प्रियंका चोपड़ा ने जिस ब्रांड के लिए यह ऐड किया है, उसमें उन्होंने तीन अलग-अलग शेड्स के ज़रिए अपनी क़ामयाबी के बारे में बताया। इस वीडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर पहुँचते ही यूज़र्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।
पिछले साल दिवाली के पहले प्रियंका चोपड़ा का वीडियो आया था- जिसमें वह जानवरों, प्रदूषण, और अपने दमे का हवाला देकर लोगों से दिवाली नहीं मनाने की अपील की थी। लेकिन इस 'मार्मिक' अपील के एक महीने के भीतर उनकी शादी में पटाखों का इस्तेमाल जमकर हुआ।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने उन्हें अंतिम सेलेक्शन के लिए अपने बॉस को satisfy करने के लिए कहा। उन्होंने कोई करार नहीं दिया और पूछा कि वह (रेड्डी) उनके बॉस को कैसे satisfy करेंगी।
हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा फैलाने की धमकी देने वाले और संविधान से पहले कुरान को मानने वाले विवादास्पद अभिनेता अजाज़ खान का एक और आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है। एजाज़ खान की TikTok प्रोफाइल पर शेयर किए गए इस वीडियो में वह मुंबई पुलिस का मज़ाक उड़ाते नज़र आते हैं।
"हम तो सिर्फ जुल्म सह रहे हैं। अभी तो हम घरों में बैठे हैं, घरों से निकले नहीं हैं। क्योंकि हमारे अल्लाह-ताला ने पहले हमें जुल्म सहना सिखाया है। हम जुल्म सहते जाएँगे, सहते जाएँगे और एक बार जब वॉलकैनो बन कर फटेंगे न... तो इंशाअल्लाह सब कहेंगे - ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह"
दरअसल, ज़ायरा वसीम ने यह कहकर बॉलीवुड को बॉय-बॉय कह दिया कि अपने काम से ख़ुश नहीं हैं। अपने फेसबुक पेज पर उन्होंने लिखा कि वो ख़ुश इसलिए नहीं हैं क्योंकि बॉलीवुड उन्हें उनके अल्लाह और उनके मज़हब इस्लाम से दूर कर रहा था।
यह एक विडंबना है कि ज़ायरा का यह निर्णय सिल्वर स्क्रीन पर उनके द्वारा जिए गए किरदारों के व्यक्तित्व से एकदम उलट है। ज़ायरा ने अपने संक्षिप्त करियर में सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ कर आगे बढ़ने वाली महिलाओं का किरदार निभाया है। सीक्रेट सुपरस्टार तो मुस्लिम पिता की दकियानूसी सोच के ही खिलाफ एक लड़की के ग्लैमर जगत में प्रवेश करने और सफलता पाने की ही कहानी थी।
सुपर डांसर रियलिटी शो की दिपाली इसका उदाहरण है, जिसके डांस और एक्सप्रेशन के तालमेल ने उसे टीवी पर्दे पर लीड रोल दिलाया। मुमकिन है अगर इस जगह उसे दायरे में रहकर परफॉर्म करने की सलाह दी जाती, या फिर उसकी परवरिश विचारोत्तेजक नृत्य और उसकी उम्र के नृत्य में फर्क़ बताने में हुई होती तो ऐसा संभव नहीं हो पाता।
इनके हर झूठ को बेनकाब कीजिए, इन्हें पढ़िए, तर्कों से घेरिए, इनसे सवाल पर सवाल कीजिए, इनके हर नैरेटिव की लंका लगा दीजिए। इनसे पूछिए कि क्यों ऐसे स्टोरी-टेलर और पूँजीपति हलाला, तलाक या आतंकवाद या समुदाय विशेष पर खुलकर कुछ नहीं कह पा रहे, कुछ बना नहीं पा रहे?