए दूसरे प्रदेशों के दंगाइयों को ला रही हैं।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है। अखिलेश मारे गए मो. वकील अहमद के परिजनों से मिलने पहुँचे और संवेदना व्यक्त की।
सआदत छात्रावास के नाबालिग लड़कों ने ख़ुद दावा किया कि उनके गुदा से ख़ून बहने की ख़बरें झूठी हैं। सीतापुर के रहने वाले 21 साल के इरफ़ान हैदर ने बताया कि 'कुछ मदरसा छात्रों को पुलिस यातना का दंश झेलना पड़ा' जैसी सारी ख़बरें झूठी थीं, इनका कोई आधार नहीं था।
कोटा में सौ से अधिक बच्चों की मौत को CAA से जोड़ चुके राजस्थान के सीएम ने एक और विवादित बयान दिया है। सीएए वापस नहीं लेने पर उन्होंने विभाजन की बात कही है। जबकि उनके ही डिप्टी सचिन पायलट कह रहे हैं कि कोटा के मामले में सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
इससे पहले ऐसी ही अराजकता प्रियंका के लखनऊ दौरे के दौरान भी देखने को मिली थी। एक वीडियो में प्रियंका के साथ खड़े लोग महिला अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की करते नजर आए थे।
कॉन्ग्रेस नेता का फेसबुक प्रोफाइल देखने पर पता चलता है कि वह फेक न्यूज़ फैलाने में माहिर है। उसने गोडसे और सावरकर के शारीरिक सम्बन्ध होने की बात पोस्ट कर रखी है। एक पोस्ट में भारत का नक्शा दिखा कर दावा किया कि जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकार है, वे राज्य गोबर हैं।
NDTV के श्रीनिवासन जैन को इससे मतलब नहीं है कि एक सिख लड़की अगवा की गई। जबरन उससे इस्लाम कबूल करवाया। इससे भी एनडीटीवी को दिक्कत नहीं है कि आरोपित के समर्थन में मजहबी भीड़ ने गुरु नानक के पवित्र जन्मस्थान को निशाना बनाया।
सिर्फ मूर्तियों को नष्ट किए जाने की कल्पना मात्र और केवल अल्लाह का नाम ही इस दुनिया में रहना चाहिए, ये सोच मात्र ही इस कविता का विरोध करने के लिए काफी होना चाहिए ना? या फिर लिबरल्स को ये लगता है कि उनकी भावनाएँ दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हैं?
भाजपा को धोखा देने के बाद शिवसेना से जनता ने उम्मीद की थी कि वे पार्टी की मूल विचारधारा यानी 'हिदुत्व' के साथ बेईमानी न करें। लेकिन अब आदित्य ठाकरे के ऐसे समारोह में शामिल होने की खबर देखकर लग रहा है कि शिवसेना अपनी मूल विचारधारा पर भी पानी फेरने को तैयार है।