केजरीवाल जीत की हैट्रिक लगा पाएँगे? आप की सत्ता में वापसी होगी? इन सवालों के जवाब 11 फरवरी को मिलेंगे। लेकिन यह कितना अजीब है कि जो नेता अपनी बातों की गारंटी नहीं दे पाता, वह दिल्ली की जनता को गारंटी कार्ड बाँट रहा है।
नई दिल्ली विधानसभा सीट पर केजरीवाल के अलावा 35 से अधिक प्रत्याशी नामांकन कराने पहुँचे। इससे हो रही देरी के पीछे भी आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा का हाथ बताया। उनका मानना है कि BJP वालों ने जानबूझकर...
एक ने अपनी पार्टी की ही महिला कार्यकर्ता को अपना शिकार बनाया तो दूसरे पर अपने परिवार की ही महिला के यौन शोषण का आरोप लगा। एक अन्य विधायक ने बीवी को कुत्ते से कटवा दिया। केजरीवाल के 6 विधायक, जिन पर लगे महिलाओं के बलात्कार, शोषण व दुर्व्यवहार के आरोप।
अरविन्द केजरीवाल ने लोगों को मुफ्त बिजली और पानी देने के बहाने साफ़ पानी, बिजली की निरंतरता, सस्ता इलाज और अच्छी शिक्षा जैसे कई अन्य बुनियादी जरूरतों की ओर ध्यान ही नहीं जाने दिया है। वहीं भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के एक मौके के इन्तजार में है।
चुनावी बिगुल बजने से पहले दिल्ली सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिल्ली के कोने-कोने में 3 स्कूलों के विज्ञापन टँगवाए। ये स्कूल हैं- वेस्ट विनोद नगर, खिचड़ीपुर और राउज एवेन्यू। वेस्ट विनोद नगर और खिचड़ीपुर, दोनों सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज का हिस्सा है। वहीं, राउज एवेन्यू दिल्ली के पॉश इलाके में।
आप ने घोषणा-पत्र में 5,000 नई बसें खरीदने का वादा किया था। लेकिन, उसके शासनकाल में डीटीसी की बसें घट गई। 900 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में 30,000 नए बेड जोड़ने में भी वह पिछड़ गई।
दिल्ली का असली मालिक जनता को बताते हुए रैप सॉन्ग में 'AAP' पर कॉन्ग्रेस से गठबंधन करने को लेकर भी निशाना साधा गया है। बीजेपी ने इस रैप सॉन्ग का विडियो ट्वीट करते हुए लिखा है- "यह रैप सॉन्ग केजरीवाल के खराब गवर्नेंस को एक्सपोज करता है।"
"ये बिल्कुल ग़लत है कि उन्होंने समय पर अपना काम किया, 7 साल हो गए घटना हुए, ढाई साल हो गए सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले को, 18 महीने हो गए रिव्यू पेटिशन ख़ारिज हुए, जो काम जेल प्रशासन को और दिल्ली सरकार को करना चाहिए था, वो हमने किया।"
दिल्ली की पटियालाा हाउस कोर्ट ने मुकेश समेत चार दोषियों को फाँसी देने के लिए 22 जनवरी का डेथ वॉरंट जारी किया था। हालाँकि, मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास लंबित होने के कारण बृहस्पतिवार को कोर्ट ने कहा कि 22 जनवरी को फाँसी नहीं दी जा सकती है।
“अगर किसी राज्य में छात्रों के साथ इस तरह की हिंसा होती तो मुख्यमंत्री जरूर उनसे मिलने जाते और सहानुभूति जताते। असल में केजरीवाल ‘जिम्मेदारी के बिना सत्ता’ चाहते हैं, जैसा कि नपुंसक हमेशा से चाहते हैं।”